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ज्योतिष उपाय

ग्रह दोष निवारण, राशि अनुसार उपाय, कुंडली ज्ञान, नवग्रह शांति — ज्योतिष सम्बन्धी सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर।

218प्रश्नोत्तर
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कालसर्प दोष त्र्यम्बकेश्वर में क्यों करवाएं

ज्योतिर्लिंग शक्ति, कुशावर्त (गोदावरी), विशेषज्ञ पंडित, सदियों परंपरा। नागबली 2-3 दिन। विश्वसनीय पंडित+सरकारी दर। विकल्प: स्थानीय शिव मंदिर+पुरोहित।

ज्योतिष दोष एवं उपायकालसर्पत्र्यम्बकेश्वर
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कालसर्प दोष निवारण प्रभावी पूजा

त्र्यम्बकेश्वर नागबली (सर्वप्रसिद्ध), शांति हवन, रुद्राभिषेक, नागपंचमी, 'ॐ नमः शिवाय' 1,25,000। घरेलू: Q892।

ज्योतिष दोष एवं उपायकालसर्पनिवारण
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कालसर्प दोष कितने प्रकार

12 प्रकार (राहु-केतु भाव): अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर, शेषनाग। प्रत्येक=भिन्न प्रभाव। नवीन अवधारणा।

ज्योतिष दोष एवं उपायकालसर्पप्रकार
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मंगलवार हनुमान पूजा मंगल दोष में कैसे सहायक

हनुमान=मंगल अधिपति → मंगलवार=हनुमान दिवस। पूजा=मंगल नकारात्मकता शमन। सिंदूर+चमेली तेल+चालीसा+लड्डू। विवाह बाधा, शत्रु, कानून=लाभ।

ज्योतिष दोष एवं उपायमंगलवारहनुमान
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मंगल दोष निवारण पूजा

हनुमान चालीसा (प्रतिदिन=पर्याप्त), 'ॐ अं अंगारकाय नमः', सुंदरकांड, कुंभ विवाह। मूंगा, 3 मुखी। लाल दान मंगलवार। हनुमान=मंगल देवता।

ज्योतिष दोष एवं उपायमंगल दोषनिवारण
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मंगल दोष होने पर विवाह में समस्या

विवाह बाधा/विलंब/कलह (ज्योतिष)। मांगलिक+मांगलिक=cancel। कुंभ विवाह=समाधान। 40-50% मांगलिक=सामान्य; अत्यधिक भय अनुचित। प्रेम>दोष।

ज्योतिष दोष एवं उपायमंगल दोषविवाह
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मंगल दोष क्या है कुंडली में कैसे दिखता है

मंगल 1/2/4/7/8/12 भाव=मांगलिक। ~40-50% कुंडली=मांगलिक (सामान्य)। सब हानिकारक नहीं — भाव/राशि/दृष्टि। मेष/वृश्चिक/मकर=दोष कम। अत्यधिक भय अनुचित।

ज्योतिष दोष एवं उपायमंगल दोषकुंडली
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केतु दोष निवारण क्या करें

गणेश अथर्वशीर्ष, 'ॐ कें केतवे नमः', दुर्गा पूजा। लहसुनिया, 9 मुखी। कुत्ते को भोजन, पितृ तर्पण। कुत्तों से प्रेम; सत्कर्म।

ज्योतिष दोष एवं उपायकेतुनिवारण
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केतु दोष क्या है लक्षण कैसे पहचानें

केतु=वैराग्य/अचानक। लक्षण: अज्ञात समस्या, संतान कष्ट, त्वचा रोग, अत्यधिक वैराग्य, कुत्ते भय, दुर्घटना। ज्योतिषी=सटीक पहचान।

ज्योतिष दोष एवं उपायकेतुदोष
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राहु को प्रसन्न करने की पूजा

दुर्गा पूजा (सर्वोत्तम), राहु काल में दुर्गा मंत्र, 'ॐ रां राहवे नमः', सरस्वती (भ्रम नाश), नागपंचमी। गोमेद, 8 मुखी। सत्य+बुजुर्ग सम्मान।

