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पूजा विधि

पूजा विधि, पूजा के नियम, सामग्री, समय, पूजा घर की व्यवस्था — सभी प्रश्नों के शास्त्रीय उत्तर।

498प्रश्नोत्तर
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माँ भुवनेश्वरी की साधना की पूर्ण विधि क्या है?

भुवनेश्वरी साधना विधि: रात्रि 10 बजे बाद → स्नान → श्वेत वस्त्र → श्वेत आसन, पूर्वाभिमुख → गुरु चित्र पूजन → यंत्र स्थापना-पंचोपचार → जल से संकल्प-विनियोग-न्यास → मूंगे का दाना यंत्र पर → पुष्प से ध्यान → 9 दिन मंत्र जाप।

पूजा विधानभुवनेश्वरी साधना विधिरात्रि 10 बजे
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छिन्नमस्ता साधना में शंख से आवाहन कैसे करते हैं?

छिन्नमस्ता साधना में शंख आवाहन: शंख में जल + अक्षत + पुष्प डालकर देवी का आवाहन करें।

पूजा विधानशंख आवाहनजल अक्षत पुष्प
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माँ छिन्नमस्ता की साधना की पूर्ण विधि क्या है?

छिन्नमस्ता साधना विधि: दृढ़ संकल्प → ब्रह्म मुहूर्त में स्नान → लाल वस्त्र → आवाहन-संकल्प-विनियोग-न्यास → शंख में जल-अक्षत-पुष्प से आवाहन → 11 माला × 11 दिन → प्रतिदिन आरती और क्षमा प्रार्थना।

पूजा विधानछिन्नमस्ता साधना विधिब्रह्म मुहूर्त
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त्रिपुर भैरवी साधना में संकल्प कैसे लेते हैं?

त्रिपुर भैरवी संकल्प विधि: उल्टे हाथ में गंगाजल + फूल + चावल + रोली लेकर अपनी मनोकामना का स्मरण करते हुए संकल्प लें।

पूजा विधानसंकल्प विधिउल्टा हाथ
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माँ त्रिपुर भैरवी की पूजा की विधि क्या है?

त्रिपुर भैरवी पूजा विधि: पूर्वाभिमुख, पीले आसन पर बैठें → उल्टे हाथ में गंगाजल-फूल-चावल-रोली से संकल्प → गणेश पूजन → यंत्र/मूर्ति का धूप-दीप-मिष्ठान्न-फल से पूजन → 15 माला मंत्र जाप।

पूजा विधानत्रिपुर भैरवी पूजापूर्वाभिमुख
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धूमावती साधना में न्यास कैसे करते हैं?

धूमावती न्यास: पिप्पलाद ऋषि = शिर में। त्रिव्रत् छंद = मुख में। श्री ज्येष्ठा धूमावती देवता = हृदय में।

पूजा विधानधूमावती न्यासपिप्पलाद ऋषि
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धूमावती साधना में हवन कैसे करते हैं?

धूमावती हवन: मंत्र जप पूर्ण होने पर दशांश हवन। सामग्री: काली मिर्च + काले तिल + घी + हवन सामग्री।

पूजा विधानधूमावती हवनदशांश हवन
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धूमावती साधना में दक्षिण दिशा और काले कपड़े का क्या महत्व है?

धूमावती साधना: दक्षिण दिशा में लकड़ी की चौकी पर काला कपड़ा → उस पर गीला नारियल या यंत्र। काले वस्त्र और काले आसन का ही प्रयोग। यह देवी के उग्र-तांत्रिक-श्मशानी स्वरूप के अनुकूल।

पूजा विधानदक्षिण दिशाकाला कपड़ा
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माँ धूमावती की साधना की पूर्ण विधि क्या है?

धूमावती साधना विधि: ब्रह्म मुहूर्त में स्नान → काले वस्त्र → गंगाजल से पूजा स्थल शुद्धि → दक्षिण दिशा में काले कपड़े पर गीला नारियल/यंत्र → तेल दीपक → संकल्प-विनियोग-न्यास → ध्यान-पूजन → 9 माला × 9/11/21 दिन → दशांश हवन (काली मिर्च+काले तिल+घी)।

पूजा विधानधूमावती साधना विधिब्रह्म मुहूर्त
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बगलामुखी साधना में हल्दी की माला से जप कैसे करते हैं?

