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पूजा विधि

पूजा विधि, पूजा के नियम, सामग्री, समय, पूजा घर की व्यवस्था — सभी प्रश्नों के शास्त्रीय उत्तर।

498प्रश्नोत्तर
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दुर्गाष्टमी की पूजा के बाद हवन (अग्नि कार्य) कैसे करें?

आम की लकड़ी, घी, गूगल, तिल और जौ मिलाकर हवन करें। 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे स्वाहा' बोलते हुए आहुति दें और अंत में नारियल और सुपारी अग्नि में डालकर पूर्णाहूति करें।

पूजा विधिहवन विधिअग्नि कार्य
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दुर्गाष्टमी पूजा में माता को कौन सा फूल और भोग (हलवा-चना) चढ़ाएं?

माता को लाल रंग के फूल, विशेषकर लाल 'गुड़हल' या 'कमल' चढ़ाएं। भोग में शुद्ध घी का 'हलवा, पूरी और काले चने' सबसे श्रेष्ठ माने गए हैं। ध्यान रहे, भोग में तुलसी का पत्ता न डालें।

पूजा विधिगुड़हलहलवा चना
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दुर्गाष्टमी की पूजा में कलश और अखंड ज्योति कैसे स्थापित करें?

ईशान कोण में जल भरे कलश में सुपारी, सिक्का और आम के 5 पत्ते डालकर उस पर लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें। कलश के दाहिनी ओर गाय के घी का या बाईं ओर तिल के तेल का अखंड दीपक जलाएं।

पूजा विधिकलश स्थापनाअखंड ज्योति
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मासिक दुर्गाष्टमी की सुबह की पूजा विधि क्या है?

सुबह तिल के जल से स्नान कर लाल कपड़े पहनें। "श्री दुर्गा प्रीत्यर्थं मासिक दुर्गाष्टमी व्रतं अहं करिष्ये" बोलकर संकल्प लें। माता की मूर्ति स्थापित कर गणेश पूजन के बाद माता को पंचामृत से स्नान कराएं और सुहाग सामग्री चढ़ाएं।

पूजा विधिपूजा विधिसंकल्प मंत्र
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सत्यनारायण पूजा में केले के खंभे और कलश क्यों लगाए जाते हैं?

केले का पेड़ पवित्रता, हरियाली और घर में वृद्धि (उर्वरता) का प्रतीक होता है। वहीं, आम के पत्तों और नारियल वाला कलश पूरे ब्रह्मांड और वरुण देवता (जल) का प्रतीक माना जाता है।

पूजा विधिकेले के खंभेकलश स्थापना
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सत्यनारायण भगवान का प्रसाद (सपाद भक्ष्य) कैसे बनता है?

प्रसाद सवा के अनुपात (1.25 किलो या सवा पाव) में बनता है। इसे बनाने के लिए 5 चीजें लगती हैं: आटा (या सूजी), गाय का दूध, गाय का घी, चीनी (या गुड़) और केला।

पूजा विधिसपाद भक्ष्यप्रसाद
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सत्यनारायण पूजा का संकल्प कैसे लें? (मंत्र सहित)

हाथ में जल, चावल और फूल लेकर भगवान का ध्यान करें और मंत्र बोलें: "मम सर्व पाप क्षय पूर्वकं... श्री सत्यनारायण देवता प्रीत्यर्थं पूजनं करिष्ये।" फिर जल ज़मीन पर छोड़ दें।

पूजा विधिसंकल्प मंत्रपूजा विधि
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शनिवार व्रत की पूजा विधि और संकल्प मंत्र क्या है?

शाम के समय पश्चिम दिशा की ओर मुख करके काले कपड़े पर शनि देव (सुपारी/यंत्र) स्थापित करें। संकल्प लें, सरसों का तेल चढ़ाएं, अपराजिता/शमी के फूल चढ़ाकर उड़द की खिचड़ी का भोग लगाएं और दीपक जलाएं।

पूजा विधिपूजा विधिसंकल्प मंत्र
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काली माता को कौन सा फूल चढ़ाएं?

