शिव परिवार कथाशिव और पार्वती की पुत्री अशोकसुंदरी की कथा क्या हैअशोकसुंदरी शिव-पार्वती की पुत्री हैं जो पार्वती के अकेलेपन को दूर करने के लिए कल्पवृक्ष से उत्पन्न हुईं। नहुष से विवाह हुआ और उनके पुत्र ययाति से यादव-पुरु वंश चला। यह कथा पद्म पुराण में वर्णित है।#अशोकसुंदरी#कल्पवृक्ष#नहुष
शिव-सती-पार्वती कथाशिव-पार्वती का विवाह किस तिथि को हुआ थाशिव-पार्वती का विवाह फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को हुआ — यही महाशिवरात्रि है। इसीलिए महाशिवरात्रि मनाने का एक प्रमुख कारण यह दिव्य विवाह-उत्सव है।#शिव पार्वती विवाह तिथि#महाशिवरात्रि#फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी
शिव-सती-पार्वती कथाकामदेव को अनंग क्यों कहते हैंकामदेव के शरीर को शिव के तृतीय नेत्र ने भस्म किया। पुनर्जीवन मिला पर शरीर नहीं — केवल प्रेम-शक्ति के रूप में। इसीलिए वे 'अनंग' (बिना शरीर के) कहलाए। द्वापर में कृष्ण-पुत्र प्रद्युम्न के रूप में पुनः जन्म हुआ।#अनंग#कामदेव#शरीर रहित
शिव-सती-पार्वती कथाकामदेव की मृत्यु के बाद रति ने क्या कियाकामदेव के भस्म होने पर रति ने शिव से क्षमायाचना और कठोर तपस्या की। पार्वती के निवेदन से शिव ने वरदान दिया — फाल्गुन पूर्णिमा को कामदेव अनंग रूप में जीवित होंगे और द्वापर में कृष्ण-पुत्र प्रद्युम्न के रूप में जन्मेंगे।#रति विलाप#कामदेव पुनर्जन्म#रति तपस्या
शिव-सती-पार्वती कथाशिव ने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म किया — इस कथा का विस्तार क्या हैकामदेव बसंत और रति के साथ आए, पुष्प-बाण से शिव की समाधि भंग की। क्रोधित शिव के तृतीय नेत्र से अग्नि निकली और कामदेव भस्म हुए। इसी दिन से होलाष्टक के आठ दिनों का आरंभ माना जाता है।#कामदेव भस्म विस्तार#तीसरा नेत्र#पुष्प बाण
शिव-सती-पार्वती कथाइंद्र ने कामदेव को शिव की तपस्या भंग करने क्यों भेजातारकासुर का वरदान था कि उसका वध केवल शिव-पुत्र के हाथों होगा। इसके लिए शिव-पार्वती का विवाह आवश्यक था। शिव की समाधि अन्यथा भंग नहीं होती थी — इसलिए इंद्र ने कामदेव को भेजा।#इंद्र कामदेव#तारकासुर#देवता योजना
शिव-सती-पार्वती कथाकामदेव को शिव ने भस्म क्यों कियाकामदेव ने देवताओं के निर्देश पर पुष्प-बाण से शिव की समाधि भंग की। क्रोधित शिव ने तृतीय नेत्र खोला और कामदेव भस्म हो गए। शिव वासना के विरोधी हैं — यही उनके दंड का दार्शनिक कारण है।#कामदेव भस्म#शिव तीसरा नेत्र#तपस्या भंग
शिव-सती-पार्वती कथाशिव ने ब्रह्मचारी रूप में क्या किया था पार्वती के साथब्रह्मचारी वेश में शिव ने अपनी ही निंदा की और पार्वती की परीक्षा ली। पार्वती ने क्रोध से उत्तर दिया — 'शिव की निंदा असह्य है' — यह दृढ़ता देखकर शिव प्रसन्न होकर असली रूप में प्रकट हुए।#शिव परीक्षा#पार्वती दृढ़ता#शिव निंदा
