शिव पूजा विधिशिव अर्चना में षोडशोपचार पूजा कैसे करें?16 उपचार: आवाहन→आसन→पाद्य→अर्घ्य→आचमन→स्नान→वस्त्र→गंध→पुष्प→धूप→दीप→नैवेद्य→ताम्बूल→दक्षिणा→आरती→प्रदक्षिणा+विसर्जन। मंत्र: 'ॐ नमः शिवाय [उपचार]म् समर्पयामि।' संक्षिप्त: पंचोपचार (5)।#षोडशोपचार#16 उपचार#विधि
शिव पूजा नियमशिव मंदिर में दक्षिणा कैसे और कितनी देनी चाहिए?यथाशक्ति — कोई निश्चित राशि नहीं। विषम संख्या (1/5/11/21/51/101) शुभ। दाहिने हाथ से, श्रद्धापूर्वक। 'दक्षिणा विहीना पूजा निष्फला' — भाव प्रधान। अन्नदान सर्वश्रेष्ठ।#दक्षिणा#दान#मंदिर
मंत्र साधनाशिव पंचाक्षर मंत्र का 1 लाख जप कैसे करेंसंकल्प लेकर 40 या निर्धारित दिनों में रुद्राक्ष माला से प्रतिदिन निश्चित संख्या में जप करें। पूर्ण होने पर दशांश हवन, तर्पण और ब्राह्मण भोजन से अनुष्ठान सिद्ध होता है।#शिव पंचाक्षर#अनुष्ठान#1 लाख जप
शिव मंत्रश्मशान भैरव मंत्र का जप कैसे और कब करना चाहिए?श्मशान भैरव = शिव का उग्र तांत्रिक स्वरूप। गुरु दीक्षा अनिवार्य — बिना गुरु कदापि न करें। काल: अर्धरात्रि, अमावस्या, अष्टमी। बटुक भैरव मंत्र अपेक्षाकृत सौम्य विकल्प। कठोर नियम: ब्रह्मचर्य, गोपनीयता, एकांत। गलत प्रयोग से गंभीर दुष्परिणाम संभव। केवल प्रमाणिक गुरु से ही सीखें।#श्मशान भैरव#भैरव साधना#तांत्रिक मंत्र
हिंदू संस्कार एवं परंपरानाथ संप्रदाय में शिव पूजा कैसे होती हैनाथ संप्रदाय में शिव को 'आदिनाथ' और 'अलख निरंजन' कहते हैं। उपासना तीन रूपों में होती है — शिवलिंग पूजन (भस्म, बेलपत्र, जल), हठयोग से शरीर के भीतर शिव-शक्ति का साक्षात्कार, और गुरु को शिव-स्वरूप मानना। 'आदेश' उनका ईश्वर-वंदन है।#नाथ संप्रदाय#शिव पूजा#गोरखनाथ
शिव महिमारुद्राक्ष की उत्पत्ति कैसे हुई, शिव पुराण के अनुसार?शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव ने दीर्घ तपस्या के बाद जब नेत्र खोले तो उनके नेत्रों से गिरे अश्रु-बिंदुओं से रुद्राक्ष के वृक्ष उत्पन्न हुए। 'रुद्र' (शिव) के 'अक्ष' (नेत्र) से उत्पन्न होने के कारण यह 'रुद्राक्ष' कहलाया और शिव का साक्षात स्वरूप माना गया।#रुद्राक्ष उत्पत्ति#शिव पुराण#शिव अश्रु
शिव रूप महिमाशिव के त्रिपुरांतक रूप का वर्णन शिव पुराण में कैसे हैत्रिपुरांतक = तीन पुरों का अंत करने वाले। तीन असुर-पुत्रों के सोने-चाँदी-लोहे के तीन नगरों को शिव ने एक ही बाण से नष्ट किया। इसके बाद आनंद में शिव ने तांडव किया — यहीं से नृत्य का उद्भव माना जाता है।#त्रिपुरांतक#त्रिपुरासुर#एक बाण
शिव रूप महिमाअर्धनारीश्वर रूप क्यों और कैसे प्रकट हुआब्रह्माजी की प्रार्थना पर शिव ने पार्वती के साथ अर्धनारीश्वर रूप धारण किया और मैथुनी सृष्टि का ज्ञान दिया। यह रूप शिव-शक्ति की अभिन्नता और पुरुष-प्रकृति के एकत्व का दिव्य प्रतीक है।#अर्धनारीश्वर#ब्रह्मा प्रार्थना#शिव शक्ति
