शिव तत्व दर्शनशिव का वास श्मशान में क्यों बताया गया है शिव पुराण में क्या लिखा हैशिव का श्मशान-वास परम वैराग्य, मृत्यु की स्वीकृति और अहंकार-नाश का प्रतीक है। श्मशान जीवन का परम सत्य दर्शाता है। शिव काल के अधिपति हैं इसलिए काल के घर श्मशान में रहते हैं — यही शिव पुराण का दर्शन है।#शिव श्मशान#वैराग्य#मृत्यु स्वीकृति
शिव धाम महिमाकाशी को शिव की नगरी क्यों कहते हैं शिव पुराण क्या कहता हैशिव पुराण में काशी को 'अविमुक्त क्षेत्र' कहा गया है जिसे शिव कभी नहीं छोड़ते। काशी में मरने पर शिव स्वयं 'तारक मंत्र' देते हैं। काशी शिव के त्रिशूल पर स्थित और प्रलयकाल में भी अविनाशी है।#काशी#अविमुक्त क्षेत्र#तारक मंत्र
शिव धाम महिमाकैलाश पर्वत को शिव का निवास क्यों माना जाता हैशिव पुराण में कैलाश को शिव का नित्य-धाम और ब्रह्माण्ड का केंद्र कहा गया है। महायोगी शिव के निवास के लिए सांसारिक कोलाहल से परे, पवित्र और आध्यात्मिक ऊर्जा से पूर्ण कैलाश-शिखर सर्वोत्तम है।#कैलाश#शिव निवास#हिमालय
शिव रूप महिमाशिव का भैरव रूप कब और क्यों प्रकट होता हैभैरव रूप ब्रह्मा के अहंकार के कारण प्रकट हुआ। भैरव ने ब्रह्मा का पाँचवाँ सिर काटा। काशी में ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली और शिव ने भैरव को काशी का कोतवाल नियुक्त किया।#भैरव#ब्रह्मा पांचवाँ सिर#काशी कोतवाल
शिव रूप महिमाअर्धनारीश्वर रूप क्यों और कैसे प्रकट हुआब्रह्माजी की प्रार्थना पर शिव ने पार्वती के साथ अर्धनारीश्वर रूप धारण किया और मैथुनी सृष्टि का ज्ञान दिया। यह रूप शिव-शक्ति की अभिन्नता और पुरुष-प्रकृति के एकत्व का दिव्य प्रतीक है।#अर्धनारीश्वर#ब्रह्मा प्रार्थना#शिव शक्ति
शिव महिमादक्ष ने शिव और सती को यज्ञ में क्यों नहीं बुलाया?दक्ष ने शिव और सती को इसलिए नहीं बुलाया क्योंकि दक्ष को शिव से पुराना बैर था — सती ने उनकी इच्छा के विरुद्ध शिव का वरण किया था और एक पूर्व के यज्ञ में शिव के न उठने से दक्ष ने अपना अपमान माना था। यह उनकी प्रतिशोध की भावना थी।#दक्ष यज्ञ#शिव सती निमंत्रण#दक्ष अपमान
शिव लीलाभस्मासुर की कथा में विष्णु ने मोहिनी रूप क्यों लिया?भस्मासुर को सीधे नहीं मारा जा सकता था क्योंकि शिव का वरदान था और वह उनका भक्त था। विष्णु ने मोहिनी रूप इसलिए लिया ताकि भस्मासुर को नृत्य में अपना हाथ अपने सिर पर रखवाकर उसे उसी के वरदान से भस्म कराया जा सके।#मोहिनी#विष्णु#भस्मासुर
शिव महिमाशिव जी के गले में सर्प क्यों होता है?शिव जी के गले में नागराज वासुकी इसलिए हैं क्योंकि वासुकी उनके परम भक्त थे और समुद्र मंथन में रस्सी बनकर घायल हुए। इस भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी ने उन्हें अपने गले में आभूषण की तरह सदा रहने का वरदान दिया।#शिव नाग#वासुकी#नागराज