शिव-सती-पार्वती कथाशिव ने ब्रह्मचारी वेश में पार्वती की परीक्षा क्यों लीशिव ने ब्रह्मचारी वेश में इसलिए परीक्षा ली कि पार्वती की भक्ति वास्तविक है या नहीं। पहले सप्तर्षियों को भेजा, फिर स्वयं वटुवेश धारण कर गए।#शिव ब्रह्मचारी वेश#पार्वती परीक्षा#वटुवेश
शिव-सती-पार्वती कथापार्वती की तपस्या से शिव क्यों प्रसन्न नहीं होते थेशिव महायोगी थे, सती के वियोग में गहरी समाधि में थे और पार्वती की परीक्षा भी लेनी थी। इसीलिए तपस्या के बावजूद ध्यान नहीं दिया — जब तक कामदेव ने पुष्प-बाण से समाधि भंग नहीं की।#शिव योगी#सती वियोग#पार्वती परीक्षा
शिव-सती-पार्वती कथापार्वती ने कितने वर्ष तपस्या की शिव को पाने के लिएशिव पुराण के अनुसार पार्वती ने 3,000 वर्ष कठोर तपस्या की। कुछ परंपराओं में इससे भी अधिक और 108 जन्मों की तपस्या का उल्लेख है। तपस्या की कठोरता सभी परंपराओं में सर्वसम्मत है।#पार्वती तपस्या वर्ष#3000 वर्ष#कठोर तप
शिव-सती-पार्वती कथाहिमवान की पुत्री पार्वती ने शिव को पाने के लिए क्या कियापार्वती ने हिमालय के गौरी-शिखर पर 3,000 वर्ष कठोर तपस्या की — पहले फलाहार, फिर पत्ते और फिर कुछ नहीं (अपर्णा)। शिव-नाम जप, उपवास और पंचाग्नि साधना से शिव का आसन हिला।#पार्वती तपस्या#शिव प्राप्ति#कठोर तप
शिव-सती-पार्वती कथासती ने दूसरा जन्म किसके घर लियासती ने दूसरा जन्म हिमनरेश हिमवान और रानी मेना के घर पार्वती के रूप में लिया। पर्वतराज की पुत्री होने से 'पार्वती' नाम पड़ा। जन्म के समय नारदजी ने भविष्यवाणी की कि ये शिव की पत्नी बनेंगी।#पार्वती जन्म#हिमवान#मेना
शिव-सती-पार्वती कथाविष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े क्यों किएशिव के तांडव से सृष्टि में प्रलय का खतरा था। सृष्टि-रक्षा के लिए विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शव के 51 टुकड़े किए ताकि शिव की भटकन रुके। उन 51 स्थानों पर शक्तिपीठ बने।#विष्णु सुदर्शन चक्र#सती शव#प्रलय रक्षा
शिव-सती-पार्वती कथाशिव सती के शव को लेकर क्यों भटकते रहेसती की मृत्यु से शिव अत्यंत शोकग्रस्त हुए — सती के शव को कंधे पर उठाकर विरह में पागलों की तरह तांडव करते हुए भटकते रहे। यह शिव की परम प्रेम-वेदना का पौराणिक चित्रण है।#शिव तांडव#सती शव#विरह वेदना
शिव-सती-पार्वती कथा५१ शक्तिपीठों की उत्पत्ति कैसे हुईसती के शव को लेकर तांडव करते शिव से प्रलय का खतरा उत्पन्न हुआ। सृष्टि-रक्षा के लिए विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शव के 51 टुकड़े किए — जहाँ-जहाँ गिरे वहाँ शक्तिपीठ स्थापित हुई।#51 शक्तिपीठ#सती शव#शक्ति पीठ उत्पत्ति
