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ग्रन्थ

गरुड़ पुराण(592)

गरुड़ पुराण पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 592 प्रश्न उपलब्ध हैं।

यमलोक एवं न्याय

यमलोक मार्ग पर अंधे कुएं और विकट पर्वत का वर्णन क्या है?

गरुड़ पुराण के दूसरे अध्याय में वर्णित है कि यममार्ग पर पापी अंधे कुएँ में गिरता है, विकट पर्वत से गिराया जाता है, छुरे की धार पर चलता है और जोंकों से भरे कीचड़ में पड़ता है — यह सत्रह दिन की अत्यंत कष्टमय यात्रा है।

#यमलोक मार्ग#अंधा कुआँ#विकट पर्वत
नरक एवं परलोक

स्त्रियों और बच्चों का संग्रहित धन छीनने वाले को कौन सा नरक मिलता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार स्त्रियों और बच्चों का संग्रहित धन छीनने वाला वैतरणी की यातना भोगता है और प्रेत-योनि में दीर्घकाल तक भटकता है। इन्हें 'स्त्रीद्रव्यहारी' और 'बालद्रव्यहारी' कहकर चतुर्थ अध्याय में वर्णित किया गया है।

#स्त्री धन#बच्चों का धन#नरक
पाप एवं दंड

परस्त्रीगमन करने वाला नपुंसक क्यों होता है?

गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय के अनुसार परस्त्रीगमन करने वाला नरक-भोग के बाद नपुंसक योनि पाता है — जिसने जिस शक्ति का दुरुपयोग किया, वह शक्ति ही अगले जन्म में उससे छिन जाती है।

#परस्त्रीगमन#नपुंसक#गरुड़ पुराण
दान एवं पुण्य

कृष्णा गाय दान से वैतरणी पार होती है — इसका विस्तार क्या है?

गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय के अनुसार कृष्णा (काली) गाय का दान — जिसे 'वैतरणी गाय दान' कहते हैं — यमलोक-मार्ग पर वैतरणी नदी को पार कराता है। दान की गई गाय नदी के तट पर प्रकट होती है और जीव उसकी पूँछ पकड़कर पार होता है।

#कृष्णा गाय#वैतरणी दान#गोदान
यमलोक एवं न्याय

यमराज धनी और निर्धन से भेद नहीं करते — ऐसा क्यों?

गरुड़ पुराण के तीसरे अध्याय में चित्रगुप्त कहते हैं — यमराज मूर्ख-पंडित, दरिद्र-धनवान, सबल-निर्बल — सभी से समान व्यवहार करते हैं क्योंकि यमलोक में केवल कर्म देखे जाते हैं, धन या पद नहीं।

#यमराज#निष्पक्षता#धनी निर्धन
नरक एवं परलोक

अवीचि नरक में सबसे कठोर दंड किसे मिलता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार अवीचि नरक में झूठ बोलने वाले, झूठी कसम खाने वाले और झूठी गवाही देने वाले जाते हैं। इस नरक में पापी को ऊँचे पहाड़ से बार-बार गिराया जाता है — यह दंड अत्यंत कठोर और निरंतर है।

#अवीचि नरक#नरक दंड#झूठ
यमलोक एवं न्याय

सूर्य, चंद्र, वायु, अग्नि और आकाश मनुष्य के कर्म क्यों जानते हैं?

गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय के अनुसार सूर्य, चंद्र, वायु, अग्नि, आकाश, भूमि, जल, हृदय और दोनों संध्याएँ — ये सभी मनुष्य के कर्मों के नित्य साक्षी हैं। साथ ही यमराज के गुप्तचर श्रवण भी सभी कर्म जानते हैं।

#सूर्य#चंद्र#कर्म साक्षी
दान एवं पुण्य

मनुष्यों और पशुओं के लिए जलहीन स्थान में जल न देने का क्या पछतावा होता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार जलहीन स्थान में जल न देने का पछतावा यममार्ग पर तब होता है जब पापी खुद प्यास से तड़पता है और यमदूत जल के बदले उबलता तेल पिलाते हैं। यह उसी कर्म का प्रतिफल है।

#जल दान#जलहीन#पछतावा
पाप एवं दंड

ब्रह्महत्यारा, गाय-हत्यारा और कन्या-हत्यारा — तीनों चांडाल योनि में क्यों जाते हैं?

गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय के अनुसार ये तीनों — ब्राह्मण, गाय और कन्या — धर्म के स्तंभ हैं। इन तीनों की हत्या समान गुरुता के पाप हैं, इसलिए तीनों हत्यारों को नरकभोग के बाद समान रूप से चांडाल योनि का दंड मिलता है।

#ब्रह्महत्या#गोहत्या#कन्या हत्या
अंत्येष्टि एवं मृत्यु संस्कार

गरुड़ पुराण के दसवें अध्याय में मृत्यु के तुरंत बाद कौन से कर्म बताए गए हैं?

गरुड़ पुराण के दसवें अध्याय में बताया गया है कि मृत्यु के तुरंत बाद मुंडन, शव-स्नान, छह स्थानों पर पिंडदान, दाह संस्कार (सूर्यास्त पूर्व), गंगा में अस्थि-विसर्जन और दशगात्र-कर्म प्रारंभ करने का विधान है।

#दसवाँ अध्याय#मृत्यु संस्कार#पिंडदान
यमलोक एवं न्याय

यममार्ग पर रक्त की वृष्टि और शस्त्र की वृष्टि का वर्णन क्या है?

गरुड़ पुराण के दूसरे अध्याय के अनुसार यममार्ग पर पापियों पर रक्त, शस्त्र, अंगार, शिला और गर्म जल की वृष्टि होती है — यह उनके पाप-कर्मों का ही प्रतिफल है जो विभिन्न यातनाओं के रूप में लौटता है।

#यममार्ग#रक्त वृष्टि#शस्त्र वृष्टि
यमलोक एवं न्याय

यमराज का भैंसे पर बैठना क्यों बताया गया है?

गरुड़ पुराण और अन्य पुराणों में यमराज भैंसे पर बैठे वर्णित हैं। भैंसा मृत्यु की अटल, निरपेक्ष और स्थूल शक्ति का प्रतीक है। काले रंग का भैंसा दक्षिण दिशा, यमलोक और अंधकार का प्रतीक है।

#यमराज#भैंसा#वाहन
यमलोक एवं न्याय

यममार्ग में पापी काले सर्पों और बिच्छुओं से क्यों घिरा होता है?

गरुड़ पुराण के दूसरे अध्याय के अनुसार पापी के अपने पाप-कर्म ही यममार्ग में काले सर्पों, बिच्छुओं और हिंसक पशुओं का रूप धारण करते हैं। जिसने जितना कष्ट दिया, उसे उतनी ही पीड़ा के रूप में यह यातना मिलती है।

#यममार्ग#काले सर्प#बिच्छू
पाप एवं दंड

ऋण लेकर न लौटाने वाले की क्या गति होती है?

गरुड़ पुराण के अनुसार ऋण लेकर न लौटाने वाला वैतरणी नदी में गिरता है। यमलोक में उसका मांस काटकर ऋणदाता को दिया जाता है और उसे रौरव नरक की यातना भोगनी पड़ती है।

#ऋण#कर्ज#वैतरणी
दान एवं पुण्य

मृत्युकाल में गाय दान से क्या विशेष लाभ होता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्युकाल में किया गया गोदान वैतरणी नदी पार कराने वाला होता है — वह गाय यमलोक के मार्ग में प्रकट होती है और जीव उसकी पूँछ पकड़कर उस भयानक नदी से बिना कष्ट पार हो जाता है।

#गोदान#मृत्युकाल#वैतरणी
तंत्र एवं विद्या

गारुड़ी विद्या और सर्पविष नाश का क्या संबंध है?

गारुड़ी विद्या गरुड़ पुराण में वर्णित वह मंत्र-विद्या है जिसके द्वारा गरुड़ की शक्ति का आवाहन करके सर्पविष नष्ट किया जाता है। महर्षि कश्यप इसके प्रसिद्ध ज्ञाता थे। गरुड़ पुराण में इसे स्वयं आयुर्वेद-तंत्र का अंग बताया गया है।

#गारुड़ी विद्या#सर्पविष#गरुड़ पुराण
नरक एवं परलोक

दंदशूक नरक में सर्पों के काटने की सजा किसे मिलती है?

दंदशूक नरक में उन लोगों को भेजा जाता है जो निर्दोष व्यक्तियों को सताते और पीड़ित करते हैं। यहाँ पाँच-सात मुख वाले महाविषधर सर्प बार-बार डसते हैं।

#दंदशूक नरक#सर्प#नरक दंड
नरक एवं परलोक

पापी एक नरक से दूसरे नरक में क्यों जाते रहते हैं?

