विस्तृत उत्तर
रजोगुण सृजन और कर्म की ऊर्जा है। जब काल-शक्ति से सृष्टि-बीज रजोगुण द्वारा क्षुब्ध होता है, तब वह बाहर प्रकट होने लगता है।
रजोगुण से सृष्टि कैसे शुरू होती है को संदर्भ सहित समझें
रजोगुण से सृष्टि कैसे शुरू होती है का सबसे सीधा सार यह है: रजोगुण सृजन की गति देकर सृष्टि-बीज को जाग्रत करता है।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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एकार्णव क्या है?
एकार्णव नैमित्तिक प्रलय में त्रैलोक्य के भस्म होने के बाद होने वाली विनाशकारी वर्षा से बना वह विशाल महासागर है जो समस्त त्रैलोक्य को डुबो देता है।
शिशुमार चक्र क्या है?
शिशुमार चक्र भगवान वासुदेव का विराट ब्रह्मांडीय स्वरूप है जिसमें समस्त ग्रह, नक्षत्र और तारे विभिन्न अंगों में स्थित हैं। इसकी धुरी ध्रुवलोक है।
पिण्ड-ब्रह्माण्ड सिद्धांत क्या है?
पिण्ड-ब्रह्माण्ड सिद्धांत कहता है — जो ब्रह्माण्ड में है वही मानव शरीर में भी है। देवता, लोक और नक्षत्र सभी शरीर के विभिन्न अंगों में सूक्ष्म रूप में विद्यमान हैं।
महर्लोक क्या है?
महर्लोक 14 लोकों में चौथा ऊर्ध्व लोक है जो स्वर्लोक के ऊपर और जनलोक के नीचे है। यह विशुद्ध आध्यात्मिक और तपोमयी ऊर्जा का लोक है।
स्वर्लोक कहाँ स्थित है?
स्वर्लोक सूर्यमंडल से लेकर ध्रुवलोक तक का विशाल ब्रह्मांडीय क्षेत्र है। यह भूलोक के ऊपर और महर्लोक के नीचे स्थित है।
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