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विस्तृत उत्तर
त्रिपुर दहन में भगवान विष्णु की महत्वपूर्ण भूमिका थी। शिव के दिव्य रथ में स्वयं भगवान विष्णु अचूक बाण, यानी पाशुपतास्त्र, के रूप में अवस्थित हुए। युद्ध के दौरान मय दानव ने अमृत-कुण्ड बनाया था, जिसमें गिरने वाले मृत दानव तुरंत जीवित और पहले से अधिक शक्तिशाली हो जाते थे। इस माया को नष्ट करने के लिए भगवान विष्णु ने गौ का रूप धारण किया और ब्रह्मा जी ने बछड़े का रूप लिया। दोनों ने उस कुण्ड का सारा अमृत पी लिया, जिससे असुरों की जीवन शक्ति क्षीण हो गई।
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