ज्योतिष दोष एवं उपायराहुपूजा
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जन्म कुंडली बनवाना जरूरी है क्या

ज्योतिष: विवाह मिलान/दोष/मुहूर्त हेतु उपयोगी — बनवा लें। भक्ति: ईश्वर शरणागति > ग्रह; कर्म > भाग्य। व्यावहारिक: बनवाना = हानि नहीं; निर्भरता = अनुचित।

ज्योतिष दोष एवं उपायकुंडलीजन्मपत्री
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अधिक मास में कौन से पुण्य कर्म करें

पुरुषोत्तम मास पुण्य = कई गुना। विष्णु भक्ति (गीता/सहस्रनाम), दान (अन्न/वस्त्र/गो), व्रत, तीर्थ स्नान, भागवत कथा, तुलसी पूजा। शुभ कार्य वर्जित, पर पुण्य = अनंत।

पंचांग एवं कैलेंडरअधिक मासपुण्य
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कालसर्प दोष निवारण सबसे प्रभावी पूजा

त्र्यम्बकेश्वर (नासिक) नागबली = सबसे प्रसिद्ध। काल सर्प शांति हवन, रुद्राभिषेक। दैनिक: 'ॐ नमः शिवाय' 108, महामृत्युंजय, रुद्राक्ष। नागपंचमी नाग पूजा। कालसर्प = नवीन अवधारणा; अत्यधिक भय अनुचित।

ज्योतिष दोष एवं उपायकालसर्पनिवारण
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खरमास क्या है इसमें कौन से काम वर्जित

खरमास = सूर्य धनु/मीन राशि (~दिसंबर-जनवरी + मार्च-अप्रैल)। गुरु कमजोर → शुभ कार्य वर्जित (विवाह/गृह प्रवेश)। पूजा/दान/दैनिक = अनुमत। अधिक मास से भिन्न।

पंचांग एवं कैलेंडरखरमासमलमास
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मूल नक्षत्र में जन्मे बच्चे के लिए कौन सी पूजा

27वें दिन मूल शांति पूजा (पंडित), गणेश पूजा, नवग्रह हवन, महामृत्युंजय, दान। मूल = अशुभ नहीं, शक्तिशाली। कई महान व्यक्ति मूल जन्मे। अत्यधिक भय अनुचित — शांति पूजा कराएं।

ज्योतिष दोष एवं उपायमूलनक्षत्र
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पूर्णिमांत और अमांत पंचांग में अंतर

अमांत: माह = अमावस्या तक (गुजरात/दक्षिण/सरकारी)। पूर्णिमांत: माह = पूर्णिमा तक (उत्तर भारत)। शुक्ल पक्ष = दोनों समान; कृष्ण = माह नाम भिन्न।

पंचांग एवं कैलेंडरपूर्णिमांतअमांत
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कुंडली मिलान में नाड़ी दोष क्या है उपाय

वर-वधू समान नाड़ी (आदि/मध्य/अंत्य) = नाड़ी दोष (0/8 — सर्वाधिक गंभीर)। संतान/स्वास्थ्य/कलह। अपवाद अनेक (भिन्न नक्षत्र/चरण)। उपाय: निवारण पूजा, महामृत्युंजय, गोदान। बहुत से सफल विवाह इसके बावजूद।

ज्योतिष दोष एवं उपायनाड़ी दोषकुंडली
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शनि ढैय्या क्या है उपाय

ढैय्या = शनि 4थे/8वें भाव; ~2.5 वर्ष; साढ़ेसाती से कम तीव्र। उपाय: प्रश्न 693 जैसे — हनुमान, शनि, शिव पूजा + दान + सदाचार।

ज्योतिष दोष एवं उपायशनिढैय्या
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अधिक मास में विवाह क्यों नहीं करते

अधिक मास = मलमास (अशुद्ध); कोई देवता अधिपति नहीं। विवाह/गृह प्रवेश/संस्कार वर्जित। पुण्य कर्म (दान/व्रत/भक्ति) = विशेष शुभ। ~32.5 माह में एक बार।

पंचांग एवं कैलेंडरअधिक मासविवाह
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मंगल दोष क्या है उपाय

