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ग्रन्थ

वेद — ऋग्वेद(48)

वेद — ऋग्वेद पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 48 प्रश्न उपलब्ध हैं।

ऋग्वेद (48)यजुर्वेद (30)सामवेद (10)अथर्ववेद (14)
शास्त्र ज्ञान

ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद में क्या अंतर?

ऋग्वेद = स्तुति/ज्ञान (सबसे प्राचीन), यजुर्वेद = यज्ञ विधि/कर्मकांड, सामवेद = संगीतमय गायन (भारतीय संगीत का मूल), अथर्ववेद = चिकित्सा/दैनिक जीवन/तंत्र। चारों एक ज्ञान के चार पहलू।

#चार वेद#ऋग्वेद#यजुर्वेद
मंत्र ज्ञान

गायत्री मंत्र का पूरा अर्थ क्या है शब्दशः?

ऋग्वेद 3.62.10: 'ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।' अर्थ: उस श्रेष्ठ परमात्मा (सविता) के दिव्य तेज का हम ध्यान करें, जो हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करे। ऋषि विश्वामित्र।

#गायत्री मंत्र#ऋग्वेद#सावित्री
धर्म ज्ञान

हिंदू धर्म सबसे पुराना धर्म है — इसका प्रमाण?

ऋग्वेद विश्व का प्राचीनतम ग्रंथ (UNESCO मान्यता), सिंधु सभ्यता (~3300 ई.पू.) में शिवलिंग/पशुपति/स्वस्तिक प्रमाण, अन्य सभी प्रमुख धर्मों से पुराना, और एकमात्र प्राचीन धर्म जो आज भी 100+ करोड़ अनुयायियों के साथ जीवंत है।

#प्राचीन धर्म#सनातन#ऋग्वेद
दिव्यास्त्र

पर्जन्य देव कौन हैं?

पर्जन्य देव वर्षा, मेघ और उर्वरता के अधिपति देवता हैं। ऋग्वेद में उनसे समय पर वर्षा और प्रजा के कल्याण की प्रार्थना की गई है।

#पर्जन्य देव#वर्षा देवता#ऋग्वेद
लक्ष्मी मंत्र

श्री सूक्त का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?

ऋग्वेद — 15+1 ऋचाएं। प्रतिदिन/शुक्रवार/दीपावली। सफेद/गुलाबी वस्त्र, लाल आसन। लक्ष्मी+श्रीयंत्र समक्ष, घी दीपक, कमल। 16 ऋचा (माहात्म्य सहित)। विष्णु पूजा भी। फलश्रुति: 7 जन्म निर्धनता नहीं।

#श्री सूक्त#ऋग्वेद#लक्ष्मी
वेद ज्ञान

चार वेद कौन-कौन से हैं?

1. ऋग्वेद — देवस्तुति, 10552 मंत्र, होता ऋत्विज। 2. यजुर्वेद — यज्ञविधान, गद्यात्मक, अध्वर्यु। 3. सामवेद — संगीतमय ऋचाएँ, उद्गाता। 4. अथर्ववेद — आरोग्य, गृहस्थ, ब्रह्मा ऋत्विज। (स्रोत: मुण्डकोपनिषद, शतपथ ब्राह्मण)

#ऋग्वेद#यजुर्वेद#सामवेद
स्तोत्र

लक्ष्मी प्राप्ति के लिए श्री सूक्त के मंत्र

ऋग्वेद के 'श्री सूक्त' का प्रथम मंत्र ('ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं...') माता लक्ष्मी के स्वर्णिम स्वरूप का आवाहन है। श्री यंत्र पर इसका नियमित पाठ दरिद्रता को पूर्णतः नष्ट कर देता है।

#श्री सूक्त#महालक्ष्मी#धन प्राप्ति
वैदिक स्तोत्र

पुरुष सूक्त पाठ कब और कैसे करें?

ऋग्वेद 10.90(16 मंत्र)। विष्णु पूजा/हवन/यज्ञ/गृहप्रवेश। एकादशी/गुरुवार। शुद्ध उच्चारण अनिवार्य(गलत=हानि)। गुरु से सीखें।

#पुरुष सूक्त#ऋग्वेद#विष्णु
देवी ग्रंथ

देवी रात्रि सूक्त का पाठ कब करना चाहिए?

