विस्तृत उत्तर
काव्या माता का वध धर्म था या अधर्म, इसका उत्तर सरल नहीं है। काव्या माता ने शरणागत धर्म निभाया, इसलिए उनका पक्ष भी धर्मपूर्ण था। वे असुरों को अपने आश्रम में संरक्षण दे रही थीं। दूसरी ओर, देवताओं की दृष्टि में वही असुर ब्रह्मांडीय व्यवस्था के लिए खतरा थे और काव्या माता का तपोबल इंद्र के प्राणों पर संकट बन चुका था। विष्णु ने लोक-व्यवस्था की रक्षा के लिए वध किया, पर भृगु ऋषि ने इसे पत्नी और अवध्य स्त्री का वध माना। इसलिए यह कथा धर्म की सूक्ष्मता बताती है, जहाँ दोनों पक्षों में सत्य का अंश है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





