ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
ग्रन्थ

श्रीमद् भागवत(464)

श्रीमद् भागवत पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 464 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्रीमद्भागवत

शरीर को नश्वर क्यों कहा गया है?

शरीर को हड्डी, नस, मांस, रक्त, चर्म और मल-मूत्र का पात्र कहकर क्षणभंगुर और रोग-दुख से भरा बताया गया है।

#शरीर#नश्वरता#वैराग्य
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा को तीर्थ क्यों कहा गया है?

भागवत कथा को तीर्थ कहा गया है क्योंकि वह संसार के कीचड़ को धोती है और हृदय में स्थित होकर मुक्ति देती है।

#कथा तीर्थ#भागवत कथा#मुक्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से कर्म कैसे नष्ट होते हैं?

सप्ताह श्रवण को पाप जलाने वाली अग्नि और कर्म क्षीण करने वाला साधन कहा गया है।

#कर्म#पाप नाश#भागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से संशय कैसे मिटते हैं?

सप्ताह श्रवण से हृदय की गांठ खुलती है, समस्त संशय छिन्न होते हैं और कर्म क्षीण होते हैं।

#संशय#भागवत कथा#हृदय
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से हृदय की गांठ कैसे खुलती है?

कहा गया है कि सप्ताह श्रवण से हृदय की गांठ खुलती है, संशय कटते हैं और कर्म क्षीण होते हैं।

#हृदय ग्रंथि#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवत

कथा में एकाग्रता क्यों जरूरी है?

एकाग्रता इसलिए जरूरी है क्योंकि प्रमाद से श्रवण और चंचल चित्त से जप निष्फल हो जाता है।

#एकाग्रता#कथा श्रवण#मनन
श्रीमद्भागवत

गुरु वचन पर विश्वास क्यों जरूरी है?

कथा का यथार्थ फल पाने के नियमों में गुरु वचन पर विश्वास को स्पष्ट रूप से रखा गया है।

#गुरु वचन#विश्वास#श्रवण फल
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में श्रद्धा क्यों जरूरी है?

श्रद्धा इसलिए जरूरी है क्योंकि गुरु वचन में विश्वास और स्थिर मन के बिना कथा श्रवण का पूरा फल नहीं मिलता।

#श्रद्धा#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवत

कथा सुनने वालों को अलग-अलग फल क्यों मिलता है?

फल का भेद श्रवण के भेद से हुआ; सबने सुना, पर धुंधुकारी ने निराहार रहकर स्थिर मन से मनन भी किया।

#कथा फल#फलभेद#श्रवण
श्रीमद्भागवत

कथा सुनने का पूरा फल कैसे मिलता है?

पूरा फल गुरु वचन में विश्वास, दीनता, मन-दोषों पर विजय, कथा में एकाग्रता और श्रवण के बाद मनन से मिलता है।

#कथा फल#श्रवण#मनन
श्रीमद्भागवत

केवल कथा सुनना काफी है या मनन भी जरूरी है?

कथा में साफ कहा गया है कि केवल श्रवण समान था, पर मनन अलग था; इसलिए फल में भेद हुआ।

#कथा श्रवण#मनन#श्रवण फल
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनते समय मन कैसा होना चाहिए?

कथा सुनते समय मन श्रद्धायुक्त, एकाग्र, दीनभाव वाला और गुरु वचन में विश्वास रखने वाला होना चाहिए।

#कथा श्रवण#मन#एकाग्रता
श्रीमद्भागवत

सात दिन भागवत सुनने का फल क्या है?

सात दिन भागवत सुनने से धुंधुकारी प्रेत योनि से मुक्त हुआ, और पुनः श्रवण से श्रोताओं को हरिधाम तथा गोलोक की प्राप्ति हुई।

#सात दिन भागवत#भागवत सप्ताह#मुक्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत सुनने से मुक्ति कैसे मिलती है?

