मनु और शतरूपास्वायम्भुव मनु और शतरूपा कौन थे?स्वायम्भुव मनु और रानी शतरूपा का सृजन ब्रह्मा ने किया; शतरूपा अयोनिजा और पुण्यशालिनी कही गई हैं।#स्वायम्भुव मनु#शतरूपा#ब्रह्मा
ऋषि और मानस पुत्रऋभु और सनत्कुमार कौन थे?ऋभु और सनत्कुमार ब्रह्मा के अग्रजन्मा दिव्य पुत्र थे, जिन्हें नैष्ठिक ब्रह्मचारी और ब्रह्मवादी कहा गया है।#ऋभु#सनत्कुमार#नैष्ठिक ब्रह्मचारी
ऋषि और मानस पुत्रब्रह्मा की बारह संतान कौन कही गई हैं?नौ मानस पुत्रों के साथ संकल्प, धर्म और अधर्म मिलकर ब्रह्मा की बारह संतान कही गई हैं।#ब्रह्मा की संतान#बारह संतान#संकल्प
ऋषि और मानस पुत्रब्रह्मा के नौ मानस पुत्र कौन थे?ब्रह्मा के नौ मानस पुत्र मरीचि, भृगु, अंगिरा, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, दक्ष, अत्रि और वसिष्ठ थे।#ब्रह्मा के मानस पुत्र#मरीचि#भृगु
ऋषि और मानस पुत्रसनकादि मुनियों ने परमपद कैसे प्राप्त किया?सनकादि मुनियों ने निष्काम कर्मयोग से परमपद प्राप्त किया।#सनकादि#निष्काम कर्मयोग#परमपद
ऋषि और मानस पुत्रसनक, सनन्दन और सनातन कौन थे?सनक, सनन्दन और सनातन ब्रह्मा द्वारा उत्पन्न श्रेष्ठ मुनि थे; सनत्कुमार का भी उल्लेख साथ आता है।#सनक#सनन्दन#सनातन
सर्गत्रिगुणात्मक चिंतन का क्या मतलब है?त्रिगुणात्मक चिंतन का अर्थ सत्त्व, रज और तमोगुण से युक्त चिंतन बताया गया है।#त्रिगुणात्मक#सत्त्व#रज
अविद्याब्रह्मा की पहली सृष्टि अविद्या से ग्रस्त क्यों कही गई?पहली सृष्टि अविद्या से ग्रस्त कही गई क्योंकि सृष्टि-विचार सम्यक विचार के बिना हुआ और ब्रह्मा को मोह ने व्याप्त कर लिया।#ब्रह्मा#पहली सृष्टि#अविद्या
अविद्यापंचपर्वा अविद्या क्या है?पंचपर्वा अविद्या वे पांच अविद्याएँ हैं जो ब्रह्मा से पहले उत्पन्न हुईं: तम, मोह, महामोह, तामिस्र और अन्धतामिस्र।#पंचपर्वा अविद्या#अविद्या#तम
सृष्टि आरम्भब्रह्मा ने भू भुव स्व मह लोकों की रचना कैसे की?पृथ्वी को पुनः व्यवस्थित करने के बाद ब्रह्मा ने भू आदि चार लोकों की पूर्ववत् रचना की।#भू#भुव#स्व
सृष्टि आरम्भपृथ्वी को फिर से कैसे स्थापित किया गया?ब्रह्मा ने पृथ्वी को निकालकर पूर्ववत् स्थापित किया, नदी-समुद्र बनाए और दबे-उठे भागों को समतल किया।#पृथ्वी स्थापना#ब्रह्मा#वाराह
सृष्टि आरम्भजल में डूबी पृथ्वी को किसने निकाला?जल में डूबी पृथ्वी को सनातन ब्रह्मा ने वाराह रूप धारण करके निकाला।#पृथ्वी#जल#ब्रह्मा
सृष्टि आरम्भब्रह्मा ने वाराह रूप क्यों धारण किया?ब्रह्मा ने जल में डूबी पृथ्वी को निकालकर फिर से स्थापित करने के लिए वाराह रूप धारण किया।#ब्रह्मा#वाराह रूप#पृथ्वी उद्धार
सृष्टि आरम्भप्रलय के बाद ब्रह्मा ने क्या सोचा?प्रलयकालीन रात बीतने पर ब्रह्मा ने चराचर जगत् को शून्य देखकर सृष्टि करने का विचार किया।#प्रलय#ब्रह्मा#सृष्टि विचार
ब्रह्मा कालब्रह्मा को नारायण क्यों कहा गया है?प्रलय की रात में ब्रह्माजी जलराशि में शयन करते हैं, इसलिए उन्हें नारायण कहा गया है।#ब्रह्मा#नारायण#प्रलय
प्रलयप्रलय में कौन से लोक नष्ट नहीं होते?भू:, भुव:, स्व: और मह: से ऊपर के लोकों का नाश नहीं होता बताया गया है।#प्रलय#ऊपर के लोक#लोक