शिव स्तोत्रशिव सहस्रनाम का पाठ कैसे और कब करना चाहिए?महाभारत (अनुशासन पर्व)/लिंग पुराण में वर्णित। कब: प्रातःकाल/संध्या, शिवरात्रि/सावन सोमवार। विधि: स्नान → शिवलिंग समक्ष → दीपक → एकाग्रचित्त पाठ (45-60 मिनट)। 11/21/40 दिन संकल्प। लाभ: पापनाश, मोक्ष, दीर्घायु, शत्रु नाश।#सहस्रनाम#1000 नाम#शिव
शिव मंदिरओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की परिक्रमा कैसे करें?ॐ आकार मांधाता द्वीप, नर्मदा मध्य। 2 ज्योतिर्लिंग: ओंकारेश्वर + ममलेश्वर — दोनों दर्शन अनिवार्य। पंचक्रोशी परिक्रमा ~7 किमी (पक्का मार्ग)। 3 दिन पूर्ण यात्रा। नर्मदा स्नान अनिवार्य। शिव प्रतिदिन रात्रि शयन यहीं।#ओंकारेश्वर#परिक्रमा#ज्योतिर्लिंग
शिव मंदिरकेदारनाथ में शिव की पूजा अन्य ज्योतिर्लिंगों से कैसे भिन्न है?त्रिकोणाकार शिवलिंग (बैल की पीठ — अन्य सभी में गोलाकार)। पंचकेदार कथा: भीम ने बैल-शिव की पीठ पकड़ी, 5 अंग 5 स्थानों पर। सर्वाधिक ऊंचा ज्योतिर्लिंग (11,755 ft)। 6 माह बंद (शीतकाल)। गर्भगृह में अंधकार — दीपक से दर्शन, घी अर्पित कर आलिंगन। शंकराचार्य समाधि।#केदारनाथ#ज्योतिर्लिंग#पंचकेदार
शिव ध्यानशिव के तीसरे नेत्र का ध्यान कैसे करें?भ्रूमध्य (आज्ञा चक्र) पर ध्यान केंद्रित। पद्मासन में, आंखें बंद, शिव के ज्योतिर्मय तीसरे नेत्र की कल्पना। 'ॐ' दीर्घ जप। 10-30 मिनट। महामृत्युंजय मंत्र सहायक। लाभ: अंतर्दृष्टि, एकाग्रता, आज्ञा चक्र जागरण। अत्यधिक जोर से न करें।#तीसरा नेत्र#आज्ञा चक्र#ध्यान
शिव मंत्ररुद्राष्टाध्यायी का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?यजुर्वेद 8 अध्याय (शतरुद्रीय/नमकम्/चमकम्)। सोमवार/प्रदोष/शिवरात्रि/सावन। 1.5-2 घंटे। वैदिक स्वर अनिवार्य — गुरु शिक्षा उत्तम। रुद्राभिषेक = इन्हीं मंत्रों से। अशुद्ध उच्चारण = विपरीत फल।#रुद्राष्टाध्यायी#यजुर्वेद#रुद्रपाठ
शिव भक्त कथावृंदा के सतीत्व भंग होने के बाद शिव ने जलंधर का वध कैसे कियावृंदा का सतीत्व भंग होते ही जलंधर की शक्ति क्षीण हो गई। भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से जलंधर का वध किया। शिव-तेज से जन्मा था इसलिए शिव ने ही वह शक्ति वापस ली — अहंकार और दुराचरण का नाश अनिवार्य है।#जलंधर वध#शिव त्रिशूल#सतीत्व भंग
शिव भक्त कथावृंदा का सतीत्व जलंधर की रक्षा कैसे करता थावृंदा की पतिव्रता-शक्ति जलंधर के चारों ओर अभेद्य दिव्य कवच था। जब-जब युद्ध में जलंधर घायल होता, सतीत्व की शक्ति उसे पुनर्जीवित करती। शिव स्वयं युद्ध करते रहे पर वृंदा का सतीत्व अखंड तक जलंधर अवध्य रहा।#वृंदा सतीत्व#पतिव्रता शक्ति#जलंधर रक्षा
शिव भक्त कथाजलंधर कौन था और उसकी उत्पत्ति कैसे हुईजलंधर की उत्पत्ति इंद्र के अपमान पर कुपित शिव के तेज से समुद्र में हुई। सिंधु-पुत्र होने से 'जलंधर' नाम पड़ा। शिव-तेज से उत्पन्न होने से देवताओं से शक्तिशाली था। दैत्यराज कालनेमी की पुत्री वृंदा से विवाह हुआ।#जलंधर#शिव तेज#समुद्र