भागवत श्रवण से मुक्ति तब फलित होती है जब श्रद्धा, मनन, एकाग्रता और गुरु वचन में विश्वास जुड़ता है।

#भागवत श्रवण#मुक्ति#मनन
श्रीमद्भागवत

जब श्राद्ध से मुक्ति न मिले तो क्या करें?

धुंधुकारी की कथा में श्राद्ध से मुक्ति न मिलने पर सूर्यदेव ने श्रीमद्भागवत सप्ताह पारायण का उपाय बताया।

#श्राद्ध#मुक्ति#भागवत सप्ताह
श्रीमद्भागवत

क्या श्राद्ध से हर आत्मा मुक्त हो जाती है?

कथा में धुंधुकारी के लिये गया श्राद्ध हुआ, फिर भी मुक्ति नहीं मिली; उसे भागवत सप्ताह से मुक्ति मिली।

#श्राद्ध#गया श्राद्ध#प्रेत मुक्ति
श्रीमद्भागवत

प्रेत योनि में आत्मा क्या भोगती है?

कथा में प्रेत योनि भूख-प्यास, शीत-ताप, दिशाओं में भटकाव, आश्रयहीनता और कर्मफल-भोग से भरी बताई गई है।

#प्रेत योनि#भूख प्यास#कर्मफल
श्रीमद्भागवत

पापी व्यक्ति को मृत्यु के बाद क्या कष्ट मिलते हैं?

धुंधुकारी के उदाहरण में पापी व्यक्ति मृत्यु के बाद प्रेत बनकर दिशाओं में भटकता, भूख-प्यास और शीत-घाम सहता है।

#पापी व्यक्ति#मृत्यु#प्रेत योनि
श्रीमद्भागवत

लोभ और वासना का अंत क्या होता है?

धुंधुकारी वासना और लोभ में अंधा होकर चोरी में लगा और अंत में जिनके लिये धन लाया उन्हीं के हाथ मारा गया।

#लोभ#वासना#कुसंग
श्रीमद्भागवत

गलत संगति से जीवन कैसे नष्ट होता है?

गलत संगति ने धुंधुकारी को चोरी, वासना, हिंसा और अंत में हत्या तथा प्रेत योनि तक पहुँचा दिया।

#गलत संगति#जीवन#धुंधुकारी
श्रीमद्भागवत

कुसंग का परिणाम क्या होता है?

कुसंग से धुंधुकारी की बुद्धि नष्ट हुई, उसने चोरी और क्रूर कर्म किए और अंत में उसी संगति ने उसकी हत्या कर दी।

#कुसंग#लोभ#धुंधुकारी
श्रीमद्भागवत

बुरे कर्मों का फल मृत्यु के बाद क्या होता है?

धुंधुकारी के उदाहरण में बुरे कर्मों का फल मृत्यु के बाद प्रेत योनि, भूख-प्यास, भटकाव और असहायता के रूप में आया।

#बुरे कर्म#कर्मफल#मृत्यु
श्रीमद्भागवत

मरने के बाद प्रेत योनि क्यों मिलती है?

इस कथा में धुंधुकारी अपने कुकर्मों, हिंसा और अपने ही दोष से प्रेत योनि में पड़ा बताया गया है।

#प्रेत योनि#कर्मफल#मृत्यु
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह प्रेत बाधा में कैसे मदद करता है?

धुंधुकारी की प्रेत बाधा गया श्राद्ध से नहीं गई, पर भागवत सप्ताह सुनने से वह प्रेत योनि छोड़ सका।

#प्रेत बाधा#भागवत सप्ताह#मुक्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह से पाप कैसे मिटते हैं?

कथा में भागवत सप्ताह को आग की तरह बताया गया है, जो मन, वचन और कर्म से हुए छोटे-बड़े पापों को जला देता है।

#भागवत सप्ताह#पाप नाश#श्रवण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से प्रेत मुक्ति कैसे होती है?

सूर्यदेव ने भागवत सप्ताह को मुक्ति का उपाय बताया; सात दिन कथा सुनकर धुंधुकारी प्रेत योनि से मुक्त हुआ।

#भागवत कथा#प्रेत मुक्ति#सप्ताह
श्रीमद्भागवत

गया श्राद्ध के बाद भी प्रेत बाधा क्यों रहती है?