काली माता को लाल 'गुड़हल' का फूल सबसे ज्यादा पसंद है। चूंकि शनिवार का दिन है, इसलिए शनि शांति के लिए नीले रंग का 'अपराजिता' फूल भी चढ़ाना बहुत शुभ होता है।

पूजा विधिपुष्पगुड़हल
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शनिवार काली पूजा की विधि क्या है?

काले कपड़े पहनें, शनि मंदिर में तेल चढ़ाएं। घर आकर माता के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं (जिसमें काले तिल और लौंग हों), लाल फूल चढ़ाएं और चालीसा पढ़ें।

पूजा विधिपूजा विधिदीपक
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प्रदोष काल (शाम) की विस्तृत 'षोडशोपचार पूजा' कैसे की जाती है?

पूजा विधिषोडशोपचार पूजाशिवलिंग स्थापना
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प्रदोष व्रत के प्रातःकालीन नियम और 'संकल्प' का श्लोक क्या है?

पूजा विधिसंकल्प मंत्रप्रातःकालीन नियम
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संकष्टी चतुर्थी में चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें?

चाँद निकलने पर एक लोटे में पानी, कच्चा दूध, चावल, लाल चंदन और लाल फूल मिलाकर चंद्रमा को देखते हुए मंत्रों के साथ अर्घ्य देना चाहिए।

पूजा विधिचंद्र अर्घ्यअर्घ्य मंत्र
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संकष्टी चतुर्थी की पूजा कैसे करें?

शाम को गणेश जी की स्थापना कर पंचामृत से स्नान कराएं। फिर लाल चंदन, लाल फूल, 21 दूर्वा और 21 मोदक चढ़ाकर 'ॐ गं गणपतये नमः' मंत्र का जाप करें और आरती करें।

पूजा विधिपूजा विधिकलश स्थापना
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शिव पूजा के बाद क्षमा प्रार्थना कैसे करें?

पूजा के बाद हाथ जोड़कर शिव जी से प्रार्थना करें कि अज्ञानवश पूजा में जो भी कमी रह गई हो, उसे अपनी कृपा से क्षमा कर सफल बनाएं।

पूजा विधिक्षमा प्रार्थनापूजा मंत्र
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मासिक शिवरात्रि की पूजा में क्या-क्या चढ़ाना चाहिए?

पूजा में दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, बिल्व पत्र और भस्म मुख्य रूप से चढ़ानी चाहिए।

पूजा विधिपूजा सामग्रीबिल्व पत्र
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पार्थिव शिवलिंग की पूजा कैसे करते हैं?

शुद्ध मिट्टी, गोबर और भस्म से अंगूठे के आकार का शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करना 'पार्थिव पूजन' कहलाता है। यह कलयुग में सबसे श्रेष्ठ पूजा है।

पूजा विधिपार्थिव शिवलिंगमिट्टी का शिवलिंग
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शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा कैसे करते हैं?

रात के चार हिस्सों में अलग-अलग चीजों (दूध, दही, घी, शहद) से शिव जी का अभिषेक किया जाता है। हर प्रहर की पूजा का अपना विशेष फल है।

पूजा विधिचार प्रहरअभिषेक
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पूर्णिमा के व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें?

चांदी या तांबे के लोटे में कच्चा दूध, पानी, सफेद फूल, चंदन और चावल मिलाकर चंद्रमा को चढ़ाएं। इसके बाद ही प्रसाद खाकर व्रत खोलें।

पूजा विधिचंद्र अर्घ्यअर्घ्य मंत्र
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पूर्णिमा व्रत की पूजा कैसे करें?

सुबह तिल और आंवले के जल से नहाकर संकल्प लें। शाम को कलश स्थापित कर भगवान सत्यनारायण की 16 तरीकों से पूजा करें, कथा पढ़ें और रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलें।

पूजा विधिसत्यनारायण पूजासंकल्प
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अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण कैसे करें?

दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। तांबे या चाँदी के लोटे में जल और काले तिल लेकर, अंगूठे और पहली उंगली के बीच (पितृ तीर्थ) से जल गिराते हुए पितरों को याद करें।

पूजा विधिपितृ तर्पणकुश की अंगूठी
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शनिवार को छाया दान कैसे करते हैं?