शिव भक्त कथाशिव और यम का युद्ध मार्कंडेय के लिए कैसे हुआयमराज ने मार्कंडेय पर यमपाश फेंका जो शिवलिंग सहित लपेट गया। क्रोधित शिव प्रकट हुए, यम को भगाया और यम को शर्त रखी — भक्त की पूजा के समय मृत्यु का अधिकार नहीं। इसीलिए शिव 'महाकाल' कहलाते हैं।#शिव यम युद्ध#यमपाश#मार्कंडेय
शिव भक्त कथामार्कंडेय ऋषि को शिव ने मृत्यु से कैसे बचायामार्कंडेय ऋषि की 16 वर्ष आयु थी। शिवलिंग से लिपटकर महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए यम को चुनौती दी। शिव प्रकट हुए, यम को भगाया और मार्कंडेय को अमरता का वरदान दिया। इसीलिए शिव 'कालांतक' कहलाते हैं।#मार्कंडेय#16 वर्ष#महामृत्युंजय मंत्र
शिव भक्त कथारावण ने शिव को कैसे प्रसन्न किया थारावण ने कैलाश उठाने का प्रयास किया, शिव के पैर से दबने पर दर्द में शिव तांडव स्तोत्र की रचना की। शिव प्रसन्न हो 'चंद्रहास' खड्ग और 'रावण' नाम दिया। नौ सिर बलि देकर दशानन बना और अजेयता का वरदान पाया।#रावण शिव भक्त#कैलाश उठाना#रावण तपस्या
शिव-सती-पार्वती कथा५१ शक्तिपीठों की उत्पत्ति कैसे हुईसती के शव को लेकर तांडव करते शिव से प्रलय का खतरा उत्पन्न हुआ। सृष्टि-रक्षा के लिए विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शव के 51 टुकड़े किए — जहाँ-जहाँ गिरे वहाँ शक्तिपीठ स्थापित हुई।#51 शक्तिपीठ#सती शव#शक्ति पीठ उत्पत्ति
शिव-सती-पार्वती कथावीरभद्र कौन है और उसकी उत्पत्ति कैसे हुईवीरभद्र शिव के पहले उग्र रुद्रावतार और गण हैं। सती के आत्मदाह के समाचार पर क्रोधित शिव ने जटा उखाड़कर पर्वत पर फेंकी — उससे आठ भुजाओं वाले विकराल वीरभद्र प्रकट हुए।#वीरभद्र#शिव अवतार#जटा
शिव पूजा विधिशिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा कैसे होती है, विधि सहित?नर्मदेश्वर/स्वयंभू = प्राण प्रतिष्ठा अनावश्यक। मनुष्य निर्मित = अनिवार्य। विधि: शुभ मुहूर्त → भूमि शुद्धि → गणेश-नवग्रह पूजन → कलश स्थापना → वैदिक मंत्रों से प्राण आवाहन → षोडशोपचार पूजन → हवन → पूर्णाहुति। योग्य पुरोहित से ही कराएं। घर के लिए नर्मदेश्वर सर्वोत्तम विकल्प।#प्राण प्रतिष्ठा#शिवलिंग#स्थापना
शिव महिमात्रिपुर संहार में शिव का दिव्य रथ कैसे बना था?पृथ्वी=रथ, सूर्य-चंद्र=पहिए, मेरु=धनुष, वासुकी=डोर, विष्णु=बाण, अग्नि=बाण की नोक, ब्रह्मा=सारथी। विष्णु वृषभ रूप में रथ में जुड़े। इस असंभव रथ पर सवार होकर शिव ने एक ही बाण से तीनों पुरों को भस्म किया।#त्रिपुर संहार#शिव दिव्य रथ#पृथ्वी रथ
शिव मंत्रशिव मंत्र जप पूर्ण होने पर उद्यापन कैसे करें?पुरश्चरण विधि: (1) जप पूर्ण करें (सवा लाख)। (2) दशांश हवन (12,500 आहुति, मंत्र+स्वाहा)। (3) हवन का दशांश तर्पण (1,250, मंत्र+तर्पयामि)। (4) तर्पण का दशांश मार्जन (125, कुश से जल छिड़कें)। (5) मार्जन का दशांश ब्राह्मण भोजन/दान। पूर्णाहुति + क्षमा प्रार्थना से समापन करें।#उद्यापन#मंत्र पूर्णाहुति#पुरश्चरण