रात्रि सूक्त = ऋग्वेद (10.127) + सप्तशती अंग। पाठ समय: सायंकाल/रात्रि, शयन पूर्व, नवरात्रि जागरण, अमावस्या। भय निवारण: रात्रि भय, बुरे स्वप्न में विशेष। फल: भय मुक्ति, नकारात्मकता से रक्षा, शांत निद्रा, अज्ञान नाश।

#रात्रि सूक्त#ऋग्वेद#रात्रि
भारतीय विज्ञान एवं गणित

ऋग्वेद में गुरुत्वाकर्षण का उल्लेख है क्या?

ऋग्वेद में काव्यात्मक संकेत हैं। भास्कराचार्य (1150 ईस्वी) ने 'गुरुत्वाकर्षण' शब्द का स्पष्ट प्रयोग किया — न्यूटन से 500 वर्ष पहले। वराहमिहिर (6वीं सदी) ने भी पृथ्वी की आकर्षण शक्ति का उल्लेख किया। गणितीय सूत्र न्यूटन ने दिए।

#ऋग्वेद#गुरुत्वाकर्षण#वैदिक विज्ञान
श्रीमद्भागवत

चार वेद कौन से हैं?

चार वेद ऋक्, यजुः, साम और अथर्व बताए गए हैं।

#चार वेद#ऋग्वेद#यजुर्वेद
ॐकार और शब्दब्रह्म

ॐकार और चारों वेदों का क्या संबंध है?

ऋग्वेद को मुख, सामवेद को जिह्वा, यजुर्वेद को महाग्रीवा और अथर्ववेद को हृदय बताया गया है।

#ॐकार#वेद#ऋग्वेद
सरस्वती मंत्र

ऋग्वेद में सरस्वती मंत्र क्या है?

ऋग्वेद (1.3.12): 'महो अर्णः सरस्वती प्र चेतयति केतुना। धियो विश्वा वि राजति॥' अर्थ: हे सरस्वती! अपने ज्ञान के महासागर से हमें प्रबुद्ध करें, संपूर्ण ब्रह्मांड और हमारी बुद्धि को आलोकित करें। फल: भौतिक ज्ञान से परे 'परा विद्या' (ब्रह्मज्ञान) की ओर उन्मुखता।

#ऋग्वेद सरस्वती मंत्र#महो अर्णः#परा विद्या
सरस्वती प्राकट्य

ऋग्वेद में सरस्वती को क्या कहा गया है?

ऋग्वेद: सरस्वती = सप्तसिंधु में से एक पवित्र और जीवनदायिनी नदी (उत्तर-पश्चिम भारत)। नदी विलुप्त होने पर मानवीकरण हुआ → 'वाक्' (वाणी), बुद्धि, कला और चेतना की अधिष्ठात्री देवी। भौतिकता से आध्यात्मिकता की ओर मानव चेतना का विकास।

#ऋग्वेद सरस्वती#नदी#वाक् देवी
समिधा

हवन में कौन सी लकड़ी (समिधा) इस्तेमाल करते हैं?

समिधा = हवन में जलाई जाने वाली पवित्र लकड़ी। ऋग्वेद और यजुर्वेद: 'समिधाग्निं दुवस्यत घृतैर्बोधयतातिथिम्।' सामान्य हवन के लिए आम की लकड़ी सर्वाधिक सुलभ और प्रामाणिक। ग्रह शांति के लिए अलग-अलग समिधाओं का विधान।

#समिधा#यज्ञीय काष्ठ#ऋग्वेद
मंत्र

वाहन पूजन में कौन सा मंत्र पढ़ते हैं?

वाहन पूजन के मंत्र: (1) स्वस्ति मंत्र (ऋग्वेद) — यात्रा सुरक्षा, (2) हनुमान मंत्र — दुर्घटना बचाव, (3) 'ॐ विष्णवे नमः' × 5 — लंबी यात्रा, (4) महामृत्युंजय मंत्र — अकाल मृत्यु से रक्षा।

#वाहन पूजन मंत्र#स्वस्ति मंत्र#ऋग्वेद
मंत्र विज्ञान

देवी सूक्तम् का क्या महत्व है?

