विस्तृत उत्तर
जालंधर पुराणों में वर्णित एक अत्यंत बलशाली दैत्य राजा था। शिव पुराण के अनुसार उसका जन्म भगवान शिव के तीसरे नेत्र से निकली क्रोधाग्नि से हुआ था, जिसे शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए समुद्र में फेंक दिया। वही तेज समुद्र के जल में एक बालक के रूप में प्रकट हुआ। समुद्र ने उसे पुत्र के रूप में पाला और ब्रह्मा जी ने उसका नाम जालंधर रखा। वह शिव-अंश से उत्पन्न होने के कारण अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी था, पर बाद में अहंकार, प्रतिशोध और वासना के कारण देवताओं और स्वयं शिव के विरुद्ध खड़ा हो गया।
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