शिव महिमात्रिपुरासुर कौन थे और उनकी उत्पत्ति कैसे हुई?त्रिपुरासुर तारकासुर के तीन पुत्र थे — तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली। कार्तिकेय द्वारा तारकासुर के वध के बाद इन्होंने देवताओं से बदला लेने के लिए ब्रह्मा की कठोर तपस्या की और तीन आकाश-नगरों के स्वामी बनकर त्रिपुरासुर कहलाए।#त्रिपुरासुर#तारकासुर पुत्र#तारकाक्ष
शिव मंत्रसंजीवनी मंत्र क्या है और इसका जप कैसे करें?संजीवनी मंत्र = महामृत्युंजय का नाम (मृत-संजीवनी)। मार्कंडेय ने मृत्यु जीती। 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...' ऋग्वेद 7.59.12। रुद्राक्ष माला, 108 नित्य, सोमवार। रोगी पास जप = लाभ। सवा लाख + हवन। शिवलिंग अभिषेक + जप।#संजीवनी#महामृत्युंजय#जीवनदायी
शिव महिमाशिव जी की जटाओं में गंगा कैसे आई?भगीरथ की तपस्या से गंगा धरती पर आने को तैयार हुई, लेकिन उनके प्रचंड वेग से पृथ्वी नष्ट हो जाती। भगीरथ ने शिव से विनती की। शिव ने जटाएं खोलकर गंगा को समेट लिया और उनका अहंकार चूर किया, फिर एक धारा भागीरथी के रूप में धरती पर उतारी।#गंगाधर#गंगा जटा#भगीरथ
दिव्यास्त्रमेघनाद को नागपाश कैसे मिला?मेघनाद ने विकट तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न करके नागपाश प्राप्त किया। साथ ही नागराज वासुकि की पुत्री से विवाह के कारण नागलोक की शक्ति भी उसे प्राप्त थी।#मेघनाद#इंद्रजीत#नागपाश
दिव्यास्त्रसुदर्शन चक्र कैसे बना?सुदर्शन चक्र की उत्पत्ति की तीन प्रमुख कथाएँ हैं — शिव ने विष्णु को दिया, विश्वकर्मा ने सूर्य के तेज से बनाया, और परशुराम ने श्रीकृष्ण को दिया।#सुदर्शन चक्र#उत्पत्ति#विश्वकर्मा
शिव पूजा विधिशिव के वाहन नंदी की पूजा कब और कैसे करें?शिव पूजा में शिवलिंग से पहले नंदी दर्शन अनिवार्य। सोमवार/शिवरात्रि/सावन विशेष। जल, अक्षत, फूल, चंदन अर्पित। 'ॐ नंदीश्वराय नमः' जपें। नंदी-शिवलिंग बीच से न गुजरें। नंदी = शिलाद पुत्र, शिव के द्वारपाल-वाहन-परम भक्त।#नंदी#वाहन#पूजा
गणेश कथाशिव ने गणेश जी को हाथी का सिर कैसे लगाया?शिव पुराण के अनुसार शिव जी ने गणों को उत्तर दिशा में भेजा। वहाँ माँ की तरफ पीठ करके सोते हुए हाथी के बच्चे का सिर लाया गया। शिव जी ने उसे गणेश के धड़ से जोड़कर मंत्रबल से प्राण डाले और गणेश जी पुनर्जीवित हुए।#गणेश हाथी सिर#शिव वरदान#गजमुख
शिव मंत्रशिव अष्टोत्तर शतनामावली का जप कैसे करें?'ॐ [नाम]ाय नमः' — 108 नाम, प्रत्येक पर बेलपत्र/पुष्प अर्पित। 15-20 मिनट। सोमवार/शिवरात्रि/सावन। विकल्प: 'ॐ नमः शिवाय' 108 बार। उन्नत: सहस्रनाम (1000 नाम)।#अष्टोत्तर#108 नाम#शतनामावली