हल्दी माला जप: बगलामुखी मंत्र का जाप — प्रतिदिन 6 माला या सवा लाख मंत्रों का पूर्ण अनुष्ठान। हल्दी की माला = माँ बगलामुखी को प्रिय, साधना के लिए विशेष उपयुक्त।

पूजा विधानहल्दी माला जप6 माला
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माँ बगलामुखी की साधना की पूर्ण विधि क्या है?

बगलामुखी साधना विधि: प्रातः स्नान → पीले वस्त्र → पूर्व/उत्तर दिशा, पीले आसन पर बैठें → गुरु-गणपति पूजन + मृत्युंजय एक माला → संकल्प-आवाहन-न्यास → हल्दी माला से मंत्र जाप (6 माला/दिन या सवा लाख) → दान।

पूजा विधानबगलामुखी साधना विधिपूर्व दिशा
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माँ बगलामुखी की पूजा से पहले क्या करना चाहिए?

बगलामुखी साधना पूर्व: (1) गुरु पूजन, (2) गणपति पूजन, (3) मृत्युंजय मंत्र का एक माला जाप। फिर संकल्प → आवाहन → न्यास (अंगन्यास, करन्यास)।

पूजा विधानबगलामुखी पूजा पूर्वगुरु पूजन
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मातंगी साधना में हवन कैसे करते हैं?

मातंगी हवन: उच्छिष्ट मातंगी = 21वें दिन घी की 108 आहुतियाँ। कर्ण मातंगी = 11वें दिन तेल + राई मिलाकर 1000 आहुतियाँ। सामान्य हवन सामग्री: पलाश के फूल + घी + हवन सामग्री।

पूजा विधानमातंगी हवनपलाश फूल
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मातंगी साधना से पहले न्यास कैसे करते हैं?

मातंगी साधना पूर्व न्यास क्रम: (1) विनियोग, (2) ऋष्यादिन्यास, (3) करन्यास, (4) अंगन्यास। फिर पंचोपचार या षोडशोपचार पूजा → मंत्र जाप → मातंगी कवच पाठ।

पूजा विधानन्यास विधिऋष्यादिन्यास
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कर्ण मातंगी साधना की विधि क्या है?

कर्ण मातंगी साधना: दक्षिण दिशा, घी या तेल का दीपक। 11 दिन × 21 या 51 माला जाप। 11वें दिन तेल + राई मिलाकर उसी मंत्र से 1000 आहुतियाँ।

पूजा विधानकर्ण मातंगी विधिदक्षिण दिशा
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राज मातंगी साधना की विधि क्या है?

राज मातंगी साधना: उत्तर दिशा, सफेद वस्त्र-आसन। अक्षत से 'ह्रीं' लिखकर यंत्र स्थापित करें। हृदयंगम साधना में: पीले वस्त्र + उत्तर दिशा + गुरु चित्र + हृदयंगम यंत्र + गुटिका + माला।

पूजा विधानराज मातंगी विधिउत्तर दिशा
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उच्छिष्ट मातंगी साधना की विधि क्या है?

उच्छिष्ट मातंगी साधना: पश्चिम दिशा, लाल वस्त्र-आसन, रात्रि 9 बजे बाद। नित्य 51 माला × 21 दिन। 21वें दिन घी की 108 आहुतियों का हवन। सिद्ध यंत्र को चांदी के ताबीज में धारण करें।

पूजा विधानउच्छिष्ट मातंगी विधिपश्चिम दिशा
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चन्द्रशेखराष्टकम् पाठ में दीप कैसा जलाएं?

चन्द्रशेखराष्टकम् पाठ में शुद्ध गाय के घी का दीपक जलाएं और चंदन या सुगंधित धूप का उपयोग करें।

पूजा सामग्रीघी का दीपकसुगंधित धूप
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चन्द्रदोष निवारण के लिए शिव को कौन सी विशेष सामग्री चढ़ाएं?

चन्द्रदोष निवारण के लिए शिव को सफेद चंदन, शक्कर और खीर (श्वेत वस्तुएं) विशेष रूप से अर्पित करें — ये चन्द्रमा की सौम्यता और शीतलता का प्रतीक हैं।

पूजा सामग्रीचन्द्रदोष सामग्रीसफेद चंदन
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चन्द्रशेखराष्टकम् पाठ में शिव को क्या अर्पित करें?

