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श्रीमद् भागवत(464)

श्रीमद् भागवत पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 464 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्रीमद्भागवत

नैमिषारण्य में ऋषि क्यों इकट्ठे हुए थे?

शौनकादि ऋषि नैमिषारण्य में भगवत प्राप्ति की इच्छा से हजार वर्ष में पूर्ण होने वाला महान यज्ञ कर रहे थे।

#नैमिषारण्य#ऋषि#यज्ञ
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण सुनने की इच्छा से क्या होता है?

जब सुकृती पुरुष इसे सुनने की इच्छा करते हैं, तब ईश्वर शीघ्र उनके हृदय में आकर बंध जाता है।

#भागवत श्रवण#ईश्वर#हृदय
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण को वेदों का सार क्यों माना जाता है?

भागवत को वेद रूप कल्पवृक्ष का पका फल कहा गया है और ऋषि शास्त्रों का सार सुनना चाहते हैं।

#वेद#भागवत पुराण#शास्त्र सार
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण मनुष्य का कल्याण कैसे करती है?

यह परमात्मा का निरूपण करती है, तीन तापों का नाश बताती है और कलियुग के जीवों के लिये शास्त्रों का सार माँगा गया है।

#कल्याण#भागवत पुराण#कलियुग
श्रीमद्भागवत

श्रीमद्भागवत को परम धर्म क्यों कहा गया है?

क्योंकि इसमें मोक्ष तक की फल-कामना से रहित, निष्कपट और सत्पुरुषों के योग्य परम धर्म का निरूपण है।

#परम धर्म#श्रीमद्भागवत#निष्कपट धर्म
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण में परम सत्य किसे कहा गया है?

परम सत्य उस स्वयंप्रकाश परमात्मा को कहा गया है, जिससे जगत की सृष्टि, स्थिति और लय होते हैं।

#परम सत्य#परमात्मा#सृष्टि
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य परम सत्य का ध्यान, निष्कपट धर्म, तीन तापों का नाश और जीवों का कल्याण बताया गया है।

#भागवत पुराण#उद्देश्य#कल्याण
श्रीमद्भागवत

श्रीमद्भागवत किसने रची?

श्रीमद्भागवत को महामुनि व्यासदेव द्वारा निर्मित बताया गया है।

#श्रीमद्भागवत#व्यासदेव#महापुराण
श्रीमद्भागवत

श्रीमद्भागवत महापुराण क्या है?

यह व्यासदेव रचित महापुराण है, जिसमें परम सत्य, निष्कपट परम धर्म, परमात्मा और भगवत रस का वर्णन है।

#श्रीमद्भागवत#भागवत पुराण#परम धर्म
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनाने वाले को क्या फल मिलता है?

जो नियमपूर्वक भक्ति से सुनता है और जो शुद्ध वैष्णवों के सामने सुनाता है, दोनों यथार्थ फल पाते हैं; उनके लिये कुछ असाध्य नहीं।

#कथा सुनाना#वक्ता फल#वैकुंठ
श्रीमद्भागवत

आधे क्षण की भागवत कथा सुनने का फल क्या है?

असार संसार में कल्याण के लिये आधे क्षण भी शुककथा का पान करने को कहा गया है; कान में प्रवेश करते ही मुक्ति की बात कही गई है।

#आधा क्षण#भागवत कथा#मुक्ति
श्रीमद्भागवत

यमराज वैष्णवों को दंड क्यों नहीं देते?

यमराज अपने दूतों से कहते हैं कि जो भगवान की कथा में मत्त हैं, उनसे दूर रहो; मैं वैष्णवों को दंड नहीं देता।

#यमराज#वैष्णव#भागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा भवरोग की औषधि क्यों है?

कलियुग में भागवत कथा भवरोग की रामबाण औषधि, कृष्णप्रिय, पाप-नाशक, मुक्ति का कारण और भक्ति बढ़ाने वाली कही गई है।

#भवरोग#औषधि#मुक्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा दारिद्र्य और दुख में कैसे सहारा देती है?

