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श्रीमद् भागवत(464)

श्रीमद् भागवत पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 464 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में एक समय भोजन कर सकते हैं?

हाँ, एक समय भोजन का विधान है; श्रोता हविष्य अन्न या सुविधा अनुसार एक समय भोजन करके कथा सुन सकता है।

#एक समय भोजन#भागवत सप्ताह#आहार
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में फलाहार कर सकते हैं?

हाँ, फलाहार का विकल्प दिया गया है; जो नियम सुख से निभ सके और श्रवण में सहायक हो, उसे स्वीकार करना चाहिए।

#फलाहार#भागवत सप्ताह#आहार नियम
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में उपवास जरूरी है?

उपवास अनिवार्य नहीं है; यदि उपवास से श्रवण में बाधा हो तो भोजन करना बेहतर बताया गया है।

#उपवास#भागवत सप्ताह#आहार
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में क्या खाना चाहिए?

श्रोता एक समय हविष्य अन्न खा सकता है; शक्ति हो तो उपवास, दूध-घी, फलाहार या एक समय भोजन का विकल्प है।

#आहार#भागवत सप्ताह#हविष्य
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में फालतू बात क्यों नहीं करनी चाहिए?

कथा में शुद्ध चित्त से ध्यान रखना है; विराम में भी व्यर्थ बात छोड़कर प्रसंगानुसार कीर्तन करना बताया गया है।

#व्यर्थ बात#कथा श्रवण#एकाग्रता
श्रीमद्भागवत

कथा विराम में कीर्तन क्यों करना चाहिए?

विराम में कीर्तन इसलिए बताया गया है कि कथा का प्रसंग और भगवान के गुण श्रोताओं के मन में बने रहें, व्यर्थ बात न हो।

#कीर्तन#कथा विराम#वैष्णव
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में दोपहर का विराम क्यों होता है?

दोपहर में दो घड़ी कथा विराम रखकर उसी प्रसंग के अनुसार वैष्णवों को भगवान के गुणों का कीर्तन करना बताया गया है।

#दोपहर विराम#कीर्तन#भागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा किस समय शुरू करनी चाहिए?

कथा सूर्योदय से आरंभ करने और मध्यम स्वर में साढ़े तीन पहर तक सुनाने की बात कही गई है।

#कथा समय#सूर्योदय#भागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा रोज कितनी देर सुननी चाहिए?

वक्ता को सूर्योदय से कथा आरंभ कर साढ़े तीन पहर तक मध्यम स्वर में कथा पढ़नी चाहिए, बीच में दो घड़ी विराम है।

#कथा समय#श्रवण#भागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में मन कैसे रखें?

मन को शुद्ध, चिंता-रहित, कथा में लगाकर रखना चाहिए और काम, क्रोध, लोभ, दंभ, मोह, द्वेष आदि से दूर रखना चाहिए।

#मन#भागवत सप्ताह#एकाग्रता
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनते समय क्या छोड़ना चाहिए?

कथा सुनते समय लोक, धन, घर-पुत्र की चिंता, काम, क्रोध, लोभ, निंदा, अनुचित संग और अशुद्ध आहार छोड़ना चाहिए।

#श्रवण नियम#त्याग#भागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में द्वादशाक्षर मंत्र क्यों जपते हैं?

कथा में विघ्न न हो, इस उद्देश्य से पाँच ब्राह्मणों को द्वादशाक्षर मंत्र द्वारा हरि-नाम जप करने के लिये रखा जाता है।

#द्वादशाक्षर मंत्र#जप#विघ्न निवारण
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में जप कौन करे?

कथा में विघ्न न हो, इसके लिये पाँच ब्राह्मणों का वरण कर उनसे द्वादशाक्षर मंत्र द्वारा हरि-नाम जप कराने को कहा गया है।

#जप#द्वादशाक्षर मंत्र#भागवत सप्ताह
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में कौन सा संकल्प लें?

वक्ता के सामने कल्याण के लिये सात दिन तक यथाशक्ति नियम धारण करने और शुद्ध चित्त से कथा में मन लगाने का संकल्प लें।

#संकल्प#भागवत सप्ताह#नियम
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा के वक्ता की पूजा क्यों करें?

वक्ता को शुकस्वरूप मानकर पूजते हैं और उससे कथा के प्रकाश से अज्ञान नष्ट करने की प्रार्थना करते हैं।

#वक्ता पूजा#भागवत कथा#शुक स्वरूप
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में नारियल क्यों रखते हैं?

भागवत पुस्तक के आगे नारियल रखकर नमस्कार और स्तुति करने का विधान है, जहाँ पुस्तक को श्रीकृष्णस्वरूप माना गया है।

#नारियल#भागवत पूजा#पुस्तक पूजा
श्रीमद्भागवत

भागवत पुस्तक की पूजा कैसे करें?

भागवत पुस्तक की धूप-दीप से विधिपूर्वक पूजा कर आगे नारियल रखकर प्रणाम और स्तुति की जाती है; समाप्ति पर भी पुस्तक पूजा है।

#भागवत पुस्तक#पूजा#नारियल
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में भगवान कृष्ण की पूजा कैसे करें?

