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विस्तृत उत्तर
इस कथा में विष्णु की श्वास को ब्रह्मांड के जन्म और लय से जोड़ा गया है। जब श्वास बाहर आती है, तो सृष्टि, गति और समय का विस्तार होता है। जब श्वास भीतर जाती है, तो वही सृष्टि अपने कारण रूप में लौटकर प्रलय की ओर जाती है। इसलिए विष्णु की श्वास को ब्रह्मांडीय जीवन की धड़कन की तरह समझाया गया है।
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