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तिथि

त्रयोदशी तिथि — तिथि — विधि, व्रत, पूजन प्रश्नोत्तर(140)

त्रयोदशी तिथि से जुड़े 140 प्रश्न — विधि, नियम, मंत्र, लाभ। शास्त्र-सम्मत व्याख्या एक स्थान पर।

विशेष फल

सातों दिन के प्रदोष व्रत का फल?

रविवार को आयु बढ़ती है, सोमवार को इच्छाएं पूरी होती हैं, मंगलवार को कर्ज से मुक्ति, बुधवार को ज्ञान, गुरुवार को शत्रुओं का नाश, शुक्रवार को विवाह, और शनिवार को शनि दोष दूर होता है।

#वारानुसार फल#लाभ#सप्ताह
पूजा विधि

प्रदोष काल में दीपदान?

इस पूजा में दो दीपक जलाए जाते हैं। पहला 'शुद्ध घी' का दीपक शिव जी के लिए, और दूसरा 'सरसों के तेल' का दीपक घर के बाहर पीपल के पेड़ के नीचे पितरों के लिए।

#दीपदान#पितृ हेतु#शिव हेतु
पूजा विधि

प्रदोष व्रत का संकल्प कैसे लें?

हाथ में जल लेकर 'ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः...' मंत्र पढ़ते हुए अपना नाम, गोत्र और दिन बोलकर शिव-पार्वती और नंदी की पूजा करने का संकल्प (प्रतिज्ञा) लेना चाहिए।

#संकल्प मंत्र#प्रदोष पूजा#विधि
स्तोत्र पाठ

कर्ज मुक्ति के लिए प्रदोष मंत्र?

कर्ज और गरीबी से छुटकारा पाने के लिए शिव जी का 'प्रदोष स्तोत्रम्' (महादारिद्र्यमग्नस्य महापापहतस्य च...) पढ़ना चाहिए।

#ऋण मोचन#दारिद्र्य#प्रदोष स्तोत्र
स्तोत्र पाठ

प्रदोष स्तोत्राष्टकम् क्या है?

यह स्कंद पुराण में लिखा एक खास पाठ है, जिसका अर्थ है कि इस जन्म और मरण के भयंकर संसार में केवल शिव जी के चरणों की सेवा ही एकमात्र सत्य है।

#स्कंद पुराण#स्तोत्राष्टकम्#शिव महिमा
मंत्र साधना

प्रदोष व्रत के मुख्य मंत्र?

इस पूजा में मुख्य रूप से 4 मंत्र जपे जाते हैं: 'ॐ नमः शिवाय', 'महामृत्युंजय मंत्र', 'शिव गायत्री मंत्र' और 'ॐ उमा सहित शिवाय नमः'।

#शिव मंत्र#पंचाक्षर#महामृत्युंजय
पौराणिक रहस्य

प्रदोष में शिव पूजा क्यों होती है?

समुद्र मंथन से निकले जहर को शिव जी ने इसी समय पीकर दुनिया को बचाया था और 'आनंद तांडव' किया था। इसलिए इस समय शिव पूजा का सबसे ज्यादा महत्व है।

#समुद्र मंथन#हलाहल विष#आनंद तांडव
काल निर्णय

प्रदोष पूजा का सही समय?

प्रदोष काल का सबसे सही समय सूर्यास्त (सूरज डूबने) से 45 मिनट पहले शुरू होकर सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक रहता है (कुल 90 मिनट)।

#पूजा समय#सूर्यास्त#90 मिनट
परिचय

प्रदोष काल क्या होता है?

'प्रदोष' का मतलब है दोषों (पापों और कष्टों) का निवारण। यह दिन और रात के मिलने का वह समय है जब शिव पूजा करने से सारे पाप खत्म हो जाते हैं।

#प्रदोष#दोष निवारण#संधिकाल
तिथि निर्णय

दुर्गाष्टमी व्रत में उदयातिथि और प्रदोष काल में किसे चुनें?

गृहस्थों को सामान्य व्रत के लिए सुबह (उदयातिथि) वाली अष्टमी चुननी चाहिए। लेकिन तांत्रिक और विशेष सिद्धियों के लिए शाम (प्रदोष) और रात वाली अष्टमी चुनी जाती है।

#प्रदोष काल#उदयातिथि#तांत्रिक पूजा
नियम और वर्जनाएं

प्रदोष व्रत में आचार संहिता (सोना, ब्रह्मचर्य) और क्षमा प्रार्थना का क्या नियम है?

#आचार संहिता#क्षमा प्रार्थना#ब्रह्मचर्य
नियम और वर्जनाएं

प्रदोष व्रत में आहार (नमक और अन्न) को लेकर क्या कड़े नियम हैं?

#नमक निषेध#अन्न निषेध#नक्त व्रत
मंत्र और स्तोत्र

प्रदोष काल में जपने वाले प्रमुख मंत्र और 'प्रदोष स्तोत्र' (स्कंद पुराण) क्या है?

