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श्रीमद् भागवत(464)

श्रीमद् भागवत पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 464 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्रीमद्भागवत

वैराग्य कैसे लाएं?

वैराग्य को बल देने वाला उपाय श्रीमद्भागवत का पारायण और भक्ति की स्थापना बताया गया है।

#वैराग्य#ज्ञान#भक्ति
श्रीमद्भागवत

ज्ञान वैराग्य कैसे जगाएं?

ज्ञान-वैराग्य को जगाने का सफल उपाय श्रीमद्भागवत पारायण बताया गया है।

#ज्ञान#वैराग्य#भागवत पारायण
श्रीमद्भागवत

भूत प्रेत बाधा कैसे दूर हो?

कहा गया है कि जिनके हृदय में भक्ति रहती है, उन्हें प्रेत-पिशाच आदि छू भी नहीं सकते।

#भूत प्रेत#भक्ति#बाधा
श्रीमद्भागवत

यमराज का भय कैसे मिटे?

कहा गया है कि जिनके हृदय में प्रेमरूप भक्ति रहती है, वे स्वप्न में भी यमराज को नहीं देखते।

#यमराज#भक्ति#भय
श्रीमद्भागवत

भगवान भक्ति से कैसे प्रसन्न होते हैं?

नारदजी कहते हैं कि तप, वेद, ज्ञान और कर्म से नहीं, भगवान भक्ति से वश में होते हैं।

#भगवान#भक्ति#कृष्ण
श्रीमद्भागवत

भक्ति कैसे बढ़ाएं?

भक्ति-वृद्धि का मार्ग श्रीमद्भागवत पारायण, भक्ति-प्रचार और सत्संग से जुड़ा बताया गया है।

#भक्ति#भागवत#सत्संग
श्रीमद्भागवत

भक्ति से क्या मिलता है?

भक्ति से कृष्ण धाम, यमराज से निर्भयता, बाधा से रक्षा और मुक्ति का फल बताया गया है।

#भक्ति#कृष्ण धाम#मोक्ष
श्रीमद्भागवत

भक्ति क्यों जरूरी है?

कलियुग में भक्ति को मोक्षदायिनी, कृष्ण को वश में करने वाली और भय दूर करने वाली कहा गया है।

#भक्ति#मोक्ष#कृष्ण
श्रीमद्भागवत

कृष्ण को कैसे पाएं?

स्रोत के अनुसार भगवान कृष्ण भक्ति से प्राप्त होते हैं; कलियुग में भक्ति ही सार है।

#कृष्ण#भक्ति#भगवान
श्रीमद्भागवत

मोक्ष कैसे मिले?

कलियुग में मोक्ष का मुख्य साधन भक्ति और श्रीमद्भागवत पारायण बताया गया है।

#मोक्ष#भक्ति#कलियुग
श्रीमद्भागवत

कलियुग में क्या करें?

कलियुग के लिये कृष्ण-स्मरण, भक्ति और श्रीमद्भागवत पारायण को मुख्य साधन बताया गया है।

#कलियुग#भक्ति#श्रीमद्भागवत
श्रीमद्भागवत

भक्ति ज्ञान और वैराग्य कैसे बढ़ते हैं?

भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की समस्या उठती है और समाधान का मार्ग श्रीमद्भागवत, भक्ति और भगवान के आश्रय की ओर जाता है।

#भक्ति#ज्ञान#वैराग्य
श्रीमद्भागवत

साधु दर्शन से क्या लाभ होता है?

साधु दर्शन को पाप-नाशक, दुख-शांत करने वाला और मंगलकारी कहा गया है।

#साधु दर्शन#नारद जी#भक्ति
श्रीमद्भागवत

कलियुग में ध्यान योग कठिन क्यों हो गया?

नारदजी बताते हैं कि मन पर नियंत्रण न होना, लोभ, दंभ, पाखंड और शास्त्र-अभ्यास की कमी ध्यानयोग का फल घटाते हैं।

#ध्यान योग#कलियुग#मन
श्रीमद्भागवत

कलियुग में तपस्या का सार क्यों घट गया?

कहा गया है कि काम, क्रोध, लोभ और तृष्णा से चित्त व्याकुल होने पर तप का सार घट जाता है।

#कलियुग#तपस्या#लोभ
श्रीमद्भागवत

कलियुग में तीर्थों का प्रभाव क्यों घटता है?

नारदजी के अनुसार तीर्थों में अधर्म और नास्तिक वृत्ति बढ़ने से उनका सार घट गया।

#कलियुग#तीर्थ#धर्म
श्रीमद्भागवत

कलियुग में मन की शांति कैसे मिले?

मन की शांति के लिये श्रीमद्भागवत श्रवण, भक्ति और केशव-कीर्तन का मार्ग दिखाया गया है।

#मन की शांति#कलियुग#श्रीमद्भागवत
श्रीमद्भागवत

कलियुग में पाप और पाखंड क्यों बढ़ता है?

