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विस्तृत उत्तर
कृष्ण ने शिशुपाल को इसलिए मारा क्योंकि उसने राजसूय यज्ञ की सभा में मर्यादा की सीमा पार कर दी थी। कृष्ण ने उसकी माता को वचन दिया था कि वे शिशुपाल के सौ अपराध क्षमा करेंगे। जब शिशुपाल ने बार-बार अपमान किया और सौ से अधिक अपराध कर दिए, तब भगवान ने सुदर्शन चक्र से उसका वध किया। जय-विजय कथा के अनुसार यह केवल दंड नहीं था, बल्कि जय के तीसरे शत्रु जन्म की समाप्ति भी थी। मृत्यु के बाद उसकी ज्योति कृष्ण में समाती दिखाई दी, जो उसके उद्धार का संकेत था।
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