एक लोहे या कांसे की कटोरी में सरसों का तेल लें, उसमें अपना चेहरा देखकर एक सिक्का डालें और उसे मंदिर में दान कर दें। इसे छाया दान कहते हैं।

पूजा विधिछाया दानरोग मुक्ति
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शनिवार व्रत की पूजा कैसे करें?

पश्चिम दिशा की ओर मुख करके काले कपड़े पहनकर पूजा करें। शनि देव को सरसों का तेल, नीले फूल, काले तिल और उड़द की दाल का भोग लगाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

पूजा विधिपूजा विधिसरसों का तेल
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वैभव लक्ष्मी व्रत में श्रीयंत्र की पूजा क्यों करते हैं?

श्रीयंत्र माता लक्ष्मी की शक्ति का साक्षात प्रतीक है। नियम के अनुसार श्रीयंत्र की पूजा के बिना यह व्रत अधूरा माना जाता है।

पूजा विधिश्रीयंत्रअष्टलक्ष्मी
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वैभव लक्ष्मी व्रत में क्या प्रसाद चढ़ता है?

इस व्रत में माता को चावल की खीर या शक्कर-दूध का भोग लगाया जाता है। सफेद और मीठा प्रसाद शुक्र ग्रह और माता लक्ष्मी (क्षीरसागर से उत्पन्न) को अति प्रिय है।

पूजा विधिखीर का प्रसादसफेद भोजन
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वैभव लक्ष्मी व्रत की पूजा कैसे करें?

लाल कपड़ा बिछाकर चावल की ढेरी पर कलश रखें। कलश के ऊपर कटोरी में सिक्का और पीछे श्रीयंत्र रखें। कुमकुम, चंदन लगाकर लाल फूल चढ़ाएं और कथा पढ़ें।

पूजा विधिपूजा विधिकलश स्थापना
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संतोषी माता व्रत की पूजा कैसे करें?

शुक्रवार को कलश स्थापित कर गुड़ और चने का भोग लगाएं। माता की कथा पढ़ें और आरती करें। यह बहुत सरल पूजा है जिसमें किसी मंत्र या पंडित की आवश्यकता नहीं होती।

पूजा विधिपूजा विधिघरेलू धर्म
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संतोषी माता के व्रत में क्या प्रसाद चढ़ता है?

इस व्रत में केवल गुड़ और भुने हुए चने का प्रसाद चढ़ता है। यह दर्शाता है कि माता छप्पन भोग नहीं, बल्कि भक्तों का सच्चा भाव और 'संतोष' देखती हैं।

पूजा विधिगुड़ और चनाप्रसाद
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गुरुवार व्रत की पूजा कैसे करें?

पीले कपड़े पहनकर भगवान विष्णु और केले के पेड़ की स्थापना करें। हल्दी-चंदन का तिलक लगाकर पीले फूल, चने की दाल, गुड़ और जल अर्पित करें। अंत में बेसन का भोग लगाकर कथा और आरती करें।

पूजा विधिपूजा विधिकेले की पूजा
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गणेश जी को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाते हैं?

गणेश पुराण की एक कथा के अनुसार भगवान गणेश ने तुलसी को श्राप दिया था, इसी वजह से गणेश जी की पूजा में तुलसी चढ़ाना बिल्कुल मना है।

पूजा विधितुलसी निषेधगणेश पुराण
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गणेश जी को कितनी दूर्वा चढ़ानी चाहिए?

गणेश जी को 21 दूर्वा (घास) की गांठें चढ़ानी चाहिए। दूर्वा अमृत का प्रतीक है जो भगवान गणेश को शीतलता प्रदान करती है।

पूजा विधिदूर्वा21 गांठें
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बुधवार व्रत की पूजा कैसे करें?

ईशान कोण में कलश और गणेश जी की स्थापना कर पंचामृत से स्नान कराएं। गणेश जी को लाल चंदन, सिंदूर, 21 दूर्वा और मोदक चढ़ाएं तथा बुध देव को हरा कपड़ा और मूंग का हलवा अर्पित कर आरती करें।

पूजा विधिपूजा विधिकलश स्थापना
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बेलपत्र (बिल्व पत्र) किस दिन नहीं तोड़ना चाहिए और इसके क्या नियम हैं?