शिव महिमाशिव जी के तीसरे नेत्र की उत्पत्ति कैसे हुई?शिव जी का तीसरा नेत्र तब प्रकट हुआ जब माता पार्वती ने उनकी दोनों आँखें ढक दीं और सृष्टि में अंधकार छा गया — शिव ने संकट में तीसरा नेत्र प्रकट किया। एक अन्य कथा में कामदेव द्वारा तप भंग करने पर तीसरा नेत्र खुला और कामदेव भस्म हुए।#शिव तीसरा नेत्र#त्रिनेत्र#पार्वती
शिव महिमादक्ष ने यज्ञ में शिव जी का अपमान कैसे किया?दक्ष ने यज्ञ में शिव का भाग नहीं रखा और सती के सामने ही शिव को श्मशानवासी, अघोरी और देवताओं के अयोग्य कहकर कटु अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। देवताओं ने भी दक्ष के भय से शिव का पक्ष नहीं लिया।#दक्ष शिव अपमान#सती#यज्ञ
शिव साधनागौरीशंकर रुद्राक्ष पहनने का क्या लाभ है और कैसे पहनें?दो प्राकृतिक जुड़े दाने = शिव-पार्वती। लाभ: दाम्पत्य सुख, विवाह योग, शिव-शक्ति संतुलन, हृदय चक्र। सोमवार/शिवरात्रि धारण, गंगाजल शुद्धि, 108 जप, गले में हृदय पास। असली दुर्लभ — नकली से बचें।#गौरीशंकर#रुद्राक्ष#शिव-पार्वती
शिव महिमाशिव जी के माथे पर चंद्रमा कैसे आया, शिव पुराण में क्या लिखा है?शिव पुराण के अनुसार दक्ष के श्राप से क्षयग्रस्त चंद्रमा ने शिव की कठोर तपस्या की। शिव ने प्रसन्न होकर चंद्रमा को मृत्यु से बचाया और अपने मस्तक पर धारण किया। इसी कारण शिव 'चंद्रशेखर' कहलाए और सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई।#शिव चंद्रशेखर#चंद्रमा दक्ष श्राप#शिव पुराण
शिव पूजा विधिनर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा सामान्य शिवलिंग से कैसे अलग होती है?नर्मदेश्वर शिवलिंग (बाणलिंग) स्वयंभू है — प्राण प्रतिष्ठा अनावश्यक (शिव पुराण)। घर में 6 इंच तक स्थापित कर सकते हैं। हजारों सामान्य शिवलिंग पूजा का फल दर्शन मात्र से प्राप्त। सामान्य शिवलिंग में प्राण प्रतिष्ठा, विस्तृत विधि अनिवार्य। जलधारी का मुख उत्तर दिशा में रखें।#नर्मदेश्वर शिवलिंग#बाणलिंग#नर्मदा
दिव्यास्त्रत्रिपुरासुर कौन था और उसका वध कैसे हुआ?त्रिपुरासुर के तीन उड़ते हुए अजेय नगर थे जिन्हें शिव ने पाशुपतास्त्र से एक ही बाण में नष्ट किया। यह इस अस्त्र का सबसे प्राचीन ज्ञात प्रयोग है।#त्रिपुरासुर#पाशुपतास्त्र#शिव
दिव्यास्त्रभगवान शिव ने अर्जुन की परीक्षा कैसे ली?भगवान शिव ने किरात (शिकारी) का वेश धारण करके अर्जुन से युद्ध किया। इस कठिन परीक्षा में अर्जुन के पराक्रम और भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें पाशुपतास्त्र दिया।#शिव#अर्जुन#किरात
दिव्यास्त्रअर्जुन को पाशुपतास्त्र कैसे मिला?अर्जुन ने इंद्रकील पर्वत पर कठोर तपस्या की। भगवान शिव ने किरात वेश में उनकी परीक्षा ली और संतुष्ट होकर पाशुपतास्त्र प्रदान किया।#अर्जुन#पाशुपतास्त्र#इंद्रकील
दिव्यास्त्रपाशुपतास्त्र कैसे मिलता था?पाशुपतास्त्र भगवान शिव की कठोर तपस्या, अटूट भक्ति और पूर्ण समर्पण से मिलता था। पात्रता के लिए शुद्ध हृदय और धर्मपरायण उद्देश्य जरूरी था।#पाशुपतास्त्र#प्राप्ति#तपस्या