गरुड़ पुराण के अनुसार जिसने अनेक पाप किए हैं, उसे हर पाप के लिए अलग नरक भोगना पड़ता है। एक नरक समाप्त होने पर अगले पाप का फल अगले नरक में मिलता है — यह क्रम पाप-क्षय होने तक चलता है।

#नरक#पापी#एक से दूसरा नरक
श्राद्ध एवं पितृकर्म

श्राद्ध में अर्घ्य देने की विधि क्या है?

श्राद्ध में अर्घ्य (तर्पण) की विधि में दक्षिण मुख, अपसव्य स्थिति में, तांबे-चाँदी के पात्र में जल-तिल-कुश मिलाकर पितरों का नाम-गोत्र लेते हुए जल छोड़ा जाता है। अपराह्न का समय श्रेष्ठ माना गया है।

#अर्घ्य#श्राद्ध विधि#तर्पण
पूजा एवं उपासना

वैष्णव पंजर क्या है?

वैष्णव पंजर गरुड़ पुराण के पूर्वखण्ड में वर्णित भगवान विष्णु का एक रक्षा-कवच (स्तोत्र) है, जिसमें विष्णु के नामों के माध्यम से शरीर के प्रत्येक अंग की सुरक्षा की जाती है। यह न्यास-विधि पर आधारित उपासना है।

#वैष्णव पंजर#विष्णु पंजर स्तोत्र#गरुड़ पुराण
पाप एवं दंड

वाद-विवाद में ब्राह्मण को पराजित करने वाला ब्रह्मराक्षस क्यों बनता है?

गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय के अनुसार अहंकार या दुर्भाव से ब्राह्मण को वाद-विवाद में पराजित करने वाला जलविहीन वन में ब्रह्मराक्षस बनता है। यह ब्रह्मतेज के अपमान का दंड है।

#ब्रह्मराक्षस#ब्राह्मण#वाद-विवाद
पाप एवं दंड

स्त्री हत्या और गर्भपात करने वाला पुलिन्द (भील) क्यों होता है?

गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय के अनुसार स्त्री-हत्यारा और गर्भपात कराने वाला नरकभोग के बाद पुलिन्द (भील) योनि में जन्म लेता है और रोगग्रस्त रहता है। इसके पहले तप्तसूर्मि नरक में गर्म सुइयों से दंडित किया जाता है।

#स्त्री हत्या#गर्भपात#पुलिन्द
धर्म एवं कर्तव्य

गायों और ब्राह्मणों के लिए प्रयास न करने का क्या पछतावा होता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार गाय और ब्राह्मण की उपेक्षा करने वाले को यमलोक में भयानक पछतावा होता है। यमदूत कोसते हैं, नरक की यातना मिलती है और अगले जन्म में दरिद्रता, अंधत्व और नीच योनियाँ प्राप्त होती हैं।

#गाय#ब्राह्मण#पछतावा
नरक एवं परलोक

विषान्न देकर मारने वाले को वैतरणी में कौन सा दंड मिलता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार विष मिला भोजन देकर मारने वाले को 'रक्षकभोजन' नरक में स्वयं विषयुक्त भोजन खिलाया जाता है। वैतरणी में उसे विषधर सर्प डसते हैं — जैसा पाप, वैसा दंड।

#विषान्न#हत्या#वैतरणी
पाप एवं दंड

महापापी की पहचान क्या है?

गरुड़ पुराण के अनुसार महापापी की पहचान उसके शरीर के चिह्नों से होती है — ब्रह्महत्यारा क्षय रोगी, गोघाती कुबड़ा, मद्यपान करने वाले के दाँत काले, गुरु-अपमानकर्ता मिरगी का रोगी और परस्त्रीगामी नपुंसक होता है।

#महापापी#पाप चिह्न#गरुड़ पुराण
नरक एवं परलोक

गोघाती को वैतरणी में डुबोने का वर्णन क्या है?

गरुड़ पुराण के अनुसार गोघाती को विशेष रूप से वैतरणी नदी में फेंका जाता है जहाँ घड़ियाल, विषधर सर्प और गिद्ध उसे नोचते हैं। इसके अलावा 'महावीचि' नरक में रक्त के गड्ढे में डाला जाता है और काँटे चुभाए जाते हैं।

#गोघाती#गौहत्या#वैतरणी
नरक एवं परलोक

ब्राह्मण होकर मद्य पीने वाले को कौन सा नरक मिलता है?

