विस्तृत उत्तर
जलपात्र दान से जलहीन यममार्ग में जीव को जल और शीतलता प्राप्त होने का फल बताया गया है।
एकादशी श्राद्ध में जलपात्र दान क्यों को संदर्भ सहित समझें
एकादशी श्राद्ध में जलपात्र दान क्यों का सबसे सीधा सार यह है: यममार्ग में जल-सहायता के लिए।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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वैतरणी नदी में श्राद्ध कैसे सहायक है?
श्राद्ध जीव की यमयात्रा में सहायक है।
यममार्ग में पिंडदान न होने पर आत्मा को क्या कष्ट होता है?
पिंडदान न होने पर आत्मा भूख-प्यास से तड़पती है, विलाप करती है और अपने सांसारिक मोह पर पश्चाताप करती है।
सौम्यपुर में आत्मा को क्या प्राप्त होता है?
सौम्यपुर में आत्मा को परिजनों द्वारा दिया गया प्रथम पिंड प्राप्त होता है और वह परिवार को याद कर रोती है।
यममार्ग में श्राद्ध और पिंडदान का क्या महत्व है?
यममार्ग में पिंडदान आत्मा को नगरों में विश्राम और पोषण देता है; पिंडदान न होने पर आत्मा भूख-प्यास से तड़पती है।
एकादशी श्राद्ध से यममार्ग में क्या लाभ है?
यममार्ग की बाधाएं कम होती हैं।
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