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श्रीमद् भागवत(464)

श्रीमद् भागवत पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 464 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्रीमद्भागवत

भक्ति शुरू करके छूट जाए तो क्या नुकसान होता है?

नारदजी कहते हैं कि भगवान के चरणों का भजन शुरू करके बीच में छूट भी जाए तो भक्त का अमंगल नहीं होता।

#भक्ति#भजन#भगवान
श्रीमद्भागवत

सिर्फ धर्म पालन से क्या भगवान मिलते हैं?

नारदजी कहते हैं कि केवल स्वधर्म पालन करने वाले और भगवान का भजन न करने वाले को वास्तविक लाभ क्या मिला, यह विचारणीय है।

#धर्म पालन#भक्ति#स्वधर्म
श्रीमद्भागवत

सकाम कर्म से बचना क्यों जरूरी है?

नारदजी चेतावनी देते हैं कि विषयों में फँसे लोगों को सकाम कर्म मुख्य धर्म जैसा लग सकता है, इसलिए भगवान की भक्ति की दिशा जरूरी है।

#सकाम कर्म#धर्म#भक्ति
श्रीमद्भागवत

भगवान को समर्पित कर्म क्या है?

भगवान को समर्पित कर्म वह है जो शास्त्र-विहित होकर भगवान की प्रसन्नता के लिए किया जाए और कृष्ण नाम-स्मरण से जुड़ा हो।

#समर्पित कर्म#भगवदर्थ कर्म#भक्ति योग
श्रीमद्भागवत

कर्म बंधन से मुक्ति कैसे मिले?

कर्म बंधन से मुक्ति तब होती है जब वही कर्म भगवान की प्रसन्नता के लिए समर्पित होकर किए जाएँ।

#कर्म बंधन#मुक्ति#भगवान को अर्पण
श्रीमद्भागवत

कर्म भगवान को अर्पित कैसे करें?

नारदजी कहते हैं कि समस्त कर्म पुरुषोत्तम भगवान को समर्पित करना ही संसार के तीन तापों की औषधि है।

#कर्म समर्पण#भगवान#भक्ति योग
श्रीमद्भागवत

साधारण भाषा में भगवान का नाम हो तो क्या वह पवित्र होती है?

हाँ। नारदजी कहते हैं कि दोषयुक्त वाणी भी यदि भगवान के नाम और यश से युक्त हो तो साधु उसे सुनते और गाते हैं।

#भगवान का नाम#भाषा#हरि यश
श्रीमद्भागवत

कृष्ण कथा सुनने से पाप कैसे मिटते हैं?

भगवान के नाम-यश से युक्त वाणी पाप मिटाती है; नारदजी ने संतों की सेवा और कृष्ण कथा सुनकर अपना हृदय शुद्ध किया।

#कृष्ण कथा#पाप नाश#सत्संग
श्रीमद्भागवत

भगवान का नाम लेने से क्या फल मिलता है?

भगवान के नाम और यश से युक्त वाणी पापों का नाश करती है; साधुजन उसे सुनते, गाते और ग्रहण करते हैं।

#भगवान का नाम#कृष्ण नाम#कीर्तन
श्रीमद्भागवत

भक्ति के बिना ज्ञान अधूरा क्यों है?

नारदजी कहते हैं कि मोक्ष देने वाला निर्मल ज्ञान भी यदि अच्युत भाव से रहित हो तो उसकी शोभा पूर्ण नहीं रहती।

#भक्ति#ज्ञान#मोक्ष
श्रीमद्भागवत

भगवान की महिमा गाना क्यों जरूरी है?

नारदजी कहते हैं कि भगवान की महिमा के बिना ज्ञान और कर्म शोभा नहीं पाते; सभी साधनों का लक्ष्य कृष्ण गुणों का वर्णन है।

#भगवान की महिमा#कृष्ण कीर्तन#हरि यश
श्रीमद्भागवत

भगवान की कथा लिखना क्यों जरूरी है?

भगवान की कथा इसलिए जरूरी है क्योंकि वही जीवों को बंधन से मुक्त करती है और दुखी मनुष्यों को शांति देती है।

#भगवान की कथा#कृष्ण लीला#भक्ति
श्रीमद्भागवत

नारद जी ने व्यास जी को क्या सलाह दी?