देवी सूक्तम् = ऋग्वेद (10.125), वाक् आम्भृणी द्वारा रचित। दुर्गा सप्तशती के पाठ के आरंभ/अंत में पढ़ा जाता है। देवी के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक। फल: मानसिक तनाव दूर, नकारात्मक ऊर्जा नाश, आध्यात्मिक उन्नति।

#देवी सूक्तम्#ऋग्वेद#वाक् आम्भृणी
वैदिक साहित्य में माँ दुर्गा

ऋग्वेद के 'देवी सूक्तम्' में क्या कहा गया है?

ऋग्वेद (10.125) — 'देवी सूक्तम्' या 'वाक् आम्भृणी सूक्त': महर्षि अम्भृण की पुत्री वाक् ऋषिका ने आत्म-साक्षात्कार में घोषणा की: 'मैं ही ब्रह्मांड की शासिका, वसु-रुद्र-आदित्यों को धारण करने वाली हूँ।' ब्रह्मांड की मूल ऊर्जा चेतनामय स्त्री-तत्त्व है।

#देवी सूक्तम्#ऋग्वेद#वाक् आम्भृणी
वैदिक स्वरूप

'तद्विष्णोः परमं पदं' मंत्र का क्या अर्थ है?

ऋग्वेद (1.22.20): 'तद्विष्णोः परमं पदं सदा पश्यन्ति सूरयः।' अर्थ: ज्ञानी और योगारूढ़ पुरुष विष्णु के उस परम पद (वैकुंठ) का निर्बाध दर्शन करते हैं — जैसे आकाश में सूर्य रूपी नेत्र। यह मंत्र विष्णु को मोक्ष का अंतिम लक्ष्य सिद्ध करता है।

#तद्विष्णोः परमं पदं#मोक्ष लक्ष्य#ऋग्वेद
वैदिक स्वरूप

'त्रीणि पदा विचक्रमे' मंत्र का क्या अर्थ है?

ऋग्वेद (1.22.18): 'त्रीणि पदा विचक्रमे विष्णुर्गोपा अदाभ्यः। अतो धर्माणि धारयन्॥' अर्थ: सृष्टि के रक्षक (गोपाः) भगवान विष्णु तीन कदमों से सम्पूर्ण जगत को नाप लेते हैं और वे ही समस्त धर्मों को धारण करते हैं।

#त्रीणि पदा विचक्रमे#ऋग्वेद मंत्र#धर्म धारण
वैदिक स्वरूप

ऋग्वेद में विष्णु को 'त्रिविक्रम' क्यों कहते हैं?

त्रिविक्रम = तीन पगों से ब्रह्मांड नापने वाले। तीन पद = आकाश, अंतरिक्ष और पृथ्वी में सर्वव्यापी प्रभाव। सूर्य की तीन अवस्थाएं (उदय, मध्य, अस्त) भी। आध्यात्मिक अर्थ: जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति पार कर 'तुरीय' (परम चेतना) में प्रवेश।

#त्रिविक्रम#तीन पग#ऋग्वेद
मंत्र और उपासना

महामृत्युंजय मंत्र का क्या अर्थ है?

महामृत्युंजय मंत्र (ऋग्वेद 7.59.12): 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्...' अर्थ: हे त्रिनेत्र शिव! जैसे पका खरबूजा बेल से स्वतः मुक्त होता है — वैसे हमें संसार के बंधनों और मृत्यु के भय से मुक्त कर मोक्ष प्रदान करें।

#महामृत्युंजय मंत्र#ऋग्वेद#त्र्यंबक
वाक् सूक्त

वाक् सूक्त क्या है?

वाक् सूक्त = ऋग्वेद के 10वें मंडल का 125वाँ सूक्त। मन्त्र द्रष्टा = महर्षि अम्भृण की पुत्री 'वाक्'। यह परब्रह्म के साथ एकाकार अवस्था में उनकी 'आत्म-स्तुति' है और दुर्गा सप्तशती का प्रवेश द्वार भी माना जाता है।

#वाक् सूक्त#अम्भृण सूक्त#ऋग्वेद दशम मंडल
ऋग्वेद में सरस्वती

तैत्तिरीय ब्राह्मण में सरस्वती को क्या कहा गया है?