सोमवार, चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या और सूर्यास्त के बाद बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। सोमवार की पूजा के लिए रविवार को ही बेलपत्र तोड़ लेना चाहिए। बेलपत्र कभी बासी नहीं होता।

पूजा विधिबेलपत्र नियमनिषिद्ध काल
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शिवलिंग पर हल्दी, कुमकुम या तुलसी क्यों नहीं चढ़ानी चाहिए?

भगवान शिव वैरागी हैं, इसलिए सौंदर्य प्रसाधन माने जाने वाले हल्दी-कुमकुम शिवलिंग पर नहीं चढ़ाए जाते। वहीं, जलंधर वध की कथा के कारण शिव पूजा में तुलसी चढ़ाना भी वर्जित है।

पूजा विधिवर्जित सामग्रीकुमकुम निषेध
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सोमवार व्रत की पूजा विधि क्या है और पूजा में कौन-कौन सी सामग्री लगती है?

पूजा में दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, गंगाजल, सफेद फूल, बेलपत्र, चंदन और भस्म लगता है। शिव परिवार का ध्यान कर अभिषेक किया जाता है और फिर चंदन, अक्षत और बेलपत्र अर्पित कर आरती की जाती है।

पूजा विधिपूजा सामग्रीषोडशोपचार पूजा
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हनुमान जी को चोला कैसे चढ़ाते हैं?

हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर चोला चढ़ाया जाता है। यह पौरुष और ब्रह्मचर्य का प्रतीक है। इसे चढ़ाते समय 'सिन्दूरं रक्तवर्णं च...' मंत्र बोलना चाहिए।

पूजा विधिचोलासिंदूर
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मंगलवार व्रत की पूजा कैसे करते हैं?

ईशान कोण में लाल कपड़ा बिछाकर राम-सीता और हनुमान जी की मूर्ति रखें। संकल्प लेकर पंचामृत से स्नान कराएं, चोला चढ़ाएं, लाल फूल और तुलसी दल अर्पित करें और गुड़-गेहूं या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।

पूजा विधिपूजा विधिषोडशोपचार
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षोडशोपचार पूजा में 16 क्या होते हैं?

षोडशोपचार पूजा के 16 उपचार हैं: आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा और पुष्पांजलि-नमस्कार। यह देवता के पूर्ण आतिथ्य की भावना से की जाने वाली सबसे विस्तृत पूजन विधि है।

पूजा एवं अनुष्ठानषोडशोपचारसोलह उपचार
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पंचोपचार पूजा क्या होती है?

पंचोपचार पूजा में पाँच उपचारों से देवता की सेवा की जाती है — गंध (चंदन), पुष्प (फूल), धूप, दीप और नैवेद्य (भोग)। यह सरलतम शास्त्रोक्त पूजन विधि है जो समय कम हो तो भी पूर्ण फल देती है।

पूजा एवं अनुष्ठानपंचोपचारपूजन विधि
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पूजा थाली में कौन-कौन सी चीजें होनी चाहिए?

पूजा थाली में रोली, अक्षत, चंदन, दीपक, धूप, फूल, फल, जल का लोटा, पान-सुपारी, कपूर और मौली अवश्य होनी चाहिए। अवसर के अनुसार बेलपत्र, दूर्वा, तुलसी, नारियल भी रखें।

पूजा एवं अनुष्ठानपूजा थालीपूजा सामग्री
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पूजा में शंख बजाने की सही विधि क्या है?

पूजा में शंख बजाने से पहले विष्णु का ध्यान करें, फिर एक बार में तीन बार बजाएं। शिव पूजा में शंख न बजाएं। बजाने और जल अर्पण के लिए अलग-अलग शंख का उपयोग करें।

पूजा विधि एवं नियमशंखशंखनाद
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घर में शंख रखने के नियम क्या हैं?

शंख को पूजाघर के ईशान कोण में, लाल-पीले वस्त्र पर रखें। बजाने और जल अर्पण के लिए अलग-अलग शंख रखें। दक्षिणावर्ती शंख केवल पूजा के लिए है। शिव पूजा में शंख न बजाएं, न उससे जल चढ़ाएं।

पूजा विधि एवं नियमशंखवास्तु
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मूर्ति का मुख किस दिशा में होना चाहिए?

