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श्रीमद् भागवत(464)

श्रीमद् भागवत पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 464 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्रीमद्भागवत

कूर्म अवतार में भगवान ने क्या किया?

समुद्र मंथन के समय भगवान ने कच्छप रूप लेकर मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया।

#कूर्म अवतार#कच्छप#समुद्र मंथन
श्रीमद्भागवत

मत्स्य अवतार ने मनु को कैसे बचाया?

चाक्षुष मन्वंतर के अंत में जब लोक समुद्र में डूब रहे थे, भगवान ने मत्स्य रूप लेकर पृथ्वी रूपी नाव पर वैवस्वत मनु की रक्षा की।

#मत्स्य अवतार#वैवस्वत मनु#प्रलय
श्रीमद्भागवत

पृथु अवतार में भगवान ने क्या किया?

पृथु अवतार में भगवान ने पृथ्वी से समस्त औषधियों का दोहन किया, इसलिए यह अवतार सबके लिए कल्याणकारी कहा गया।

#पृथु अवतार#पृथ्वी#औषधि
श्रीमद्भागवत

ऋषभदेव ने कौन सा मार्ग बताया?

ऋषभदेव अवतार में भगवान ने परमहंसों का वह मार्ग दिखाया जो सभी आश्रमों के लिए वंदनीय बताया गया है।

#ऋषभदेव#परमहंस मार्ग#मोक्ष मार्ग
श्रीमद्भागवत

दत्तात्रेय अवतार ने किसे ज्ञान दिया?

दत्तात्रेय अवतार में भगवान ने अलर्क और प्रह्लाद आदि को ज्ञान का उपदेश दिया।

#दत्तात्रेय#अत्रि#अनसूया
श्रीमद्भागवत

कपिल भगवान ने सांख्य ज्ञान किसे दिया?

कपिल अवतार में भगवान ने समय से लुप्त हुए तत्त्व-निर्णायक सांख्य शास्त्र का उपदेश आसुरि नामक ब्राह्मण को दिया।

#कपिल भगवान#सांख्य ज्ञान#आसुरि
श्रीमद्भागवत

नारद अवतार ने क्या उपदेश दिया?

नारद अवतार में भगवान ने सात्वत तंत्र का उपदेश दिया, जिसमें कर्मों से कर्मबंधन से मुक्ति का वर्णन है।

#नारद अवतार#सात्वत तंत्र#नारद पांचरात्र
श्रीमद्भागवत

वराह अवतार ने पृथ्वी को कैसे बचाया?

वराह अवतार में भगवान ने रसातल में गई हुई पृथ्वी को निकालने के लिए सूकर रूप धारण किया।

#वराह अवतार#पृथ्वी उद्धार#सूकर रूप
श्रीमद्भागवत

विराट पुरुष रूप कैसा है?

विराट पुरुष रूप में समस्त लोकों की कल्पना है; योगी उसे हजारों पैर, भुजा, मुख, सिर, कान, आँख और आभूषणों से युक्त देखते हैं।

#विराट पुरुष#पुरुष रूप#नारायण
श्रीमद्भागवत

पुरुष अवतार क्या है?

सृष्टि के आरंभ में भगवान ने महत्तत्त्व आदि से पुरुष रूप ग्रहण किया, जिसमें दस इंद्रियाँ, मन और पाँच भूत सोलह कलाएँ थीं।

#पुरुष अवतार#नारायण#विराट रूप
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण में भगवान के कितने अवतार बताए गए हैं?

कई प्रमुख अवतार गिनाए गए हैं, पर अंत में कहा गया है कि भगवान हरि के अवतार असंख्य हैं।

#भगवान अवतार#भागवत पुराण#असंख्य अवतार
श्रीमद्भागवत

भगवान विष्णु के अवतारों की सूची क्या है?

पुरुष, कुमार, वराह, नारद, नर-नारायण, कपिल, दत्तात्रेय, यज्ञ, ऋषभ, पृथु, मत्स्य, कूर्म, धन्वंतरि, मोहिनी, नरसिंह, वामन, परशुराम, व्यास, राम, बलराम-कृष्ण, बुद्ध और कल्कि का वर्णन है।

#विष्णु अवतार#अवतार सूची#भागवत पुराण
श्रीमद्भागवत

भगवान सबमें एक होकर भी अलग-अलग कैसे दिखते हैं?

