विस्तृत उत्तर
भस्मासुर को सीधे शस्त्र से किसी देवता ने नहीं मारा। उसका अंत भगवान विष्णु की योगमाया से हुआ। विष्णु जी ने ब्रह्मचारी या मोहिनी रूप में उसकी बुद्धि को भ्रमित किया। उन्होंने उसे विश्वास दिलाया कि शिव जी का वरदान शायद झूठा है और उसकी परीक्षा अपने सिर पर हाथ रखकर करनी चाहिए। भस्मासुर ने बिना सोचे अपना हाथ अपने सिर पर रख दिया। शिव जी का वरदान सत्य था, इसलिए वह तुरंत भस्म हो गया। इस अर्थ में उसका वध उसके अपने अहंकार, अपने ही वरदान और विष्णु की माया से हुआ।
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