मंडल में श्रीहरि की स्थापना कर श्रीकृष्ण को लक्ष्य बनाकर मंत्रोच्चार सहित षोडशोपचार पूजा, दक्षिणा और नमस्कार करना बताया गया है।

#कृष्ण पूजा#षोडशोपचार#भागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से पहले पितृ तर्पण क्यों करें?

गणेश पूजा के बाद पितरों का तर्पण और पूर्व पापों की शुद्धि के लिये प्रायश्चित्त करने का निर्देश है।

#पितृ तर्पण#भागवत कथा#प्रायश्चित्त
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह से पहले गणेश पूजा क्यों करें?

कथा में विघ्न न आए, इसके लिये नित्यकर्म के बाद गणनाथ गणेशजी की पूजा करने को कहा गया है।

#गणेश पूजा#विघ्न निवारण#भागवत सप्ताह
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा शुरू करने से पहले क्या करें?

आरंभ से पहले वक्ता का क्षौर, स्नान, नित्यकर्म, गणेश पूजा, पितृ तर्पण, श्रीहरि स्थापना, श्रीकृष्ण व भागवत पूजा और वक्ता पूजन बताया गया है।

#कथा आरंभ#पूजा#संकल्प
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में श्रोता किस दिशा में बैठें?

श्रोता वक्ता की दिशा के अनुसार पूर्वमुख या उत्तरमुख बैठें; एक मत से वक्ता और श्रोता दोनों पूर्वमुख भी बैठ सकते हैं।

#श्रोता#दिशा#भागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में वक्ता किस दिशा में बैठे?

वक्ता उत्तरमुख हो तो श्रोता पूर्वमुख बैठें; वक्ता पूर्वमुख हो तो श्रोता उत्तरमुख बैठें, या दोनों पूर्वमुख भी बैठ सकते हैं।

#वक्ता दिशा#आसन#भागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में सहायक वक्ता क्यों चाहिए?

वक्ता के पास ऐसा विद्वान सहायक रखना चाहिए जो श्रोताओं के संशय दूर कर सके और लोगों को समझाने में कुशल हो।

#सहायक वक्ता#संशय#भागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में कैसे वक्ता से बचना चाहिए?

जो अनेक धर्मों के भ्रम में पड़े हों, स्त्री-लोलुप हों या पाखंड का प्रचार करें, ऐसे पंडित भी भागवत वाचन के लिये अयोग्य बताए गए हैं।

#वक्ता चयन#पाखंड#भागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा का वक्ता किसे बनाना चाहिए?

भागवत कथा का वक्ता वैष्णव ब्राह्मण, वेद-शास्त्र में पारंगत, दृष्टांत-कुशल, धीर, विवेकी और निःस्पृह होना चाहिए।

#वक्ता#भागवत कथा#वैष्णव ब्राह्मण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा के वक्ता कैसे होने चाहिए?

वक्ता वेद-शास्त्र की व्याख्या में समर्थ, दृष्टांत देने में कुशल, विवेकी, निःस्पृह और वैष्णव ब्राह्मण होना चाहिए।

#वक्ता#भागवत कथा#वैष्णव
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनने कौन आ सकता है?

कथा सुनने के लिये परिवार सहित सबको बुलाया गया है; धनहीन, रोगी, पापी, संतानहीन और मोक्ष चाहने वाले भी इसे सुनें।

#श्रोता#भागवत कथा#सर्वजन
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह का निमंत्रण कैसे दें?

निमंत्रण विनयपूर्वक भेजना चाहिए: सात दिन सत्संग और रसमयी कथा होगी, अवकाश न हो तो एक दिन अवश्य आएँ।

#निमंत्रण#भागवत सप्ताह#आमंत्रण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में किन लोगों को बुलाना चाहिए?

कथा में परिवार सहित जनसमुदाय, स्त्रियाँ, शूद्र, हरिकथा से दूर लोग, विरक्त वैष्णव और कीर्तन-प्रेमियों को बुलाने की बात कही गई है।

#निमंत्रण#भागवत कथा#वैष्णव
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा की तैयारी कब शुरू करें?

तैयारी मुहूर्त और धन-व्यवस्था से शुरू होती है; बिछाने की सामग्री पाँच दिन पहले जुटाने और वक्ता को एक दिन पहले क्षौर कराने को कहा गया है।

#कथा तैयारी#भागवत सप्ताह#मंडप
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा का मंडप कैसे बनाएं?

मंडप ऊँचा, केले के खंभों से सुसज्जित, फल-पुष्प-पत्तों और चंदोवे से अलंकृत तथा ध्वजाओं से सजाया हुआ बताया गया है।

#मंडप#भागवत कथा#कथा तैयारी
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा कहाँ करानी चाहिए?

भागवत कथा तीर्थ, वन या घर में कराई जा सकती है; मुख्य बात है कि स्थान विस्तृत, शुद्ध और सज्जित हो।

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श्रीमद्भागवत

घर में भागवत सप्ताह करा सकते हैं?

