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विस्तृत उत्तर
शिशुपाल को मुक्ति भगवान कृष्ण के हाथों वध होने से मिली। वह जीवन भर कृष्ण से द्वेष रखता था, लेकिन उस द्वेष के कारण उसका ध्यान लगातार कृष्ण पर ही लगा रहता था। जय-विजय कथा के अनुसार वह जय का तीसरा और अंतिम श्रापित जन्म था। राजसूय सभा में सीमा पार करने के बाद कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर काटा। मृत्यु के समय उसकी ज्योति कृष्ण में समाती दिखाई दी, जो उसके श्राप-मुक्त होकर भगवान के धाम लौटने का संकेत है।
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