विस्तृत उत्तर
एकादशी व्रती व्यक्ति श्राद्ध भोजन को खाए बिना केवल सूँघता है। इसके बाद भोजन जल में प्रवाहित या गाय को दिया जाता है।
श्राद्ध भोजन सूंघने का नियम क्या है को संदर्भ सहित समझें
श्राद्ध भोजन सूंघने का नियम क्या है का सबसे सीधा सार यह है: व्रती प्रसाद खाए नहीं, केवल सूँघे।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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बरगद पेड़ की पूजा — वट सावित्री व्रत में?
वट सावित्री=ज्येष्ठ अमावस्या(पति दीर्घायु)। बरगद पर जल+दूध+रोली→मौली बांधें→7 परिक्रमा→कथा सुनें→व्रत। सावित्री ने यमराज से पति प्राण वापस लिए। बरगद=अमरत्व।
एकादशी को कौन से काम न करें?
एकादशी=विष्णु व्रत। न करें: अन्न(चावल विशेष), मांस, दिन सोना, क्रोध, झूठ। करें: विष्णु पूजा, गीता, व्रत, जप, दान। उपवास+भक्ति दिन।
शिव व्रत रखकर यदि टूट जाए तो प्रायश्चित्त क्या है?
क्षमा प्रार्थना + क्षमापन स्तोत्र। अगले सोमवार/शिवरात्रि पर व्रत। रुद्राभिषेक, 108 महामृत्युंजय, गरीबों को भोजन दान। व्रत भंग = पाप नहीं — शिव दंडित नहीं करते, भक्ति जारी रखें।
पूर्णिमा को कौन से काम शुभ?
पूर्णिमा=पूर्ण चंद्र। शुभ: सत्यनारायण, व्रत, दान, पूजा, गंगा स्नान, तीर्थ। गृहप्रवेश/विवाह कुछ में वर्जित। भक्ति+दान+साधना दिन।
मंत्र जप में एकादशी का क्या विशेष महत्व है?
विष्णु तिथि — विष्णु/कृष्ण जप सर्वोत्तम। उपवास+जप = द्विगुणित। सात्विक ऊर्जा। निर्जला = सबसे शक्तिशाली। 11 = एकादश रुद्र/सिद्धि।
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