हाँ, कथा तीर्थ, वन या घर में भी हो सकती है, पर स्थान बड़ा, शुद्ध, लीपा-पुता और मंडप से सुसज्जित होना चाहिए।

#घर में भागवत#भागवत सप्ताह#कथा स्थान
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में किन दिनों से बचना चाहिए?

शुभ महीनों में भी भद्रा, व्यतीपात आदि कुयोगों को छोड़कर कथा आरंभ करने की बात कही गई है।

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श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह के लिए मुहूर्त कैसे देखें?

मुहूर्त के लिये ज्योतिषी से पूछना, शुभ महीनों को चुनना और भद्रा-व्यतीपात जैसे कुयोग छोड़ना बताया गया है।

#मुहूर्त#भागवत सप्ताह#ज्योतिष
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा के शुभ महीने कौन से हैं?

भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, आषाढ़ और श्रावण कथा आरंभ के शुभ महीने बताए गए हैं।

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श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह कब शुरू करना चाहिए?

भागवत सप्ताह शुरू करने से पहले ज्योतिषी से मुहूर्त पूछना और शुभ महीनों में कथा आरंभ करना बताया गया है।

#भागवत सप्ताह#मुहूर्त#शुभ समय
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह की पूरी विधि क्या है?

पूरी विधि में मुहूर्त, धन-व्यवस्था, निमंत्रण, स्थान, मंडप, वक्ता, पूजा, नियम, श्रवण, कीर्तन और उद्यापन शामिल हैं।

#भागवत सप्ताह#विधि#पूजा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा के नित्य पाठ से क्या मिलता है?

इस पवित्र आख्यान के नित्य पाठ से अपुनर्भव, यानी पुनर्जन्म से छूटने का फल बताया गया है।

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श्रीमद्भागवत

गोकर्ण कथा सुनने का फल क्या है?

गोकर्ण कथा का एक अक्षर भी कानों से ग्रहण करने वालों को फिर गर्भ में नहीं आना पड़ा, ऐसा फल बताया गया है।

#गोकर्ण कथा#श्रवण फल#पाप नाश
श्रीमद्भागवत

श्राद्ध में भागवत कथा पढ़ने का फल क्या है?

कथा में कहा गया है कि श्राद्ध में इस पवित्र आख्यान का पाठ करने से पितरों को बड़ी तृप्ति होती है।

#श्राद्ध#भागवत कथा#पितृ तृप्ति
श्रीमद्भागवत

कथा सुनने से पाप कैसे जलते हैं?

भागवत सप्ताह को अग्नि के समान कहा गया है, जो मन-वचन-कर्म से हुए नए-पुराने सभी पापों को जला देता है।

#कथा श्रवण#पाप#अग्नि
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से सबकी मुक्ति कैसे हुई?

दूसरी सप्ताह कथा के बाद भगवान प्रकट हुए और गोकर्ण की कृपा से गाँव के सभी जीव विमानों पर चढ़ाकर हरिलोक भेजे गए।

#सर्वमुक्ति#भागवत कथा#गोकर्ण
श्रीमद्भागवत

श्रावण मास में भागवत कथा का फल क्या है?

श्रावण मास में गोकर्ण ने फिर सप्ताह कथा कही; उसके बाद भगवान विमानों सहित प्रकट हुए और श्रोताओं को दिव्य गति मिली।

#श्रावण मास#भागवत कथा#सप्ताह
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनने से भगवान कैसे प्रसन्न होते हैं?

कथा श्रवण से भगवान कृष्ण प्रसन्न होकर प्रकट हुए, शंख बजाया, गोकर्ण को गले लगाया और श्रोताओं को दिव्य गति दी।

#भगवान कृष्ण#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवत

भागवत श्रवण से गोलोक कैसे मिलता है?

श्रावण मास में पुनः भागवत सप्ताह के बाद भगवान कृष्ण प्रकट हुए और गोकर्ण सहित श्रोताओं को गोलोक-हरिलोक ले गए।

#गोलोक#भागवत श्रवण#गोकर्ण
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा से वैकुंठ कैसे मिलता है?

धुंधुकारी के लिये वैकुंठवासी पार्षद विमान लेकर आए; उन्होंने कहा कि सही श्रवण-मनन से सबको वैकुंठ फल मिल सकता है।

#वैकुंठ#भागवत कथा#श्रवण फल
श्रीमद्भागवत

शरीर नश्वर है तो क्या करना चाहिए?

शरीर नश्वर है, इसलिए उससे अविनाशी फल कमाने के लिये भागवत कथा सुननी और हृदय में उतारनी चाहिए।

#शरीर नश्वर#भागवत श्रवण#मुक्ति
श्रीमद्भागवत

जीवन का स्थायी फल कैसे मिले?

नश्वर शरीर से स्थायी फल पाने का मार्ग भागवत कथा श्रवण, पाप-क्षय, संशय-नाश और मुक्ति से जोड़ा गया है।

#जीवन#स्थायी फल#भागवत कथा
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