मंगल 1/2/4/7/8/12 भाव = मांगलिक। विवाह बाधा/दांपत्य कलह। उपाय: हनुमान पूजा, 'ॐ अं अंगारकाय नमः', मूंगा, कुंभ विवाह। ~40% कुंडली मांगलिक — सब हानिकारक नहीं। 28 वर्ष बाद कमजोर।

ज्योतिष दोष एवं उपायमंगल दोषमांगलिक
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कालसर्प दोष कैसे पहचानें कुंडली में

सभी 7 ग्रह राहु-केतु के एक ओर = कालसर्प। 12 प्रकार (भाव अनुसार)। लक्षण: सांप सपने, बाधा, असफलता। ज्योतिषी से जांच। महत्वपूर्ण: प्राचीन ग्रंथों में 'कालसर्प' शब्द नहीं — अपेक्षाकृत नवीन अवधारणा।

ज्योतिष दोष एवं उपायकालसर्पदोष
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हिंदू कैलेंडर और अंग्रेजी कैलेंडर तारीख अलग क्यों

अंग्रेजी = सौर (सूर्य आधारित; 365.25 दिन)। हिंदू = चांद्र-सौर (चंद्र माह + सौर वर्ष)। चंद्र माह (29.5 दिन) ≠ सौर माह = तिथि भिन्न। दीवाली = कार्तिक अमावस्या → हर साल अलग अंग्रेजी तारीख।

पंचांग एवं कैलेंडरहिंदू कैलेंडरअंग्रेजी
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राहु केतु दोष से कैसे बचें

राहु: दुर्गा पूजा, 'ॐ रां राहवे नमः', गोमेद, 8 मुखी रुद्राक्ष। केतु: गणेश पूजा, 'ॐ कें केतवे नमः', लहसुनिया, 9 मुखी। सार्वभौमिक: महामृत्युंजय + हनुमान + शिव।

ज्योतिष दोष एवं उपायराहुकेतु
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कुंडली मिलान में कितने गुण मिलने चाहिए

36 में से 18+ = विवाह योग्य; 24+ = अच्छा; 30+ = उत्तम। नाड़ी दोष (8 अंक) सबसे गंभीर — 0 हो तो 28+ भी चिंतनीय। गुण संख्या < विशिष्ट दोष। उत्तर = अष्टकूट; दक्षिण = दशकूट।

ज्योतिष दोष एवं उपायकुंडली मिलानगुण
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नक्षत्र अनुसार शुभ कार्य कैसे तय करें

27 नक्षत्र = शुभ/अशुभ। विवाह: रोहिणी, मृगशिरा, स्वाति, अनुराधा। खरीदारी: पुष्य सर्वोत्तम। यात्रा: अश्विनी, पुष्य, रेवती। पंचांग/ऐप = सरलतम — आज का नक्षत्र+शुभ/अशुभ दिखता है।

पंचांग एवं कैलेंडरनक्षत्रशुभ कार्य
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कुंडली न मिले तो विवाह करना चाहिए या नहीं

ज्योतिष: कुंडली मिलान महत्वपूर्ण। भक्ति: राम-सीता/शिव-पार्वती = कुंडली नहीं। प्रेम + सम्मान > कुंडली। कुंडली = मार्गदर्शक, अंतिम निर्णय नहीं। दोष हो तो पूजा; अच्छा रिश्ता कुंडली पर न टूटे।

ज्योतिष दोष एवं उपायकुंडलीविवाह
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शनि साढ़ेसाती में कौन सी पूजा करें

हनुमान पूजा (सर्वप्रभावी), शनि पूजा ('ॐ शं शनैश्चराय नमः'), शिव अभिषेक, पीपल पूजा। दान: काले वस्त्र/तेल/तिल/उड़द। गरीब/वृद्ध सेवा = शनि सबसे प्रसन्न। सदाचार = सर्वोत्तम। साढ़ेसाती सदैव अशुभ नहीं।

ज्योतिष दोष एवं उपायशनिसाढ़ेसाती
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पंचांग कैसे पढ़ें सरल भाषा में