स्रोत के अनुसार लोभ, असत्य, सदाचार का अभाव, शास्त्र-अभ्यास की कमी और दिखावे से पाप-पाखंड बढ़ता है।

#कलियुग#पाप#पाखंड
श्रीमद्भागवत

कलियुग के मुख्य दोष क्या हैं?

असत्य, आलस्य, पाखंड, लोभ, सदाचार का अभाव और साधनों का सार घटना कलियुग के दोष बताए गए हैं।

#कलियुग#दोष#अधर्म
श्रीमद्भागवत

कलियुग में धर्म क्यों घट रहा है?

धर्म-क्षय का कारण सत्य, तप, शौच, दया, दान, साधना और सदाचार का घटना बताया गया है।

#कलियुग#धर्म#अधर्म
श्रीमद्भागवत

क्या हरि कीर्तन से तप और योग का फल मिलता है?

हाँ, कहा गया है कि कलियुग में केशव-कीर्तन से वह फल मिलता है जो तप, योग और समाधि से भी दुर्लभ है।

#हरि कीर्तन#तप#योग
श्रीमद्भागवत

कलियुग में हरि कीर्तन का क्या महत्व है?

नारदजी कहते हैं कि कलियुग में केशव-कीर्तन से वह फल मिलता है जो तप, योग और समाधि से भी दुर्लभ है।

#हरि कीर्तन#कलियुग#केशव
श्रीमद्भागवत

जन्म-मृत्यु के भय से मुक्ति कैसे मिले?

सूतजी श्रीमद्भागवत को संसार-भय और जन्म-मृत्यु के भय को दूर करने वाला साधन बताते हैं।

#जन्म मृत्यु#मुक्ति#श्रीमद्भागवत
श्रीमद्भागवत

क्या श्रीमद्भागवत सुनने से वैकुंठ मिलता है?

श्रीमद्भागवत के पढ़ने-सुनने को शीघ्र वैकुंठफलदायक कहा गया है।

#श्रीमद्भागवत#वैकुंठ#भागवत श्रवण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा को अमृत से श्रेष्ठ क्यों कहा गया है?

कथा में देवताओं का अमृत भी भागवत-कथामृत के सामने कम माना गया, क्योंकि भागवत भक्ति और परम फल देने वाली है।

#भागवत कथा#अमृत#शुकदेव
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह करने से क्या होता है?

सप्ताह-विधि से भागवत सुनने को मुक्ति देने वाला बताया गया है।

#भागवत सप्ताह#सप्ताह श्रवण#मुक्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा मन को कैसे शुद्ध करती है?

सूतजी के अनुसार मन की शुद्धि के लिये श्रीमद्भागवत से श्रेष्ठ कोई साधन नहीं है।

#मन की शुद्धि#भागवत कथा#भक्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनने के क्या लाभ हैं?

भागवत कथा को पवित्र करने वाली, कृष्ण-प्राप्ति कराने वाली, भक्ति बढ़ाने वाली और वैकुंठफलदायक कहा गया है।

#भागवत कथा#श्रवण#भक्ति
श्रीमद्भागवत

श्रीमद्भागवत सुनने से क्या फल मिलता है?

स्रोत के अनुसार श्रीमद्भागवत सुनना मन को शुद्ध करता है, भय दूर करता है और वैकुंठफल देने वाला है।

#श्रीमद्भागवत#भागवत श्रवण#वैकुंठ
श्रीमद्भागवत

कलियुग में भगवान कृष्ण को कैसे प्रसन्न करें?

श्रीमद्भागवत को भगवान कृष्ण की प्रसन्नता और भक्ति-वृद्धि का साधन कहा गया है।

#भगवान कृष्ण#कलियुग#भागवत कथा
श्रीमद्भागवत

कलियुग में मोक्ष का सबसे आसान उपाय क्या है?

कलियुग के लिये श्रीमद्भागवत का श्रवण और केशव-कीर्तन मोक्षदायक साधन बताए गए हैं।

#कलियुग#मोक्ष#हरि कीर्तन
लोक

श्रीमद्भागवत में हंस अवतार

श्रीमद्भागवत में हंस अवतार सनकादिक मुनियों को आत्मज्ञान देने के लिए प्रकट होता है।

#श्रीमद्भागवत#हंस अवतार#एकादश स्कंध
लोक

हंस अवतार किस पुराण में है

हंस अवतार श्रीमद्भागवत एकादश स्कंध और महाभारत शांति पर्व में वर्णित है।

#हंस अवतार पुराण#श्रीमद्भागवत#महाभारत शांति पर्व
लोक

हंस अवतार कौन थे

हंस अवतार भगवान विष्णु का ज्ञानमय रूप है, जिसने सनकादिक मुनियों को आत्मज्ञान दिया।

#हंस अवतार#भगवान विष्णु#हंस गीता
लोक

श्रीमद्भागवत नवम स्कंध अम्बरीष कथा

नवम स्कंध में अम्बरीष कथा भक्त-पराधीन भगवान की महिमा बताती है।

#नवम स्कंध#अम्बरीष#श्रीमद्भागवत
लोक

श्रीमद्भागवत अम्बरीष कथा

श्रीमद्भागवत की अम्बरीष कथा भगवान की भक्त-पराधीनता बताती है।

#श्रीमद्भागवत#अम्बरीष कथा#दुर्वासा
लोक

राजा अम्बरीष कौन थे

राजा अम्बरीष भगवान विष्णु के परम भक्त और महान चक्रवर्ती राजा थे।

#राजा अम्बरीष#श्रीमद्भागवत#विष्णु भक्त
लोक

भस्मासुर कथा के दो संस्करण क्यों मिलते हैं?