#प्रदोष स्तोत्र#महामृत्युंजय मंत्र#पंचाक्षर मंत्र
पूजा विधि

प्रदोष काल (शाम) की विस्तृत 'षोडशोपचार पूजा' कैसे की जाती है?

#षोडशोपचार पूजा#शिवलिंग स्थापना#बिल्व पत्र
पूजा विधि

प्रदोष व्रत के प्रातःकालीन नियम और 'संकल्प' का श्लोक क्या है?

#संकल्प मंत्र#प्रातःकालीन नियम#ब्रह्म मुहूर्त
वार भेद और फल

शनि प्रदोष को इतना अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली क्यों माना गया है?

#शनि प्रदोष#संतान प्राप्ति#साढ़े-साती
वार भेद और फल

गुरु प्रदोष (गुरुवार) और भृगुवारा प्रदोष (शुक्रवार) के क्या फल हैं?

#गुरु प्रदोष#शुक्र प्रदोष#सौभाग्य
वार भेद और फल

भौम प्रदोष (मंगलवार) और सौम्यवारा प्रदोष (बुधवार) का क्या महत्व है?

#भौम प्रदोष#सौम्यवारा प्रदोष#ऋण मोचन
वार भेद और फल

रवि प्रदोष और सोम प्रदोष व्रत के विशिष्ट फल क्या हैं?

#रवि प्रदोष#सोम प्रदोष#आरोग्य
पौराणिक कथा

भगवान शिव के 'तांडव नृत्य' और देवताओं के वादन का प्रदोष काल से क्या संबंध है?

#तांडव नृत्य#प्रसन्न मुद्रा#शिव नृत्य
पौराणिक कथा

समुद्र मंथन में भगवान शिव के 'नीलकंठ' स्वरूप का प्रदोष व्रत से क्या संबंध है?

#समुद्र मंथन#नीलकंठ#हलाहल विष
काल-निर्णय

प्रदोष व्रत में 'तिथि क्षय' और 'साम्यावस्था' के नियम क्या हैं?

#तिथि क्षय#साम्यावस्था#तिथि निर्णय
काल-निर्णय

प्रदोष व्रत किस दिन रखें? 'प्रदोष व्यापिनी' और 'पूर्ण व्याप्ति' का नियम क्या है?

#प्रदोष व्यापिनी#पूर्ण व्याप्ति#धर्म सिंधु
व्रत के प्रकार

नित्य प्रदोष, पक्ष प्रदोष और महाप्रदोष में क्या अंतर है?

#नित्य प्रदोष#पक्ष प्रदोष#महाप्रदोष
काल-निर्णय

प्रदोष काल की घटिका और त्रिमूहूर्त गणना कैसे की जाती है?

#घटिका गणना#त्रिमूहूर्त#समय गणना
व्रत का महत्व

प्रदोष काल का आध्यात्मिक और दार्शनिक अर्थ क्या है?

#प्रदोष काल#आध्यात्मिक अर्थ#शिव तांडव
व्रत एवं उपवास

प्रदोष व्रत विधि और समय

प्रदोष व्रत त्रयोदशी को रखा जाता है। पूजा का समय — सूर्यास्त से ४५ मिनट पहले से ४५ मिनट बाद (प्रदोष काल) — सबसे शुभ है। स्नान, उपवास, शिवलिंग पूजा, बेलपत्र, जल अभिषेक और कथा श्रवण इसके मुख्य अंग हैं।

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व्रत एवं उपवास

प्रदोष व्रत में क्या खाना चाहिए?

प्रदोष व्रत में फलाहार किया जाता है — फल, दूध-दही, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, मखाना, उबले आलू। अन्न, लहसुन-प्याज और सामान्य नमक वर्जित हैं। पूर्ण उपवास करना सर्वोत्तम है।

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व्रत

प्रदोष व्रत कैसे रखें शिव पूजा विधि सहित

प्रदोष: त्रयोदशी (दोनों पक्ष)। दिनभर उपवास → प्रदोष काल (सूर्यास्त + ~2.5 घंटे) में शिवलिंग अभिषेक + बिल्वपत्र + 'ॐ नमः शिवाय' 108 बार। सोम प्रदोष = अत्यन्त शुभ, शनि प्रदोष = शनि दोष निवारण। शिव पुराण में माहात्म्य।

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शिव पूजा

शिव पूजा से मनोकामना कैसे पूरी होती है?

शिव पूजा से मनोकामना: शिव पुराण — 'आशुतोषः भक्तानां वाञ्छितप्रदः।' चमकम् (तैत्तिरीय संहिता 4.7): 346 इच्छाओं की वैदिक प्रार्थना। प्रदोष पूजा — स्कंद पुराण: सर्वकामप्रदायिनी। विशिष्ट कामना: दूध (पुत्र), दही (धन), शहद (वाक्), घी (मोक्ष)। 16 सोमवार व्रत।

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शिव पूजा

शिव पूजा का सही समय क्या है?