5 अंग: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह), नक्षत्र (चंद्र स्थिति), योग (सूर्य+चंद्र), करण (तिथि आधा)। शुभ = शुभ तिथि+नक्षत्र+योग। ऑनलाइन: = सरलतम।

पंचांग एवं कैलेंडरपंचांगपढ़ना
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गुरु चांडाल दोष क्या है उपाय

गुरु+राहु एक भाव = ज्ञान में भ्रम, गुरु विश्वासघात। उपाय: विष्णु पूजा, गुरुवार व्रत, 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः', पुखराज, सत्य + गुरु सम्मान = सबसे प्रभावी।

ज्योतिष दोष एवं उपायगुरु चांडालदोष
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विक्रम संवत और शक संवत में अंतर

विक्रम = 57 ई.पू. (ग्रेगोरियन+57); उत्तर भारत, नेपाल। शक = 78 ई. (ग्रेगोरियन-78); भारत राष्ट्रीय कैलेंडर; दक्षिण/महाराष्ट्र। दोनों नववर्ष = चैत्र शुक्ल प्रतिपदा।

पंचांग एवं कैलेंडरविक्रम संवतशक संवत
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सर्वार्थ सिद्धि योग कब होता है महत्व

वार+नक्षत्र विशिष्ट संयोग। 'सभी कार्य सफल' — व्यापार, संपत्ति, विवाह, यात्रा, निवेश। अमृत सिद्धि से व्यापक। पंचांग/ऐप में 'सर्वार्थ सिद्धि' देखें।

मुहूर्तसर्वार्थ सिद्धियोग
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रवि पुष्य नक्षत्र योग में क्या खरीदें

रविवार+पुष्य नक्षत्र = सोना/आभूषण (सबसे प्रचलित), संपत्ति, वाहन, रत्न, व्यापार सामग्री। ~1-2 बार/माह। पुष्य=सबसे शुभ खरीदारी नक्षत्र + रवि=सूर्य तेज।

मुहूर्तरवि पुष्यनक्षत्र
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राहु काल में पूजा कर सकते हैं या नहीं

नियमित पूजा = हाँ (कभी अशुभ नहीं)। नया अनुष्ठान/हवन = टालें। राहु काल = राहु/दुर्गा पूजा विशेष शुभ। ईश्वर स्मरण = 24×7; राहु काल = नया शुरू न करें, नियमित भक्ति करें।

मुहूर्तराहु कालपूजा
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गुरु पुष्य योग में क्या खरीदना शुभ

गुरुवार+पुष्य = सोना, पीली वस्तुएं, शिक्षा सामग्री, पुखराज, धार्मिक सामग्री, संपत्ति। शिक्षा/धर्म = गुरु पुष्य > रवि पुष्य। बृहस्पति=ज्ञान/धन/धर्म।

मुहूर्तगुरु पुष्ययोग
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शुभ मुहूर्त कैसे निकालें किसी भी काम के लिए

सरल: अभिजित मुहूर्त (दोपहर ~11:36-12:24, बुधवार छोड़कर)। पंचांग: शुभ तिथि+नक्षत्र+योग। राहु काल टालें। महत्वपूर्ण कार्य: ज्योतिषी अनिवार्य। ऑनलाइन:।

मुहूर्तशुभ मुहूर्तविधि
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विवाह का शुभ मुहूर्त कैसे निकालें

शुभ तिथि+नक्षत्र+वार+लग्न+गुण मिलान+मांगलिक जांच। शुभ मास: माघ/फाल्गुन/वैशाख/ज्येष्ठ। अक्षय तृतीया=सबसे शुभ (बिना मुहूर्त)। ज्योतिषी अनिवार्य — विवाह=सबसे जटिल मुहूर्त।

मुहूर्तविवाहमुहूर्त
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रत्न कैसे काम करते हैं ज्योतिषीय रूप से

ज्योतिष: रत्न ग्रह तरंगें absorb+amplify → कमजोर ग्रह बल बढ़ाता। 9 ग्रह=9 रत्न (नवरत्न)। त्वचा स्पर्श आवश्यक। वैज्ञानिक प्रमाण अभाव — विश्वास/परंपरा। ज्योतिषी से कुंडली अनिवार्य।

