📖
विस्तृत उत्तर
शिशुपाल की मृत्यु के समय उसके शरीर से निकली ज्योति भगवान कृष्ण में समाती दिखाई दी। इसका कारण यह था कि वह कोई सामान्य शत्रु नहीं, बल्कि वैकुण्ठ द्वारपाल जय का तीसरा श्रापित जन्म था। उसने जीवन भर कृष्ण से द्वेष किया, लेकिन उसी द्वेष के कारण उसका मन लगातार कृष्ण में लगा रहा। इसे वैर-भाव से स्मरण कहा जाता है। बाहरी रूप से वह शत्रु था, पर मृत्यु के बाद उसका श्राप समाप्त हुआ और वह भगवान के धाम लौटने योग्य हो गया।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?

