शिव अस्त्र-शस्त्रचंद्रहास तलवार क्या हैचंद्रहास शिव की दिव्य तलवार है जो उन्होंने रावण को उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर दी थी। जब रावण ने सीता-हरण में जटायु पर इसका दुरुपयोग किया, तब यह स्वतः शिव के पास लौट गई।#चंद्रहास#शिव खड्ग#दिव्य तलवार
शिव अस्त्र-शस्त्रशिव का फरसा परशुराम को कैसे मिलापरशुराम ने शिव की घोर तपस्या की। शिव ने प्रसन्न होकर धर्म-रक्षा के लिए दिव्य परशु (फरसा) दिया और उसे उठाने की शक्ति भी प्रदान की। इसी से वे 'परशुराम' कहलाए।#परशु#परशुराम#फरसा
शिव अस्त्र-शस्त्रपाशुपतास्त्र किसने बनाया थापाशुपतास्त्र भगवान शिव का स्वयं-सिद्ध दिव्यास्त्र है। पुराणों के अनुसार शिव ने इसे आदि पराशक्ति से सृष्टि से पहले ही प्राप्त किया था। यह शिव, काली और परा-शक्ति का संयुक्त अस्त्र है।#पाशुपतास्त्र निर्माण#शिव#आदि परा शक्ति
शिव अस्त्र-शस्त्रशिव का पाशुपतास्त्र क्या हैपाशुपतास्त्र शिव का सर्वशक्तिशाली दिव्यास्त्र है — मन, नेत्र, वाणी या धनुष किसी से भी चलाया जा सकता है। सम्पूर्ण सृष्टि का विनाश कर सकता है। महाभारत में शिव ने यह अर्जुन को दिया था।#पाशुपतास्त्र#महाविनाशक#दिव्यास्त्र
शिव अस्त्र-शस्त्रभवरेंदु चक्र क्या है'भवरेंदु' शिव के चक्र का एक नाम है। 'भव' = शिव, 'रेंदु' = चक्र। यह नाम कुछ परंपराओं में मिलता है। अधिक प्रचलित नाम 'सुदर्शन' है जो शिव ने विष्णु को दिया था।#भवरेंदु#शिव चक्र#दिव्यास्त्र
शिव अस्त्र-शस्त्रशिव जी के चक्र का नाम क्या थाशिव के चक्र के दो नाम मिलते हैं — 'भवरेंदु' (कुछ ग्रंथों में) और 'सुदर्शन' (अधिक प्रचलित)। पुराणों में वर्णित है कि सुदर्शन चक्र मूलतः शिव का था जो उन्होंने विष्णु को प्रदान किया।#शिव चक्र#सुदर्शन#भवरेंदु
शिव अस्त्र-शस्त्ररामायण में उस धनुष का नाम क्या था जो राम ने तोड़ा थाराम ने सीता स्वयंवर में जो धनुष तोड़ा उसका नाम 'पिनाक' था, जिसे 'शिवधनुष' भी कहते हैं। यह भगवान शिव का दिव्य धनुष था जो राजा जनक के पास धरोहर के रूप में था।#पिनाक#शिवधनुष#राम
शिव अस्त्र-शस्त्रपिनाक धनुष राम ने सीता स्वयंवर में कैसे तोड़ाराजा जनक के स्वयंवर में गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से राम ने पिनाक धनुष सहज भाव से उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह टूट गया। इसी से सीता का विवाह राम से हुआ।#पिनाक#सीता स्वयंवर#राम
शिव अस्त्र-शस्त्रशिव जी ने पिनाक धनुष से किसका वध किया थाशिव ने पिनाक धनुष से त्रिपुरासुर के तीन अभेद्य उड़नशील नगरों को एक ही बाण से भस्म किया। तारकाक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली का अंत हुआ — इसीलिए शिव 'त्रिपुरांतक' हैं।#पिनाक#त्रिपुरासुर#त्रिपुरांतक
