विस्तृत उत्तर
शालिग्राम और तुलसी का विवाह इसलिए कराया जाता है क्योंकि शालिग्राम भगवान विष्णु का पाषाण रूप और तुलसी देवी वृंदा का रूप मानी जाती हैं। वृंदा ने विष्णु को पाषाण बनने का श्राप दिया था और स्वयं तुलसी रूप में प्रकट हुईं। भगवान विष्णु ने वरदान दिया कि वे शालिग्राम रूप में तुलसी के साथ सदैव पूजे जाएँगे। इसीलिए तुलसी विवाह में तुलसी माता को वधू और शालिग्राम को वर माना जाता है। यह विवाह भक्त और भगवान, श्राप और वरदान, प्रायश्चित और प्रेम के मिलन का प्रतीक है।
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