विस्तृत उत्तर
कीर्तिमुख की उत्पत्ति भगवान शिव के क्रोध से हुई। जालंधर ने राहु को दूत बनाकर शिव के पास भेजा और पार्वती को सौंपने जैसा अपमानजनक संदेश कहलवाया। यह सुनकर शिव के भृकुटी-मध्य से एक भयंकर सिंहमुखी गण प्रकट हुआ। वह राहु को निगलने दौड़ा, पर राहु ने शरण माँग ली। शिव ने उसे दूत मानकर बचा लिया। तब वह गण अपनी भूख शांत करने के लिए शिव से आज्ञा माँगने लगा। शिव ने उसे स्वयं अपना शरीर खाने को कहा। उसने आज्ञा का पालन किया। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उसे कीर्तिमुख कहा।
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