तैत्तिरीय ब्राह्मण (द्वितीय खंड): सरस्वती = 'वाग्मिता (eloquent speech) और मधुर संगीत की माता' — यह उनके ज्ञान और कला की देवी बनने की प्रक्रिया का स्पष्ट आरंभ था। यजुर्वेद में उन्हें इंद्र की माता और संगिनी भी कहा गया है।

#तैत्तिरीय ब्राह्मण#वाग्मिता#संगीत माता
ऋग्वेद में सरस्वती

सरस्वती को 'वृत्रघ्नी' क्यों कहते हैं?

वृत्र = अज्ञान, अंधकार और सूखे का सर्पाकार दानव जो नदियों (ज्ञान-जीवन के प्रवाह) को रोकता था। सरस्वती ने इसका नाश किया इसलिए 'वृत्रघ्नी' — बाधाओं को दूर करने वाली और शत्रुओं का संहार करने वाली शक्ति।

#वृत्रघ्नी#वृत्र दानव#अज्ञान नाश
ऋग्वेद में सरस्वती

'अम्बितमे नदीतमे देवितमे सरस्वति' का क्या अर्थ है?

'अम्बितमे नदीतमे देवितमे सरस्वति' — ऋग्वेद (2.41.16), महर्षि गृत्समद। अर्थ: 'हे सरस्वती! आप माताओं में सर्वश्रेष्ठ (अम्बितमे), नदियों में सर्वश्रेष्ठ (नदीतमे) और देवियों में सर्वश्रेष्ठ (देवितमे) हैं।'

#अम्बितमे नदीतमे देवितमे#ऋग्वेद मंत्र#गृत्समद
ऋग्वेद में सरस्वती

ऋग्वेद में सरस्वती को क्या कहा गया है?

ऋग्वेद में सरस्वती = परम पवित्र, शक्तिशाली नदी और जल-देवी (आपः)। संपत्ति, स्वास्थ्य और पवित्रता देने वाली शक्ति। 'वृत्रघ्नी' (वृत्र नाशक) और मारुतों की संगिनी भी कही गई हैं।

#ऋग्वेद#नदी देवी#जल देवी
श्रीसूक्त में माँ लक्ष्मी का स्वरूप

श्रीसूक्त क्या है?

श्रीसूक्त ऋग्वेद के परिशिष्ट भाग में वर्णित माँ लक्ष्मी का सबसे प्राचीन और प्रामाणिक वर्णन है — पंद्रह ऋचाओं का यह समूह भौतिक विज्ञान, मनोविज्ञान और आध्यात्मिकता का जटिल मिश्रण है।

#श्रीसूक्त#ऋग्वेद परिशिष्ट#पंद्रह ऋचाएं
मंत्र का स्वरूप और अर्थ

महामृत्युंजय मंत्र का वैदिक स्वरूप क्या है?

वैदिक स्वरूप 32 अक्षरों का है, ॐ जोड़ने पर 33 अक्षरों का 'त्रयस्त्रिशाक्षरी' मंत्र बनता है: 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥'

#वैदिक स्वरूप#32 अक्षर#त्रयस्त्रिशाक्षरी
महामृत्युंजय मंत्र परिचय

महामृत्युंजय मंत्र के रचयिता कौन हैं?

महामृत्युंजय मंत्र को महर्षि वशिष्ठ द्वारा दृष्ट (रचित) माना जाता है — यह ऋग्वेद के सातवें मंडल (७.५९.१२) का श्लोक है जो ऋषियों के गहन समाधि और ध्यान में उद्घाटित हुआ।

#महर्षि वशिष्ठ#ऋग्वेद सातवां मंडल#दृष्ट मंत्र
महामृत्युंजय मंत्र परिचय

महामृत्युंजय मंत्र किस वेद में है?

महामृत्युंजय मंत्र मुख्य रूप से ऋग्वेद (७.५९.१२) में है — साथ ही यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता, वाजसनेयी संहिता) और अथर्ववेद (१४.१.१७) में भी प्रामाणिक रूप से उद्धृत है।

#ऋग्वेद#यजुर्वेद#अथर्ववेद
देवी-देवता परिचय

वरुण देव कौन हैं और क्या करते हैं?

वरुण देव जल, समुद्र और नदियों के अधिपति हैं। वे पश्चिम दिशा के दिक्पाल, सत्य के रक्षक और न्याय के देवता हैं। उनका वाहन मगरमच्छ और अस्त्र पाश है।

#वरुण देव#जल देवता#पाश
वेद एवं शास्त्र

वेद में सोम क्या है?