शिव को जल, गाय का दूध, दही, शहद, बिल्वपत्र, सफेद पुष्प, अक्षत और धतूरा अर्पित करें। चन्द्रदोष निवारण के लिए सफेद चंदन, शक्कर या खीर विशेष रूप से चढ़ाएं।

पूजा सामग्रीशिव अर्पणबिल्वपत्र
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कालसर्प शांति पूजा कब करनी चाहिए?

कालसर्प शांति पूजा नाग पंचमी, शिवरात्रि या मासिक शिवरात्रि पर करें। तीर्थ में करनी हो तो नाग पंचमी या महाशिवरात्रि; पितृदोष के लिए अमावस्या पर करें।

पूजा विधिनाग पंचमीशिवरात्रि
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कालसर्प पूजा के बाद नाग-नागिन की प्रतिमा का क्या करें?

कालसर्प पूजा के बाद चांदी के नाग-नागिन की प्रतिमा को किसी योग्य ब्राह्मण को दान करें या पवित्र नदी/जलाशय में विसर्जित करें।

पूजा विधिनाग प्रतिमा विसर्जनब्राह्मण दान
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कालसर्प शांति पूजा में हवन में कौन से मंत्र बोलते हैं?

हवन में 108 आहुतियां दें — राहु के लिए 'ॐ रां राहवे नमः', केतु के लिए 'ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः' और सर्प सूक्त की ऋचाओं से 'नमो अस्तु सर्पेभ्यो... स्वाहा'।

पूजा विधिहवन मंत्रराहु केतु आहुति
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कालसर्प पूजा में अभिषेक कैसे करते हैं?

कालसर्प पूजा में महामृत्युंजय मंत्र जपते हुए शिवलिंग और नाग-प्रतिमा पर कच्चे दूध की धारा अर्पित करें, फिर जल-धारा से अभिषेक करें — भाव रखें कि शिव के आभूषण (नाग) का अभिषेक हो रहा है।

पूजा विधिअभिषेककच्चा दूध
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शिव-नाग पूजा में आवाहन कैसे करते हैं?

शिव आवाहन: 'ॐ नमः शिवाय' से शिवलिंग पर; नाग आवाहन: चांदी के नाग-नागिन जोड़े को शिवलिंग के समक्ष रखकर नवनाग स्तोत्र से 'ॐ नवनागदेवताभ्यो नमः, आवाहयामि स्थापयामि।'

पूजा विधिआवाहनशिव आवाहन
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कालसर्प शांति संकल्प कैसे लेते हैं?

कालसर्प शांति संकल्प में हाथ में जल, अक्षत, पुष्प लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान, तिथि और कालसर्प योग के अशुभ प्रभाव निवारण का उद्देश्य बोलकर जल पात्र में छोड़ते हैं।

पूजा विधिसंकल्पकालसर्प शांति
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कालसर्प शांति पूजा में नाग-नागिन की प्रतिमा क्यों रखते हैं?

नाग-नागिन प्रतिमा इसलिए रखते हैं क्योंकि शास्त्र जीवित नाग की नहीं बल्कि भगवान शंकर के आभूषण के रूप में प्रतिमा की पूजा का निर्देश देते हैं — यही सात्त्विक और कल्याणकारी विधि है।

पूजा विधिनाग नागिन प्रतिमाचांदी
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कालसर्प दोष शांति पूजा में क्या सामग्री चाहिए?

कालसर्प पूजा में मुख्य सामग्री: चांदी/तांबे के नाग-नागिन जोड़े (अनिवार्य), शिवलिंग/शिव चित्र, कच्चा दूध, पंचामृत, जल, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य।

पूजा विधिपूजा सामग्रीचांदी नाग नागिन
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बेलपत्र से शिव पूजा करने की सही विधि क्या है?

भस्म-रुद्राक्ष धारण कर संकल्प लें। शिव का अभिषेक करें। बेलपत्र पर चंदन लगाकर 'बिल्वाष्टकम्' के श्लोक पढ़ते हुए उसे शिवलिंग पर चढ़ाएं और अंत में कपूर से आरती करें।

पूजा विधिशिव पूजासंकल्प
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शिव जी की क्षमा प्रार्थना मंत्र?