गरुड़ पुराण के अनुसार मद्यपान करने वाला ब्राह्मण विशेष रूप से वैतरणी नरक में डाला जाता है। इसके अलावा 'विलेपक' नरक में उसे जलती आग में फेंका जाता है और अगले जन्म में उसके दाँत काले होते हैं तथा वह भेड़िये-कुत्ते की योनि पाता है।

#ब्राह्मण#मद्यपान#नरक
यमलोक एवं न्याय

चित्रगुप्त पापियों को कौन से वचन सुनाते हैं?

गरुड़ पुराण के तीसरे अध्याय के अनुसार चित्रगुप्त पापियों को सुनाते हैं — 'तुम्हारे पाप ही तुम्हारे दुःख के कारण हैं, हम नहीं।' साथ ही यमदूत पूछते हैं कि दान, तीर्थ, देव-पूजन और हरिनाम जप क्यों नहीं किया।

#चित्रगुप्त#यमलोक#पापी
पाप एवं दंड

महापाप से सरीसृप और कीट योनि कैसे मिलती है?

गरुड़ पुराण के पाँचवें अध्याय के अनुसार स्वर्ण-चोरी से कीट-पतंग योनि मिलती है, भूमि-हरण से विष्ठा का कीड़ा बनना पड़ता है, और घोर महापापी नरकभोग के बाद साँप-छिपकली जैसी सरीसृप योनि में जन्म लेते हैं।

#महापाप#सरीसृप योनि#कीट योनि
नरक एवं परलोक

पर्यावर्तन नरक में गिद्धों और चीलों के नोचने की सजा किसे मिलती है?

पर्यावर्तन नरक में वे पापी जाते हैं जो अतिथियों का तिरस्कार करते हैं और उन्हें भोजन-जल से वंचित करते हैं। यहाँ विशालकाय गिद्ध और चीलें पापी को अपनी वज्र जैसी चोंच से बार-बार नोचती रहती हैं।

#पर्यावर्तन नरक#गिद्ध#चील
अंत्येष्टि एवं मृत्यु संस्कार

गरुड़ पुराण के नवें अध्याय में मरणासन्न व्यक्ति के लिए क्या करना चाहिए?

गरुड़ पुराण के नवें अध्याय में बताया गया है कि मरणासन्न व्यक्ति को तुलसी के पास गोबर से बने मण्डल में, कुश बिछाकर भूमि पर लिटाएँ। मुख में तुलसी-मंजरी, शालिग्राम का चरणामृत और तिल दें। नारायण-नाम का कीर्तन करते रहें।

#मरणासन्न#गरुड़ पुराण#नवाँ अध्याय
पूजा एवं उपासना

मृत्युंजय पूजा का विधान कहाँ है?

मृत्युंजय पूजा का विधान गरुड़ पुराण के आचारखण्ड में वर्णित है। इसका सम्बन्ध महामृत्युंजय मंत्र से है, जिसका मूल ऋग्वेद और यजुर्वेद में है। यह पूजा अकाल मृत्यु-निवारण और दीर्घायु के लिए की जाती है।

#मृत्युंजय पूजा#गरुड़ पुराण#महामृत्युंजय
नरक एवं परलोक

वैतरणी नदी सभी नरकों में सर्वाधिक कष्टप्रद क्यों है?

गरुड़ पुराण के अनुसार वैतरणी नदी रक्त, मवाद और मांस के कीचड़ से भरी सौ योजन चौड़ी नदी है, जिसमें विशालकाय ग्राह और गिद्ध भरे हैं। सभी महापापियों को विशेष रूप से इसी में फेंका जाता है, इसीलिए यह सर्वाधिक कष्टप्रद मानी गई है।

#वैतरणी#नरक#यमलोक
आत्मा और मोक्ष

गरुड़ पुराण में कितने नरक बताए गए हैं

भागवत पुराण (5.26) में 28, गरुड़ पुराण में 21-28 नरक वर्णित हैं। प्रमुख: तामिस्र, रौरव, कुम्भीपाक, कालसूत्र, वैतरणी आदि — प्रत्येक विशिष्ट पाप से संबंधित। हिंदू धर्म में नरक अस्थायी है — पाप भोगकर पुनर्जन्म होता है। उद्देश्य: सत्कर्म की प्रेरणा।