दारिद्र्य-दुख से जलते, माया से दबे और संसार-सागर में डूबते लोगों के कल्याण के लिये भागवत गरजती है।

#दारिद्र्य#दुख#माया
श्रीमद्भागवत

भागवत सुनने से मोह कैसे मिटता है?

कथामृत पीने से सबका मोह नष्ट हुआ; शुकदेवजी ने भक्ति को पुत्रों सहित अपने शास्त्र में स्थापित किया।

#मोह#भागवत श्रवण#भक्ति
श्रीमद्भागवत

जहाँ भागवत सप्ताह हो वहाँ भगवान आते हैं?

भक्तों ने वर माँगा कि जहाँ भी भविष्य में सप्ताह कथा हो, भगवान पार्षदों सहित पधारें; भगवान ने तथास्तु कहा।

#भागवत सप्ताह#भगवान आगमन#वर
श्रीमद्भागवत

कथा और कीर्तन से भगवान कैसे प्रसन्न होते हैं?

कथा-कीर्तन देखकर भगवान प्रसन्न हुए और कहा कि तुम्हारी भक्ति ने मुझे वश में कर लिया, वर माँगो।

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श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में भगवान कैसे प्रकट होते हैं?

शुकदेवजी के वचन के बीच सभा में प्रह्लाद, बलि, उद्धव और अर्जुन आदि पार्षदों सहित श्रीहरि प्रकट हुए।

#भगवान प्रकट#भागवत कथा#कीर्तन
श्रीमद्भागवत

भागवत रस स्वर्ग से भी श्रेष्ठ क्यों है?

शुकदेवजी कहते हैं कि यह भागवत रस स्वर्ग, सत्यलोक, कैलास और वैकुंठ में भी नहीं है, इसलिए इसे कभी न छोड़ें।

#भागवत रस#स्वर्ग#कैलास
श्रीमद्भागवत

भागवत सुनने पढ़ने और मनन से मुक्ति कैसे मिलती है?

शुकदेवजी कहते हैं कि जो भक्ति से भागवत के श्रवण, पठन और मनन में तत्पर रहता है, वह मुक्त हो जाता है।

#श्रवण#पठन#मनन
श्रीमद्भागवत

भागवत वैष्णवों का धन क्यों है?

शुकदेवजी भागवत को पुराणों का तिलक और वैष्णवों का धन कहते हैं, क्योंकि इसमें परमहंसों का निर्मल ज्ञान और भक्ति-ज्ञान-वैराग्य सहित मुक्ति मार्ग है।

#वैष्णव#भागवत#धन
श्रीमद्भागवत

भागवत सुनने से तीन ताप कैसे मिटते हैं?

भागवत में निष्कपट परम धर्म और कल्याणकारी वास्तविक वस्तु का वर्णन है, जिससे तीन ताप शांत होते हैं।

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श्रीमद्भागवत

भागवत रस बार-बार क्यों पीना चाहिए?

शुकदेवजी कहते हैं कि भागवत रस अमृतमय, छिलका-गुठली रहित और दुर्लभ है; चेतना रहते इसे बार-बार पीना चाहिए।

#भागवत रस#श्रवण#शुकदेव
श्रीमद्भागवत

भागवत को वेदों का पका फल क्यों कहा गया है?

शुकदेवजी भागवत को वेदरूपी कल्पवृक्ष का पका फल कहते हैं, जो उनके मुख से अमृतरस से परिपूर्ण हुआ है।

#वेद#भागवत#शुकदेव
श्रीमद्भागवत

भागवत सुनने से ज्ञान वैराग्य भक्ति कैसे बढ़ते हैं?