पूजा के अंत में 'करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा...' मंत्र बोलकर शिव जी से अपने शरीर, वाणी या मन से हुई सभी गलतियों की माफी मांगनी चाहिए।

पूजा विधिक्षमा प्रार्थनापूर्णाहुति
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नंदी के कान में क्या बोलें?

हाथ में दूर्वा (घास) लें, नंदी के बाएं कान में 3 बार अपनी इच्छा बोलें, फिर 3 बार 'श्री शिवाय नमस्तुभ्यं' बोलकर वह दूर्वा नंदी जी को चढ़ा दें।

पूजा विधिनंदी पूजनमनोकामना
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बेलपत्र चढ़ाने का मंत्र?

बेलपत्र की डंडी को जलाधारी (पानी बहने वाली जगह) की तरफ रखकर 'त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्...' मंत्र बोलते हुए बेलपत्र चढ़ाना चाहिए।

पूजा विधिबिल्व अर्पणबेलपत्र
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प्रदोष काल में दीपदान?

इस पूजा में दो दीपक जलाए जाते हैं। पहला 'शुद्ध घी' का दीपक शिव जी के लिए, और दूसरा 'सरसों के तेल' का दीपक घर के बाहर पीपल के पेड़ के नीचे पितरों के लिए।

पूजा विधिदीपदानपितृ हेतु
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शिव पंचोपचार पूजा मंत्र?

शिव जी को 5 चीजें चढ़ाते समय 5 अलग मंत्र बोलते हैं: चंदन (लं), फूल (हं), धूप (यं), दीपक (रं) और भोग/प्रसाद (वं)।

पूजा विधिपंचोपचारआगमिक मंत्र
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प्रदोष व्रत का संकल्प कैसे लें?

हाथ में जल लेकर 'ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः...' मंत्र पढ़ते हुए अपना नाम, गोत्र और दिन बोलकर शिव-पार्वती और नंदी की पूजा करने का संकल्प (प्रतिज्ञा) लेना चाहिए।

पूजा विधिसंकल्प मंत्रप्रदोष पूजा
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पूजा में शुद्धि के मंत्र?

पूजा से पहले खुद को शुद्ध करने (ॐ अपवित्रः पवित्रो वा...), अपने बैठने के आसन को शुद्ध करने (ॐ पृथ्वि! त्वया धृता...) और रुद्राक्ष की माला को शुद्ध करने के मंत्र पढ़े जाते हैं।

पूजा विधिआत्म शुद्धिआसन शुद्धि
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मनसा देवी की कृपा पाने के लिए कौन सा स्तोत्र या मंत्र पढ़ना चाहिए?

माता की कृपा पाने और सांपों के डर से बचने के लिए 'मनसा देवी नागिनी द्वादश नाम स्तोत्र' का रोज पाठ करना चाहिए।

पूजा विधिमनसा देवी स्तोत्रमंत्र जाप
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कामिका एकादशी पर किन खास मंत्रों का जाप करना चाहिए?

इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' और 'विष्णु गायत्री मंत्र' का जाप करना बहुत शुभ माना जाता है। साथ ही 'शान्ताकारं भुजगशयनं...' स्तुति भी पढ़नी चाहिए।

पूजा विधिमंत्र जापद्वादशाक्षर मंत्र
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कामिका एकादशी की सुबह की पूजा विधि और संकल्प क्या है?

सुबह जल्दी उठकर पानी में गंगाजल मिलाकर नहाना चाहिए। फिर हाथ में जल और चावल (अक्षत) लेकर व्रत का संकल्प लें और भगवान के 'श्रीधर' स्वरूप की पूजा करें।

पूजा विधिसंकल्प मंत्रब्रह्म मुहूर्त
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कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु के किस स्वरूप (श्रीधर) की पूजा होती है?

इस दिन भगवान विष्णु के 'श्रीधर' (हृदय में लक्ष्मी को धारण करने वाले) स्वरूप की पूजा होती है। इनकी पूजा से अपार सुख, शांति और ऐश्वर्य मिलता है।

पूजा विधिश्रीधर स्वरूपभगवान विष्णु
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देवशयनी एकादशी पर कौन से खास मंत्र (शयन मंत्र) का जाप करें?

इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करना चाहिए। साथ ही भगवान को सुलाते समय 'सुप्ते त्वयि जगन्नाथ...' (शयन मंत्र) का जाप करने से विशेष कृपा मिलती है।

पूजा विधिशयन मंत्रमूल मंत्र
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देवशयनी एकादशी पर भगवान को किशमिश (दाख) का भोग क्यों लगाते हैं?

शास्त्रों में देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु को ऋतु फल और मिठाई के साथ विशेष रूप से किशमिश (दाख) का भोग लगाने का नियम बताया गया है।

पूजा विधिकिशमिश भोगदाख
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देवशयनी एकादशी की पूजा विधि और सामग्री क्या है?

शेषनाग पर लेटे हुए भगवान विष्णु की पूजा करें। उन्हें पंचामृत से स्नान कराकर पीले कपड़े पहनाएं, पीला चंदन लगाएं और पीले फूल व तुलसी दल चढ़ाकर घी का दीपक जलाएं।

पूजा विधिषोडशोपचार पूजाशयनी स्वरूप
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एकादशी की सुबह नहाने और संकल्प का क्या नियम है?

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में गंगाजल मिले पानी से नहाकर पीले कपड़े पहनने चाहिए। इसके बाद हाथ में जल और फूल लेकर भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लेना चाहिए।

पूजा विधिसंकल्प मंत्रस्नान विधि
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योगिनी एकादशी पर कौन से खास मंत्रों का जाप करना चाहिए?

इस दिन भगवान विष्णु के 'अष्टाक्षर मंत्र' (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जाप सबसे प्रभावशाली होता है। साथ ही 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ भी जरूर करना चाहिए।

पूजा विधिमंत्र जापअष्टाक्षर मंत्र
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योगिनी एकादशी पर पीपल के पेड़ की पूजा का क्या महत्व है?

इस एकादशी पर पीपल के पेड़ को जल चढ़ाने और उसकी 7 परिक्रमा करने से सभी बड़े पाप और 'पितृ दोष' खत्म हो जाते हैं।

पूजा विधिपीपल पूजापितृ दोष
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योगिनी एकादशी की सुबह की पूजा विधि क्या है?

सुबह जल्दी उठकर पानी में तिल डालकर नहाना चाहिए। पीले कपड़े पहनकर भगवान के सामने व्रत का संकल्प लें। फिर विष्णु जी की मूर्ति को पंचामृत से नहलाकर उनकी पूजा करें।

पूजा विधिसंकल्प मंत्रस्नान विधि
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मोहिनी एकादशी पर कौन से मंत्र और स्तोत्र का पाठ करें?

इस दिन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके अलावा 'विष्णु सहस्रनाम', 'नारायण कवच' और भगवद्गीता के 11वें अध्याय का पाठ करना बहुत शुभ होता है।

पूजा विधिमंत्र पाठविष्णु सहस्रनाम
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मोहिनी एकादशी की पूजा विधि और सामग्री क्या है?

भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराकर पीले कपड़े पहनाएं और गर्मी दूर करने के लिए चंदन लगाएं। पीले फूल, फल और तुलसी दल चढ़ाकर घी का दीपक जलाएं।

पूजा विधिषोडशोपचार पूजापूजन सामग्री
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एकादशी की सुबह स्नान और संकल्प का क्या नियम है?

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पानी में गंगाजल या तिल मिलाकर नहाना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु के सामने हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प जरूर लेना चाहिए।

पूजा विधिसंकल्प मंत्रब्रह्म मुहूर्त
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वरूथिनी एकादशी की पूजा विधि क्या है?

दशमी के दिन सात्विक भोजन कर ब्रह्मचर्य का पालन करें। एकादशी की सुबह नहाकर पीले कपड़े पहनें और संकल्प लें। भगवान की पूजा में तुलसी दल जरूर चढ़ाएं। दिन भर फलाहार कर रात में भजन-कीर्तन करें।

पूजा विधिपूजा विधिदशमी नियम
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वरूथिनी एकादशी पर विष्णु जी के किस अवतार की पूजा होती है?