कथा में धुंधुकारी के अपने दोष और असंख्य कुकर्म इतने भारी बताए गए हैं कि गया श्राद्ध से भी उसकी मुक्ति नहीं हुई।

#गया श्राद्ध#प्रेत बाधा#कर्मफल
श्रीमद्भागवत

गया श्राद्ध से मुक्ति क्यों नहीं मिली?

धुंधुकारी ने कहा कि सैकड़ों गया-श्राद्ध से भी उसकी मुक्ति नहीं होगी, इसलिए दूसरा उपाय चाहिए।

#गया श्राद्ध#प्रेत मुक्ति#धुंधुकारी
श्रीमद्भागवत

प्रेत आत्मा को शांति कैसे मिले?

कथा में प्रेत आत्मा को अंतिम शांति श्रीमद्भागवत सप्ताह के श्रवण और मनन से मिली।

#प्रेत आत्मा#शांति#श्राद्ध
श्रीमद्भागवत

प्रेत योनि से मुक्ति कैसे मिलती है?

इस कथा में प्रेत योनि से मुक्ति का उपाय श्रीमद्भागवत का सात दिन का पारायण बताया गया है।

#प्रेत योनि#मुक्ति#भागवत सप्ताह
श्रीमद्भागवत

दशम स्कंध पाठ से आत्मदेव को क्या मिला?

कथा के अंत में कहा गया है कि आत्मदेव ने दशम स्कंध का नियमपूर्वक पाठ करके भगवान श्रीकृष्ण के चरण प्राप्त किए।

#दशम स्कंध#आत्मदेव#कृष्णचरण
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव को कृष्ण की प्राप्ति कैसे हुई?

आत्मदेव ने गोकर्ण के उपदेश से घर छोड़ा, वन में हरि सेवा की और नियमपूर्वक दशम स्कंध का पाठ करके श्रीकृष्ण को प्राप्त किया।

#आत्मदेव#कृष्ण प्राप्ति#दशम स्कंध
श्रीमद्भागवत

वन में आत्मदेव को क्या करना था?

गोकर्ण ने आत्मदेव को वन में शरीर-अभिमान और ममता छोड़कर भजन, साधुसेवा, काम-तृष्णा त्याग और कथा-रस में लगने को कहा।

#आत्मदेव#वन#गोकर्ण उपदेश
श्रीमद्भागवत

पुत्र मोह क्यों छोड़ना चाहिए?

गोकर्ण कहते हैं कि पुत्र-मोह अज्ञान है, मोह से नरक की प्राप्ति होती है और शरीर भी नश्वर है।

#पुत्र मोह#गोकर्ण#आत्मदेव
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण ने संसार को असार क्यों कहा?

गोकर्ण ने संसार को दुखरूप, मोहक और क्षणभंगुर कहा; पुत्र, धन और शरीर को स्थायी मानना अज्ञान बताया।

#संसार#गोकर्ण#वैराग्य
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण ने आत्मदेव को क्या समझाया?

गोकर्ण ने आत्मदेव को संसार की असारता, पुत्र-धन के मोह का दुख, शरीर की नश्वरता और भजन-साधुसेवा का मार्ग समझाया।

#गोकर्ण#आत्मदेव#वैराग्य
श्रीमद्भागवत

कुपुत्र से क्या दुख होता है?

धुंधुकारी के उदाहरण से कथा बताती है कि कुपुत्र धन, घर और माता-पिता की शांति नष्ट कर देता है और मोह को दुख में बदल देता है।

#कुपुत्र#धुंधुकारी#आत्मदेव
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव का धन कैसे नष्ट हुआ?

पहले आत्मदेव ने संतान के लिये आधा धन धर्मकर्म और दान में लगाया; बाद में धुंधुकारी ने कुसंग से पिता की संपत्ति नष्ट कर दी।

#आत्मदेव#धन#धुंधुकारी
श्रीमद्भागवत

धुंधुकारी ने माता-पिता के साथ क्या किया?