शिव भक्त कथाजलंधर अजेय क्यों था उसकी शक्ति का रहस्य क्या थाजलंधर की अजेयता के दो कारण — शिव-तेज से जन्म (देवताओं से शक्तिशाली) और पत्नी वृंदा का अखंड सतीत्व जो अभेद्य दिव्य कवच था। जब तक वृंदा का सतीत्व अखंड था, शिव भी उसे युद्ध में नहीं जीत सके।#जलंधर अजेय#वृंदा सतीत्व#शक्ति रहस्य
शिव ध्यानशिव मंत्र जप करते समय सिर पर कंपन क्यों होता है?'ॐ' ध्वनि resonance + कुंडलिनी गति + आज्ञा/सहस्रार चक्र सक्रियता + प्राणवायु प्रवाह। सकारात्मक संकेत (योग शास्त्र)। घबराएं नहीं, जप जारी। अत्यधिक हो: रोकें, गहरी सांस, गुरु परामर्श। अनुभव व्यक्तिगत।#कंपन#सिर#जप
शिव-सती-पार्वती कथाकामदेव को अनंग क्यों कहते हैंकामदेव के शरीर को शिव के तृतीय नेत्र ने भस्म किया। पुनर्जीवन मिला पर शरीर नहीं — केवल प्रेम-शक्ति के रूप में। इसीलिए वे 'अनंग' (बिना शरीर के) कहलाए। द्वापर में कृष्ण-पुत्र प्रद्युम्न के रूप में पुनः जन्म हुआ।#अनंग#कामदेव#शरीर रहित
शिव-सती-पार्वती कथाइंद्र ने कामदेव को शिव की तपस्या भंग करने क्यों भेजातारकासुर का वरदान था कि उसका वध केवल शिव-पुत्र के हाथों होगा। इसके लिए शिव-पार्वती का विवाह आवश्यक था। शिव की समाधि अन्यथा भंग नहीं होती थी — इसलिए इंद्र ने कामदेव को भेजा।#इंद्र कामदेव#तारकासुर#देवता योजना
शिव-सती-पार्वती कथाकामदेव को शिव ने भस्म क्यों कियाकामदेव ने देवताओं के निर्देश पर पुष्प-बाण से शिव की समाधि भंग की। क्रोधित शिव ने तृतीय नेत्र खोला और कामदेव भस्म हो गए। शिव वासना के विरोधी हैं — यही उनके दंड का दार्शनिक कारण है।#कामदेव भस्म#शिव तीसरा नेत्र#तपस्या भंग
शिव-सती-पार्वती कथाशिव ने ब्रह्मचारी वेश में पार्वती की परीक्षा क्यों लीशिव ने ब्रह्मचारी वेश में इसलिए परीक्षा ली कि पार्वती की भक्ति वास्तविक है या नहीं। पहले सप्तर्षियों को भेजा, फिर स्वयं वटुवेश धारण कर गए।#शिव ब्रह्मचारी वेश#पार्वती परीक्षा#वटुवेश
शिव-सती-पार्वती कथापार्वती की तपस्या से शिव क्यों प्रसन्न नहीं होते थेशिव महायोगी थे, सती के वियोग में गहरी समाधि में थे और पार्वती की परीक्षा भी लेनी थी। इसीलिए तपस्या के बावजूद ध्यान नहीं दिया — जब तक कामदेव ने पुष्प-बाण से समाधि भंग नहीं की।#शिव योगी#सती वियोग#पार्वती परीक्षा
शिव-सती-पार्वती कथाविष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े क्यों किएशिव के तांडव से सृष्टि में प्रलय का खतरा था। सृष्टि-रक्षा के लिए विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शव के 51 टुकड़े किए ताकि शिव की भटकन रुके। उन 51 स्थानों पर शक्तिपीठ बने।#विष्णु सुदर्शन चक्र#सती शव#प्रलय रक्षा
शिव-सती-पार्वती कथाशिव सती के शव को लेकर क्यों भटकते रहेसती की मृत्यु से शिव अत्यंत शोकग्रस्त हुए — सती के शव को कंधे पर उठाकर विरह में पागलों की तरह तांडव करते हुए भटकते रहे। यह शिव की परम प्रेम-वेदना का पौराणिक चित्रण है।#शिव तांडव#सती शव#विरह वेदना
