तुलनात्मक अध्ययनभगवान शिव के गण 'महोदर' और श्री गणेश के 'महोदर' अवतार (मोहासुर वध) में क्या तात्त्विक समानता है?दोनों स्वरूपों में 'विशाल उदर' ब्रह्मांडीय भ्रम, अज्ञान और लोभ को निगलने का प्रतीक है। जैसे गणेश जी के महोदर अवतार ने 'मोहासुर' का वध किया, वैसे ही शिव गण महोदर की ऊर्जा साधक के भीतर के मोह और लोभ को भस्म करती है।#महोदर अवतार#मोहासुर वध#भगवान गणेश
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव पर अभिषेक के बाद ताली क्यों बजाते हैं?अभिषेक के बाद ताली का नाद ध्यानमग्न शिव का ध्यान आकृष्ट करता है। शंकुकर्ण नाम ही ब्रह्मांडीय नाद की सूक्ष्म आवृत्तियां ग्रहण करने से जुड़ा है — इसलिए यहां ताली का नाद विशेष प्रभावी और मंत्रों को बहुगुणित करने वाला।#शंकुकर्णेश्वर#ताली#अभिषेक
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव की आराधना से क्या-क्या फल प्राप्त होते हैं?फल — (1) असाध्य रोगमुक्ति और अकाल मृत्यु से रक्षा, (2) अष्टमेश-मारकेश ग्रह दशा शांति, (3) पितृ दोष-शाप निवारण, (4) संतान-रोजगार (40 सोमवार), (5) कैवल्य मोक्ष — शिव स्वयं तारक मंत्र देते हैं।#शंकुकर्णेश्वर#फलश्रुति#अकाल मृत्यु
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव के सान्निध्य में घट दान का क्या विधान है?महर्षि व्यास के अनुसार वैशाख पूर्णिमा पर जल-भरा घड़ा ब्राह्मण को दान = गया में 100 बार श्राद्ध का पुण्य। जल-भरा घट प्राणों की पूर्णता का प्रतीक — पितृ-तृप्ति और प्राण-रक्षा दोनों।#घट दान#शंकुकर्णेश्वर#वैशाख पूर्णिमा
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव के समीप कौन-कौन से मंदिर और देवस्थान हैं?समीपस्थ — वायव्य में मांडव्येश्वर, उत्तर में सिद्धेश्वर (प्राचीन कुंड पर), निकट द्वारेश्वर-द्वारेश्वरी (सदाशिव-पार्वती), उत्तर में मुख-शिवलिंग व छागलेश्वर, पश्चिम में कपर्दीश्वर व अंगारेश्वर (तड़ाग सहित)।#शंकुकर्णेश्वर#मांडव्येश्वर#सिद्धेश्वर
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव के सान्निध्य में महामृत्युंजय अनुष्ठान का विशेष महत्व क्या है?तीन शक्तियां — काशी क्षेत्र (करोड़ों गुना फल), शिवगण-ऊर्जान्वित लिंग, और प्राण-दिशा (वायव्य कोण)। गुप्त नाद-ऊर्जा मंत्रों को बहुगुणित करती है। अष्टमेश-मारकेश दशा के अरिष्ट योग खंडित होते हैं।#शंकुकर्णेश्वर#महामृत्युंजय#अनुष्ठान
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव को 'गुप्त शिवलिंग' क्यों कहते हैं?दो कारण — (1) ऐतिहासिक: ऐबक, लोदी, औरंगजेब के आक्रमणों से बचाने के लिए छिपाया गया, (2) दार्शनिक: शिव का वास साधक के सूक्ष्म शरीर (लिंग देह) में गुप्त रूप से है — गुप्त शिवलिंग इसी सत्य का प्रतीक।#गुप्त शिवलिंग#शंकुकर्णेश्वर#काशी
