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श्रीमद् भागवत(464)

श्रीमद् भागवत पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 464 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्रीमद्भागवत

धुंधुली को गर्भ से डर क्यों लगा?

धुंधुली को गर्भ से शरीर कमजोर होने, घर का काम रुकने, प्रसव-पीड़ा, नियमों और बाल-पालन के कष्ट का डर लगा।

#धुंधुली#गर्भ#प्रसव
श्रीमद्भागवत

धुंधुली ने फल क्यों नहीं खाया?

धुंधुली ने गर्भ, प्रसव, नियमों और बाल-पालन के कष्टों से डरकर फल नहीं खाया।

#धुंधुली#फल#गर्भ
श्रीमद्भागवत

पुत्र पाने वाले फल के नियम क्या थे?

संन्यासी ने कहा कि फल खाने वाली स्त्री एक वर्ष तक सत्य, शौच, दया, दान और एक समय भोजन का नियम रखे।

#फल#पुत्र प्राप्ति#सत्य
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव को फल किसने दिया?

आत्मदेव को पुत्र-प्राप्ति का फल उस संन्यासी योगी ने दिया, जिसने पहले उन्हें पुत्र-मोह छोड़ने को समझाया था।

#आत्मदेव#फल#संन्यासी
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव ने संन्यास क्यों नहीं माना?

आत्मदेव ने संन्यास को नीरस कहा और पुत्र-पौत्र से भरे गृहस्थ जीवन को सरस मानकर पुत्र मांगने का हठ किया।

#आत्मदेव#संन्यास#गृहस्थ
श्रीमद्भागवत

राजा सगर और अंग का उदाहरण क्यों दिया गया?

संन्यासी ने सगर और अंग का उदाहरण यह दिखाने के लिये दिया कि संतान भी दुख का कारण बन सकती है।

#राजा सगर#राजा अंग#आत्मदेव
श्रीमद्भागवत

संन्यासी ने पुत्र मोह छोड़ने को क्यों कहा?

संन्यासी ने कहा कि कर्म की गति प्रबल है और पुत्र से सुख निश्चित नहीं; संतान के कारण सगर और अंग को भी दुख मिला।

#पुत्र मोह#संन्यासी#आत्मदेव
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव को सात जन्म तक पुत्र क्यों नहीं मिलना था?

संन्यासी ने आत्मदेव का प्रारब्ध देखकर कहा कि सात जन्म तक उन्हें किसी भी प्रकार पुत्र प्राप्त नहीं होगा।

#आत्मदेव#सात जन्म#प्रारब्ध
श्रीमद्भागवत

संन्यासी ने आत्मदेव को क्या बताया?

संन्यासी ने आत्मदेव को पुत्र-मोह छोड़ने, कर्म की गति को प्रबल मानने और विवेक से संसार-वासना त्यागने को कहा।

#संन्यासी#आत्मदेव#विवेक
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव ने जीवन को धिक्कार क्यों कहा?

आत्मदेव ने संतानहीन जीवन, घर, धन और कुल को धिक्कार कहा क्योंकि संतान-अभाव से उन्हें सब व्यर्थ लग रहा था।

#आत्मदेव#संतानहीन जीवन#दुख
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव संन्यासी से क्यों रोए?

आत्मदेव संतान-अभाव के दुख से रोए; वे कहते हैं कि उनका सब कुछ सूना हो गया है और वे प्राण त्यागने आए हैं।

#आत्मदेव#संन्यासी#संतान दुख
श्रीमद्भागवत

संतान न मिलने पर आत्मदेव कहाँ गए?

संतान न मिलने से दुखी आत्मदेव घर छोड़कर वन गए और प्यास लगने पर एक तालाब के पास बैठ गए।

#आत्मदेव#वन#तालाब
श्रीमद्भागवत

पुत्र के लिए आत्मदेव ने क्या दान किया?

आत्मदेव ने पुत्र के लिये पुण्यकर्म किए और दीन-दुखियों को गौ, भूमि, सोना और वस्त्र दान किए।

#आत्मदेव#दान#संतान
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव को संतान क्यों नहीं थी?

संन्यासी ने आत्मदेव का प्रारब्ध देखकर कहा कि सात जन्म तक उन्हें किसी प्रकार संतान नहीं हो सकती।

#आत्मदेव#प्रारब्ध#संतान
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव दुखी क्यों थे?

आत्मदेव के पास धन और घर होते हुए भी संतान नहीं थी; इसी कारण वे अत्यंत चिंतित और दुखी थे।

#आत्मदेव#संतान#दुख
श्रीमद्भागवत

धुंधुली कौन थी?

धुंधुली आत्मदेव की पत्नी थी; वह सुंदर और कुलीन थी, पर हठी, कृपण, झगड़ालू और कुटिल स्वभाव की बताई गई है।

#धुंधुली#आत्मदेव#धुंधुकारी
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव कहाँ रहते थे?