भगवान एक हैं, पर जैसे एक अग्नि अलग-अलग लकड़ियों में अनेक-सी दिखती है, वैसे ही वे अनेक जीवों में अलग-अलग से जान पड़ते हैं।

#भगवान#जीव#सृष्टि
श्रीमद्भागवत

योग तपस्या और धर्म किसके लिए हैं?

योग, तपस्या और धर्म का लक्ष्य श्रीकृष्ण ही बताए गए हैं; सभी कर्मों और गतियों की समाप्ति भी उन्हीं में है।

#योग#तपस्या#धर्म
श्रीमद्भागवत

वेदों का अंतिम लक्ष्य क्या है?

वेद, यज्ञ, योग, कर्म, ज्ञान, तप, धर्म और सभी गतियों का अंतिम लक्ष्य वासुदेव श्रीकृष्ण बताया गया है।

#वेद#वासुदेव#कृष्ण
श्रीमद्भागवत

धन और संतान के लिए लोग किसकी पूजा करते हैं?

रजोगुणी या तमोगुणी स्वभाव वाले लोग धन, ऐश्वर्य और संतान की कामना से भूत, पितर और प्रजापति आदि की पूजा करते हैं।

#धन#संतान#उपासना
श्रीमद्भागवत

मोक्ष चाहने वालों को किसकी पूजा करनी चाहिए?

मोक्ष चाहने वाले शांत और दोष-दृष्टि से रहित होकर सत्त्वगुणी विष्णु भगवान और उनके अंशों का भजन करते हैं।

#मोक्ष#विष्णु पूजा#नारायण
श्रीमद्भागवत

सत्त्वगुण क्यों जरूरी है?

सत्त्वगुण चित्त को निर्मल करता है, भगवान का दर्शन कराने वाला है और मनुष्य का परम कल्याण श्रीहरि से होता है।

#सत्त्वगुण#विष्णु#मन शुद्धि
श्रीमद्भागवत

हृदय की गांठ टूटने का मतलब क्या है?

हृदय की गांठ टूटना भगवान के साक्षात्कार से भीतर की आसक्ति, संदेह और कर्मबंधन के कटने का संकेत है।

#हृदय ग्रंथि#भक्ति#साक्षात्कार
श्रीमद्भागवत

मन के संदेह कैसे मिटते हैं?

प्रेममयी भक्ति से आसक्तियाँ मिटती हैं; भगवान का साक्षात्कार होते ही सारे संदेह कट जाते हैं।

#संदेह#भक्ति#भगवान साक्षात्कार
श्रीमद्भागवत

भगवान का अनुभव कैसे होता है?

भागवत श्रवण से प्राप्त ज्ञान-वैराग्ययुक्त भक्ति और प्रेममयी भक्ति से भगवान के तत्त्व का अनुभव होता है।

#भगवान अनुभव#परमात्मा#भक्ति
श्रीमद्भागवत

स्थायी भक्ति कैसे मिलती है?

महात्मा सेवा, श्रवण की इच्छा, श्रद्धा और निरंतर भागवत-कथा सेवन से अशुभ वासनाएँ मिटती हैं और स्थायी भक्ति मिलती है।

#स्थायी भक्ति#भागवत सेवा#श्रद्धा
श्रीमद्भागवत

काम और लोभ से कैसे बचें?

भागवत और भगवद्कथा के निरंतर सेवन से अशुभ वासनाएँ नष्ट होती हैं, फिर काम-लोभ शांत होकर चित्त निर्मल होता है।

#काम#लोभ#भागवत
श्रीमद्भागवत

बुरी वासनाएँ कैसे मिटती हैं?

भगवान की कथा सुनने वालों के हृदय में कृष्ण स्थित होकर अशुभ वासनाएँ दूर करते हैं; निरंतर भागवत सेवा से वे नष्ट होती हैं।

#बुरी वासनाएँ#कृष्ण कथा#भागवत सेवा
श्रीमद्भागवत

भगवान की कथा में रुचि कैसे बढ़ती है?

महात्मा सेवा से श्रवण की इच्छा और श्रद्धा आती है; कथा सुनने से कृष्ण हृदय की अशुभ वासनाएँ दूर करते हैं।

#भगवत कथा#कथा रुचि#श्रवण
श्रीमद्भागवत

संतों की सेवा से भक्ति कैसे आती है?