धुंधुकारी ने माता-पिता को मार-पीटकर घर के बर्तन उठा लिए और पिता की संपत्ति नष्ट कर दी।

#धुंधुकारी#माता-पिता#आत्मदेव
श्रीमद्भागवत

धुंधुकारी के पाप क्या थे?

धुंधुकारी चोरी, आग लगाना, बालकों को कुएँ में डालना, दीनों को सताना, कुसंग और माता-पिता को मारना जैसे पाप करता था।

#धुंधुकारी#पाप#दुराचार
श्रीमद्भागवत

धुंधुकारी कैसा था?

धुंधुकारी महाखल, आचारहीन, क्रोधी, हिंसक, चोर, द्वेषी और बुरे संग में पड़ा हुआ बताया गया है।

#धुंधुकारी#दुष्ट पुत्र#आचारहीन
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण और धुंधुकारी में क्या अंतर था?

गोकर्ण पंडित और ज्ञानी थे, जबकि धुंधुकारी अत्यंत दुष्ट, आचारहीन, हिंसक और माता-पिता को पीड़ित करने वाला निकला।

#गोकर्ण#धुंधुकारी#चरित्र
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण जन्म पर लोग क्यों चकित हुए?

लोग इसलिए चकित हुए कि गाय से मनुष्याकार, सुंदर, दिव्य और सुवर्ण-कांति वाला बालक जन्मा था।

#गोकर्ण#अद्भुत जन्म#गाय
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण नाम क्यों रखा गया?

गाय से उत्पन्न उस बालक के कान गाय जैसे थे, इसलिए आत्मदेव ने उसका नाम गोकर्ण रखा।

#गोकर्ण#नाम#गाय
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण कैसे जन्मे?

धुंधुली द्वारा संन्यासी का फल गाय को खिलाने के तीन महीने बाद गाय से मनुष्याकार दिव्य बालक उत्पन्न हुआ; वही गोकर्ण थे।

#गोकर्ण#जन्म#गाय
श्रीमद्भागवत

गाय को फल क्यों खिलाया गया?

धुंधुली ने फल स्वयं न खाकर अपनी बहन की सलाह पर परीक्षा के लिये गाय को खिला दिया, जिससे बाद में गोकर्ण जन्मे।

#गाय#फल#धुंधुली
श्रीमद्भागवत

धुंधुकारी नाम कैसे पड़ा?

धुंधुली ने बहन से मिले बालक को अपना पुत्र बताकर उसका नाम धुंधुकारी रखा।

#धुंधुकारी#नामकरण#धुंधुली
श्रीमद्भागवत

धुंधुकारी कैसे जन्मा?

धुंधुकारी धुंधुली का वास्तविक पुत्र नहीं था; धुंधुली की बहन ने अपना जन्मा बालक गुप्त रूप से उसे दे दिया।

#धुंधुकारी#धुंधुली#जन्म
श्रीमद्भागवत

धुंधुली की बहन ने क्या योजना बनाई?

धुंधुली की बहन ने अपना गर्भस्थ बालक जन्म के बाद धुंधुली को देने और बदले में धन लेने की योजना बनाई।

#धुंधुली#बहन#योजना
श्रीमद्भागवत

धुंधुली ने पति से क्या झूठ बोला?

धुंधुली ने फल नहीं खाया, पर आत्मदेव के पूछने पर झूठ बोल दिया कि उसने फल खा लिया है।

#धुंधुली#झूठ#आत्मदेव
सभी ग्रन्थ
अन्य ग्रन्थ देखें

रामायण, महाभारत, गीता, पुराण, वेद, उपनिषद — सभी ग्रन्थों की सूची।

टैग खोज
विषय अनुसार खोजें

गरुड़ पुराण, बालकाण्ड, मंत्र, साधना — टैग द्वारा प्रश्न खोजें।