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विस्तृत उत्तर
तलातल जन्म-मरण के चक्र से जुड़ा है क्योंकि यह मोक्ष का स्थान नहीं है। यहाँ जीव अपने पुण्य कर्मों के फल से भोग-सुख प्राप्त करता है, लेकिन जब पुण्य समाप्त हो जाते हैं तो उसे पुनः भूर्लोक पर जन्म लेना पड़ता है। तलातल की माया, विलासिता और इंद्रियतृप्ति जीव को ईश्वर से दूर करती है और वह जन्म-मरण के चक्र यानी संसार में फँसा रहता है। इसलिए तलातल भोग का लोक है, मुक्ति का नहीं।
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