पवित्र तीर्थों के सेवन से महात्माओं की सेवा, फिर श्रवण की इच्छा, श्रद्धा और अंत में भगवत कथा में रुचि उत्पन्न होती है।

#संत सेवा#भक्ति#वासुदेव कथा
श्रीमद्भागवत

भागवत पढ़ने से पहले क्या करना चाहिए?

भागवत पाठ से पहले नर-नारायण ऋषि, देवी सरस्वती और श्री व्यासदेव को प्रणाम करना बताया गया है।

#भागवत पाठ#नारायण#सरस्वती
श्रीमद्भागवत

भगवान को प्रसन्न कैसे करें?

अपने धर्म की पूर्ण सिद्धि भगवान को प्रसन्न करने में है; इसलिए एकाग्र मन से उनका श्रवण, कीर्तन, ध्यान और पूजन करना चाहिए।

#भगवान को प्रसन्न#श्रवण#कीर्तन
श्रीमद्भागवत

मनुष्य जीवन का उद्देश्य क्या है?

मनुष्य जीवन का उद्देश्य तत्त्व-जिज्ञासा बताया गया है; केवल कर्म, भोग या स्वर्ग-प्राप्ति इसका अंतिम फल नहीं है।

#मनुष्य जीवन#जीवन उद्देश्य#तत्त्व जिज्ञासा
श्रीमद्भागवत

पैसा किसलिए कमाना चाहिए?

अर्थ को धर्म के लिये बताया गया है; धन का फल भोग-विलास नहीं, और भोग का उद्देश्य केवल जीवन-निर्वाह है।

#धन#अर्थ#धर्म
श्रीमद्भागवत

धर्म का असली उद्देश्य क्या है?

धर्म का असली उद्देश्य मोक्ष, भगवान को प्रसन्न करना और जीवन को तत्त्व-जिज्ञासा की ओर ले जाना है।

#धर्म#मोक्ष#भगवान
श्रीमद्भागवत

पूजा-पाठ के बाद भी मन शांत क्यों नहीं होता?

यदि धर्म के अनुष्ठान से भगवान की लीला-कथा में प्रेम नहीं जागता, तो वह परिश्रम मात्र बताया गया है।

#पूजा पाठ#मन की शांति#भगवत कथा
श्रीमद्भागवत

भक्ति से ज्ञान और वैराग्य कैसे आते हैं?

भगवान वासुदेव में भक्ति लगते ही अनन्य प्रेम से निष्काम ज्ञान और वैराग्य शीघ्र प्रकट होते हैं।

#भक्ति#ज्ञान#वैराग्य
श्रीमद्भागवत

भगवान की भक्ति से मन को शांति कैसे मिलती है?

निरंतर और निष्काम भक्ति से हृदय परमात्मा को पाता है, अशुभ वासनाएँ मिटती हैं और आत्मप्रसाद मिलता है।

#मन की शांति#भक्ति#कृष्ण
श्रीमद्भागवत

निष्काम भक्ति का मतलब क्या है?

निष्काम भक्ति का अर्थ है बिना किसी फल-कामना के भगवान में स्थिर प्रेम, जिससे ज्ञान और वैराग्य अपने आप आते हैं।

#निष्काम भक्ति#भक्ति#वासुदेव
श्रीमद्भागवत

सच्ची भक्ति क्या है?

सच्ची भक्ति वह है जो भगवान कृष्ण में हो, बिना किसी कामना के हो और निरंतर बनी रहे।

#भक्ति#सच्ची भक्ति#कृष्ण
श्रीमद्भागवत

कृष्ण के धाम जाने के बाद धर्म का सहारा क्या है?

ऋषि यही प्रश्न पूछते हैं कि धर्मरक्षक कृष्ण के धाम जाने पर धर्म ने अब किसकी शरण ली है।

#धर्म#कृष्ण#धाम
श्रीमद्भागवत

कलियुग से पार पाने में हरि कथा कैसे मदद करती है?