शिव अस्त्र-शस्त्रपिनाक धनुष किसने बनाया थापिनाक धनुष का निर्माण देव-शिल्पी विश्वकर्मा ने किया था — दिव्य बाँस से। उन्होंने दो धनुष बनाए — पिनाक शिव को और सारंग विष्णु को दिया।#पिनाक निर्माण#विश्वकर्मा#ब्रह्मा
शिव अस्त्र-शस्त्रपिनाक धनुष कितना शक्तिशाली थापिनाक धनुष की टंकार से पर्वत काँपते थे, बादल फटते थे। इसी एक बाण से शिव ने त्रिपुरासुर की तीनों अभेद्य नगरियों को नष्ट किया। महाबली रावण भी इसे नहीं उठा सका।#पिनाक शक्ति#त्रिपुरासुर वध#अप्रतिम धनुष
शिव अस्त्र-शस्त्रशिव जी के धनुष का नाम क्या हैशिव जी के धनुष का नाम 'पिनाक' है। इसी से शिव को 'पिनाकी' कहते हैं। इसी धनुष से त्रिपुरासुर-वध हुआ और बाद में सीता स्वयंवर में राम ने इसे तोड़ा।#पिनाक#शिव धनुष#दिव्य धनुष
शिव अस्त्र-शस्त्रशिव पुराण के अनुसार शिव जी के कितने अस्त्र-शस्त्र हैंशिव के प्रमुख अस्त्र-शस्त्र हैं — त्रिशूल (शस्त्र), पिनाक (धनुष), पाशुपतास्त्र (दिव्यास्त्र), चंद्रहास (तलवार), परशु (फरसा) और सुदर्शन चक्र जो विष्णु को दिया।#शिव अस्त्र सूची#पिनाक त्रिशूल पाशुपतास्त्र चंद्रहास#शिव शस्त्र
शिव अस्त्र-शस्त्रशिव जी का त्रिशूल किसने बनाया थाशिव पुराण के अनुसार त्रिशूल के निर्माणकर्ता स्वयं भगवान शिव हैं। यह उनका स्वयंभू शस्त्र है जो उनके साथ ही प्रकट हुआ।#त्रिशूल निर्माण#शिव पुराण#स्वयंभू
शिव अस्त्र-शस्त्रशिव जी के त्रिशूल का नाम क्या हैशिव जी के त्रिशूल का नाम 'त्रिशूल' ही है। कुछ ग्रंथों में इसे 'विजय' भी कहा गया है। यह उनका सर्वाधिक शक्तिशाली और नित्य शस्त्र है।#त्रिशूल#शिव शस्त्र#महाअस्त्र
शिव पूजा विधिशिव परिवार की पूजा कैसे करें और इसका क्या लाभ है?शिवलिंग = पूरे परिवार का प्रतीक। क्रम: गणेश→पार्वती→कार्तिकेय→शिव→नंदी। लाभ: पारिवारिक एकता, बुद्धि (गणेश), सौभाग्य (पार्वती), साहस (कार्तिकेय), कल्याण (शिव)। संतान सुख। शिक्षा: विरोधी वाहन फिर भी एकसाथ = एकता।#शिव परिवार#पार्वती#गणेश
मंत्र साधनाबीमारी से रक्षा के लिए महामृत्युंजय मंत्रगंभीर बीमारियों और अकाल मृत्यु से रक्षा के लिए भगवान शिव के 'महामृत्युंजय मंत्र' का रुद्राक्ष की माला से जप और अमृत वर्षा का ध्यान करना सनातन धर्म का सबसे अचूक उपाय है।#महामृत्युंजय#बीमारी रक्षा#शिव
तंत्र साधनादुश्मन को शांत करने का अघोर मंत्रअकारण परेशान कर रहे शत्रु की बुद्धि को स्तंभित और शांत करने के लिए दक्षिण मुख होकर भगवान शिव के अघोर मंत्र ('ॐ अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो...') का जप करना अत्यंत प्रभावशाली है।#अघोर मंत्र#शिव#शत्रु शांति
मंत्र साधनाशिव जी का सबसे छोटा मंत्रभगवान शिव का सबसे छोटा तांत्रिक मंत्र उनका एकाक्षरी बीज 'ह्रौं' है। इसके अलावा 'नमः शिवाय' (बिना ॐ के) सबसे सूक्ष्म और स्वतंत्र वैदिक मंत्र है, जिसे कोई भी जप सकता है।#शिव#बीज मंत्र#नमः शिवाय