वेद में सोम के तीन मुख्य अर्थ हैं — एक पर्वतीय लता जिसका रस यज्ञ में अर्पित होता था, चन्द्रमा, और प्रसंगानुसार ईश्वर/प्राण/आनन्द। यह मादक पदार्थ नहीं था — वेद में सोम और मद्य (सूरा) अलग-अलग बताये गये हैं। सोमरस पुष्टिकारक और आयुवर्धक था।

#सोम#सोमरस#ऋग्वेद
वेद एवं शास्त्र

अग्नि सूक्त में अग्नि का क्या अर्थ है?

अग्नि सूक्त ऋग्वेद का प्रथम सूक्त है। वैदिक अग्नि केवल भौतिक आग नहीं — वे देवों के मुख और यज्ञ के पुरोहित हैं। पृथ्वी पर यज्ञाग्नि, आकाश में विद्युत् और सूर्य में ऊर्जा — ये तीन अग्नि के रूप हैं। देवताओं में इनका स्थान सर्वप्रथम है।

#अग्नि सूक्त#ऋग्वेद#वैदिक देवता
वेद एवं शास्त्र

नासदीय सूक्त क्या है ऋग्वेद में?

नासदीय सूक्त ऋग्वेद (१०।१२९) का दार्शनिक सूक्त है जिसमें ७ मन्त्रों में सृष्टि-पूर्व की अवस्था का वर्णन है। उस समय न सत् था, न असत् — केवल तमस था। पहले 'काम' उत्पन्न हुआ और सृष्टि आरम्भ हुई। यह विश्व-साहित्य में सृष्टि-रहस्य पर सबसे पुरानी दार्शनिक रचना है।

#नासदीय सूक्त#ऋग्वेद#सृष्टि उत्पत्ति
वेद एवं शास्त्र

श्रीसूक्त का पाठ शुक्रवार को क्यों?

शुक्रवार का स्वामी शुक्र ग्रह है जो धन, ऐश्वर्य और सुख का कारक है — माता लक्ष्मी के स्वरूप से सीधा सम्बन्ध। इसलिए श्रीसूक्त का पाठ शुक्रवार को विशेष फलदायी है। नित्य पाठ से दरिद्रता नष्ट होती है और धन-धान्य की वृद्धि होती है।

#श्रीसूक्त#शुक्रवार#लक्ष्मी पूजा
वेद एवं उपनिषद

ऋग्वेद में कितने मंत्र हैं?

ऋग्वेद में 10 मंडल, 1028 सूक्त और लगभग 10,552 मंत्र (ऋचाएँ) हैं। यह विश्व का प्राचीनतम उपलब्ध ग्रंथ है जिसमें गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, नासदीय सूक्त जैसे अमूल्य सूक्त संकलित हैं।

#ऋग्वेद#वेद#मंत्र
स्तोत्र एवं पाठ

श्री सूक्त से लक्ष्मी जी कैसे प्रसन्न होती हैं

ऋग्वेद सूक्त; लक्ष्मी सबसे प्राचीन मंत्र। वैदिक ध्वनि=लक्ष्मी आकर्षण। धन, सौभाग्य, संतान। श्री सूक्त हवन=धन सर्वोत्तम। शुक्रवार/दीवाली। ऋग्वेद=सर्वोच्च प्रामाणिकता।

#श्री सूक्त#लक्ष्मी#ऋग्वेद
वेद एवं यज्ञ

यज्ञ में ऋग्वेद और अथर्ववेद के मंत्रों की क्या भूमिका है

ऋग्वेद = होता का वेद — देवताओं की स्तुति और आह्वान। अथर्ववेद = ब्रह्मा (यज्ञ अध्यक्ष) का वेद — निरीक्षण, त्रुटि सुधार, मन से यज्ञ का दूसरा पक्ष संस्कारित। ऐतरेय ब्राह्मण: वेदत्रयी वाक् से, ब्रह्मा मन से यज्ञ पूर्ण करता है। दोनों अनिवार्य।

#ऋग्वेद#अथर्ववेद#यज्ञ
मंत्र ज्ञान

शिव जी का महामृत्युंजय मंत्र क्या है?

