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मंत्र जाप विधि

मंत्र जाप कैसे करें, कितनी बार जपें, किस माला पर, कब जपें — सम्पूर्ण मंत्र जाप के प्रश्नोत्तर।

477प्रश्नोत्तर
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मंत्र जप में एक दिन छूट जाए तो दोबारा शुरू करना पड़ता है क्या?

पुनः आरंभ अनिवार्य नहीं (सामान्य)। छूटे दिन = अगले दिन दोगुना / अनुष्ठान 1 दिन बढ़ाएं। बीमारी = क्षम्य, आलस्य = प्रायश्चित। जारी रखें।

मंत्र जप नियमछूटनादिन
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मंत्र जप करते समय हंसी आने का क्या कारण है?

शुभ। आनंद (भक्ति), तनाव release, कुंडलिनी/प्राण, अनाहत चक्र। रोकें नहीं — स्वाभाविक। कुछ क्षण → शांत → जारी। अनियंत्रित = गुरु।

मंत्र जप अनुभवहंसीजप
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मंत्र जप काउंटर ऐप से गिनती करना शास्त्रसम्मत है या नहीं?

माला सर्वोत्तम (शास्त्रसम्मत, स्पर्श ऊर्जा, गोपनीयता)। ऐप = गिनती सहायक, माला का विकल्प नहीं। विशेष परिस्थिति (यात्रा) में ऐप मान्य — जप न छूटे, यह अधिक महत्वपूर्ण। Airplane mode रखें। भाव > माध्यम।

मंत्र विधिऐपकाउंटर
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मंत्र जप में ग्रहण काल का क्या विशेष महत्व है?

ग्रहण जप = लाख गुना फल। अथर्वशीर्ष: 'सूर्यग्रहे जप्त्वा सिद्धमंत्रो भवति।' विधि: स्पर्श→मोक्ष निरंतर जप, स्नान, जल में खड़े। भोजन/शयन वर्जित। सूर्य ग्रहण: गायत्री/आदित्य। चंद्र: शिव मंत्र। गर्भवती: सावधानी। मंत्र सिद्धि का सर्वोत्तम अवसर।

मंत्र विधिग्रहणसूर्य ग्रहण
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शाबर मंत्र में हिंदी या देशी भाषा का प्रयोग क्यों होता है?

नाथ सम्प्रदाय = सामान्य जनता हेतु। संस्कृत कठिन → लोकभाषा = सही उच्चारण सहज। तुरंत प्रभाव (मान्यता)। 'भगवान भाव देखते, भाषा नहीं' — तुलसीदास = अवधी।

मंत्र जप ज्ञानशाबरदेशी
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मंत्र जप में कौन से दिन विशेष शुभ माने जाते हैं?

सोमवार=शिव, मंगलवार=हनुमान/दुर्गा, शुक्रवार=लक्ष्मी। चतुर्थी=गणेश, एकादशी=विष्णु, अमावस्या=शिव/काली। नवरात्रि, शिवरात्रि, ग्रहण (1000 गुना)। ब्रह्ममुहूर्त सर्वशुभ।

मंत्र जप नियमदिनशुभ
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मंत्र जप में अग्निहोत्र का क्या महत्व है?

मंत्र + अग्नि = शक्ति गुणित। पुरश्चरण: दशांश हवन अनिवार्य। ऋग्वेद: 'अग्नि = देवताओं का मुख' — हवन = देवताओं तक मंत्र पहुंचाना। वातावरण शुद्धि। दीपक (घी) = लघु अग्निहोत्र।

मंत्र विधिअग्निहोत्रहवन
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एकमुखी रुद्राक्ष से जप करने का क्या विधान है?

सर्वदुर्लभ = शिव स्वरूप। 108 माला असंभव — 1 दाना कंठ/पूजा। पंचमुखी माला + एकमुखी धारण = सर्वोत्तम। 'ॐ नमः शिवाय'। नकली बहुत — विश्वसनीय स्रोत।

माला नियमएकमुखीरुद्राक्ष
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संध्या काल में मंत्र जप करने का क्या महत्व है?