रत्नरत्नज्योतिष
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महिलाओं के लिए कौन सा रत्न शुभ

कुंडली अनुसार (लिंग नहीं)। सामान्य प्रचलित: मोती (शांति/सौंदर्य), हीरा (प्रेम), पन्ना (बुद्धि)। बिना कुंडली न पहनें। Universal 'महिला रत्न' नहीं। मोती सबसे सस्ता/सुलभ।

रत्नमहिलारत्न
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राहु काल क्या है इसमें कौन से काम न करें

प्रतिदिन ~1.5 घंटे अशुभ (राहु प्रभावित)। सोम=7:30-9AM; बुध=12-1:30PM; शनि=9-10:30AM (स्थान अनुसार भिन्न)। नया कार्य/यात्रा/खरीदारी वर्जित। दैनिक कार्य = सामान्य। ज्योतिष मान्यता।

मुहूर्तराहु कालअशुभ
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हीरा रत्न पहनने के लाभ नुकसान

हीरा = शुक्र। लाभ: सौंदर्य, धन, दांपत्य, कला। नुकसान: सूर्य/चंद्र शत्रुता, अति भौतिकता। अनामिका, सोना, शुक्रवार। सबसे शक्तिशाली — बिना ज्योतिषी बिल्कुल न पहनें।

रत्नहीराशुक्र
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अमृत सिद्धि योग कब होता है इसमें क्या करें

वार+नक्षत्र संयोग (रवि+हस्त, सोम+मृगशिरा, गुरु+पुष्य आदि)। नया व्यापार, खरीदारी, गृह प्रवेश, पूजा — कोई भी शुभ कार्य। 'अमृत जैसा फल।' पंचांग/ऐप में देखें।

मुहूर्तअमृत सिद्धियोग
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अभिजित मुहूर्त क्या है और कब होता है

दिन का 8वां मुहूर्त; ~48 min; दोपहर ~11:36-12:24 (स्थान अनुसार)। दोष नाशक, राम-कृष्ण जन्म मुहूर्त। प्रतिदिन (बुधवार छोड़कर)। दक्षिण यात्रा वर्जित। सबसे सरल — पंचांग न हो तो ~12 बजे शुभ कार्य।

मुहूर्तअभिजितमुहूर्त
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रत्न को शुद्ध कैसे करें पहनने से पहले

कच्चा दूध/गंगाजल/पंचामृत 24 घंटे → शुद्ध जल → ग्रह मंत्र 108 बार → धूप → शुभ दिन पहनें। कुछ रत्न (मोती/मूंगा) भिगोने से सावधान। ज्योतिषी से मार्गदर्शन।

रत्नरत्नशुद्धि
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माणिक रत्न पहनने के लाभ नुकसान

माणिक = सूर्य। लाभ: नेतृत्व, आत्मविश्वास, स्वास्थ्य, पिता, सरकारी कार्य। नुकसान (गलत): क्रोध, अहंकार, शत्रु ग्रह बढ़े। अनामिका, सोना, रविवार। ज्योतिषी परामर्श अनिवार्य।

रत्नमाणिकसूर्य
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पन्ना रत्न किसे पहनना चाहिए और कैसे

पन्ना = बुध। मिथुन/कन्या, व्यापारी, विद्यार्थी, लेखक। कनिष्ठा उंगली (दाहिना), सोना/पंचधातु, बुधवार, 'ॐ बुं बुधाय नमः' 108 बार। ज्योतिषी से कुंडली दिखाकर ही — बिना परामर्श न पहनें।

रत्नपन्नाबुध
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मोती रत्न किसे पहनना चाहिए किस उंगली में

मोती = चंद्रमा। कर्क राशि, मानसिक शांति, माता संबंध, सौंदर्य। कनिष्ठा (दाहिना), चांदी, सोमवार, 'ॐ सों सोमाय नमः' 108 बार। ज्योतिषी परामर्श अनिवार्य — राहु/केतु प्रबल हो तो हानिकारक।