तंत्र साधनाअघोर मंत्र और उनके आध्यात्मिक लाभअघोर मंत्र का अर्थ है हर वस्तु में शिव को देखना। 'ॐ अघोरेभ्यो...' मंत्र के जप से द्वैत भाव, मृत्यु का भय और पाप भस्म होते हैं तथा साधक को गहरा वैराग्य और आत्मज्ञान प्राप्त होता है।#अघोर#शिव#वैराग्य
दोष निवारणमानसिक तनाव और डिप्रेशन दूर करने का मंत्रडिप्रेशन और मानसिक तनाव को दूर करने के लिए भगवान शिव के 'ॐ नमः शिवाय' और चंद्र देव के बीज मंत्र का गहरी सांसों के साथ मानसिक जप करना चाहिए।#मानसिक तनाव#डिप्रेशन#शिव
मंत्र साधनाक्रोध कम करने का शिव मंत्रक्रोध और मानसिक ताप को शांत करने के लिए 'ॐ शान्ताय नमः' या जल को अभिमंत्रित कर 'ॐ नमः शिवाय' का प्रयोग करना चाहिए। यह शरीर के अग्नि तत्व को शांत करता है।#क्रोध नियंत्रण#शिव#चंद्रमा
मंत्र साधनाशिव पंचाक्षर मंत्र की महिमा'नमः शिवाय' पंचाक्षर मंत्र पंचतत्वों का प्रतीक है। यह वेदों का सार है जो सभी पापों को नष्ट कर असीम शांति और मोक्ष प्रदान करता है। इसे किसी भी अवस्था में जपा जा सकता है।#शिव#पंचाक्षर#नमः शिवाय
शिव रूपनटराज रूप में शिव की पूजा कब और कैसे करनी चाहिए?प्रदोष काल सर्वोत्तम (शिव तांडव का समय)। चिदंबरम = नटराज का मुख्य केंद्र (पंचभूत आकाश तत्त्व)। 'ॐ नटराजाय नमः' 108 बार + शिव तांडव स्तोत्र। नटराज = अज्ञान पर विजय, सृष्टि-संहार चक्र। कलाकारों/नर्तकों के लिए विशेष।#नटराज#तांडव#चिदंबरम
शिव मंत्रशिव संकल्प सूक्त का पाठ करने की विधि क्या है?शुक्ल यजुर्वेद 34.1-6। 6 मंत्र — 'तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु' (मेरा मन शुभ संकल्प वाला हो)। प्रातः, शुद्ध उच्चारण, 1-3 बार। लाभ: मन शुद्धि, संकल्प शक्ति, एकाग्रता। परीक्षा/निर्णय/अशांति में विशेष।#शिव संकल्प#सूक्त#वेद
शिव स्तोत्रबिल्वाष्टक स्तोत्र का पाठ शिवलिंग के सामने कैसे करें?8 श्लोक, 8 बेलपत्र। प्रत्येक श्लोक पर एक त्रिदल बेलपत्र अर्पित। 'त्रिदलं त्रिगुणाकारं... एकबिल्वं शिवार्पणम्' — एक बेलपत्र = तीन जन्मों के पाप नष्ट। सोमवार/शिवरात्रि/सावन।#बिल्वाष्टक#स्तोत्र#बेलपत्र
स्त्री धर्मअविवाहित लड़की सोमवार व्रत रख सकती क्या?हाँ — विशेष शुभ। 16 सोमवार=अच्छा वर। पार्वती ने शिव हेतु व्रत किया। श्रावण सोमवार विशेष। शिवलिंग स्पर्श=परंपरा भिन्न (शास्त्रीय निषेध नहीं)। शिव=अर्धनारीश्वर।#अविवाहित#सोमवार#व्रत
शिव मंत्रशिव मंत्र जप में विनियोग का क्या अर्थ है और कैसे करें?विनियोग = मंत्र का परिचय (6 अंग: ऋषि, छन्द, देवता, बीज, शक्ति, कीलक)। जप पूर्व जल हाथ में लेकर बोलें। महामृत्युंजय: वशिष्ठ ऋषि, अनुष्टुप, त्र्यंबक, ॐ, ह्रीं, क्लीं। सरल: 'ॐ नमः शिवाय' 3 बार = विनियोग विकल्प।#विनियोग#अर्थ#विधि