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव वायव्य कोण में क्यों स्थित हैं — इसका आध्यात्मिक कारण क्या है?वायव्य कोण के अधिपति वायु देव हैं — वायु प्राण का प्रतीक। प्राण-दिशा में स्थापित होने से यह शिवलिंग प्राणों की रक्षा, आयु-वृद्धि, असाध्य रोग नाश और अकाल मृत्यु रोकने में अमोघ है।#शंकुकर्णेश्वर#वायव्य कोण#वायु
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव मंदिर काशी में कहाँ स्थित है?काशी विश्वनाथ (विश्वेश्वर) के वायव्य कोण (उत्तर-पश्चिम दिशा) में स्थित हैं।#शंकुकर्णेश्वर#काशी#वायव्य कोण
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव कौन हैं और इनकी स्थापना किसने की?शंकुकर्णेश्वर महादेव काशी का गुप्त शिवलिंग है, जिसे शिवगण 'शंकुकर्ण' ने स्थापित किया। काशी खंड अध्याय 69 में इसे काशी के 68 मोक्षदायी शिवलिंगों में गिना गया है।#शंकुकर्णेश्वर महादेव#काशी#शिवगण
हिंदू पूजा पद्धतिघनकर्णेश्वर महादेव की पूजा विधि और अभिषेक कैसे करें?पहले घंटाकर्ण हृद में स्नान — फिर ध्यान, आवाहन, पाद्य-अर्घ्य, गोदुग्ध अभिषेक (रुद्र सूक्त सहित), भस्म-बिल्वपत्र, महा-आरती। विशेष — मौन और नाद-श्रवण पर बल, अधिक बोलना वर्जित।#घनकर्णेश्वर#पूजा विधि#अभिषेक
वैदिक दर्शननाद ब्रह्म क्या है — शिव और ध्वनि का संबंधनाद-ब्रह्म — ध्वनि के रूप में ईश्वर की अनुभूति। शिव नाद के अधिपति हैं, उनके डमरू से १४ माहेश्वर सूत्र उत्पन्न हुए। ॐ इसी नाद का तारक मंत्र है। घनकर्णेश्वर 'घन' नाद के अधिष्ठाता हैं।#नाद ब्रह्म#शिव#ॐ
पौराणिक कथाएँराजा दिवोदास के कारण शिव ने काशी क्यों छोड़ी थी?दिवोदास के राजकाल में शिव मंदराचल गए। काशी की स्थिति जानने को योगिनियाँ, सूर्य, ब्रह्मा भेजे — सब काशी की माया में मुग्ध होकर लौटे नहीं। फिर घंटाकर्ण-महोदर को भेजा — वे भी मोहित होकर रुक गए और शिवलिंग स्थापित कर दिए।#दिवोदास#काशी#शिव
काशी के शिवलिंगघंटाकर्णेश्वर महादेव के दर्शन से मानसिक रोग दूर होते हैं — क्या यह सच है?प्रत्यक्ष श्लोक-प्रमाण नहीं है। पर घंटाकर्ण स्वयं पिशाच से शिवगण बने — इसलिए आगमिक मान्यता है कि इनकी आराधना से पिशाच-वृत्ति (मानसिक विकार) दूर होती है। नाद-योग और ध्वनि-चिकित्सा का वैज्ञानिक आधार भी इसे समर्थन देता है।#घंटाकर्णेश्वर#मानसिक रोग#पिशाच बाधा
काशी के शिवलिंगघंटाकर्णेश्वर महादेव मंदिर कहाँ है — काशी में सटीक स्थानवाराणसी के कर्णघंटा मोहल्ले (K 60/66) में — चौक और मैदागिन के बीच। समीप ही घंटाकर्ण हृद (कर्णघंटा तालाब — K 60/67) और व्यासेश्वर महादेव का मंदिर भी है।#घंटाकर्णेश्वर महादेव#काशी#वाराणसी