शिव-सती-पार्वती कथादक्ष के कटे सिर पर बकरे का सिर क्यों लगाया गयादक्ष का मूल सिर यज्ञाग्नि में जल गया था इसलिए बकरे का सिर लगाकर उन्हें जीवित किया गया। यह पशु-बुद्धि और अहंकार का प्रतीक है — जिस पशु-वृत्ति से दक्ष ने शिव का अपमान किया वही उनकी पहचान बन गई।#दक्ष बकरा सिर#दक्ष पुनर्जीवन#यज्ञ पूर्ण
शिव-सती-पार्वती कथाशिव ने दक्ष को मारने के बाद उन्हें वापस जीवित क्यों कियाब्रह्मा-विष्णु सहित समस्त देवताओं की विनय पर शिव ने क्रोध शांत किया। यज्ञ अधूरा रह गया था — अधूरे यज्ञ से सृष्टि को अशुभ होता, इसलिए दक्ष को पुनर्जीवित कर यज्ञ पूर्ण कराया गया।#दक्ष पुनर्जीवन#शिव क्षमा#यज्ञ पूर्ण
शिव महिमाशिव जी व्याघ्र चर्म यानी बाघ की खाल क्यों पहनते हैं?शिव पुराण के अनुसार दारुकवन में ऋषियों ने क्रोध में बाघ उत्पन्न किया जो शिव को मारने आया, लेकिन शिव ने उसे क्षण भर में मार डाला और उसकी खाल अपने शरीर पर लपेट ली। यह अहंकार और वासना पर विजय का प्रतीक है।#व्याघ्र चर्म#बाघ की खाल#दारुकवन
लोकइलावृत वर्ष में भगवान शिव किसकी उपासना करते हैं और क्यों?इलावृत वर्ष में भगवान शिव चतुर्व्यूह के चतुर्थ अंश 'संकर्षण' की उपासना करते हैं। यह दर्शाता है कि शिव जी भी भगवान विष्णु के संहार-स्वरूप के उपासक हैं।#इलावृत वर्ष#भगवान शिव#संकर्षण
लोकअलकनंदा को भागीरथी क्यों कहते हैं?अलकनंदा को भागीरथी इसलिए कहते हैं क्योंकि महाराज भगीरथ की घोर तपस्या से यह पृथ्वी पर अवतरित हुई और भगीरथ के रथ का अनुसरण करती हुई भारतवर्ष में आई।#अलकनंदा#भागीरथी#भगीरथ
शिव रूपकाल भैरव की पूजा में मदिरा का अर्पण क्यों किया जाता है?काल भैरव = तामसिक देवता, वाम मार्गी तांत्रिक परंपरा। ब्रह्मा वध कथा (शिव पुराण) — उग्र स्वरूप को तामसिक भोग। उज्जैन मंदिर: मूर्ति मदिरा ग्रहण करती है — ~2000 बोतल/दिन, अनसुलझा रहस्य। प्रसाद नहीं लिया जाता। सामान्य शिव पूजा में मदिरा सर्वथा वर्जित।#काल भैरव#मदिरा#उज्जैन
शिव महिमाभगीरथ ने शिव जी से गंगा को क्यों माँगा था?भगीरथ ने शिव से गंगा इसलिए माँगी क्योंकि उनके पूर्वज — राजा सगर के साठ हजार पुत्र — कपिल मुनि के क्रोध से भस्म हो गए थे और उनकी मुक्ति गंगाजल से ही संभव थी। गंगा का प्रचंड वेग संभालने के लिए शिव की जटाओं की आवश्यकता थी।#भगीरथ#गंगा#सगर पुत्र मोक्ष
शिव पूजा नियमशिवलिंग पर हल्दी क्यों नहीं चढ़ाई जाती, इसका कारण बताएं?शिवलिंग पर हल्दी वर्जित। कारण: हल्दी = स्त्री सौभाग्य/सौंदर्य प्रतीक, शिव = वैरागी। हल्दी = विष्णु/बृहस्पति से संबंधित (पीतांबर)। रसोई सामग्री, शिव श्मशानवासी। शिवलिंग पर चंदन, भस्म या केसर लगाएं। पार्वती प्रतिमा पर हल्दी स्वीकार्य।#हल्दी#शिवलिंग#निषेध