शिव दर्शनशिव के अष्टमूर्ति रूपों का वर्णन किस ग्रंथ में है?भविष्य पुराण: 8 मूर्तियां — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, यजमान(आत्मा), चंद्र, सूर्य। कालिदास 'अभिज्ञानशाकुंतलम्' नांदी श्लोक = सबसे प्रसिद्ध संदर्भ। अर्थ: शिव ब्रह्मांड के 8 तत्वों में सर्वव्यापी।#अष्टमूर्ति#आठ रूप#भविष्य पुराण
कार्तिकेय कथाशिव का वीर्य जो अग्नि में पड़ा उससे कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ?शिव का दिव्य तेज अग्निदेव ने ग्रहण किया, फिर गंगा को सौंपा। गंगाजल में बहकर वह छह भागों में विभाजित होकर शरवण वन में छह शिशुओं के रूप में प्रकट हुआ। कृत्तिकाओं ने उन्हें दूध पिलाया और पार्वती ने छहों को एक करके षड्मुख कार्तिकेय को प्राप्त किया।#कार्तिकेय जन्म#शिव तेज#अग्निदेव
ज्योतिर्लिंगशिव के ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट होने की कथा क्या है लिंग पुराण के अनुसार?लिंग पुराण के अनुसार ब्रह्मा-विष्णु के श्रेष्ठता-विवाद में शिव अनंत प्रकाश स्तंभ (ज्योतिर्लिंग) रूप में प्रकट हुए। विष्णु ने अंत न पाकर सत्य स्वीकारा; ब्रह्मा ने झूठ बोला तो श्राप मिला। वह अनंत ज्योति-स्तंभ ही ज्योतिर्लिंग कहलाया।#ज्योतिर्लिंग प्रकटन#लिंग पुराण#ब्रह्मा विष्णु विवाद
शिव पर्वमहाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि की पूजा में क्या अंतर है?मासिक: हर माह कृष्ण चतुर्दशी, सामान्य पूजा, व्रत वैकल्पिक, जागरण नहीं। महाशिवरात्रि: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (वर्ष में 1 बार), विस्तृत 4 प्रहर पूजा, व्रत + जागरण अनिवार्य, अनंत गुना फल। महाशिवरात्रि = महापर्व।#महाशिवरात्रि#मासिक शिवरात्रि#अंतर
ज्योतिर्लिंगशिव पुराण में कितने ज्योतिर्लिंगों का वर्णन है?शिव पुराण में कुल 64 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है, जिनमें से 12 सर्वाधिक पवित्र 'महाज्योतिर्लिंग' हैं। सोमनाथ से लेकर घुश्मेश्वर तक ये 12 ज्योतिर्लिंग भारत के विभिन्न स्थानों पर स्थित हैं। इनके नाम का पाठ सात जन्मों के पाप नष्ट करता है।#12 ज्योतिर्लिंग#शिव पुराण#64 ज्योतिर्लिंग
शिव लीलागजासुर ने काशी में आकर क्या उत्पात मचाया?गजासुर ने काशी में आकर भक्तों को पीड़ित किया, शिवलिंग पूजा में बाधा डाली, ऋषियों के आश्रम उजाड़े और समस्त काशी में त्राहि-त्राहि मचा दी। देवताओं और भक्तों ने मिलकर शिव जी से रक्षा की प्रार्थना की।#गजासुर काशी#उत्पात#देवता भयभीत
ज्योतिर्लिंगकाशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का महत्व शिव पुराण में क्या बताया गया है?शिव पुराण के अनुसार काशी शिव की नगरी है जो प्रलय में भी नष्ट नहीं होती। यहाँ मृत्यु पर शिव स्वयं तारक मंत्र देते हैं, इसलिए काशी मोक्षदायिनी है। विश्वनाथ के दर्शन मात्र से समस्त तीर्थों का फल मिलता है।#काशी विश्वनाथ#मोक्ष#तारक मंत्र