संध्या = दो ऊर्जाओं का मिलन — मंत्र शक्ति अधिक। 'संध्याहीनोऽशुचिः' — संध्या बिना अशुद्ध। प्रातः (ब्रह्म मुहूर्त) = सर्वोत्तम। मध्याह्न = मध्यम। सायं = द्वितीय। कम से कम प्रातः संध्या = अनिवार्य। गायत्री = सूर्य मंत्र = संध्या हेतु।

मंत्र विधिसंध्यासमय
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मंत्र जप से रक्तचाप नियंत्रित होता है क्या?

हां, वैज्ञानिक। Harvard (Benson): Relaxation Response → BP कम। Vagus Nerve → हृदय गति कम। Cortisol ↓ → BP ↓। AHA: ध्यान = BP सहायक। ॐ, गायत्री, सोहम उपयुक्त। सावधानी: मंत्र = सहायक, दवा का विकल्प नहीं। चिकित्सक परामर्श अनिवार्य।

मंत्र प्रभावरक्तचापBP
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राम नाम जप के लिए कौन सी माला सबसे उत्तम है?

तुलसी माला सर्वोत्तम (राम=विष्णु, तुलसी=विष्णुप्रिया)। रुद्राक्ष/स्फटिक/चंदन भी। 'श्री राम जय राम' / 'ॐ रामाय नमः'। राम नाम = सर्वसरलतम — माला बिना भी।

माला नियमरामनाम
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भूत प्रेत से बचने के लिए कौन सा मंत्र पढ़ें?

हनुमान चालीसा सबसे प्रभावी — 'भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै।' महामृत्युंजय मंत्र, नरसिंह मंत्र और गायत्री मंत्र भी शक्तिशाली हैं। संध्या काल में पाठ और गुग्गुल धूप जलाना विशेष लाभकारी।

मंत्र विधिभूत प्रेतरक्षा मंत्र
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मंत्र जप करते समय माला हाथ से गिर जाए तो क्या करें?

तुरंत उठाएं → गंगाजल/जल → इष्ट मंत्र 3-5 बार → जहां छूटा वहीं से। रुद्राक्ष: गंगाजल + 11 जप। टूटी: नदी विसर्जन + नई। गिरना ≠ जप भंग।

मंत्र जप नियममालागिरना
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मंत्र जप छोड़ने के बाद दोबारा शुरू करने का क्या नियम है?

कोई दंड नहीं। शुभ दिन + नया संकल्प। माला शुद्धि (गंगाजल+108 जप)। क्षमा प्रार्थना। 108/दिन से शुरू। 'देर आए दुरुस्त आए।' ईश्वर = प्रसन्न।

मंत्र जप नियमछोड़नादोबारा
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चंदन माला से जप करने का क्या विशेष लाभ है?

शीतलता (शांति), सुगंध (एकाग्रता), सात्विक (सर्वदेवता), आयुर्वेद (पित्त↓, मस्तिष्क शांत)। विष्णु/शिव विशेष। श्वेत=शिव/विष्णु, लाल=देवी/गणेश। सूखी जगह रखें।

माला नियमचंदनमाला
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मंत्र जप से मांगलिक दोष शांत होता है क्या?

ज्योतिष: हां। मंगल बीज 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः'। हनुमान मंत्र/चालीसा (मंगलवार)। महामृत्युंजय। ज्योतिष आधारित — विवाह निर्णय केवल दोष पर न लें।

मंत्र जप लाभमांगलिकदोष
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अजपा जप क्या होता है और कैसे करें?

श्वास = स्वतः 'सोऽहम्' जप। अंदर='सो'(वह/ब्रह्म), बाहर='हम्'(मैं)। 21,600 श्वास/दिन = 21,600 जप। श्वास पर ध्यान = स्वतः। मानस से ऊपर। कोई नियम नहीं — सदा चल रहा। सिद्ध = मोक्ष।

मंत्र जप ज्ञानअजपाजप
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मंत्र जप के बाद माला कहाँ रखनी चाहिए?