शिव-सती-पार्वती कथासती के शरीर के टुकड़े कितने और कहाँ-कहाँ गिरेदेवी पुराण के अनुसार विष्णु के सुदर्शन चक्र से सती के 51 टुकड़े हुए। 42 भारत में, 4 बांग्लादेश में, 2 नेपाल में और 1-1 श्रीलंका-पाकिस्तान-तिब्बत में गिरे — वहाँ 51 शक्तिपीठ स्थापित हुए।#सती शरीर टुकड़े#51 शक्तिपीठ#सती अंग
शिव-सती-पार्वती कथादक्ष के कटे सिर पर बकरे का सिर क्यों लगाया गयादक्ष का मूल सिर यज्ञाग्नि में जल गया था इसलिए बकरे का सिर लगाकर उन्हें जीवित किया गया। यह पशु-बुद्धि और अहंकार का प्रतीक है — जिस पशु-वृत्ति से दक्ष ने शिव का अपमान किया वही उनकी पहचान बन गई।#दक्ष बकरा सिर#दक्ष पुनर्जीवन#यज्ञ पूर्ण
शिव-सती-पार्वती कथाशिव ने दक्ष को मारने के बाद उन्हें वापस जीवित क्यों कियाब्रह्मा-विष्णु सहित समस्त देवताओं की विनय पर शिव ने क्रोध शांत किया। यज्ञ अधूरा रह गया था — अधूरे यज्ञ से सृष्टि को अशुभ होता, इसलिए दक्ष को पुनर्जीवित कर यज्ञ पूर्ण कराया गया।#दक्ष पुनर्जीवन#शिव क्षमा#यज्ञ पूर्ण
शिव-सती-पार्वती कथावीरभद्र ने दक्ष के यज्ञ में क्या कियावीरभद्र ने दक्ष के यज्ञ को पूरी तरह नष्ट कर दिया, अपमानकर्ता देवताओं को दंडित किया और अंत में दक्ष का सिर काट दिया। भगवान विष्णु भी वीरभद्र की शक्ति देख अंतर्धान हो गए।#वीरभद्र#दक्ष यज्ञ विध्वंस#दक्ष सिर
शिव-सती-पार्वती कथावीरभद्र कौन है और उसकी उत्पत्ति कैसे हुईवीरभद्र शिव के पहले उग्र रुद्रावतार और गण हैं। सती के आत्मदाह के समाचार पर क्रोधित शिव ने जटा उखाड़कर पर्वत पर फेंकी — उससे आठ भुजाओं वाले विकराल वीरभद्र प्रकट हुए।#वीरभद्र#शिव अवतार#जटा
शिव-सती-पार्वती कथासती की मृत्यु का समाचार पाकर शिव ने क्या कियासती के आत्मदाह का समाचार पाकर शिव अत्यंत क्रोधित हुए। उन्होंने अपनी जटा से वीरभद्र और महाकाली को उत्पन्न किया और वीरभद्र को दक्ष यज्ञ का विध्वंस करने की आज्ञा दी।#सती मृत्यु#शिव क्रोध#वीरभद्र
शिव पुराण परिचयउमा संहिता में किसका वर्णन हैउमा संहिता (8,000 श्लोक) में देवी पार्वती के अद्भुत चरित्र, शिव-पार्वती संवाद में आध्यात्मिक उपदेश, गृहस्थ धर्म और शिव-शक्ति की अभिन्नता का वर्णन है। उमा = पार्वती जो शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप का आधा भाग हैं।#उमा संहिता#पार्वती#अर्धनारीश्वर
शिव पुराण परिचयरुद्र संहिता में कौन-कौन से खंड हैंरुद्र संहिता में 5 खंड हैं — 1. सृष्टि खंड (शिव-महात्म्य) 2. सती खंड (सती विवाह, दक्ष-यज्ञ) 3. पार्वती खंड (पार्वती तपस्या, शिव-विवाह) 4. कुमार खंड (कार्तिकेय जन्म) 5. युद्ध खंड (शंखचूड़ आदि वध)।#रुद्र संहिता#शिव पुराण#सती