ऋषि कहते हैं कि कलियुग अंतःकरण की पवित्रता और शक्ति को नष्ट करता है; उससे पार जाने वालों के लिये सूतजी कर्णधार जैसे मिले हैं।

#कलियुग#हरि कथा#सूतजी
श्रीमद्भागवत

कृष्ण और बलराम की लीलाएँ अद्भुत क्यों कही गईं?

क्योंकि कृष्ण ने बलराम के साथ ऐसे कर्म और पराक्रम प्रकट किए जिन्हें मनुष्य नहीं कर सकते।

#कृष्ण#बलराम#लीला
श्रीमद्भागवत

कृष्ण मनुष्य जैसे दिखकर भी भगवान कैसे थे?

कृष्ण लोगों के सामने मनुष्य जैसे आचरण करते थे, पर बलराम के साथ उन्होंने ऐसी लीलाएँ और पराक्रम किए जो मनुष्य नहीं कर सकते।

#कृष्ण#भगवान#मानव लीला
श्रीमद्भागवत

कृष्ण कथा सुनने की इच्छा क्यों बढ़ती है?

क्योंकि भगवान का यश कलियुग के पापों को हरता है और रसिक श्रोताओं को उनकी लीला में पद-पद पर नया रस मिलता है।

#कृष्ण कथा#हरि कथा#भगवत लीला
श्रीमद्भागवत

भगवान के चरणों की शरण क्यों श्रेष्ठ है?

परम शांत मुनि भगवान के चरणों की शरण में रहते हैं; उनके स्पर्श से जीव तुरंत पवित्र होता है, गंगा से पवित्रता समय लेकर मिलती है।

#भगवान चरण#शरण#पवित्रता
श्रीमद्भागवत

कृष्ण नाम लेने का महत्व क्या है?

जन्म-मृत्यु के घोर चक्र में पड़ा जीव भी यदि भगवान के मंगलमय नाम का उच्चारण कर ले, तो तुरंत मुक्त हो सकता है।

#कृष्ण नाम#भगवान नाम#मुक्ति
श्रीमद्भागवत

भगवान का अवतार क्यों होता है?

भगवान का अवतार जीवों के परम कल्याण और भगवत प्रेममयी समृद्धि के लिये बताया गया है।

#भगवान अवतार#हरि कथा#कृष्ण
श्रीमद्भागवत

भगवान कृष्ण देवकी और वसुदेव के यहाँ क्यों आए?

ऋषि सूतजी से कृष्ण के देवकी-वसुदेव से जन्म का प्रयोजन पूछते हैं और कहते हैं कि भगवान का अवतार जीवों के कल्याण के लिये होता है।

#कृष्ण अवतार#देवकी#वसुदेव
श्रीमद्भागवत

कलियुग के लोगों के लिए सहज कल्याण क्या है?

ऋषि सूतजी से यही पूछते हैं कि शास्त्रों का सार बताइए जिससे कलियुग के जीवों का परम कल्याण हो।

#कलियुग#सहज कल्याण#शास्त्र सार
श्रीमद्भागवत

कलियुग में शास्त्रों का सार क्यों जरूरी है?

क्योंकि लोग अल्पायु और बाधाग्रस्त हैं, शास्त्र बहुत हैं और उनमें अनेक कर्मों का वर्णन है; उनका एक अंश सुनना भी कठिन है।

#कलियुग#शास्त्र सार#कल्याण
श्रीमद्भागवत

कलियुग में मनुष्य की हालत कैसी बताई गई है?

कलियुग में मनुष्य अल्पायु, साधना में अरुचि वाला, आलसी, मंदबुद्धि, मंदभाग्य और अनेक बाधाओं से घिरा बताया गया है।

#कलियुग#मनुष्य#अल्पायु
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सूतजी को पुराणों का ज्ञाता क्यों माना गया?

क्योंकि उन्होंने इतिहास, पुराण और धर्मशास्त्रों का अध्ययन और व्याख्या की थी तथा व्यासादि मुनियों के ज्ञान को जानते थे।

#सूतजी#पुराण#धर्मशास्त्र
श्रीमद्भागवत

सूतजी से ऋषियों ने क्या पूछा?

ऋषियों ने सूतजी से शास्त्रों का सार, कलियुग के जीवों का कल्याण, कृष्ण अवतार, हरि कथा और धर्म का आश्रय पूछा।

#सूतजी#ऋषि#प्रश्न
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