इस दिन भगवान विष्णु के 'वराह अवतार' की पूजा होती है, जिन्होंने पृथ्वी को प्रलय से बचाया था। पूजा में पंचामृत से स्नान कराकर पीले फूल, पीले फल, चंदन और सफेद तिल चढ़ाने चाहिए।

पूजा विधिवराह अवतारविष्णु पूजा
प्र

कामदा एकादशी की सुबह की पूजा विधि (षोडशोपचार) क्या है?

सुबह नहाकर भगवान विष्णु की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं। उन्हें पीले कपड़े पहनाएं, चंदन लगाएं और तुलसी का पत्ता जरूर चढ़ाएं। अंत में खीर या फल का भोग लगाकर आरती करें।

पूजा विधिषोडशोपचार पूजातुलसी दल
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श्राद्ध में कौन सी 10 चीजों का 'महादान' करना चाहिए?

पितरों के मार्ग की रुकावटें दूर करने के लिए श्राद्ध में 10 महादान करने चाहिए: गाय, ज़मीन, काले तिल, सोना, घी, कपड़े, अनाज, गुड़, चांदी और नमक का दान।

पूजा विधिमहादानदान विधान
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श्राद्ध में तर्पण का सही तरीका और एकाक्षरी मंत्र क्या है?

तर्पण करते समय अंगूठे और पहली उंगली (तर्जनी) के बीच के हिस्से से काले तिल मिला हुआ जल छोड़ना चाहिए। जल देते समय "ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः" मंत्र का जाप करें।

पूजा विधितर्पण विधिएकाक्षरी मंत्र
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श्राद्ध की पूजा में काले तिल और कुशा घास का क्या महत्व है?

कुशा (घास) भगवान विष्णु से उत्पन्न हुई है जो पूजा में पवित्रता लाती है। काले तिल पितरों को बहुत पसंद हैं और ये बुरी शक्तियों से श्राद्ध की पूजा की रक्षा करते हैं।

पूजा सामग्रीकाले तिलकुशा घास
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श्राद्ध की 'पंचबलि' क्या है और इसमें किन 5 जीवों को भोजन दिया जाता है?

श्राद्ध में ब्राह्मण को खिलाने से पहले 5 जीवों को भोजन दिया जाता है: गाय (देवताओं के लिए), कुत्ता (यमराज के मार्ग रक्षक), कौआ (पितरों के प्रतिनिधि), देवता (प्रकृति) और चींटी (सूक्ष्म जीवों के लिए)।

पूजा विधिपंचबलिकाक बलि
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कालभैरव को क्या भोग (प्रसाद) चढ़ाना चाहिए?

गृहस्थ लोगों को भगवान भैरव को हमेशा सात्विक भोग जैसे- उड़द की दाल के बड़े, इमरती, गुड़, चना, दही और फलों का प्रसाद ही चढ़ाना चाहिए।

पूजा विधिभोगप्रसाद
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कालभैरव की पूजा में कौन सा दीपक (चौमुखी) जलाना चाहिए?

भगवान कालभैरव की पूजा में हमेशा सरसों के तेल का 'चौमुखी दीपक' (चार बत्तियों वाला दीया) जलाना चाहिए। यह पूजा का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पूजा विधिचौमुखी दीपकसरसों का तेल
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मासिक कालाष्टमी की पूजा विधि क्या है?

शाम या मध्यरात्रि में भगवान भैरव की प्रतिमा के सामने संकल्प लें। उन्हें स्नान कराकर चंदन या भस्म लगाएं। लाल फूल चढ़ाकर, सरसों के तेल का दीपक जलाएं, भोग लगाएं और अंत में आरती करें।

पूजा विधिपूजा विधिसंकल्प मंत्र
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पूजा विधि — प्रश्नोत्तर

पूजा विधि से सम्बन्धित 498+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। सनातन धर्म के विद्वानों द्वारा दिए गए इन उत्तरों में वेद, पुराण, उपनिषद और शास्त्रों के प्रमाण दिए गए हैं। यदि आप पूजा विधि के बारे में कोई भी प्रश्न खोज रहे हैं — चाहे विधि हो, नियम हो, सामग्री हो या लाभ — तो यहाँ आपको शास्त्रसम्मत उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर में स्रोत, विधि और व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया है।

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