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देव कार्य और पितृ कार्य की जनेऊ मुद्रा में क्या अंतर

संक्षिप्त उत्तर

देव कार्य में सव्य, पितृ कार्य में अपसव्य और ऋषि तर्पण में निवीत मुद्रा रखी जाती है।

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विस्तृत उत्तर

देव कार्य में यज्ञोपवीत बाएँ कंधे पर रहता है, जिसे सव्य कहा जाता है। पितृ कार्य में यज्ञोपवीत दाएँ कंधे पर रखा जाता है, जिसे अपसव्य या प्राचीनावीत कहा जाता है। ऋषि तर्पण के समय जनेऊ को माला की तरह गले में रखा जाता है, जिसे निवीत कहा जाता है। इस प्रकार देव, पितृ और ऋषि कर्मों में जनेऊ की मुद्रा अलग-अलग होती है।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

देव कार्य और पितृ कार्य की जनेऊ मुद्रा में क्या अंतर है को संदर्भ सहित समझें

देव कार्य और पितृ कार्य की जनेऊ मुद्रा में क्या अंतर है का सबसे सीधा सार यह है: देव कार्य में सव्य, पितृ कार्य में अपसव्य और ऋषि तर्पण में निवीत मुद्रा रखी जाती है।

लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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