रत्नमोतीचंद्र
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अमृत सिद्धि योग में पूजा का क्या विधान है

अमृत सिद्धि योग: विशिष्ट वार + नक्षत्र (जैसे गुरुवार+पुष्य, शनिवार+रोहिणी)। कर्म = अमृत (शाश्वत) फल। मंत्र सिद्धि, औषधि आरम्भ, दीक्षा, गृह प्रवेश सर्वोत्तम। दान = अक्षय। सर्वार्थ सिद्धि से भिन्न — वह 'सिद्धि', यह 'अमृत (शाश्वत) फल'।

मुहूर्त एवं योगअमृत सिद्धियोग
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सर्वार्थ सिद्धि योग में पूजा करने से क्या लाभ मिलता है

सर्वार्थ सिद्धि योग: विशिष्ट वार + नक्षत्र संयोग = सभी कार्य सिद्ध। पूजा = कई गुना फल, मंत्र सिद्धि, मनोकामना पूर्ति। गृह प्रवेश, विवाह, व्यापार, खरीद — सभी शुभ। अन्य दोषों को भी क्षीण करता है। पंचांग में तिथि देखें।

मुहूर्त एवं योगसर्वार्थ सिद्धियोग
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गुरु पुष्य योग में खरीदारी और पूजा का क्या महत्व है

गुरु पुष्य = गुरुवार + पुष्य नक्षत्र। धन-समृद्धि का सर्वोत्तम मुहूर्त। स्वर्ण/रत्न/सम्पत्ति/वाहन खरीद = अक्षय। बृहस्पति + विष्णु/लक्ष्मी पूजा। पीले वस्त्र-फूल। विवाह वर्जित (पुष्य में), अन्य सभी शुभ। रवि पुष्य से अधिक बार आता है।

मुहूर्त एवं योगगुरु पुष्यनक्षत्र
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रवि पुष्य नक्षत्र योग में पूजा का क्या विशेष महत्व है

रवि पुष्य = रविवार + पुष्य नक्षत्र (सर्वश्रेष्ठ)। अत्यन्त दुर्लभ, स्वयंसिद्ध शुभ। पूजा = अनन्त फल। स्वर्ण/रत्न खरीद, व्यापार आरम्भ, मंत्र दीक्षा, गृह प्रवेश। लक्ष्मी-सूर्य पूजा विशेष। वर्ष में कुछ बार ही।

मुहूर्त एवं योगरवि पुष्यनक्षत्र
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शुक्र ग्रह शांति पूजा कैसे करें

शुक्र शान्ति: (1) बीज मंत्र जप (16,000) + हवन (श्वेत चन्दन, तिल)। (2) लक्ष्मी पूजा/श्री सूक्त — अधिदेवता। (3) शुक्रवार व्रत। उपाय: श्वेत वस्तुएँ दान, गाय सेवा, स्त्री सम्मान। रत्न: हीरा/ओपल। शुक्र = सौन्दर्य, विवाह, ऐश्वर्य कारक।

ग्रह शांतिशुक्रग्रह दोष
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केतु दोष शांति के लिए कौन सी पूजा करवाएं

केतु शान्ति: (1) केतु बीज मंत्र जप (17,000) + हवन। (2) गणेश पूजा — केतु के देवता। (3) महामृत्युंजय जप। (4) नवग्रह शान्ति। (5) नागबलि पूजा (त्र्यम्बकेश्वर)। उपाय: कुत्ते की सेवा, दूर्वा दान। रत्न: लहसुनिया। ज्योतिषी से कुण्डली दिखाकर करवाएँ।

ग्रह शांतिकेतुग्रह दोष
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बुध ग्रह शांति के लिए कौन सी पूजा करवाएं

बुध शान्ति: (1) बुध बीज मंत्र जप (9,000/17,000) + हवन (अपामार्ग)। (2) विष्णु सहस्रनाम — बुध के अधिदेवता। (3) नवग्रह पूजा। (4) बुधवार व्रत। उपाय: हरे मूंग/वस्त्र दान, बच्चों को भोजन। रत्न: पन्ना (Emerald)। बुध शुभ-अशुभ दोनों — कुण्डली देखकर करें।

ग्रह शांतिबुधग्रह दोष
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चंद्र ग्रह शांति के लिए कौन सा उपाय करें?