ब्रह्मा कालब्रह्मा की आयु कितनी बताई गई है?ब्रह्मा की आयु दो परार्ध बताई गई है।#ब्रह्मा की आयु#दो परार्ध#ब्रह्मा
शिव तत्त्वमहेश्वर एक ही क्यों बताए गए हैं?असंख्य कल्प, पितामह और विष्णु उत्पन्न होते हैं, पर महेश्वर मात्र एक बताए गए हैं।#महेश्वर#असंख्य कल्प#ब्रह्मा
कल्प और मन्वन्तरब्रह्मा के तैंतीस कल्प कौन से हैं?ब्रह्मा के तैंतीस कल्पों में भवोद्भव से सर्वरूपक तक अनेक नाम गिनाए गए हैं।#तैंतीस कल्प#ब्रह्मा#कल्प नाम
ब्रह्मा कालब्रह्मा का एक वर्ष कितना होता है?हजार कल्पों का काल ब्रह्माजी का एक वर्ष बताया गया है।#ब्रह्मा#ब्रह्म वर्ष#कल्प
कल्प और मन्वन्तरएक कल्प में कितनी चतुर्युगी होती हैं?एक हजार चतुर्युगों का काल एक कल्प कहा गया है।#कल्प#चतुर्युगी#युग
ब्रह्मा कालब्रह्मा का दिन रात मनुष्यों जैसा क्यों नहीं है?ब्रह्मा का अहोरात्र उत्पत्ति और प्रलय से जुड़ा है, मनुष्यों की तरह सूर्योदय-सूर्यास्त वाला नहीं।#ब्रह्मा#अहोरात्र#सूर्योदय
ब्रह्मा कालब्रह्मा रात में क्या करते हैं?ब्रह्मा रात में प्रलय करते हैं और दिन की सृष्टि विलीन हो जाती है।#ब्रह्मा#रात#प्रलय
ब्रह्मा कालब्रह्मा दिन में क्या करते हैं?ब्रह्मा दिन में सृष्टि करते हैं और वैकारिक सृष्टि सहित देवता, प्रजापति और महर्षि विद्यमान रहते हैं।#ब्रह्मा#दिन#सृष्टि
ब्रह्मा कालब्रह्मा का दिन क्या होता है?ब्रह्मा की प्राकृत सृष्टि का समय ही उनका दिन बताया गया है।#ब्रह्मा#ब्रह्मा का दिन#कल्प
शिव तत्त्वसदाशिव सर्वात्मक क्यों कहे गए हैं?सदाशिव भव, विष्णु, ब्रह्मा आदि रूपों में स्थित होने और लोकों तथा पितामह के रूप में कहे जाने से सर्वात्मक बताए गए हैं।#सदाशिव#सर्वात्मक#भव
ब्रह्माण्ड वर्णनकरोड़ों ब्रह्माण्डों की उत्पत्ति कैसे बताई गई है?प्रधान प्रकृति सदाशिव के आश्रय से करोड़ों ब्रह्माण्डों में ब्रह्मा, विष्णु और शिव का सृजन करती है।#करोड़ों ब्रह्माण्ड#प्रधान#सदाशिव
ब्रह्माण्ड वर्णनब्रह्माण्ड अण्ड कैसे उत्पन्न होता है?महत्तत्त्व से पंचमहाभूत तक सभी तत्त्व अण्ड की उत्पत्ति करते हैं।#ब्रह्माण्ड#अण्ड#महत्तत्त्व
शिव तत्त्वब्रह्मा विष्णु शिव की विश्व प्राज्ञ तैजस अवस्थाएँ क्या हैं?बीजरूप ब्रह्मा, योनिरूप विष्णु और प्रधानरूप शिव की विश्व, प्राज्ञ और तैजस अवस्थाएँ कही गई हैं।#ब्रह्मा#विष्णु#शिव
सृष्टि तत्त्वब्रह्मा से सृष्टि कैसे होती है?माया-वितत लिंगों से उद्भूत तीन प्रधान देवों में ब्रह्मा से जगत् की उत्पत्ति बताई गई है।#ब्रह्मा#सृष्टि#शिवात्मक
शिव तत्त्वब्रह्मा विष्णु रुद्र शिवात्मक कैसे हैं?ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र तीनों प्रधान देव माया-वितत लिंगों से उद्भूत और शिवात्मक बताए गए हैं।#ब्रह्मा#विष्णु#रुद्र
शिव तत्त्वशिवजी ने ब्रह्मा को परम ज्ञान क्यों दिया?मधु-कैटभ के संसर्ग से नष्ट ज्ञानवाले ब्रह्मा को परम ज्ञान देने के लिए शिव का प्रादुर्भाव बताया गया है।#शिव#ब्रह्मा#परम ज्ञान
शिव तत्त्वशिवलिंग का प्राकट्य किस विवाद के बाद बताया गया है?शिवलिंग का प्राकट्य ब्रह्मा और विष्णु के विवाद के बाद बताया गया है।#शिवलिंग#प्राकट्य#ब्रह्मा
सृष्टि तत्त्वमनु और शतरूपा की उत्पत्ति किस रूप में बताई गई है?मनु और शतरूपा की उत्पत्ति ब्रह्मा के स्त्री-पुरुष भाव के रूप में बताई गई है।#मनु#शतरूपा#ब्रह्मा