पूजा स्थान (देवता पास), गौमुखी/थैली में, ऊंचे स्थान (भूमि नहीं)। प्रत्येक देवता अलग माला। शौचालय/बिस्तर/खुले में नहीं। दूसरों को न दें।

मंत्र जप नियममालारखना
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मंत्र जप में नियमितता कैसे बनाए रखें?

निश्चित समय+स्थान। छोटा लक्ष्य (108)। 40 दिन संकल्प। कैलेंडर ट्रैकिंग। संगति/गुरु। बीमार = 11 मानस। 'छोटा नियमित > बड़ा अनियमित।' 108/दिन = 39,420/वर्ष।

मंत्र जप व्यावहारिकनियमितताजप
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मंत्र जप करते समय शरीर में गर्मी महसूस होने का कारण क्या है?

कुंडलिनी जागरण, बीज मंत्र अग्नि तत्व, 'तप'=आंतरिक अग्नि। शारीरिक: metabolism, रक्त प्रवाह। शुभ संकेत। अत्यधिक: ठंडा जल, चंदन, 'ॐ शांति'।

मंत्र जप अनुभवगर्मीशरीर
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मंत्र जप से मस्तिष्क पर क्या वैज्ञानिक प्रभाव पड़ता है?

Alpha/Theta waves↑ (शांति), Cortisol↓ (तनाव कम), Serotonin↑ (प्रसन्नता), Prefrontal cortex↑ (बुद्धि), Amygdala↓ (भय कम), Vagus nerve (relax), Neuroplasticity। Harvard/Johns Hopkins प्रमाणित।

मंत्र जप विज्ञानमस्तिष्कवैज्ञानिक
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ब्राह्म मुहूर्त में मंत्र जप करने से क्या विशेष लाभ मिलता है?

सात्विक ऊर्जा अधिकतम, मन शांत, प्राण शुद्ध, 'ब्रह्म' काल = ब्रह्म संवाद। कुछ ग्रंथ: 100 गुना फल। नियमितता = दीर्घकालिक। 'ब्राह्मे मुहूर्ते उत्तिष्ठेत्।'

मंत्र जप नियमब्रह्ममुहूर्तजप
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उपांशु जप में ओठ हिलने चाहिए या नहीं?

हां — ओठ+जिह्वा हिलें, ध्वनि मंद (whisper) = स्वयं मुश्किल से सुनें, दूसरे नहीं। यही उपांशु। वाचिक=आवाज, उपांशु=ओठ हिलें बिना आवाज, मानस=ओठ भी नहीं।

मंत्र जप नियमउपांशुओठ
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मंत्र जप से दिव्य दृष्टि प्राप्त होती है क्या?

अज्ञा चक्र सक्रियता = 'दिव्य दृष्टि' (अंतर्ज्ञान, सूक्ष्म बोध)। पतंजलि: 'मूर्ध्ज्योतिषि सिद्धदर्शनम्'। ॐ = अज्ञा प्रभावित। वर्षों की साधना — रातोंरात नहीं। प्रतीकात्मक, भौतिक नहीं। भ्रामक दावों से बचें। गुरु अनिवार्य।

मंत्र विधिदिव्य दृष्टिअज्ञा चक्र
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मंत्र उच्चारण शुद्धि कितनी महत्वपूर्ण है जप में?

शिक्षा वेदांग: 'स्वर/वर्ण दोषयुक्त = वज्र समान हानि।' वैदिक/तांत्रिक = शुद्धि अत्यावश्यक। नाम जप/चालीसा = भाव > उच्चारण। 'मन्त्रहीनं...परिपूर्णं तदस्तु मे' — भक्ति से कमी पूर्ण। गुरु से सीखें + भक्ति = सर्वोत्तम।

मंत्र विधिउच्चारणशुद्धि
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मंत्र जप के साथ यंत्र पूजा करने से क्या अतिरिक्त लाभ मिलता है?