पौराणिक कथाएँघंटाकर्ण को मोक्ष कैसे मिला — श्रीकृष्ण और शिव की कथाशिव ने कहा मोक्ष केवल विष्णु दे सकते हैं। बदरिकाश्रम में श्रीकृष्ण ने घंटाकर्ण को गले लगाया — स्पर्श मात्र से पिशाच योनि छूटी, अठारह भुजाओं वाला शिवगण बना। आज भी बद्रीनाथ (माणा) में रक्षक देवता के रूप में पूजित।#घंटाकर्ण#मोक्ष#श्रीकृष्ण
पंचांग एवं ज्योतिषशिव योग क्या होता है?शिव योग 27 नित्ययोगों में 20वाँ, अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक दृष्टि से सर्वोत्तम। 'मंगलकारी-कल्याणकारी'। सूर्य-चंद्र योगफल 253°20'–266°40'। स्वामी भगवान शिव। धार्मिक कार्य, साधना, तीर्थयात्रा के लिए सर्वोत्तम। जन्म में धर्मपरायण, पवित्र हृदय, संन्यास-प्रवण।#शिव योग#27 नित्ययोग#पंचांग
पौराणिक कथाएँकामदेव को शिव ने क्यों भस्म किया?देवों के आग्रह पर कामदेव ने तारकासुर वध के लिए शिव की तपस्या भंग करने हेतु पुष्प बाण चलाया। क्रोधित शिव ने तीसरा नेत्र खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया। तभी से वे 'अनंग' (शरीर रहित) कहलाए।#कामदेव#शिव#भस्म
तीर्थ एवं धामकाशी में मरने पर मोक्ष क्यों मिलता है?काशी में शिव स्वयं मरने वाले के कान में तारक मंत्र देते हैं जिससे पापी भी मोक्ष पाता है। काशी शिव का अविमुक्त क्षेत्र है जिसे वे कभी नहीं छोड़ते। मणिकर्णिका घाट पर दाह-संस्कार से आत्मा सीधे मोक्ष पाती है।#काशी#मोक्ष#तारक मंत्र
व्रत एवं त्योहारश्रावण मास में क्या खाना वर्जित है?श्रावण में मांसाहार, हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, मेथी, गोभी), प्याज-लहसुन, बैंगन, कच्चा दूध-दही, कढ़ी और नशीले पदार्थ वर्जित हैं। शास्त्र और वैज्ञानिक दोनों आधार पर सात्विक भोजन का पालन करना इस मास का विशेष नियम है।#श्रावण#सावन#वर्जित भोजन
देवी-देवता पूजनकेतकी का फूल शिव पूजा में क्यों नहीं चढ़ाते?शिव पुराण के अनुसार केतकी के फूल ने ब्रह्माजी के पक्ष में झूठी गवाही दी थी। इसलिए भगवान शिव ने उसे श्राप दिया कि वह कभी उनकी पूजा में स्वीकार नहीं होगा। तभी से केतकी शिव पूजा में वर्जित है।#केतकी#शिव पूजा#शिव पुराण
शिवक्या घर में शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना शुभ होता हैघर में शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना पूरी तरह शुभ है। यह नकारात्मकता दूर कर साहस और समृद्धि प्रदान करता है।#शिव तांडव#स्तोत्र#नियम
शिवशीघ्र विवाह के लिए भगवान शिव का कौन सा मंत्र जपना चाहिएविवाह हेतु 'ॐ साम्ब सदाशिवाय नमः' मंत्र और सोमवार के दिन शिव-पार्वती की विधिवत पूजा फलदायी होती है।#विवाह#शिव मंत्र#पार्वती
सनातन संप्रदायलिंगायत संप्रदाय में शिव पूजा कैसे होती हैलिंगायत प्रत्येक व्यक्ति गले में इष्टलिंग धारण करते हैं और प्रतिदिन उसकी अंग-पूजन करते हैं। मंदिर की आवश्यकता नहीं — स्वयं का शरीर ही शिव-मंदिर है।#लिंगायत#वीरशैव#शिव पूजा