आत्मदेव तुंगभद्रा नदी के तट पर बसे एक उत्तम नगर में रहते थे, जहाँ लोग सत्य और सत्कर्म में तत्पर थे।

#आत्मदेव#तुंगभद्रा#गोकर्ण कथा
श्रीमद्भागवत

आत्मदेव ब्राह्मण कौन थे?

आत्मदेव तुंगभद्रा तट के नगर में रहने वाले वेद और श्रौत-स्मार्त कर्मों में निपुण ब्राह्मण थे।

#आत्मदेव#ब्राह्मण#गोकर्ण कथा
श्रीमद्भागवत

गोकर्ण धुंधुकारी कथा क्या है?

गोकर्ण-धुंधुकारी कथा का आरंभ आत्मदेव, धुंधुली, फल, धुंधुकारी और गोकर्ण के जन्म से होता है।

#गोकर्ण कथा#धुंधुकारी#आत्मदेव
श्रीमद्भागवत

सप्ताह यज्ञ किन पापियों को सुधारता है?

पंचमहापाप, छल, क्रूरता, ब्राह्मण-धन से पोषण और मन-वाणी-शरीर से पाप करने वालों तक को सप्ताह यज्ञ से पवित्र कहा गया है।

#सप्ताह यज्ञ#महापाप#कलियुग
श्रीमद्भागवत

सप्ताह यज्ञ से कौन पवित्र होता है?

कहा गया है कि सप्ताह यज्ञ से पापी, दुराचारी, कुटिल, हिंसक और मन-वाणी-शरीर से पाप करने वाले भी पवित्र हो जाते हैं।

#भागवत सप्ताह#सप्ताह यज्ञ#पाप नाश
श्रीमद्भागवत

सच्ची भक्ति कहाँ रहती है?

सनकादि भक्ति से कहते हैं कि वह नित्य वैष्णव भक्तों के हृदय में निवास करे; वहीं कलियुग के दोष उसे स्पर्श नहीं कर सकते।

#भक्ति#वैष्णव#हृदय
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से भक्ति कैसे जागती है?

कहा गया है कि भागवत कथा के शब्द और कथा-रस से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य पुष्ट होकर तरुण हो जाते हैं।

#भक्ति#भागवत कथा#ज्ञान वैराग्य
श्रीमद्भागवत

कृष्ण के बाद भक्तों का सहारा क्या है?

उद्धव की चिंता के उत्तर में भगवान भक्तों के अवलंबन के लिये अपना तेज श्रीमद्भागवत में स्थापित करते हैं।

#कृष्ण#उद्धव#भक्त
श्रीमद्भागवत

कृष्ण भागवत में कैसे स्थित हैं?

कहा गया है कि भगवान ने अपना तेज भागवत में रखा और अंतर्धान होकर भागवत-सागर में प्रवेश किया।

#कृष्ण#भागवत#वाङ्मयी मूर्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह तप से बड़ा क्यों है?

कहा गया है कि जो फल तप, योग और समाधि से भी नहीं मिलता, वह भागवत सप्ताह से सहज मिल जाता है।

#भागवत सप्ताह#तप#योग
श्रीमद्भागवत

कलियुग में भागवत सप्ताह क्यों जरूरी है?

कलियुग में मन की चंचलता, रोग, अल्प आयु और दोषों के कारण सात दिन का भागवत श्रवण विशेष रूप से बताया गया है।

#कलियुग#भागवत सप्ताह#आयु
श्रीमद्भागवत

भागवत दान करने का फल क्या है?

सोने के सिंहासन पर रखकर भागवत को वैष्णव को दान करने से कृष्ण के साथ सायुज्य प्राप्ति कही गई है।

#भागवत दान#वैष्णव#सायुज्य
श्रीमद्भागवत

अंत समय भागवत सुनने से क्या होता है?

कहा गया है कि अंत समय श्रीमद्भागवत का वाक्य सुनने वाले पर गोविंद प्रसन्न होकर वैकुंठधाम देते हैं।

#अंत समय#भागवत श्रवण#वैकुंठ
श्रीमद्भागवत

आधा भागवत श्लोक पढ़ने का फल?

कहा गया है कि नित्य आधा या चौथाई भागवत श्लोक पढ़ने से राजसूय और अश्वमेध यज्ञ का पुण्य मिलता है।

#भागवत श्लोक#नित्य पाठ#राजसूय
श्रीमद्भागवत

रोज भागवत पढ़ने से क्या फल मिलता है?

नित्य भागवत पाठ को पाप-नाशक, पुण्यदायक और हरि-चिंतन, तुलसी-पोषण तथा गौ-सेवा के समान कहा गया है।

#भागवत पाठ#नित्य पाठ#पुण्य
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा तीर्थों से श्रेष्ठ क्यों है?

कहा गया है कि गंगा, गया, काशी, पुष्कर और प्रयाग भी फल की दृष्टि से भागवत कथा की बराबरी नहीं कर सकते।

#भागवत कथा#तीर्थ#गंगा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से पाप मिटते हैं?