दिव्यास्त्रमार्कण्डेय को यमदण्ड से कैसे बचाया गया?यमराज का पाश शिवलिंग पर पड़ने से क्रुद्ध होकर शिव महाकाल रूप में प्रकट हुए, यमराज को प्रहार से मूर्छित किया और मार्कण्डेय को अमरता का वरदान दिया।#मार्कण्डेय#यमदण्ड#शिव
शिव पर्वश्रावण मास में सोमवार व्रत कैसे रखें, विधि सहित?सूर्योदय पूर्व स्नान → संकल्प → जलाभिषेक → पंचामृत → बेलपत्र → 108 जप → स्तोत्र → कर्पूर आरती। निराहार/फलाहार (अन्न-नमक वर्जित)। ब्रह्मचर्य। संध्या पूजा + कथा। सभी सोमवार व्रत — अधूरा अशुभ।#श्रावण सोमवार#व्रत#विधि
शिव अस्त्र-शस्त्रचंद्रहास रावण को कैसे मिलीरावण ने कैलाश उठाने के बाद शिव के पैर से दबने पर दर्द में शिव तांडव स्तोत्र रचा। प्रसन्न शिव ने चंद्रहास खड्ग, अजेयता और 'रावण' नाम दिया — साथ में चेतावनी कि दुरुपयोग पर तलवार वापस आ जाएगी।#चंद्रहास#रावण#कैलाश
शिव अस्त्र-शस्त्रशिव का फरसा परशुराम को कैसे मिलापरशुराम ने शिव की घोर तपस्या की। शिव ने प्रसन्न होकर धर्म-रक्षा के लिए दिव्य परशु (फरसा) दिया और उसे उठाने की शक्ति भी प्रदान की। इसी से वे 'परशुराम' कहलाए।#परशु#परशुराम#फरसा
शिव अस्त्र-शस्त्रपिनाक धनुष राम ने सीता स्वयंवर में कैसे तोड़ाराजा जनक के स्वयंवर में गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से राम ने पिनाक धनुष सहज भाव से उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह टूट गया। इसी से सीता का विवाह राम से हुआ।#पिनाक#सीता स्वयंवर#राम
शिव पूजा विधिशिव परिवार की पूजा कैसे करें और इसका क्या लाभ है?शिवलिंग = पूरे परिवार का प्रतीक। क्रम: गणेश→पार्वती→कार्तिकेय→शिव→नंदी। लाभ: पारिवारिक एकता, बुद्धि (गणेश), सौभाग्य (पार्वती), साहस (कार्तिकेय), कल्याण (शिव)। संतान सुख। शिक्षा: विरोधी वाहन फिर भी एकसाथ = एकता।#शिव परिवार#पार्वती#गणेश
शिव रूपनटराज रूप में शिव की पूजा कब और कैसे करनी चाहिए?प्रदोष काल सर्वोत्तम (शिव तांडव का समय)। चिदंबरम = नटराज का मुख्य केंद्र (पंचभूत आकाश तत्त्व)। 'ॐ नटराजाय नमः' 108 बार + शिव तांडव स्तोत्र। नटराज = अज्ञान पर विजय, सृष्टि-संहार चक्र। कलाकारों/नर्तकों के लिए विशेष।#नटराज#तांडव#चिदंबरम
शिव स्तोत्रबिल्वाष्टक स्तोत्र का पाठ शिवलिंग के सामने कैसे करें?8 श्लोक, 8 बेलपत्र। प्रत्येक श्लोक पर एक त्रिदल बेलपत्र अर्पित। 'त्रिदलं त्रिगुणाकारं... एकबिल्वं शिवार्पणम्' — एक बेलपत्र = तीन जन्मों के पाप नष्ट। सोमवार/शिवरात्रि/सावन।#बिल्वाष्टक#स्तोत्र#बेलपत्र
शिव मंत्रशिव मंत्र जप में विनियोग का क्या अर्थ है और कैसे करें?विनियोग = मंत्र का परिचय (6 अंग: ऋषि, छन्द, देवता, बीज, शक्ति, कीलक)। जप पूर्व जल हाथ में लेकर बोलें। महामृत्युंजय: वशिष्ठ ऋषि, अनुष्टुप, त्र्यंबक, ॐ, ह्रीं, क्लीं। सरल: 'ॐ नमः शिवाय' 3 बार = विनियोग विकल्प।#विनियोग#अर्थ#विधि