शिव पूजा समय: निशीथ काल (अर्धरात्रि) — सर्वोत्तम (शिव रात्रि-देवता)। प्रदोष (त्रयोदशी सूर्यास्त बाद) — स्कंद पुराण। ब्रह्म मुहूर्त — नित्य पूजा। महाशिवरात्रि: 4 प्रहर, तृतीय प्रहर (12-3 बजे) सर्वश्रेष्ठ। वर्जित: राहु काल, गुलिक काल।

#शिव पूजा#समय#प्रदोष
शिव पूजा

जलाभिषेक करने का सही समय क्या है?

जलाभिषेक समय: ब्रह्म मुहूर्त (सर्वोत्तम)। प्रदोष काल (त्रयोदशी को सूर्यास्त बाद — स्कंद पुराण)। सोमवार — शिव-दिन। सावन — संपूर्ण मास श्रेष्ठ। महाशिवरात्रि — 4 प्रहर अभिषेक। राहु काल में वर्जित।

#जलाभिषेक#समय#प्रदोष
पूजा समय

शिवलिंग की पूजा कब करनी चाहिए?

शिवलिंग पूजा के लिए: ब्रह्ममुहूर्त सर्वोत्तम, प्रदोष काल शिव का विशेष समय। सोमवार और श्रावण मास में पूजा विशेष पुण्यकारी है। प्रदोष व्रत (त्रयोदशी) — शिव पूजा का महाकाल। नित्य एक निश्चित समय पर पूजा करें।

#पूजा समय#प्रदोष#सोमवार
जप समय

शिव मंत्र जप का सही समय क्या है?

शिव मंत्र जप के लिए: ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-5:36) सर्वोत्तम। प्रदोष काल (त्रयोदशी की सायं) शिव का विशेष समय — इस काल में जप महाफलदायी। सोमवार और श्रावण मास में नित्य जप विशेष पुण्यकारी।

#शिव जप समय#प्रदोष#ब्रह्ममुहूर्त
साधना समय

लक्ष्मी मंत्र जप का समय क्या है?

लक्ष्मी मंत्र जप के लिए ब्रह्ममुहूर्त (4-6 बजे प्रातः) और प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) सर्वश्रेष्ठ हैं। शुक्रवार को जप का फल सात गुना अधिक है। शरद पूर्णिमा, दीपावली और अक्षय तृतीया वार्षिक विशेष समय हैं।

#मंत्र जप समय#शुक्रवार#प्रदोष
पूजा विधि

शिवलिंग की पूजा कब करनी चाहिए?

प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त और प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) शिव पूजा के सर्वश्रेष्ठ समय हैं। सोमवार और त्रयोदशी (प्रदोष) विशेष रूप से शुभ हैं। सावन माह और महाशिवरात्रि सर्वोत्तम अवसर हैं।

#पूजा समय#शिव पूजा#प्रदोष
साधना विधि

शिव मंत्र जप का सही समय क्या है?

शिव मंत्र जप के लिए ब्रह्ममुहूर्त (4-6 बजे प्रातः) सर्वश्रेष्ठ है। प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) और अर्धरात्रि भी शिव जी को प्रिय है। सोमवार और सावन माह में जप का विशेष महत्व है।

#मंत्र जप#समय#ब्रह्ममुहूर्त
शिव पूजा नियम

शिव मंदिर में किस समय दर्शन सबसे शुभ होते हैं?

ब्रह्ममुहूर्त (4-5:30 AM) सर्वोत्तम। प्रातःकाल (6-11 AM) दैनिक दर्शन। प्रदोष काल (सूर्यास्त) विशेष (स्कन्द पुराण — शिव तांडव)। शिवरात्रि निशिता काल। दोपहर 12-3 कुछ मंदिरों में बंद। शिव = महाकाल — सच्चे मन से कभी भी।

#मंदिर#दर्शन#समय
शिव पर्व

सोम प्रदोष और शनि प्रदोष में शिव पूजा कैसे अलग होती है?

सोम प्रदोष: सर्वश्रेष्ठ — दूध अभिषेक, चंद्र दोष शांति, मनोकामना, दाम्पत्य सुख। शनि प्रदोष: शनि दोष निवारण — तिल तेल दीपक, सरसों तेल अभिषेक, साढ़ेसाती/ढैय्या मुक्ति। दोनों में प्रदोष काल (संध्या) पूजा समान।

#सोम प्रदोष#शनि प्रदोष#त्रयोदशी
शिव पर्व

प्रदोष काल में शिव पूजा की विशेष विधि क्या है?

प्रदोष काल = सूर्यास्त के आसपास 2.5 घंटे — शिव तांडव करते हैं (स्कन्द पुराण)। त्रयोदशी का प्रदोष विशेष। विधि: जलाभिषेक → पंचामृत → बेलपत्र → 108 जप → स्तोत्र पाठ → कर्पूर आरती। व्रत सूर्योदय-सूर्यास्त, प्रदोष पूजा के बाद खोलें।

#प्रदोष#त्रयोदशी#संध्या
आज का पंचांग
आज की तिथि, नक्षत्र, मुहूर्त

पंचांग सहित दैनिक मुहूर्त, राहु काल और चौघड़िया।

पर्व-पञ्चांग
सभी पर्व देखें

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी — पर्व-केन्द्रित प्रश्नोत्तर।