मंत्र (ध्वनि) + यंत्र (दृश्य) = दोगुना। एकाग्रता (ध्यान बिंदु), ऊर्जा संचित+केंद्रित, देवता निवास+आवाहन, 24×7 विकिरण। श्री यंत्र+श्री सूक्त उदाहरण। मंत्र अकेला शुभ, +यंत्र = सम्पूर्ण।

मंत्र जप ज्ञानयंत्रमंत्र
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कमलगट्टे की माला किस देवी-देवता के लिए प्रयोग करें?

लक्ष्मी सर्वोत्तम (कमल = लक्ष्मी आसन)। श्री सूक्त, 'ॐ श्रीं'। सरस्वती, सौम्य देवी, विष्णु भी। 108 बीज, शुक्रवार/दीपावली। धन+समृद्धि+ऋण मुक्ति।

माला नियमकमलगट्टामाला
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मंत्र जप के दौरान कोई बोलने लगे तो क्या करना चाहिए?

सामान्यतः बीच में बोलना अनुशंसित नहीं। अत्यावश्यक: रोकें → बात → पुनः जप। अनावश्यक: संकेत दें, बाद में। अनुष्ठान: मौन अनिवार्य। दैनिक: अत्यधिक कठोरता न रखें। निश्चित समय/स्थान = बाधा न्यूनतम। नियमितता > कठोरता।

मंत्र विधिबाधाबोलना
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पितृ दोष निवारण के लिए कौन सा मंत्र जपें?

सरलतम: 'ॐ पितृभ्यो नमः' 108 बार। पितृ गायत्री। महामृत्युंजय (1,25,000 जप)। गीता 15वाँ अध्याय। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय'। दक्षिण दिशा, काले तिल माला, प्रातःकाल।

मंत्र विधिपितृ दोष मंत्रतर्पण मंत्र
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एक ही माला से अलग-अलग मंत्रों का जप कर सकते हैं या नहीं?

आदर्श: अलग माला (ऊर्जा मिश्रण)। व्यावहारिक: स्फटिक = सर्वदेवता। अनुष्ठान = अलग अनिवार्य। शिव=रुद्राक्ष, विष्णु=तुलसी, देवी=स्फटिक/हल्दी।

माला नियमएक मालाअलग
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शाबर मंत्र और संस्कृत मंत्र में कौन अधिक प्रभावी है?

संस्कृत: शास्त्रीय, वैदिक, गहन। शाबर: लोकभाषा, सरल, तीव्र। गहन = संस्कृत > शाबर। तात्कालिक = शाबर प्रभावी। दोनों = भाव प्रधान। विवादास्पद।

मंत्र जप ज्ञानशाबरसंस्कृत
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भगवान का नाम जप और मंत्र जप एक ही है या अलग?

नाम: सीधा नाम (राम/कृष्ण), कोई विधि/दीक्षा नहीं, भक्ति प्रधान। मंत्र: विशिष्ट संस्कृत, विधि-नियम, कुछ में दीक्षा, शक्ति प्रधान। 'कलौ नामैव केवलम्' — कलियुग में नाम सर्वश्रेष्ठ। दोनों = ईश्वर प्राप्ति।

मंत्र विधिनाम जपमंत्र जप
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मंत्र जप से वास्तु दोष दूर होता है क्या?

हां, सहायक। मंत्र: 'ॐ वास्तु पुरुषाय नमः', गणेश मंत्र, महामृत्युंजय। हवन, शंख ध्वनि, गंगाजल। गंभीर दोष: वास्तु विशेषज्ञ। मंत्र = सहायक + वास्तु सुधार = सर्वोत्तम।

मंत्र विधिवास्तुदोष
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धन्वंतरि मंत्र का जप रोग मुक्ति के लिए कैसे करें?

'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वंतरये...सर्वामयविनाशनाय...नमः'। सरल: 'ॐ धन्वंतरये नमः' 108 बार। तुलसी माला, पीले वस्त्र। धनतेरस = धन्वंतरि जयंती सर्वोत्तम। फल: रोग निवारण, स्वास्थ्य। चिकित्सा + मंत्र = दोनों।

मंत्र विधिधन्वंतरिरोग मुक्ति
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माला जप में अंगूठे और मध्यमा से ही मनके क्यों फेरते हैं?