महामृत्युंजय मंत्र ऋग्वेद 7.59.12 का है — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...'। अर्थ: तीन नेत्रों वाले शिव हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें जैसे खीरा पककर बेल से स्वतः अलग होता है। यह भारतीय परंपरा का सर्वश्रेष्ठ रोग-मृत्यु रक्षा मंत्र है।

#महामृत्युंजय#त्र्यम्बक#ऋग्वेद
वेद परिचय

वेद क्या हैं?

वेद हिंदू धर्म के सर्वोच्च अपौरुषेय (ईश्वरीय) ग्रंथ हैं — ऋग्वेद (देव स्तुति), यजुर्वेद (यज्ञ विधि), सामवेद (संगीत पूजा), अथर्ववेद (जीवन विज्ञान)। वेदव्यास ने इन्हें चार भागों में विभाजित किया। प्रत्येक वेद में संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद — चार भाग हैं।

#वेद#चार वेद#श्रुति
मंत्र ज्ञान

शिव जी का महामृत्युंजय मंत्र क्या है?

महामृत्युंजय मंत्र है — 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥' यह ऋग्वेद (7.59.12) का मंत्र है। अर्थ — तीन नेत्रों वाले शिव हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें।

#महामृत्युंजय#मंत्र#ऋग्वेद
वेद ज्ञान

वेदों में आत्मा का वर्णन कैसे है?

ऋग्वेद (1/164/20) के 'दो पक्षी सूक्त' में जीवात्मा और परमात्मा का अनूठा चित्रण है। ऋग्वेद (10/16) में आत्मा की अमरता का वर्णन है। वैदिक आत्मा-दर्शन ही उपनिषदों के महावाक्यों का मूल स्रोत है।

#आत्मा#वेद#अमर
वेद ज्ञान

वेदों में योग का वर्णन कैसे है?

वेदों में योग के मूल तत्त्व — मन की एकाग्रता, प्राण-नियंत्रण और ब्रह्मचर्य — स्पष्टतः मिलते हैं। केशी सूक्त (ऋग्वेद 10/136) में सिद्ध योगी का विशद चित्र है। वैदिक यम, ब्रह्मचर्य और ध्यान-परंपरा ही पतंजलि के योगसूत्र का मूल आधार है।

#योग#वेद#ऋग्वेद
वेद ज्ञान

वेदों में देवताओं का वर्णन कैसे है?

वेदों में 33 देव हैं — 8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य और इंद्र-प्रजापति। इंद्र और अग्नि के सर्वाधिक सूक्त हैं। ऋग्वेद (1/164/46) के अनुसार सभी देवता उसी एक ब्रह्म के विभिन्न रूप हैं।

#देवता#वेद#ऋग्वेद
वेद ज्ञान

वेदों में ब्रह्म का वर्णन कैसे किया गया है?

वेदों में ब्रह्म को 'एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति' (ऋग्वेद 1/164/46) — एक ही सत्य, अनेक नाम — के रूप में बताया गया है। हिरण्यगर्भ सूक्त (10/121), नासदीय सूक्त (10/129) और यजुर्वेद (40/8) में ब्रह्म को सर्वव्यापी, निर्गुण और सृष्टि के आधार के रूप में वर्णित किया गया है।

#ब्रह्म#वेद#ऋग्वेद
सृष्टि विज्ञान

ब्रह्मांड का निर्माण कैसे हुआ?

ऋग्वेद के नासदीय सूक्त (10/129) के अनुसार सृष्टि से पहले न सत था, न असत — एकमात्र परम सत्ता थी जिसकी 'काम' (संकल्प) से सृष्टि हुई। पुराणों में भगवान विष्णु की नाभि से ब्रह्मा प्रकट होकर सृष्टि के रचयिता बने। वेदांत के अनुसार ब्रह्म की माया-शक्ति से यह सृष्टि प्रकट हुई।

#ब्रह्मांड#सृष्टि#नासदीय सूक्त
वैदिक स्तोत्र

देवी रात्रि सूक्त कब पढ़ना चाहिए?

ऋग्वेद 10.127। रात्रि पूजा, नवरात्रि(कालरात्रि), दीपावली, अमावस्या। रात्रि भय/चोर/नकारात्मकता दूर। दुर्गा सप्तशती अंग।

#रात्रि सूक्त#देवी#ऋग्वेद
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