विस्तृत उत्तर
विष्णु जी ने ब्रह्मचारी रूप इसलिए लिया क्योंकि भस्मासुर को बल से रोकना उचित समाधान नहीं था। उसके पास शिव जी का वरदान था और वह अत्यंत उत्तेजित अवस्था में शिव जी के पीछे दौड़ रहा था। ब्रह्मचारी रूप शांत, निष्कपट और विश्वसनीय प्रतीत होता है। विष्णु जी ने इसी रूप में उससे सहानुभूति से बात की, उसकी थकान पूछी और उसे अपने पक्ष में कर लिया। फिर धीरे-धीरे उसकी बुद्धि को भ्रमित कर दिया। इस रूप से भगवान ने दिखाया कि कई बार धर्म की रक्षा शस्त्र से नहीं, बल्कि वाणी, मनोविज्ञान और योगमाया से होती है।
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