शिव मंत्रशिव मंत्र जप के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन क्यों आवश्यक है?ब्रह्मचर्य से ओज संचय → मंत्र शक्ति वृद्धि। मन एकाग्र रहता है। शिव स्वयं परम योगी — उनकी साधना में वैराग्य अनुकूल। पुरश्चरण विधि में ब्रह्मचर्य अनिवार्य नियम। नाड़ी शुद्धि, चक्र जागृति में सहायक। गृहस्थ साधक: पूर्ण ब्रह्मचर्य अनिवार्य नहीं, संयम और सात्विकता पर्याप्त।#ब्रह्मचर्य#साधना नियम#ओज
शिव महिमाहलाहल विष पीने से शिव का गला नीला क्यों पड़ गया?हलाहल की अत्यंत तीव्र विषाक्तता और उष्मा के प्रभाव से शिव जी का कंठ नीला पड़ गया। माता पार्वती ने गला दबाकर विष को नीचे उतरने से रोका था इसलिए वह कंठ में ही स्थिर रहा और नीला पड़ा। तभी से शिव 'नीलकंठ' कहलाए।#नीलकंठ#हलाहल प्रभाव#शिव गला नीला
शिव नाम महिमाशिव को शंभू क्यों कहते हैंशंभू = 'शं' (शुभ, कल्याण) + 'भू' (स्वरूप) = आनंद-स्वरूप, कल्याण के साकार रूप। शिव स्वयं परमानंद हैं और भक्तों को भी आनंद देते हैं — इसीलिए 'शंभू'। वे अनंत, अनादि और सृष्टि के संचालक हैं।#शंभू#आनंद स्वरूप#कल्याण
शिव नाम महिमाशिव को उमापति क्यों कहते हैंउमापति = उमा (पार्वती) के पति। 'उमा' नाम उनकी माँ द्वारा 'उ! मा!' कहने से पड़ा। यह नाम शिव के गृहस्थ, प्रेमपूर्ण और परम-भक्त-वत्सल स्वरूप को दर्शाता है। एक ओर महायोगी, दूसरी ओर उमा के परम प्रेमी।#उमापति#पार्वती पति#शिव नाम
शिव नाम महिमाशिव को रुद्र क्यों कहते हैंरुद्र = 'रुत्' (दुख) + 'द्र' (हरने वाला) — दुखों को हरने वाले देव। यह शिव का वेदों में मूल नाम है। यजुर्वेद के रुद्रम् में 'नमस्ते रुद्र मन्यव' से इनका स्तवन है। रुद्र सौम्य और उग्र — दोनों स्वरूपों में विराजते हैं।#रुद्र#दुख हरण#वेद नाम
शिव नाम महिमाशिव को आशुतोष क्यों कहते हैंआशुतोष = शीघ्र प्रसन्न होने वाले। एक बेलपत्र, एक लोटा जल — इतने से संतुष्ट हो जाते हैं। रावण-भस्मासुर जैसों को भी वरदान दिया। 'ॐ आशुतोषाय नमः' इनकी शीघ्र कृपा के लिए मंत्र है।#आशुतोष#शीघ्र प्रसन्न#भक्त वत्सल
शिव नाम महिमाशिव को पशुपति क्यों कहते हैंपशुपति = जीवात्माओं के स्वामी। 'पशु' = माया-बंधन में जकड़ी आत्मा, 'पति' = उस बंधन से मुक्त कराने वाले स्वामी। शिव समस्त जीव-जगत और बद्ध आत्माओं के रक्षक-मुक्तिदाता हैं। यजुर्वेद के रुद्रम् में इसका उल्लेख है।#पशुपति#पशुपतिनाथ#जीव स्वामी
शिव नाम महिमाशिव को त्रिलोचन क्यों कहते हैंत्रिलोचन = तीन नेत्रों वाले। दायाँ = सूर्य, बायाँ = चंद्र, तृतीय = अग्नि (दिव्य ज्ञान)। तृतीय नेत्र घोर अधर्म पर खुलता है — कामदेव को भस्म किया। यह आज्ञा-चक्र और परम ज्ञान का प्रतीक है।#त्रिलोचन#तीसरा नेत्र#तृतीय नयन