देवी-देवता एवं उपासनाशिव के 1008 नामों में सबसे प्रमुख कौन से हैंशिव के 1008 नामों में सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं — महादेव, शम्भु, शंकर, नीलकंठ, त्र्यम्बक, पशुपति, महाकाल, विश्वनाथ, नटराज और गिरीश। 'ॐ नमः शिवाय' इन सभी नामों का सार है।#शिव सहस्रनाम#शिव के नाम#महादेव
महिला एवं धर्मगर्भवती स्त्री शिव मंत्र जपे या नहींहाँ — शुभ। 'ॐ नमः शिवाय' (शांति), महामृत्युंजय (सुरक्षित प्रसव), गायत्री, गीता। गर्भ संस्कार=शिशु लाभ। उग्र मंत्र टालें। शांति+सात्विक=सर्वोपरि।#गर्भवती#शिव#मंत्र
महिला एवं धर्ममहिलाएं शिव मंत्र जप कर सकती हैं क्याहाँ। शिव=अर्धनारीश्वर; पार्वती=सबसे बड़ी भक्त। 'ॐ नमः शिवाय', महामृत्युंजय, शिव चालीसा — सब अनुमत। सोमवार व्रत महिलाओं में लोकप्रिय। शास्त्रीय वर्जना नहीं।#महिला#शिव#मंत्र
तीर्थ यात्रापंच केदार मंदिर कहाँ कहाँउत्तराखंड 5 शिव मंदिर: केदारनाथ (पीठ), मध्यमहेश्वर (नाभि), तुंगनाथ (भुजा — विश्व सबसे ऊंचा), रुद्रनाथ (मुख), कल्पेश्वर (जटा — वर्षभर)। 12-15 दिन। मई-नवंबर।#पंच केदार#शिव#उत्तराखंड
स्तोत्र एवं पाठशिव चालीसा और शिव तांडव में कौन ज्यादा प्रभावीचालीसा=सौम्य/सरल/सभी के लिए। तांडव=उग्र/शक्तिशाली/संस्कृत (कठिन)। शांति=चालीसा; शक्ति/शनि=तांडव। सामान्य=चालीसा। सरलतम='ॐ नमः शिवाय' 108।#शिव चालीसा#शिव तांडव#तुलना
स्तोत्र एवं पाठशिव तांडव स्तोत्र पढ़ने से क्या होता हैरावण रचित; शिव नटराज स्तुति। शक्ति, शत्रु नाश, शनि शमन, ऊर्जा। उग्र — सही उच्चारण आवश्यक। सोमवार/शिवरात्रि। ~10-12 min।#शिव तांडव#रावण#शक्ति
स्तोत्र एवं पाठरुद्र सूक्त पाठ से क्या लाभयजुर्वेद; शिव सर्वोच्च वैदिक स्तुति। पाप नाश, रोग, शत्रु, समृद्धि (चमकम), मोक्ष। रुद्राभिषेक=सर्वोत्तम। शुद्ध उच्चारण अनिवार्य — पंडित से।#रुद्र सूक्त#शिव#यजुर्वेद
स्तोत्र एवं पाठशिव महिम्न स्तोत्र पाठ से क्या फलपुष्पदंत गंधर्व रचित; 43 श्लोक। शिव कृपा, पाप नाश, भक्ति, ज्ञान, भय निवारण, मोक्ष। सोमवार/शिवरात्रि। ~20-25 min।#शिव महिम्न#स्तोत्र#पुष्पदंत
स्तोत्र एवं पाठशिव कवच पढ़ने से क्या लाभशिव रक्षा कवच। शिव कृपा, भय/शत्रु/रोग/मृत्यु भय/ग्रह दोष निवारण। सोमवार/शिवरात्रि। ~8-10 min। नारायण+देवी+शिव=त्रिदेव कवच।#शिव कवच#शिव#रक्षा
रुद्राक्षचौदह मुखी रुद्राक्ष शिव का तीसरा नेत्र क्यों14 मुखी = शिव तीसरा नेत्र (शिव पुराण: शिव नेत्रों से उत्पन्न)। आज्ञा चक्र सक्रिय, अंतर्दृष्टि, भविष्य दृष्टि। सर्वोच्च आध्यात्मिक। दुर्लभ (₹10,000-₹2,00,000+)। माथे पर धारण।#चौदह मुखी#रुद्राक्ष#तीसरा नेत्र
दैनिक आचारसोमवार को कौन सा रंग पहनना शुभ हैसोमवार = सफेद/क्रीम/हल्का नीला (चंद्रमा/शिव)। सप्ताह: सोम-सफेद, मंगल-लाल, बुध-हरा, गुरु-पीला, शुक्र-सफेद/गुलाबी, शनि-काला/नीला, रवि-लाल/केसरिया। ज्योतिष परंपरा — वैदिक में नहीं।#सोमवार#रंग#चंद्रमा