भागवत कथा, पाठ, श्रवण, दर्शन और सेवन को पाप नष्ट करने वाला बताया गया है।

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श्रीमद्भागवत

घर में भागवत कथा कराने से क्या होता है?

स्रोत के अनुसार जिस घर में नित्य भागवत कथा होती है, वह घर तीर्थरूप हो जाता है और वहाँ रहने वालों के पाप नष्ट होते हैं।

#घर में भागवत कथा#तीर्थ#पाप नाश
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण किसका संवाद है?

श्रीमद्भागवत को श्रीशुकदेवजी और राजा परीक्षित का संवाद कहा गया है।

#भागवत पुराण#शुकदेव#परीक्षित
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण में कितने श्लोक हैं?

श्रीमद्भागवत को अठारह हजार श्लोकों और बारह स्कंधों वाला ग्रंथ कहा गया है।

#भागवत पुराण#अठारह हजार श्लोक#बारह स्कंध
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा की विधि क्या है?

भागवत कथा के लिये पवित्र स्थान, श्रद्धापूर्वक श्रवण, सत्य, ब्रह्मचर्य और कलियुग में सात दिन की विधि बताई गई है।

#भागवत कथा विधि#श्रवण#सत्य
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह क्यों करें?

भागवत सप्ताह को कलियुग में दुख, दारिद्र्य, दुर्भाग्य, पाप और काम-क्रोध पर विजय का साधन कहा गया है।

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श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह क्या है?

भागवत सप्ताह सात दिनों में श्रीमद्भागवत श्रवण की वह विधि है जिसे कलियुग के लिये विशेष साधन बताया गया है।

#भागवत सप्ताह#सप्ताह श्रवण#कलियुग
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा कितने दिन की होती है?

सामान्य रूप से हर समय श्रवण श्रेष्ठ कहा गया है, पर कलियुग के लिये सात दिन का भागवत सप्ताह विधान बताया गया है।

#भागवत कथा#भागवत सप्ताह#श्रवण विधि
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा कहाँ करें?

सनकादि नारदजी को हरिद्वार के पास आनंद नामक गंगातट पर भागवत कथा करने को कहते हैं।

#भागवत कथा#हरिद्वार#गंगा तट
श्रीमद्भागवत

सत्संग से विवेक कैसे जागता है?

कहा गया है कि सत्संग अज्ञानजनित मोह और मद का अंधकार मिटाकर विवेक जगाता है।

#सत्संग#विवेक#अज्ञान
श्रीमद्भागवत

सत्संग क्यों जरूरी है?

नारदजी के अनुसार संत-दर्शन पाप नष्ट करता है, संसार-दुख शांत करता है और विवेक जगाता है।

#सत्संग#साधु#विवेक
श्रीमद्भागवत

दुख कैसे दूर करें?

दुख दूर करने के लिये कृष्ण-स्मरण, भक्ति, श्रीमद्भागवत और सत्संग का मार्ग बताया गया है।

#दुख#भक्ति#कृष्ण
श्रीमद्भागवत

भागवत वेदों का सार क्यों है?

सनकादि कहते हैं कि भागवत कथा वेद और उपनिषदों के सार से बनी है और फलरूप में अलग होकर अधिक मधुर है।

#भागवत#वेद#उपनिषद
श्रीमद्भागवत

कलियुग के दोष कैसे मिटते हैं?

स्रोत के अनुसार श्रीमद्भागवत की ध्वनि से कलियुग के दोष वैसे मिटते हैं जैसे सिंह-गर्जना से भेड़िये भागते हैं।

#कलियुग#दोष#भागवत
श्रीमद्भागवत

भागवत से ज्ञान वैराग्य कैसे बढ़ता है?

भागवत के शब्द सुनने से ज्ञान-वैराग्य को बल मिलता है और उसका कष्ट मिटता है।

#भागवत#ज्ञान#वैराग्य
श्रीमद्भागवत

भागवत सुनने के फायदे?

भागवत सुनने से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को बल मिलता है, कलियुग दोष मिटते हैं और शोक-दुख नष्ट होते हैं।

#भागवत#श्रवण#ज्ञान
श्रीमद्भागवत

भागवत पारायण क्यों करें?

सनकादि के अनुसार श्रीमद्भागवत पारायण भक्ति, ज्ञान और वैराग्य को बल देकर कलियुग के दोष दूर करता है।

#भागवत पारायण#ज्ञान यज्ञ#भक्ति
श्रीमद्भागवत

गीता पाठ से वैराग्य क्यों नहीं जागा?

नारदजी ने गीता-पाठ किया, पर ज्ञान-वैराग्य पूरी तरह न जागे; सनकादि ने भागवत-कथा को फलरूप सार बताया।

#गीता पाठ#वैराग्य#श्रीमद्भागवत
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