शिव महिमाशिव जी के तीसरे नेत्र की उत्पत्ति कैसे हुई?शिव जी का तीसरा नेत्र तब प्रकट हुआ जब माता पार्वती ने उनकी दोनों आँखें ढक दीं और सृष्टि में अंधकार छा गया — शिव ने संकट में तीसरा नेत्र प्रकट किया। एक अन्य कथा में कामदेव द्वारा तप भंग करने पर तीसरा नेत्र खुला और कामदेव भस्म हुए।#शिव तीसरा नेत्र#त्रिनेत्र#पार्वती
शिव पार्वती विवाहशिव और पार्वती के विवाह में सप्तपदी का क्या विधान था?शिव-पार्वती विवाह में ब्रह्मा पुरोहित बने। अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए गए जिसमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्रतिज्ञाएं शामिल थीं। शिव ने वैदिक मंत्रों के साथ विवाह के सभी लोकाचार पूरे किए।#सप्तपदी#शिव पार्वती विवाह#विवाह विधि
आरती लाभदुर्गा आरती जय अम्बे गौरी का महत्व?दुर्गा सबसे लोकप्रिय। शक्ति, शत्रु नाश, भय दूर, सौभाग्य। 'मनवांछित फल पावै'। नवरात्रि अनिवार्य, शुक्र/मंगल।#जय अम्बे गौरी#दुर्गा#आरती
शिव पार्वती विवाहशिव की बारात में कौन-कौन थे?शिव की बारात में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र, सप्तर्षि, देवता, गंधर्व, यक्ष, नाग, किन्नर, गण, भूत-प्रेत, पिशाच, योगिनियाँ और समस्त जीव-जंतु शामिल थे। यह अब तक की सबसे विचित्र और अद्भुत बारात थी।#शिव बारात#शिव पार्वती विवाह#गण
शिव पूजा विधिशिव परिवार की पूजा कैसे करें और इसका क्या लाभ है?शिवलिंग = पूरे परिवार का प्रतीक। क्रम: गणेश→पार्वती→कार्तिकेय→शिव→नंदी। लाभ: पारिवारिक एकता, बुद्धि (गणेश), सौभाग्य (पार्वती), साहस (कार्तिकेय), कल्याण (शिव)। संतान सुख। शिक्षा: विरोधी वाहन फिर भी एकसाथ = एकता।#शिव परिवार#पार्वती#गणेश
नित्य कर्मअन्नपूर्णा मंत्र भोजन से पहलेभोजन से पूर्व 'अन्नपूर्णे सदापूर्णे...' मंत्र का उच्चारण करने से अन्न के दोष नष्ट होते हैं, भोजन प्रसाद बन जाता है और घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती।#अन्नपूर्णा#भोजन#कृतज्ञता
गणेश कथापार्वती ने उबटन से गणेश जी को क्यों बनाया?पार्वती जी ने उबटन से गणेश को इसलिए बनाया क्योंकि शिव के गण नंदी ने शिव जी के आने पर उनकी आज्ञा की अनदेखी की थी। पार्वती को एक ऐसे विश्वस्त गण की जरूरत थी जो केवल उन्हीं की आज्ञा माने।#पार्वती उबटन#गणेश जन्म#पार्वती गण
शिव पूजा विधिशिव के साथ पार्वती की पूजा करने का विधान क्या है?शिवलिंग = शिव+पार्वती (जलाधारी = पार्वती)। पहले गणेश → शिव (बेलपत्र) → पार्वती (सिंदूर, श्रृंगार)। शिवलिंग पर सिंदूर वर्जित — पार्वती प्रतिमा पर। दाम्पत्य सुख, मनचाहा वर, कलह निवारण।#शिव-पार्वती#गौरी#पूजा
शिवलिंग पूजालिंगवेदी क्या होती है?लिंगवेदी महादेवी पार्वती का रूप बताई गई है, जबकि लिंगरूप में साक्षात् महेश्वर प्रतिष्ठित रहते हैं।#लिंगवेदी#पार्वती#महादेवी
