विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत में परीक्षित ने यही प्रश्न शुकदेव जी से पूछा था कि शिव स्वयं वैरागी हैं, फिर उनके भक्त अक्सर धनवान क्यों होते हैं। शुकदेव जी ने समझाया कि शिव प्रकृति के तीन गुणों और अहंकार के अधिष्ठाता रूप में कार्य करते हैं। सकाम भक्त जब शिव जी की आराधना करता है, तो वे शीघ्र प्रसन्न होकर उसे भौतिक ऐश्वर्य, शक्ति या इच्छित वरदान दे सकते हैं। इसलिए कई शिव भक्त भौतिक रूप से शक्तिशाली दिखाई देते हैं। पर यह धन हमेशा मोक्ष का चिन्ह नहीं होता। वृकासुर की कथा दिखाती है कि वरदान यदि विवेकहीन हो, तो भक्त और संसार दोनों के लिए संकट बन सकता है।
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