चन्द्र शांति: शिव पूजन-अभिषेक (सर्वश्रेष्ठ) → 'ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः' 11000 जप → पलाश समिधा-दूध-चावल हवन → सोमवार व्रत → दान (चावल, दूध, चाँदी, मोती) → माता सेवा (सबसे प्रभावी व्यावहारिक उपाय)।

ग्रह दोष शांतिचंद्र ग्रहचंद्र शांति
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सूर्य ग्रह शांति पूजा कैसे करवाएं?

सूर्य शांति: प्रतिदिन ताम्बे से सूर्य अर्घ्य (सबसे सरल) → 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' 7000 जप → मदार समिधा से हवन → आदित्य हृदय स्तोत्र (सर्वश्रेष्ठ) → दान (गेहूँ, गुड़, ताँबा) → रविवार व्रत → सूर्य नमस्कार।

ग्रह दोष शांतिसूर्य ग्रहसूर्य शांति
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मंगल ग्रह शांति के लिए कौन सी पूजा उत्तम है?

मंगल शांति उत्तम पूजा: हनुमान पूजा (सर्वश्रेष्ठ) + मंगल शांति हवन (खैर समिधा, 10000 जप) + उज्जैन मंगलनाथ भात पूजा (मांगलिक हेतु) + मंगलवार व्रत + दान (लाल मसूर, गुड़, ताँबा)। हनुमान चालीसा सबसे सरल उपाय।

ग्रह दोष शांतिमंगल ग्रहमंगल शांति
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गुरु ग्रह शांति पूजा कैसे करें?

गुरु शांति: गुरुवार → 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' 19000 जप → पीपल समिधा + पीले तिल-चना हवन → विष्णु सहस्रनाम → दान (पीला वस्त्र, चना, हल्दी, केसर, पुखराज) → गुरुवार व्रत → पीपल पूजा।

ग्रह दोष शांतिगुरु ग्रहबृहस्पति
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राहु दोष निवारण पूजा कैसे करवाएं?

राहु शांति: 'ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः' 18000 जप → दूर्वा समिधा से हवन → नाग पूजा → दान (काला वस्त्र, सरसों, उड़द, नारियल) → दुर्गा सप्तशती पाठ → राहुकाल में नारियल जल-प्रवाह। सर्प दोष हेतु नागबलि।

ग्रह दोष शांतिराहु दोषराहु शांति
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मांगलिक दोष शांति पूजा कैसे करें?

मांगलिक दोष शांति: ज्योतिषीय पुष्टि → मंगलवार → मंगल यंत्र स्थापना → 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' 10000 जप → खैर समिधा से हवन → कुंभ विवाह (विशेष) → हनुमान पूजा → लाल वस्तु दान। उज्जैन मंगलनाथ भात पूजा सर्वश्रेष्ठ।

ग्रह दोष शांतिमांगलिक दोषमंगल दोष
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गुरु बृहस्पति गायत्री मंत्र का जप कैसे करें?

'ॐ वृषभध्वजाय विद्महे...तन्नो गुरुः प्रचोदयात्'। बीज: 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' 19,000। गुरुवार, पीले वस्त्र, पुखराज/तुलसी। गुरु = ज्ञान/धर्म/विवाह/भाग्य। + विष्णु पूजा।

ग्रह मंत्रगुरुबृहस्पति
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ज्योतिष उपाय — प्रश्नोत्तर

ज्योतिष उपाय से सम्बन्धित 218+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। सनातन धर्म के विद्वानों द्वारा दिए गए इन उत्तरों में वेद, पुराण, उपनिषद और शास्त्रों के प्रमाण दिए गए हैं। यदि आप ज्योतिष उपाय के बारे में कोई भी प्रश्न खोज रहे हैं — चाहे विधि हो, नियम हो, सामग्री हो या लाभ — तो यहाँ आपको शास्त्रसम्मत उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर में स्रोत, विधि और व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया है।

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