विस्तृत उत्तर
तुलसी की उत्पत्ति वृंदा की अग्नि-समाधि के बाद हुई मानी जाती है। जब वृंदा को विष्णु के छल और जालंधर की मृत्यु का सत्य ज्ञात हुआ, तब उसने विष्णु को श्राप दिया और अपने पति के प्रति पतिव्रत भाव से अग्नि में प्रवेश किया। उसके शरीर की भस्म पवित्र मानी गई। देवियों ने उस भस्म पर दिव्य बीज रोपे, जिनसे तुलसी सहित पवित्र पौधे उत्पन्न हुए। तुलसी को वृंदा का ही पुनर्जन्म माना गया। भगवान विष्णु ने तुलसी को वरदान दिया कि उनके पूजन में तुलसी दल अनिवार्य होगा और बिना तुलसी उनका भोग पूर्ण नहीं माना जाएगा।
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