अंगूठा = अग्नि/ब्रह्म। मध्यमा = आकाश (शुद्धतम)। अग्नि + आकाश = शक्ति + शून्यता। तर्जनी = वायु (चंचल — वर्जित)। 'मंत्र मुद्रा' = ऊर्जा संचार।

मंत्र जप नियमअंगूठामध्यमा
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अखंड जप क्या होता है और इसे कैसे करें?

अखंड जप = बिना टूटे निरंतर। व्यक्तिगत (12-24 घंटे) या सामूहिक (बारी-बारी, 24/7)। संकल्प → अखंड ज्योत → निरंतर जप → ब्रह्मचर्य → हवन/दान से समापन। नवरात्रि 9 दिन अखंड जप प्रचलित। शक्ति कई गुना।

मंत्र विधिअखंड जपनिरंतर
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प्रेत मुक्ति के लिए कौन सा मंत्र जपें?

'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' 108 बार, महामृत्युंजय 1,25,000, गीता 15वाँ अध्याय, गरुड़ पुराण पाठ। नारायण बलि + गया पिंडदान = सर्वश्रेष्ठ। विद्वान पंडित से करवाएँ।

मंत्र विधिप्रेत मुक्तिमंत्र
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महामृत्युंजय मंत्र का जप कब और कैसे करें?

महामृत्युंजय जप विधान: रुद्राक्ष की लाल धागे वाली माला, लाल आसन, उत्तर दिशा, ब्रह्म मुहूर्त (4 बजे सुबह) सर्वोत्तम। 108 बार (एक माला) जप से: अकाल मृत्यु भय नाश, व्याधि शमन, जीवन-ऊर्जा प्राप्ति।

मंत्र जपमहामृत्युंजय जप विधानब्रह्म मुहूर्त
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महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ क्या है?

'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...' — तीन नेत्रों वाले (भूत-वर्तमान-भविष्य के ज्ञाता) शिव की आराधना। जैसे खरबूजा पकने पर बेल से स्वतः मुक्त होता है — वैसे हे शिव! हमें मृत्यु और भौतिक बंधनों से मुक्त कर मोक्ष प्रदान करें।

मंत्र जपमहामृत्युंजय मंत्र अर्थत्र्यम्बक
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'ॐ नमः शिवाय' का असली अर्थ क्या है?

'ॐ' = प्रपंच सागर पार करने वाली नौका (सूक्ष्म प्रणव)। 'नमः' = अहंकार का समर्पण। 'शिवाय' = कल्याणकारी शिव को। पूर्ण अर्थ: 'मैं कल्याणकारी शिव के प्रति समर्पण करता हूँ।' इसका जप पांचों क्लेश भस्म करता है।

मंत्र जपॐ नमः शिवाय अर्थपंचाक्षर मंत्र
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बीज मंत्र को 'मंत्रों का प्राण' क्यों कहते हैं?

जैसे प्राण के बिना शरीर निर्जीव है — वैसे बीज के बिना कोई भी बड़ा मंत्र शक्तिहीन और चैतन्य-रहित होता है। बीज ही मंत्र में चेतना का संचार करता है और उसे फलदायी बनाता है — इसीलिए बीज मंत्र 'मंत्रों का प्राण' कहलाते हैं।

बीज मंत्र परिचयमंत्रों का प्राणचेतना संचार
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'बीज' शब्द का क्या अर्थ है?

'बीज' का अर्थ: जैसे वट-बीज में विशाल वटवृक्ष अव्यक्त है — वैसे एकाक्षर बीज मंत्र में देवता का संपूर्ण स्वरूप, समस्त शक्तियाँ और चेतना निहित होती है। बीज मंत्र देवता का संकेताक्षर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर है।

बीज मंत्र परिचयबीज शब्द अर्थवटवृक्ष
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ऋषि 'मंत्र-द्रष्टा' क्यों कहलाते हैं?