मंत्रमहामृत्युंजय मंत्र का शब्दशः अर्थ क्या हैऋग्वेद 7.59.12: 'हम तीन नेत्रधारी (शिव), सुगंधित, पोषक की पूजा करते हैं। जैसे पका फल डंठल से स्वतः मुक्त हो, वैसे हमें मृत्यु से मुक्त करें, अमृत (मोक्ष) दें।' प्रतीक: मृत्यु = प्राकृतिक, कष्टरहित (पके फल जैसी)। दीर्घायु और मोक्ष का सर्वशक्तिमान मंत्र।#महामृत्युंजय#शिव#मंत्र
पौराणिक कथारावण शिव भक्त था फिर पापी कैसे कहलायारावण शिवभक्त, वेदज्ञ, महाशक्तिशाली — पर पापी कहलाया क्योंकि: अहंकार, सीता हरण (परस्त्री अपहरण), ऋषियों पर अत्याचार, शक्ति का दुरुपयोग। शिक्षा: भक्ति + अहंकार = विनाश। ज्ञान बिना सदाचार = व्यर्थ। भक्ति ≠ अधर्म की अनुमति।#रावण#शिव भक्त#पाप
पौराणिक कथाशिव ने गंगा जटाओं में क्यों धारण किया कथासगर पुत्रों (60,000) की मुक्ति हेतु भगीरथ ने तपस्या से गंगा को स्वर्ग से बुलाया। गंगा का प्रचंड वेग पृथ्वी नष्ट कर देता, अतः शिव ने जटाओं में धारण कर वेग नियंत्रित किया। आध्यात्मिक: गंगा=ज्ञान, शिव=गुरु — बिना गुरु ज्ञान नियंत्रित नहीं।#शिव#गंगा#भगीरथ
व्रत विधिश्रावण मास में मांसाहार का त्याग क्यों करते हैं?श्रावण मांस त्याग: शिव मास (सात्त्विक), वर्षा=प्रजनन काल (जैवविविधता), आयुर्वेद (अग्नि मंद, गरिष्ठ=रोग), कीटाणु वृद्धि, साधना काल=शुद्ध आहार। चातुर्मास=4 माह त्याग।#श्रावण#मांसाहार#त्याग
त्योहार पूजादशहरा पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन शुभ क्यों माने जाते हैं?दशहरा नीलकंठ: शिव दूत (विजय संकेत), राम-रावण विजय स्मृति, शमी+नीलकंठ=अत्यंत शुभ, धन+विजय। शकुन शास्त्र: सर्वदा शुभ, दशहरा=सर्वाधिक। दाहिनी ओर=तुरंत सफलता। न दिखे=शमी पूजा+शिव जप।#दशहरा#नीलकंठ#शकुन
व्रत विधिहरतालिका तीज व्रत में बालू से शिव पार्वती बनाने का क्या विधान है?बालू शिव-पार्वती: पार्वती ने बालू शिवलिंग बनाकर तप किया (अनुसरण)। विधि: बालू/मिट्टी→शिवलिंग+पार्वती+गणेश→केले पत्ते→षोडशोपचार→बेलपत्र। 'हरतालिका'=सखी ने हरा (छिपाया)। निर्जला+जागरण। प्रातः विसर्जन।#हरतालिका तीज#बालू#शिव-पार्वती
तंत्र साधनातंत्र में चिता भस्म और हवन भस्म में क्या अंतर है?हवन भस्म: यज्ञ अग्नि, सात्त्विक, सर्वसुलभ, नित्य पूजा, बिना दीक्षा। चिता भस्म: श्मशान अग्नि, तामसिक/उग्र, केवल दीक्षित तांत्रिक, विशेष अनुष्ठान। सामान्य भक्त = हवन भस्म/विभूति पर्याप्त। चिता भस्म = गुरु दीक्षा अनिवार्य।#चिता भस्म#हवन भस्म#विभूति
तंत्र साधनातंत्र साधना में श्मशान भस्म का प्रयोग कैसे होता है?श्मशान भस्म: शिव = भस्मधारी (वैराग्य प्रतीक)। उन्नत तांत्रिक साधना (अघोर/कापालिक) में। आध्यात्मिक: मृत्यु भय विजय। गुरु दीक्षा अनिवार्य — बिना अधिकार अत्यंत खतरनाक। सामान्य भक्त: यज्ञ भस्म/विभूति/गोमय भस्म = पर्याप्त।#श्मशान भस्म#तंत्र#शिव