शिवलिंग पूजाशिवलिंग में शिव और पार्वती कैसे माने जाते हैं?लिंगवेदी के रूप में महादेवी पार्वती और लिंगरूप में साक्षात् महेश्वर प्रतिष्ठित बताए गए हैं।#शिवलिंग#पार्वती#महेश्वर
उमा-महेश्वरउमा-महेश्वर कैसे प्रकट हुए?ब्रह्मा-विष्णु की वैदिक स्तुति से प्रसन्न होकर महेश्वर लिंग में शब्दमय रूप से प्रकट हुए और उमा सहित दर्शन दिए।#उमा महेश्वर#महेश्वर#लिंग
श्रद्धा और शिवदर्शनश्रद्धा से शिव को कैसे वश में किया जा सकता है?शिव ने कहा कि मात्र श्रद्धा से भक्त उन्हें वश में कर सकता है और उनका दर्शन पा सकता है।#श्रद्धा#शिव वश#भक्त
वाराणसी और पार्वती प्रश्नकाशी को अविमुक्त क्षेत्र क्यों कहा गया है?वाराणसीपुरी को अविमुक्त क्षेत्र कहा गया है, जहाँ शिव और रुद्राणी का संवाद बताया गया है।#काशी#वाराणसी#अविमुक्त क्षेत्र
वाराणसी और पार्वती प्रश्नवाराणसी में पार्वती ने शिव से क्या पूछा?पार्वती ने पूछा कि तप, विद्या, योग आदि किस साधन से शिव वश में होते, पूजित होते और दर्शन देते हैं।#वाराणसी#पार्वती#शिव
योग अभ्यासयोग शुरू करने से पहले किसे प्रणाम करना चाहिए?योग शुरू करने से पहले गुरु, शिव, पार्वती, गणेश और शिष्यों सहित योगीश्वरों को प्रणाम करना चाहिए।#योग आरम्भ#गुरु प्रणाम#शिव
रुद्र उत्पत्तिनीललोहित महादेव ने क्या उत्पन्न किया?नीललोहित महादेव ने ब्रह्मा की प्रार्थना पर अपने तुल्य अनेक रुद्र उत्पन्न किये।#नीललोहित#महादेव#रुद्र
सती और शिवसती ने पार्वती रूप में किसे पति माना?सती ने पार्वती रूप में पुनः शिवजी को पति रूप में प्राप्त किया।#सती#पार्वती#शिव
सती और शिवसती ने दक्ष यज्ञ में क्या किया?सती ने दक्ष के यज्ञ का विध्वंस करके अपना देहत्याग किया।#सती#दक्ष यज्ञ#विध्वंस
पितृ वंशहैमवती गंगा कौन हैं?हैमवती गंगा मेना से उत्पन्न बताई गई हैं और शिवजी के मस्तक पर विराजमान रहने से जगत् को पवित्र करने वाली कही गई हैं।#हैमवती गंगा#मेना#गंगा
पितृ वंशउमा किसकी पुत्री थीं?उमा मेना से उत्पन्न बताई गई हैं; आगे सती के पार्वती रूप में शिव को पति रूप में प्राप्त करने का वर्णन आता है।#उमा#मेना#मैनाक
पितृ वंशमेना की संतान कौन थी?मेना से मैनाक, क्रौञ्च, उमा और हैमवती गंगा उत्पन्न बताए गए हैं।#मेना#मैनाक#क्रौञ्च
पितृ वंशमेना कौन थी?मेना स्वधा से अग्निष्वात्त पितरों की उत्पन्न मानसी कन्या थीं।#मेना#स्वधा#अग्निष्वात्त
लोकपार्वती ने जालंधर को कैसे पहचान लिया?पार्वती आदिशक्ति थीं, इसलिए उन्होंने जालंधर की माया तुरंत पहचान ली।#पार्वती#जालंधर#आदिशक्ति
लोकजालंधर ने शिव का रूप क्यों लिया?जालंधर ने पार्वती को छलने के लिए शिव का रूप धारण किया।#जालंधर माया#शिव रूप#पार्वती
लोकजालंधर ने पार्वती को क्यों मांगना चाहा?जालंधर ने अहंकार और वासना में आकर पार्वती को मांगना चाहा।#जालंधर#पार्वती#नारद कूटनीति