दो संस्करण इसलिए मिलते हैं क्योंकि भागवत में ब्रह्मचारी रूप है, जबकि लोकपरंपरा में मोहिनी रूप अधिक प्रसिद्ध हुआ।

#कथा संस्करण#श्रीमद्भागवत#शिव पुराण
लोक

भस्मासुर कथा श्रीमद्भागवत में कहाँ आती है?

भस्मासुर यानी वृकासुर की कथा श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कन्ध, अध्याय 88 में आती है।

#श्रीमद्भागवत#दशम स्कन्ध#वृकासुर
लोक

श्रीमद्भागवत में भस्मासुर को किस रूप से मारा गया?

श्रीमद्भागवत में विष्णु जी ब्रह्मचारी रूप में वृकासुर को भ्रमित करते हैं, जिससे वह स्वयं भस्म हो जाता है।

#श्रीमद्भागवत#वृकासुर#ब्रह्मचारी
लोक

वृकासुर कौन था?

वृकासुर शकुनि नामक असुर का पुत्र था, जिसने शिव जी से विनाशकारी वरदान मांगा और अपने ही वरदान से नष्ट हुआ।

#वृकासुर#भस्मासुर#श्रीमद्भागवत
लोक

समुद्र मंथन किस पुराण में है?

समुद्र मंथन श्रीमद्भागवत, विष्णु पुराण, अग्नि पुराण और महाभारत में वर्णित है।

#समुद्र मंथन पुराण#श्रीमद्भागवत#विष्णु पुराण
लोक

चतुःश्लोकी भागवत कहाँ मिलती है?

यह श्रीमद्भागवत स्कंध २, अध्याय ९ में मिलती है।

#चतुःश्लोकी#श्रीमद्भागवत#स्कंध 2
श्राद्ध दर्शन

क्या श्राद्ध में पशु हिंसा कर सकते हैं?

नहीं, श्राद्ध में पशु हिंसा पूर्णतः वर्जित है। भागवत पुराण श्राद्ध में पशु-हिंसा और मांसाहार का पूर्णतः निषेध करता है। पितर सात्त्विक हविष्यान्न अर्थात् दूध, घी, कंद-मूल से ही प्रसन्न होते हैं। पशुबलि या किसी जीव की हत्या से प्राप्त अन्न पितरों को कभी तृप्ति नहीं देता।

#पशु हिंसा वर्जित#अहिंसा#श्रीमद्भागवत
ब्राह्मण भोजन

देव कार्य के लिए कितने ब्राह्मण होने चाहिए?

श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार श्राद्ध में देव कार्य के लिए दो ब्राह्मणों को भोजन कराने का विधान है। दो युग्म अर्थात् सम संख्या है, जबकि पितृ कार्य के लिए विषम संख्या एक, तीन, पाँच होती है। ब्राह्मण भगवान के भक्त, ज्ञाननिष्ठ और योगी होने चाहिए।

#देव कार्य#दो ब्राह्मण#श्रीमद्भागवत
लोक

गोकर्ण कौन थे?

गोकर्ण गाय के गर्भ से जन्मे सात्विक दिव्य पुत्र थे, जिन्होंने भागवत पारायण से धुन्धुकारी को प्रेत योनि से मुक्त कराया।

#गोकर्ण#धुन्धुकारी#भागवत महापुराण
लोक

धुन्धुकारी कौन था?

धुन्धुकारी आत्मदेव ब्राह्मण का पालित पुत्र था, जो बड़ा होकर महापापी, हिंसक, दुराचारी और चोर बना।

#धुन्धुकारी#भागवत महापुराण#प्रेत कथा
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श्रीमद्भागवत पुराण में कितने नरक बताए गए हैं?

श्रीमद्भागवत पुराण में २८ प्रमुख नरकों का वर्णन है, जहाँ पापों के अनुसार दंड मिलता है।

#श्रीमद्भागवत पुराण#28 नरक#नरक
लोक

श्रीमद्भागवत पुराण में सात अधोलोक कैसे बताए गए हैं?

श्रीमद्भागवत पुराण सात अधोलोकों को अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल और पाताल बताकर उन्हें बिल-स्वर्ग कहता है।

#श्रीमद्भागवत पुराण#सात अधोलोक#पाताल लोक
लोक

श्रीमद्भागवत पुराण में महातल का क्या वर्णन है?

श्रीमद्भागवत में महातल को काद्रवेय नागों का लोक बताया गया है, जहाँ तक्षक, कालिय, कुहक और सुषेण गरुड़ से भयभीत रहते हैं।

#श्रीमद्भागवत#महातल#काद्रवेय
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