विधिपूर्वक सप्ताह श्रवण के अंत में ज्ञान, वैराग्य और भक्ति को बड़ी पुष्टि मिली और वे तरुण होकर सबको आकर्षित करने लगे।

#ज्ञान#वैराग्य#भक्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत श्रवण को सबसे बड़ा धर्म क्यों कहा गया?

नारदजी कहते हैं कि वे भागवत श्रवण को सब धर्मों से श्रेष्ठ मानते हैं, क्योंकि इससे वैकुंठ-विहारी कृष्ण की प्राप्ति होती है।

#भागवत श्रवण#श्रेष्ठ धर्म#कृष्ण प्राप्ति
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह से कौन से फल मिलते हैं?

विधिपूर्वक सप्ताह करने से पाप निवृत्ति, तत्काल फल और धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष चारों की प्राप्ति कही गई है।

#भागवत सप्ताह फल#धर्म#अर्थ
श्रीमद्भागवत

भागवत पुस्तक दान करने का फल क्या है?

सामर्थ्य हो तो सोने के सिंहासन पर भागवत पुस्तक रखकर आचार्य को दान करने से जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति बताई गई है।

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श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में बारह ब्राह्मणों को भोजन क्यों कराएं?

समापन पर बारह ब्राह्मणों को खीर, मधु आदि उत्तम पदार्थ खिलाकर व्रत की पूर्ति और दान का विधान बताया गया है।

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श्रीमद्भागवत

विष्णु सहस्रनाम पाठ क्यों करें?

विधि में हुई कमी-अधिकता और अनेक त्रुटियों की शांति के लिये विष्णुसहस्रनाम पाठ बताया गया है; इससे कर्म सफल होते हैं।

#विष्णु सहस्रनाम#दोष शांति#भागवत सप्ताह
श्रीमद्भागवत

हवन न कर सकें तो क्या करें?

हवन न कर सकें तो उसका फल पाने के लिये हवन सामग्री ब्राह्मण को दें और दोष-शांति के लिये विष्णुसहस्रनाम पढ़ें।

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श्रीमद्भागवत

भागवत हवन में क्या सामग्री चढ़ाएं?

दशम स्कंध के श्लोक पढ़कर खीर, मधु, घृत, तिल और अन्न आदि से विधिपूर्वक आहुति देने को कहा गया है।

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श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह के बाद हवन कैसे करें?

गृहस्थ श्रोता कर्म-शांति के लिये हवन करे; दशम स्कंध के श्लोक पढ़कर खीर, मधु, घी, तिल और अन्न से आहुति दी जाती है।

#हवन#भागवत सप्ताह#दशम स्कंध
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह के बाद गीता पाठ कब करें?

यदि श्रोता विरक्त हो तो कर्म की शांति के लिये अगले दिन गीता पाठ करने को कहा गया है।

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श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह के बाद दान किसे दें?

समाप्ति पर ब्राह्मणों और याचकों को धन-अन्न दें; सामर्थ्य हो तो हवन सामग्री, गौ-सुवर्ण और भागवत पुस्तक आचार्य को दें।

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श्रीमद्भागवत

भागवत कथा के बाद प्रसाद और तुलसी क्यों देते हैं?

कथा समाप्ति पर वक्ता श्रोताओं को प्रसाद, तुलसी और प्रसादमालाएँ देता है; इसके बाद कीर्तन होता है।

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श्रीमद्भागवत

कथा पूरी होने पर क्या करना चाहिए?

कथा पूरी होने पर भागवत पुस्तक और वक्ता की भक्ति से पूजा, प्रसाद-तुलसी वितरण, कीर्तन, जयघोष, शंखध्वनि और दान करना चाहिए।

#कथा समाप्ति#पूजा#प्रसाद
श्रीमद्भागवत

क्या भागवत सप्ताह में उद्यापन जरूरी है?

विशेष फल की इच्छा वालों के लिये उद्यापन है, पर निष्काम अकिंचन भक्तों के लिये उद्यापन का आग्रह नहीं बताया गया।

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श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह का उद्यापन कैसे करें?