ऋषि 'मंत्र-द्रष्टा' इसलिए कहलाते हैं क्योंकि उन्होंने मंत्रों की रचना नहीं की बल्कि अपनी योग-शक्ति से ब्रह्मांडीय नाद-सागर में दैवीय शक्तियों की ध्वनि-तरंगों को 'देखा' और अनुभव किया।

बीज मंत्र परिचयमंत्र द्रष्टामंत्र कर्ता नहीं
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बीज मंत्रों की उत्पत्ति कैसे हुई?

ऋषियों ने योग-शक्ति से ब्रह्मांडीय नाद-सागर में डुबकी लगाकर दैवीय शक्तियों की घनीभूत और सार-रूप ध्वनि-तरंगों को सुना और अनुभव किया — वही बीज मंत्र कहलाए। ये मनुष्य की रचना नहीं, देव-शक्तियों के ध्वन्यात्मक स्वरूप हैं।

बीज मंत्र परिचयबीज मंत्र उत्पत्तिऋषि योग शक्ति
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बीज मंत्र क्या हैं?

बीज मंत्र मनुष्य की रचना नहीं बल्कि साक्षात् देव-शक्तियों के ध्वन्यात्मक स्वरूप हैं — ऋषियों ने गहन योग-शक्ति से दैवीय शक्तियों की विशिष्ट ध्वनि-तरंगों को सुना और अनुभव किया। ये सृष्टि के आरंभ से विद्यमान हैं।

बीज मंत्र परिचयबीज मंत्रदेव शक्ति
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शिव पुराण के अनुसार 5 लाख और 10 लाख जप से क्या होता है?

शिव पुराण (2.1.14): 5 लाख जप = भगवान शिव के प्रत्यक्ष दर्शन और समस्त कामनाएं पूर्ण; 10 लाख जप = अकल्पनीय पुण्य। कलियुग में 5 लाख (चार गुना) जप अनुशंसित, सवा लाख न्यूनतम प्रामाणिक संख्या।

जप संख्या5 लाख जप10 लाख जप
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सवा लाख जप का विधान किसके लिए है?

सवा लाख (1,25,000) जप किसी गंभीर रोग, अकाल मृत्यु के भय, सर्जरी से पूर्व या विशिष्ट मनोकामना पूर्ति के लिए शास्त्रोक्त विधान है।

जप संख्यासवा लाखगंभीर रोग
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महामृत्युंजय मंत्र का दैनिक जप कितनी बार करना चाहिए?

दैनिक जप: न्यूनतम 11, 27 या 108 बार (एक माला) — मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य रक्षा और बुरे स्वप्न से बचने के लिए। 108 = ब्रह्मांडीय गणित (27 नक्षत्र × 4 चरण)।

जप संख्यादैनिक जप11 27 108
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प्रदोष व्रत के मुख्य मंत्र?

इस पूजा में मुख्य रूप से 4 मंत्र जपे जाते हैं: 'ॐ नमः शिवाय', 'महामृत्युंजय मंत्र', 'शिव गायत्री मंत्र' और 'ॐ उमा सहित शिवाय नमः'।

मंत्र साधनाशिव मंत्रपंचाक्षर
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मंत्र जप से मन शांत कैसे होता है?

शास्त्र: पतंजलि — 'चित्तवृत्ति निरोध।' गीता: 'अभ्यास+वैराग्य।' विज्ञान: Vagus Nerve→शांति तंत्र, Cortisol↓, Repetition→overthinking बंद, Alpha/Theta waves↑। ॐ 10-15 मिनट, या 108 जप। सोने पूर्व राम नाम।

मंत्र प्रभावमन शांतिध्यान
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घनकर्णेश्वर पर कौन-से मंत्र जपने चाहिए?