मूर्ति का मुख प्रायः पश्चिम दिशा में हो, ताकि पूजा करने वाले का मुख पूर्व में रहे। पूजाघर घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में सर्वोत्तम होता है। अलग-अलग देवताओं के लिए दिशाएं भिन्न हो सकती हैं।

पूजा विधि एवं नियममूर्ति दिशावास्तु
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टूटी मूर्ति घर में रखनी चाहिए या नहीं?

नहीं, टूटी मूर्ति घर या पूजाघर में नहीं रखनी चाहिए। इसे नदी में विसर्जित करें और नई मूर्ति स्थापित करें। शिवलिंग अपवाद है — वह टूटने के बाद भी पूजनीय रहता है।

पूजा विधि एवं नियमखंडित मूर्तिवास्तु
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देव प्रतिमा टूट जाए तो क्या करें?

खंडित मूर्ति को पूजाघर से हटाएं, बहते जल में विसर्जित करें और नई मूर्ति स्थापित करें। मूर्ति कूड़े में न फेंकें। शिवलिंग टूटने पर अपवाद है — उसे खंडित नहीं माना जाता।

पूजा विधि एवं नियममूर्तिखंडित मूर्ति
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पूजा सामग्री को कूड़े में फेंक सकते हैं क्या?

नहीं, पूजा सामग्री कूड़े में नहीं फेंकनी चाहिए। फूल-पत्ते नदी में या पेड़ की जड़ में, राख तुलसी में, प्रसाद पशु-पक्षियों को, और पुराने चित्र पवित्र अग्नि में विसर्जित करें।

पूजा विधि एवं नियमपूजा सामग्रीविसर्जन
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भगवान के विसर्जित फूल कहाँ डालें?

भगवान के विसर्जित फूल नदी में प्रवाहित करें, पीपल या तुलसी की जड़ में रखें, या पवित्र भूमि में दबाएं। कूड़े में नहीं फेंकें — ये देव-अर्पित होने के बाद पूजनीय हो जाते हैं।

पूजा विधि एवं नियमपूजा फूलविसर्जन
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पूजा के बाद आरती का जल कहाँ डालें?

पूजा और आरती का जल तुलसी के पौधे में, पीपल की जड़ में या पवित्र नदी में डालें। इसे नाली या अपवित्र स्थान में न बहाएं। चरणामृत प्रसाद रूप में ग्रहण करना सर्वोत्तम है।

पूजा विधि एवं नियमआरतीपूजा जल
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पंचामृत अभिषेक के बाद क्या करें?

अभिषेक के बाद मूर्ति को गंगाजल से धोएं, पोंछें और पुनः पूजन करें। पंचामृत को दोनों हाथों में लेकर शीश से लगाकर प्रसाद ग्रहण करें और भक्तों में वितरित करें। इसे नाली में न बहाएं।

पूजा विधि एवं नियमपंचामृतअभिषेक
प्र

पूजा में पंचामृत क्या होता है और कैसे बनाएं?

पंचामृत — दूध, दही, घी, शहद और मिश्री — इन पाँचों को मिलाकर बनाया जाता है। अंत में तुलसी डालें। यह देव-अभिषेक के लिए प्रयोग होता है और बाद में प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया जाता है।

पूजा विधि एवं नियमपंचामृतअभिषेक
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पूजा में नैवेद्य के नियम क्या हैं?

नैवेद्य सात्विक, ताजा, और स्वच्छता से बना हो। बनाते समय चखें नहीं। भगवान के सामने ध्यान से अर्पित करें, आचमन जल दें, फिर प्रसाद लें। बासी या अशुद्ध भोग न चढ़ाएं।

पूजा विधि एवं नियमनैवेद्यभोग
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नीले फूल किस देवता को चढ़ाएं?

नीले फूल मुख्यतः शनिदेव को चढ़ाए जाते हैं। अपराजिता (नीला फूल) शनि, विष्णु, दुर्गा और शिव को प्रिय है। शनिवार को अपराजिता अर्पित करने से शनि दोष दूर होता है।

देवी-देवता पूजननीला फूलअपराजिता
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केतकी का फूल शिव पूजा में क्यों नहीं चढ़ाते?