शिव नाम महिमाशिव को महाकाल क्यों कहा जाता हैमहाकाल = समय के महान अधिपति। शिव समस्त काल-चक्र के स्वामी हैं — जन्म से मृत्यु तक सब उनके अधीन है। वे मृत्युंजय भी हैं — मृत्यु को भी जीतने वाले। उज्जैन में महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग इसी रूप का प्रतीक है।#महाकाल#काल#समय
शिव नाम महिमाशिव को भोलेनाथ क्यों कहते हैंभोलेनाथ = सरल, निष्कपट और सहजता से प्रसन्न होने वाले प्रभु। एक लोटा जल और बेलपत्र से प्रसन्न हो जाते हैं। रावण-भस्मासुर जैसे असुरों को भी वरदान दिया। यही उनकी भोली प्रकृति है।#भोलेनाथ#आशुतोष#शिव सरलता
शिव नाम महिमाशिव को नीलकंठ क्यों कहते हैंसमुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को शिव ने संसार की रक्षा के लिए पी लिया। पार्वती ने कंठ पकड़ा जिससे विष नीचे नहीं उतरा — कंठ नीला हो गया। इसीलिए शिव 'नीलकंठ' कहलाए।#नीलकंठ#समुद्र मंथन#हलाहल विष
शिव नाम महिमाभगवान शिव को महादेव क्यों कहा जाता हैमहादेव = 'महान देव' — सभी देवताओं में श्रेष्ठ। शिव संहार के अधिपति हैं जो सृष्टि का सबसे शक्तिशाली कार्य है। सभी से समदृष्टि रखते हैं — देव, दानव, साधु, भक्त — सब पर समान कृपा। इसीलिए वे 'देवों के देव महादेव' हैं।#महादेव#शिव नाम#देवाधिदेव
शिव मंदिरमहाकालेश्वर भस्म आरती में श्मशान भस्म का उपयोग क्यों होता है?प्राचीन: श्मशान भस्म — शिव = श्मशानवासी, मृत्यु विजयी, वैराग्य संदेश। वर्तमान: श्मशान भस्म का उपयोग नहीं — कपिला गाय गोबर + 6 वृक्ष लकड़ी + कपूर-गुगल से तैयार। भस्म प्रकार: श्रौत, स्मार्त, लौकिक।#श्मशान भस्म#महाकालेश्वर#भस्म आरती
शिव पूजा नियमशिव की पूजा में ग्रहण काल विशेष रूप से शुभ क्यों माना जाता है?ग्रहण = ब्रह्मांडीय ऊर्जा संकेंद्रण — जप 100-1000 गुना फल। शिव = राहु-केतु नियंत्रक। महामृत्युंजय जप सर्वोत्तम। ग्रहण स्पर्श→मोक्ष तक जप। ग्रहण बाद स्नान + दान।#ग्रहण#सूर्य ग्रहण#चंद्र ग्रहण
दिव्यास्त्रभगवान शिव ने त्रिपुर विनाश में अंतर्धान अस्त्र का प्रयोग क्यों किया?शिव ने अंतर्धान अस्त्र से असुरों को निद्रा-चेतनाहीन किया ताकि वे रक्षा न कर सकें और पाशुपतास्त्र को अचूक अवसर मिले।#शिव#त्रिपुर#अंतर्धान अस्त्र
शिव महिमासती ने यज्ञकुंड में आत्मदाह क्यों किया?सती ने यज्ञकुंड में आत्मदाह इसलिए किया क्योंकि उनके पिता दक्ष ने पति शिव का घोर अपमान किया और यज्ञ में उनके लिए भाग नहीं रखा। अपने पिता द्वारा पति की निंदा और अपने चारों ओर देवताओं की चुप्पी सती के लिए असह्य हो गई।#सती आत्मदाह#सती दक्ष यज्ञ#शिव पत्नी
शिव अस्त्र-शस्त्रत्रिशूल में तीन शिर क्यों होते हैंत्रिशूल के तीन शिर तीन गुण (सत्व-रज-तम), तीन काल (भूत-वर्तमान-भविष्य), तीन ताप (दैहिक-दैविक-भौतिक) और तीन लोकों पर शिव की सर्वाधिकार-शक्ति के प्रतीक हैं।#त्रिशूल तीन शिर#त्रिशूल प्रतीक#तीन गुण
