विस्तृत उत्तर
जालंधर की पत्नी वृंदा थी, जिसे आगे चलकर तुलसी के रूप में पूजा गया। वृंदा अत्यंत पतिव्रता, शीलवान और भगवान विष्णु की परम भक्त मानी जाती है। असुर कुल में जन्म लेने के बावजूद वह आसुरी प्रवृत्तियों से दूर थी और भक्ति, तप तथा धर्म में स्थित थी। विवाह के बाद उसने जालंधर को अपना पति-धर्म मानकर पूर्ण निष्ठा से सेवा की। उसके अखंड सतीत्व के कारण जालंधर अजेय बना रहा। जब तक वृंदा का पतिव्रत सुरक्षित था, तब तक देवता, विष्णु और शिव भी जालंधर को मार नहीं पा रहे थे।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





