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विस्तृत उत्तर
अमृत-कुण्ड मय दानव की मायावी विद्या से बनाया गया था। युद्ध के दौरान जो मृत दानव इस कुण्ड में गिरते थे, वे तुरंत जीवित हो जाते थे और पहले से अधिक शक्तिशाली बन जाते थे। इस कारण देवताओं के लिए युद्ध कठिन हो गया। इस घोर माया को नष्ट करने के लिए भगवान विष्णु ने गौ और ब्रह्मा जी ने बछड़े का रूप धारण किया तथा उस कुण्ड का सारा अमृत पी लिया।
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