उद्यापन में पुस्तक-वक्ता पूजा, प्रसाद-तुलसी, कीर्तन, जय-शंखध्वनि, दान, गीता पाठ या हवन, ब्राह्मण भोजन और पुस्तक दान बताए गए हैं।

#उद्यापन#भागवत सप्ताह#दान
श्रीमद्भागवत

मोक्ष चाहने वाले भागवत क्यों सुनें?

मोक्ष चाहने वालों के लिये कथा पापहरिणी, भोग-मोक्ष देने वाली और श्रवण-पठन-मनन से मुक्ति कराने वाली कही गई है।

#मोक्ष#भागवत श्रवण#भक्ति
श्रीमद्भागवत

संतान सुख के लिए भागवत कथा क्यों सुनते हैं?

जिन स्त्रियों को संतान-संबंधी दुख हो, उन्हें प्रयत्नपूर्वक कथा सुनने को कहा गया है; विधिपूर्वक श्रवण से उत्तम फल मिलता है।

#संतान सुख#भागवत कथा#स्त्री
श्रीमद्भागवत

रोगी लोग भागवत कथा क्यों सुनें?

धनहीन, क्षयरोगी, अन्य रोगों से पीड़ित, भाग्यहीन, पापी, पुत्रहीन और मोक्ष इच्छुक लोगों को कथा सुनने को कहा गया है।

#रोगी#भागवत कथा#श्रवण
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में कौन से गुण अपनाने चाहिए?

सत्य, शौच, दया, मौन, सरलता, विनय और उदार मन का आचरण करने को कहा गया है।

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श्रीमद्भागवत

भागवत कथा सुनते समय किनसे बात नहीं करनी चाहिए?

नियम से कथा सुनने वाले को रजस्वला, अंत्यज, म्लेच्छ, पतित, गायत्रीहीन, ब्राह्मणद्वेषी और वेदबाह्य लोगों से बातचीत न करने को कहा गया है।

#बातचीत#श्रवण नियम#भागवत कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में निंदा से क्यों बचना चाहिए?

कथा सुनने वाले को वेद, वैष्णव, ब्राह्मण, गुरु, गौसेवक, स्त्री, राजा और महापुरुषों की निंदा से बचना चाहिए।

#निंदा#भागवत कथा#वाणी संयम
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में क्रोध और लोभ क्यों छोड़ें?

कथा सुनने वाले को काम, क्रोध, मद, मान, मत्सर, लोभ, दंभ, मोह और द्वेष को पास नहीं आने देना चाहिए।

#क्रोध#लोभ#मन शुद्धि
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में जमीन पर सोना क्यों बताया गया?

नियम से कथा सुनने वाले के लिये ब्रह्मचर्य, भूमि पर शयन और संयमित भोजन का विधान श्रोता के व्रत और विनय का भाग है।

#भूमि शयन#भागवत सप्ताह#नियम
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में ब्रह्मचर्य क्यों जरूरी है?

नियमपूर्वक कथा सुनने वाले के लिये ब्रह्मचर्य, भूमि पर शयन और संयमित भोजन को श्रवण-व्रत का अंग बताया गया है।

#ब्रह्मचर्य#भागवत सप्ताह#नियम
श्रीमद्भागवत

भागवत सप्ताह में किन चीजों से परहेज करें?

दाल, मधु, तेल, भारी अन्न, दूषित पदार्थ, बासी अन्न, काम-क्रोध-लोभ और निंदा से बचना बताया गया है।

#परहेज#भागवत सप्ताह#आहार
श्रीमद्भागवत

उपवास से कथा सुनने में बाधा हो तो क्या करें?

यदि उपवास से श्रवण में बाधा हो तो भोजन करना बेहतर है; वही नियम लें जो कथा सुनने में सहायक हो।

#उपवास#कथा श्रवण#आहार
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