शिव पूजा विधिशिवलिंग पर केसर चढ़ाने से क्या विशेष लाभ मिलता है?केसर को चंदन में मिलाकर 'गंधोदक' बनाकर शिवलिंग पर लगाएं (रुद्राभिषेक विधि)। लाभ: आर्थिक समृद्धि, दरिद्रता नाश, वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति, गुरु ग्रह बल, मानसिक शांति। शुद्ध केसर + चंदन ही प्रयोग करें। हल्दी वर्जित है लेकिन केसर शिव-प्रिय है।#केसर#शिवलिंग#चंदन
शिव मंत्रशिव मंत्र जप के दौरान मन भटकने पर क्या करना चाहिए?उपांशु जप करें (धीमे स्वर में)। शिव के स्वरूप का ध्यान करें। माला के मनकों पर ध्यान केंद्रित करें। पहले प्राणायाम करें। नियत समय-स्थान पर जप करें। मंत्र अर्थ का चिंतन करें। पतंजलि: 'अभ्यास और वैराग्य से मन नियंत्रित होता है।' धैर्यपूर्वक पुनः मंत्र पर लौटें।#मन भटकना#एकाग्रता#जप विधि
शिव पूजाशिव की पूजा से अकाल मृत्यु का भय कैसे दूर होता है?शिव = मृत्युंजय (मृत्यु पर विजयी)। मार्कण्डेय कथा: शिव ने यमराज से बचाया। महामृत्युंजय मंत्र = मृत संजीवनी (शिव पुराण)। उपाय: नित्य 108 जप, रुद्राभिषेक, सोमवार/प्रदोष व्रत, रुद्राक्ष धारण। दार्शनिक: आत्मज्ञान से मृत्यु भय स्वतः नष्ट — शिव काल से परे, शरणागत भी काल-मुक्त।#अकाल मृत्यु#महामृत्युंजय#मृत्युंजय शिव
शिव पूजा विधिशिव के गण भृंगी और नंदी की पूजा कैसे करें?नंदी: शिवलिंग से पहले दर्शन, जल-अक्षत-चंदन, 'ॐ नंदीश्वराय नमः', कान में मनोकामना। भृंगी: शिव अनन्य भक्त — केवल शिव पूजा → पार्वती शाप → अस्थिपंजर → शिव ने तीसरा पैर दिया। 'ॐ भृंगिरीट्याय नमः'। शिक्षा: शिव-शक्ति अभिन्न — एकतरफा पूजा अधूरी।#भृंगी#नंदी#गण
शिव मंत्रशिव मंत्र जप के बाद शांति का अनुभव क्यों होता है?मंत्र ध्वनि से शरीर-मन में शांतिकारी कंपन उत्पन्न होते हैं। एकाग्रता से चित्तवृत्ति निरोध होता है। श्वास नियमित होती है। ॐ (प्रणव) चेतना को उच्च स्तर पर ले जाता है। शिव पुराण: भक्ति भाव से शिव कृपा प्राप्त होती है। संचित कर्म क्षय से आत्मा हल्की होती है।#शांति#मंत्र प्रभाव#ध्वनि कंपन
शिव तीर्थशिव के बारह ज्योतिर्लिंग दर्शन का क्रम क्या होना चाहिए?शिव पुराण/स्तुति श्लोक क्रम: (1)सोमनाथ-गुजरात (2)मल्लिकार्जुन-श्रीशैल (3)महाकाल-उज्जैन (4)ओंकारेश्वर-मालवा (5)वैद्यनाथ-देवघर (6)भीमशंकर-महाराष्ट्र (7)रामेश्वरम-तमिलनाडु (8)नागेश्वर-द्वारका (9)विश्वनाथ-वाराणसी (10)त्र्यम्बकेश्वर-नासिक (11)केदारनाथ-हिमालय (12)घृष्णेश्वर-महाराष्ट्र। नाम पाठ मात्र से सात जन्मों के पाप नष्ट।#ज्योतिर्लिंग#द्वादश ज्योतिर्लिंग#दर्शन क्रम
शिव पूजा विधिशिवलिंग पर भांग चढ़ाने का तांत्रिक महत्व क्या है?पौराणिक: समुद्र मंथन के बाद विष ताप शांत करने हेतु शिव को भांग अर्पित (शिव पुराण)। तांत्रिक: भांग = 'विजया' — मन के विकारों पर विजय का प्रतीक। चेतना का रूपांतरण — नकारात्मकता शिव को समर्पित। त्याज्य वस्तुओं का समर्पण = शिव की सर्वव्यापकता। सावन/शिवरात्रि पर विशेष फलदायी। भांग सेवन नहीं, समर्पण का अर्थ है।#भांग#विजया#शिवलिंग