शिव पुराण के अनुसार केतकी के फूल ने ब्रह्माजी के पक्ष में झूठी गवाही दी थी। इसलिए भगवान शिव ने उसे श्राप दिया कि वह कभी उनकी पूजा में स्वीकार नहीं होगा। तभी से केतकी शिव पूजा में वर्जित है।

देवी-देवता पूजनकेतकीशिव पूजा
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कमल का फूल किस देवता को चढ़ाते हैं?

कमल मुख्यतः माता लक्ष्मी को चढ़ाया जाता है, जो कमल पर विराजती हैं। भगवान विष्णु, सरस्वती और दुर्गा को भी कमल प्रिय है। नील कमल माता दुर्गा को विशेष रूप से अर्पित होता है।

देवी-देवता पूजनकमलफूल
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गणेश जी को दूर्वा क्यों चढ़ाते हैं?

मुद्गल पुराण के अनुसार अनलासुर राक्षस को निगलने के बाद गणेश जी के पेट में जलन हुई, जो केवल 21 दूर्वा खाने से शांत हुई। तभी से गणेश को दूर्वा अर्पण की परंपरा है। दूर्वा गणेश को सर्वाधिक प्रिय है।

देवी-देवता पूजनगणेशदूर्वा
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देवी को सिंदूर चढ़ाते हैं क्या?

हाँ, देवी को सिंदूर अर्पित करते हैं। विशेष रूप से मां दुर्गा को सिंदूर बहुत प्रिय है। नवरात्रि में 'सिंदूर खेला' की परंपरा इसी भाव से है। देवी की माँग या मस्तक पर सिंदूर लगाना उनके सौभाग्यस्वरूप का सम्मान है।

पूजा विधि एवं नियमदेवी पूजासिंदूर
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पूजा में कुमकुम और रोली में क्या अंतर है?

कुमकुम और रोली दोनों हल्दी और चूने के मिश्रण से बनते हैं और लाल होते हैं। दोनों पूजा में तिलक और देव-अर्पण के लिए उपयोगी हैं। सिंदूर इनसे अलग है — वह सिर्फ सुहागिनें मांग में लगाती हैं।

पूजा विधि एवं नियमकुमकुमरोली
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एकादशी पर तुलसी पूजा कैसे करें?

एकादशी पर तुलसी के पत्ते न तोड़ें, जल न चढ़ाएं। एक दिन पहले दशमी को पत्ते तोड़कर रख लें। एकादशी पर दीपक जलाकर, धूप-पूजन करके, तुलसी स्तुति और विष्णु ध्यान के साथ पूजा करें।

पूजा विधि एवं नियमएकादशीतुलसी पूजा
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रविवार को तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए क्यों?

रविवार को माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, इसलिए उस दिन पत्ते तोड़ना या जल चढ़ाना उनके व्रत को खंडित करना माना जाता है। विष्णु पुराण में यह स्पष्ट वर्जित है।

पूजा विधि एवं नियमतुलसीरविवार
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तुलसी के पत्ते तोड़ने का सही समय क्या है?

सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच, स्नान के बाद, उंगलियों के पोर से, हाथ जोड़कर प्रार्थना करके तुलसी पत्ते तोड़ें। रविवार, एकादशी, ग्रहण, संध्याकाल और मृत्यु-सूतक में पत्ते तोड़ना वर्जित है।

पूजा विधि एवं नियमतुलसीतुलसी पत्ते
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पूजा विधि — प्रश्नोत्तर

पूजा विधि से सम्बन्धित 498+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। सनातन धर्म के विद्वानों द्वारा दिए गए इन उत्तरों में वेद, पुराण, उपनिषद और शास्त्रों के प्रमाण दिए गए हैं। यदि आप पूजा विधि के बारे में कोई भी प्रश्न खोज रहे हैं — चाहे विधि हो, नियम हो, सामग्री हो या लाभ — तो यहाँ आपको शास्त्रसम्मत उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर में स्रोत, विधि और व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया है।

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