#नरक#गरुड़ पुराण#28 नरक
आत्मा और मोक्ष

गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद का वर्णन कैसा है

गरुड़ पुराण प्रेतकल्प: यमदूत आत्मा ले जाते हैं → 10 दिन पिंडदान से प्रेत शरीर → 86,000 योजन यम मार्ग → वैतरणी नदी (गोदान से पार) → चित्रगुप्त का कर्म लेखा → यम न्याय → स्वर्ग/नरक/पुनर्जन्म। अंत्येष्टि संस्कार अत्यंत आवश्यक।

#गरुड़ पुराण#मृत्यु#प्रेतकल्प
आत्मा और मोक्ष

प्रेत योनि क्या है और कोई प्रेत कैसे बनता है

प्रेत योनि = शरीर छूटा पर अगली गति नहीं मिली। कारण: अंत्येष्टि न होना, अतृप्त इच्छाएं, अकाल मृत्यु, आत्महत्या, अत्यधिक पाप। मुक्ति: विधिवत अंत्येष्टि, गया पिंडदान, गरुड़ पुराण पाठ, नारायण बलि। मूल कारण — आसक्ति (गीता 2.62-63)।

#प्रेत योनि#भूत-प्रेत#अतृप्ति
कर्म सिद्धांत

पाप और पुण्य का लेखा कौन रखता है?

चित्रगुप्त प्रत्येक जीव के कर्मों का लेखा रखते हैं (पद्म/गरुड़ पुराण)। यमराज (धर्मराज) कर्मफल का न्याय करते हैं। वेदांत दृष्टिकोण: ईश्वर स्वयं कर्मफल का प्रबंधन करते हैं। कर्म सूक्ष्म शरीर में संस्कार रूप में संचित होते हैं।

#चित्रगुप्त#यमराज#कर्म लेखा
धार्मिक उपाय

प्रेत योनि में जाने से कैसे बचें?

धर्मपूर्ण जीवन, ईश्वर भक्ति, मोह त्याग, दान, गंगा स्नान, अंतिम समय ईश्वर स्मरण। परिजन: विधिवत संस्कार+गरुड़ पुराण+श्राद्ध। गरुड़ पुराण: 'सत्यव्रती को बिना कर्मकांड सद्गति।' सच्चा जीवन = सबसे बड़ा बचाव।

#प्रेत योनि#बचाव#गरुड़ पुराण
धार्मिक उपाय

प्रेत बाधा से मुक्ति कैसे पाएं?

हनुमान चालीसा/बजरंग बाण (मंगल/शनि), महामृत्युंजय जप, गीता अध्याय 3/7/9 पाठ, गया में पिंडदान, गुग्गुल धूप, गंगाजल छिड़काव। गरुड़ पुराण/अथर्ववेद/चरक संहिता में उपाय। सावधानी: पहले डॉक्टर, फर्जी बाबाओं से सावधान।

#प्रेत बाधा#मुक्ति#हनुमान
अंतिम संस्कार

गरुड़ पुराण का पाठ मृत्यु के बाद क्यों करते हैं?

आत्मा का मार्गदर्शन (यमलोक यात्रा), प्रेत योनि से रक्षा, तर्पण से आत्मा को शक्ति। 13 दिन तक पाठ। परिजनों को धर्म ज्ञान। गरुड़ पुराण = ज्ञान ग्रंथ, सामान्य समय में भी पठनीय।

#गरुड़ पुराण#मृत्यु#पाठ
धार्मिक चर्चा

महिलाएं दाह संस्कार में शामिल हो सकती हैं क्या?

गरुड़ पुराण: हाँ — पुरुष न हो तो पत्नी/बेटी/बहन सारी रस्में कर सकती हैं।: 'शास्त्र में वंचित नहीं — सामाजिक परंपरा।' कानूनी बाधा नहीं। आधुनिक: कई महिलाएँ कर रही हैं।

#महिला दाह संस्कार#गरुड़ पुराण#अधिकार
मंत्र विधि

मृत व्यक्ति की आत्मा शांति के लिए कौन सा मंत्र जपें?

मंत्र: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय', 'ॐ नमः शिवाय', महामृत्युंजय, गायत्री, विष्णु सहस्रनाम। गीता पाठ (अध्याय 2/8/15) सर्वोत्तम। गरुड़ पुराण (13 दिन)। श्राद्ध/तर्पण/पिंडदान/गया श्राद्ध। अन्नदान मृतक नाम से = सर्वश्रेष्ठ।

#आत्मा शांति#मृतक#श्राद्ध
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रामायण, महाभारत, गीता, पुराण, वेद, उपनिषद — सभी ग्रन्थों की सूची।

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