तीन साधनाएँ — (१) 'ॐ नमः शिवाय' पंचाक्षरी जप, (२) महामृत्युंजय मंत्र, (३) नाद-अनुसंधान — घंटा बजाकर क्षीण होती गूँज पर ध्यान केंद्रित करना। जप उपांशु या मानसिक हो।

मंत्र एवं साधनाघनकर्णेश्वरमंत्र
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जप माला में सुमेरु का क्या महत्व है और इसे क्यों नहीं पार करते

सुमेरु परमात्मा और गुरु का प्रतीक है। इसे न लांघना आध्यात्मिक अनुशासन और भक्ति की मर्यादा का हिस्सा है।

जप नियमसुमेरुमाला
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बिना माला के मंत्र जप की संख्या कैसे गिन सकते हैं

बिना माला के उंगलियों के पोरों पर की जाने वाली गणना (कर माला) सबसे प्रामाणिक और शास्त्रोक्त विधि है।

जप नियमकर मालागणना
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चलते-फिरते मंत्र जप करने के क्या नियम हैं

चलते-फिरते केवल मानसिक जप करना चाहिए। यह निरंतर परमात्मा से जुड़े रहने का एक प्रभावी तरीका है।

जप नियमनियमअजपा जप
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बिस्तर पर बैठकर मंत्र जप करने के क्या नुकसान और नियम हैं

विशेष सिद्धि के लिए बिस्तर पर जप वर्जित है, लेकिन सामान्य 'नाम जप' किसी भी स्थान या अवस्था में किया जा सकता है।

जप नियमनियमशुद्धि
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हरे राम हरे कृष्ण महामंत्र की उत्पत्ति कैसे हुई

हरे कृष्ण महामंत्र का स्रोत 'कलि-संतरण उपनिषद' है। इसमें ब्रह्माजी ने नारद को बताया कि कलियुग में 16 नामों का यह महामंत्र ही एकमात्र उपाय है। 15वीं सदी में चैतन्य महाप्रभु ने इसे जन-जन तक पहुँचाया।

मंत्र एवं उपासनाहरे कृष्णमहामंत्र
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कर्ज न चुका पा रहे हों तो ऋणमुक्ति मंत्र क्या है

ऋणमुक्ति के लिए बुधवार को 'ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र' का पाठ करें और 'ॐ गणेश ऋणं छिन्दि वरेण्यं हुं नमः फट्' का 108 बार जप करें। मंगलवार को 'ऋणमोचक मंगल स्तोत्र' पढ़ें।

मंत्र जप एवं साधनाऋणमुक्तिकर्ज
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बिजनेस में नुकसान हो रहा हो तो कौन सी पूजा करें

बिजनेस में नुकसान हो तो बुधवार-शुक्रवार को लक्ष्मी-गणेश पूजा करें, लक्ष्मी बीज मंत्र का जप करें, मंगलवार को सुंदरकांड पढ़ें और व्यापारस्थल में वास्तु दोष दूर करें।

मंत्र जप एवं साधनाव्यापारनुकसान
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नौकरी में तरक्की के लिए कौन सा मंत्र जपें

नौकरी में तरक्की के लिए गायत्री मंत्र, 'ॐ घृणि सूर्याय नमः', 'ॐ नमः शिवाय' और 'ॐ श्री हनुमते नमः' का 108 बार जप करें। परिश्रम और ईमानदारी के साथ मंत्र जप सबसे प्रभावशाली होता है।

मंत्र जप एवं साधनानौकरीतरक्की
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सूर्य के 108 नामों का जप कैसे करें

रविवार को सूर्योदय के समय अर्घ्य देने के बाद लाल माला से 'ॐ [नाम] नमः' क्रम में 108 नाम जपें। लाल वस्त्र पहनें। मित्र, रवि, सूर्य, भानु, खग, पूषा, हिरण्यगर्भ, मरीचि, आदित्य, सविता, अर्क, भास्कर ये 12 नाम सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं।

मंत्र जप एवं साधनासूर्य 108 नामजप विधि
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मंत्र जाप विधि — प्रश्नोत्तर

मंत्र जाप विधि से सम्बन्धित 477+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। सनातन धर्म के विद्वानों द्वारा दिए गए इन उत्तरों में वेद, पुराण, उपनिषद और शास्त्रों के प्रमाण दिए गए हैं। यदि आप मंत्र जाप विधि के बारे में कोई भी प्रश्न खोज रहे हैं — चाहे विधि हो, नियम हो, सामग्री हो या लाभ — तो यहाँ आपको शास्त्रसम्मत उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर में स्रोत, विधि और व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया है।

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