शिव उपासनाशिव पूजा में हवन करते समय कौन सी लकड़ी प्रयोग करेंशिव हवन लकड़ी: बिल्व (सर्वोत्तम — शिव प्रिय), आम, पलाश (ढाक), शमी, पीपल, बरगद। 8 अंगुल लम्बी, सूखी, कीड़ा न लगी। घी में डुबोकर 'ॐ नमः शिवाय स्वाहा' से आहुति। गोबर कण्डे भी शुभ। वर्जित: सड़ी-गली, गीली, कीड़ा लगी।#शिव#हवन#समिधा
शिव उपासनाशिव के किस स्तोत्र से कोर्ट केस में विजय मिलती हैकोर्ट विजय हेतु प्रचलित: (1) कालभैरवाष्टक (शंकराचार्य) — न्याय देवता। (2) शिव ताण्डव (रावण कृत) — शक्ति/निर्भयता। (3) महामृत्युंजय — बन्धन मुक्ति। (4) रुद्राष्टक (तुलसीदास)। ये परम्परागत मान्यताएँ हैं — कानूनी तैयारी अनिवार्य, सत्य पक्ष पर हों। मानसिक बल हेतु सहायक।#शिव#स्तोत्र#विजय
शिव उपासनाशिव की पूजा से मानसिक रोग दूर होते हैं क्या शास्त्रीय प्रमाण हैशिव पूजा + मानसिक स्वास्थ्य: शिव पुराण — 'ॐ नमः शिवाय' जप = मन शान्त, भय नाश। रुद्राभिषेक = चित्त शान्ति। योगसूत्र 1.23 — ईश्वर प्रणिधान से चित्तवृत्ति निरोध। आधुनिक: ध्यान/मंत्र = cortisol कमी, anxiety सुधार। जलाभिषेक = white noise शान्तिदायक। गम्भीर रोगों में चिकित्सा अनिवार्य — पूजा पूरक।#शिव#मानसिक स्वास्थ्य#ध्यान
शिव उपासनाशिवलिंग पर कितनी बेलपत्र एक बार में चढ़ानी चाहिएबेलपत्र: न्यूनतम 1 त्रिदल, शुभ 3/5/7/11/21/108। जितने अधिक दल उतना उत्तम। उल्टा (चिकना भाग शिवलिंग पर), डंठल तोड़कर, कटा-फटा वर्जित। 'त्रिदलं त्रिगुणाकारं...' मंत्र। जल धारा साथ अनिवार्य। पुराना धोकर पुनः मान्य। तोड़ना: चतुर्थी/अष्टमी/नवमी/अमावस्या/सोमवार वर्जित।#शिवलिंग#बेलपत्र#त्रिदल
शिव पूजामहादेव के भक्त को शिवरात्रि पर कितने प्रहर जागना चाहिए?शिवरात्रि जागरण: चारों प्रहर सर्वश्रेष्ठ (मोक्ष प्राप्ति)। प्रहर: 1=दूध अभिषेक, 2=दही, 3=घी, 4=शहद — प्रत्येक ~3 घण्टे। न्यूनतम 1 प्रहर अवश्य। 4>3>2>1 प्रहर — जितना अधिक उतना पुण्य। क्षमतानुसार — श्रद्धा प्रधान।#शिवरात्रि जागरण#चार प्रहर#रात्रि पूजा
शिव पूजाशिव के पार्थिव लिंग बनाने की विधि और मंत्र क्या है?पार्थिव लिंग: नदी मिट्टी + गंगाजल → अण्डाकार लिंग → 'ॐ नमः शिवाय' जपते हुए बनाएँ। 1/3/5/11/108/1008 संख्या। स्थापना: 'ॐ शिवलिंगाय नमः'। जल-बेलपत्र-पुष्प पूजन → विसर्जन (जलाशय)। स्वयं ईश्वर निर्माण = सर्वोच्च भक्ति।#पार्थिव लिंग#मिट्टी शिवलिंग#पार्थिव पूजा
शिव पूजाशिवलिंग की स्थापना किस तिथि में करनी चाहिए?शिवलिंग स्थापना तिथि: महाशिवरात्रि (सर्वोत्तम), सावन सोमवार, प्रदोष (त्रयोदशी), शुभ सोमवार। स्थिर लग्न। पुष्य/रोहिणी नक्षत्र। जलाधारी उत्तर मुख। स्थापना के बाद नित्य पूजा अनिवार्य — सम्भव न हो तो चित्र रखें।#शिवलिंग स्थापना#शुभ तिथि#प्राण प्रतिष्ठा