शिव मंदिरपंच केदार यात्रा का महत्व और क्रम क्या है?5 स्थानों पर शिव के 5 अंग (पांडव कथा): केदारनाथ (पीठ), मद्महेश्वर (नाभि), तुंगनाथ (भुजाएं — सबसे ऊंचा शिव मंदिर), रुद्रनाथ (मुख), कल्पेश्वर (जटा — वर्षभर खुला)। पूर्ण शिवलिंग = केदारनाथ + पशुपतिनाथ (नेपाल)।#पंचकेदार#केदारनाथ#तुंगनाथ
शिव अवतारशरभ अवतार क्यों और कैसे हुआ?शरभ अवतार नृसिंह भगवान के असंयत क्रोध को शांत करने के लिए हुआ। हिरण्यकश्यप के वध के बाद नृसिंह का क्रोध थमा नहीं। शिव ने आठ पैर वाले शरभ रूप में उन्हें पूंछ में लपेटकर क्रोध शांत किया।#शरभ अवतार#नृसिंह क्रोध#शिव अवतार
गणेश कथागणेश जी का सिर हाथी का क्यों है, शिव पुराण में क्या कारण बताया है?शिव पुराण के अनुसार शिव जी ने क्रोध में गणेश जी का सिर काट दिया था। पार्वती के क्रोध को शांत करने के लिए शिव ने पुत्र को पुनर्जीवित करने का वचन दिया। उत्तर दिशा में मिले हाथी के बच्चे का सिर लाकर जोड़ा गया और इस प्रकार गणेश जी गजमुख हुए।#गणेश हाथी सिर#शिव पुराण#गजमुख
शिव पर्वशिवरात्रि की रात जागरण का शास्त्रीय कारण क्या है?शिव पुराण: इसी रात ज्योतिर्लिंग प्रकट + शिव-पार्वती विवाह। चार प्रहर अभिषेक केवल रात्रि में संभव। शिव = निशाचर, रात्रि ऊर्जा सर्वाधिक। इन्द्रियां अंतर्मुख → साधना अनुकूल। शिकारी कथा: अनजाने जागरण से भी मोक्ष।#शिवरात्रि#जागरण#रात्रि
शिव मंत्रश्रावण मास में शिव मंत्र जप का अनुष्ठान कैसे करें?संकल्प → सवा लाख (1,25,000) या यथाशक्ति → दैनिक ÷30 → ब्रह्ममुहूर्त/प्रदोष → रुद्राक्ष माला → सात्विक नियम → समापन: हवन+दान। सरल: 108/दिन पूरे सावन = ~3,240। 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय।#अनुष्ठान#श्रावण#जप
शिव अवतारभैरव अवतार क्यों हुआ था?भैरव अवतार ब्रह्मा जी के अहंकार के कारण हुआ। ब्रह्मा ने शिव के विषय में अपमानजनक वचन कहे, जिससे शिव क्रोधित हुए और उनकी भृकुटि से काल भैरव प्रकट हुए। भैरव ने ब्रह्मा का पाँचवाँ सिर काटकर अहंकार का नाश किया।#भैरव अवतार#काल भैरव#ब्रह्मा अहंकार
शिव पूजा सामग्रीशिव पूजा में धूप अगरबत्ती किस प्रकार की जलाएं?चंदन सर्वश्रेष्ठ, गुगल सबसे शास्त्रीय, कपूर (कर्पूरगौरं), लोबान। केवड़ा वर्जित। प्राकृतिक > chemical। दीपक बाद, नैवेद्य पहले। शिवलिंग चारों ओर घुमाएं।#धूप#अगरबत्ती#प्रकार
शिव मंदिरनागेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा नाग दोष निवारण में कैसे सहायक है?नागेश्वर = नागों के ईश्वर। शिव = वासुकि (सर्प) धारक → राहु-केतु (सर्प ग्रह) नियंत्रक। कालसर्प दोष, सर्प भय निवारण। दूध+काले तिल अभिषेक, 'ॐ नागेश्वराय नमः' 108 जप। नागपंचमी विशेष।#नागेश्वर#ज्योतिर्लिंग#नाग दोष