दिव्यास्त्रशिव ने दुर्गा को त्रिशूल क्यों दियामहिषासुर-वध के लिए देवताओं ने देवी दुर्गा को अपने अस्त्र दिए। शिव ने अपने शूल से त्रिशूल निकालकर देवी को दिया। देवी ने इसी त्रिशूल से महिषासुर का वध किया — इसलिए उन्हें महिषासुरमर्दिनी कहते हैं।#शिव दुर्गा त्रिशूल#महिषासुर#देवी शक्ति
शिव दर्शनशिव ने विष क्यों पिया और इसका आध्यात्मिक संदेश क्या है?सृष्टि रक्षा — कोई तैयार नहीं, शिव ने पिया। संदेश: परोपकार (दूसरों का दुःख स्वयं लिया), त्याग (अमृत दूसरों को), नकारात्मकता रोकें-फैलाएं नहीं, शिव+शक्ति = पूर्ण (पार्वती ने कंठ दबाया)। ज्ञान में स्थित = दुःख नष्ट नहीं करता।#हलाहल#विष#नीलकंठ
शिव दर्शनशिव को भोलेनाथ क्यों कहते हैं — इसका आध्यात्मिक अर्थ क्या है?भोला = सरल, निश्छल, शीघ्र प्रसन्न (आशुतोष)। एक लोटा जल = प्रसन्न। जाति-पद नहीं देखते। भस्मासुर/रावण को भी वरदान — करुणा। श्मशानवासी फिर भी शांत = अनासक्ति। गहन: अहंकार शून्य = परम ज्ञानी = भोलेनाथ।#भोलेनाथ#अर्थ#आध्यात्मिक
दिव्यास्त्रभगवान शिव ने विष्णु को सुदर्शन चक्र क्यों दिया?असुरों के बढ़ते अत्याचार से देवताओं की रक्षा के लिए विष्णु ने कैलाश पर शिव की कठोर तपस्या की। शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें सुदर्शन चक्र वरदान में दिया।#शिव#विष्णु#सुदर्शन चक्र
कार्तिकेय कथातारकासुर के वध के लिए शिव-पुत्र की जरूरत क्यों थी?तारकासुर ने ब्रह्मा से यह वरदान लिया था कि उसका वध केवल शिव-पुत्र से होगा। उसने यह सोचकर यह माँगा था कि संन्यासी शिव का पुत्र कभी नहीं होगा। इस वरदान को पूरा करने के लिए ही कार्तिकेय का जन्म आवश्यक था।#तारकासुर वरदान#शिव पुत्र#तारकासुर वध
शिव महिमाशिव जी शरीर पर भस्म क्यों लगाते हैं?शिव जी भस्म इसलिए लगाते हैं क्योंकि वे मृत्यु के स्वामी हैं और भस्म शरीर की नश्वरता का बोध कराती है। एक कथा के अनुसार सती के भस्म होने के बाद उन्होंने उसे अपने शरीर पर लगाया। भस्म पाप-नाशक, वैराग्य की प्रतीक और उनका श्रृंगार भी है।#शिव भस्म#चिताभस्म#भोलेनाथ
शिव मंत्रशिव मंत्र जप में गौमुखी थैली का प्रयोग क्यों किया जाता है?गोमुखी = जप माला की थैली (गाय के मुख आकार)। प्रयोग कारण: (1) जप गोपनीय रहता है — दृष्टि दोष से बचाव। (2) तर्जनी स्वतः बाहर — शास्त्रीय नियम पालन। (3) माला शुद्ध रहती है। (4) एकाग्रता बढ़ती है। (5) साधना शक्ति संरक्षित रहती है। ऊनी या सूती कपड़े की होनी चाहिए।#गौमुखी#जप माला#गोपनीयता
शिव महिमाशिव के माथे पर अर्धचंद्र क्यों होता है?शिव के माथे पर अर्धचंद्र इसलिए है क्योंकि उन्होंने दक्ष के श्राप से ग्रस्त चंद्रमा की रक्षा करके उन्हें अपने मस्तक पर स्थान दिया। समुद्र मंथन के हलाहल विष की गर्मी को शांत करने के लिए भी चंद्रमा को मस्तक पर धारण किया गया।#शिव चंद्रमा#अर्धचंद्र#चंद्रशेखर