काल और ब्रह्मादिव्य वर्ष मानुष वर्ष आर्ष वर्ष श्रौव्य वर्ष और पित्र्य वर्ष का वर्णन कहाँ है?इन पाँच प्रकार के वर्षों का वर्णन ब्रह्मा की उत्पत्ति, युग और कल्प के प्रसंग में बताया गया है।#दिव्य वर्ष#मानुष वर्ष#आर्षवर्ष
काल और ब्रह्माब्रह्मा के दिन रात और आयु की गणना कहाँ बताई गई है?ब्रह्मा के दिन-रात और आयु की गणना लिङ्गपुराण में वर्णित विषयों में बताई गई है।#ब्रह्मा#दिन रात#आयु
सृष्टि तत्त्वप्रजापतियों की सृष्टि और पृथ्वी उद्धार की कथा कहाँ है?प्रजापतियों की सृष्टि और पृथ्वी के उद्धार की कथा लिङ्गपुराण में वर्णित विषयों में बताई गई है।#प्रजापति#पृथ्वी उद्धार#ब्रह्मा
शिव तत्त्वसदाशिव से ब्रह्मा विष्णु और कालरुद्र कैसे प्रकट होते हैं?सदाशिव से रजोगुण के आश्रय से ब्रह्मा, सत्त्व के आश्रय से विष्णु और तमोगुण के आश्रय से कालरुद्र का प्रादुर्भाव बताया गया है।#सदाशिव#ब्रह्मा#विष्णु
पुराण परिचयईशानकल्प में किस कथा का आधार बताया गया है?ईशानकल्प में लिङ्ग के प्रादुर्भाव आदि से सम्बद्ध वृत्तान्तों को आधार बताया गया है।#ईशानकल्प#लिङ्ग प्रादुर्भाव#ब्रह्मा
पुराण परिचयब्रह्मा ने सबसे पहले किस पुराण की उद्भावना की?महात्मा ब्रह्मा ने ईशानकल्प के लिङ्ग-प्रादुर्भाव आदि वृत्तान्तों के आधार पर श्रेष्ठ लिङ्गपुराण की उद्भावना की।#ब्रह्मा#लिङ्गपुराण#ईशानकल्प
गुण और देव रूपहिरण्यगर्भ क्या है?हिरण्यगर्भ वह स्वरूप है जो रजोगुण से युक्त होने पर प्रकट बताया गया है।#हिरण्यगर्भ#रजोगुण#ब्रह्मा
गुण और देव रूपतमोगुण रजोगुण सत्त्वगुण से कौन से रूप जुड़े हैं?तमोगुण से कालरुद्र, रजोगुण से हिरण्यगर्भ, सत्त्वगुण से विष्णु और निर्गुण से महेश्वर रूप जुड़ता है।#तमोगुण#रजोगुण#सत्त्वगुण
पुराण कथाकथा शुरू करने से पहले सूतजी ने किसे प्रणाम किया?सूतजी ने शिव, ब्रह्मा, विष्णु और मुनीश्वर व्यासजी को नमस्कार करके कथा आरंभ की।#सूतजी#शिव#ब्रह्मा
शिव तत्त्वब्रह्मा विष्णु शिव रूप का क्या अर्थ है?ब्रह्मा-विष्णु-शिवरूप का अर्थ सदाशिव को सृष्टि, स्थिति और अंत से जुड़े परम रूप में समझना है।#ब्रह्मा#विष्णु#शिव
लोकब्रह्मा हंस गीता का उत्तर क्यों नहीं दे सकेब्रह्मा रजोगुणी सृष्टि-कर्म में आच्छादित थे, इसलिए वे मोक्ष का सूक्ष्म उत्तर न दे सके।#ब्रह्मा#हंस गीता#रजोगुण
लोकसनकादिक मुनियों ने ब्रह्मा से क्या पूछाउन्होंने पूछा कि मोक्ष चाहने वाला साधक मन और विषयों का बंधन कैसे तोड़े।#सनकादिक प्रश्न#ब्रह्मा#मन विषय
लोकपंचपर्वा अविद्या क्या हैपंचपर्वा अविद्या अज्ञान के पाँच रूप हैं: तामिस्र, अंध-तामिस्र, तमस्, मोह और महा-मोह।#पंचपर्वा अविद्या#अज्ञान#माया
लोकब्रह्मा ने अविद्या क्यों बनाईब्रह्मा ने जीवों को कर्मफल भोगने योग्य भौतिक जगत में बाँधने के लिए अविद्या रची।#अविद्या#ब्रह्मा#सृष्टि
लोकहंस अवतार की कथाहंस अवतार कथा में भगवान विष्णु हंस रूप में प्रकट होकर आत्मज्ञान का उपदेश देते हैं।#हंस अवतार कथा#सनकादिक#ब्रह्मा
लोकब्रह्मा ने दुर्वासा को क्यों नहीं बचायाब्रह्मा जी सुदर्शन चक्र को रोकने में असमर्थ थे।#ब्रह्मा#दुर्वासा#सुदर्शन चक्र