नारदजी ने व्यासजी से भगवान के निर्मल यश, नाम और प्रेममयी लीलाओं का कल्याणकारी वर्णन करने को कहा।

#नारद उपदेश#वेदव्यास#भगवान की लीला
श्रीमद्भागवत

वेदव्यास को भागवत लिखने की प्रेरणा किसने दी?

वेदव्यास को भगवान की लीला और यश का वर्णन करने की प्रेरणा देवर्षि नारदजी ने दी।

#वेदव्यास#नारदजी#भागवत प्रेरणा
श्रीमद्भागवत

भागवत पुराण क्यों लिखा गया?

नारदजी ने व्यासजी को भगवान के निर्मल यश और लीला का वर्णन करने को कहा, क्योंकि उसी से जीवों का बंधन और दुख मिटता है।

#भागवत पुराण#वेदव्यास#नारद
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा शुकदेव से परीक्षित तक कैसे पहुँची?

शौनकजी कहते हैं कि भगवान शुकदेवजी ने पुण्यमयी भागवत कथा कही और पूछते हैं कि उनका परीक्षित से संवाद कैसे हुआ।

#भागवत कथा#शुकदेव#परीक्षित
श्रीमद्भागवत

नारद और व्यास संवाद क्या है?

नारद-व्यास संवाद की भूमिका है: व्यासजी अपने अधूरेपन पर विचार कर रहे थे, तभी नारदजी आए और व्यासजी ने उनका विधिपूर्वक पूजन किया।

#नारद व्यास संवाद#व्यास असंतोष#नारद
श्रीमद्भागवत

परीक्षित गंगा किनारे क्यों बैठे?

शौनकजी यही पूछते हैं कि सम्राट परीक्षित ने राज्य छोड़कर गंगातट पर मृत्यु तक अनशन का व्रत क्यों लिया।

#परीक्षित#गंगा#उपवास
श्रीमद्भागवत

परीक्षित ने भागवत कथा क्यों सुनी?

कारण का पूरा विस्तार आगे की कथा में आता है। शौनकजी पूछते हैं कि शुकदेव और परीक्षित का संवाद कैसे हुआ जिसमें भागवत कही गई।

#परीक्षित#भागवत कथा#शुकदेव
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शुकदेव जी इतने बड़े योगी क्यों माने जाते हैं?

वे समदर्शी, भेदभावरहित, परमात्मा में स्थित और इतनी विरक्त दृष्टि वाले थे कि स्त्री-पुरुष भेद भी नहीं देखते थे।

#शुकदेव योगी#वैराग्य#समदर्शी
श्रीमद्भागवत

शुकदेव जी कौन थे?

शुकदेवजी व्यासजी के पुत्र, महान योगी, समदर्शी, भेदभावरहित और परमात्मा में स्थित मुनि बताए गए हैं।

#शुकदेव#व्यास पुत्र#योगी
श्रीमद्भागवत

वेदव्यास का जन्म कैसे हुआ?

व्यासजी का जन्म द्वापर युग में महर्षि पराशर से वसुकन्या सत्यवती के गर्भ से बताया गया है।

#वेदव्यास जन्म#पराशर#सत्यवती
श्रीमद्भागवत

वेदव्यास कौन थे?

वेदव्यास पराशर और सत्यवती के पुत्र, भगवान के कलावतार योगीराज, वेद-विभाजक और महाभारत रचने वाले महामुनि बताए गए हैं।

#वेदव्यास#व्यासजी#पराशर
श्रीमद्भागवत

पुराण को पाँचवाँ वेद क्यों कहते हैं?

इतिहास और पुराण को पाँचवाँ वेद कहा गया है; आगे महाभारत द्वारा वेद का अर्थ आम लोगों के लिए खोलने की बात आती है।

#पुराण#पाँचवाँ वेद#इतिहास
श्रीमद्भागवत

चार वेद कौन से हैं?

चार वेद ऋक्, यजुः, साम और अथर्व बताए गए हैं।

#चार वेद#ऋग्वेद#यजुर्वेद
श्रीमद्भागवत

वेदों को किसने बाँटा?

भगवान के कलावतार योगीराज व्यासजी ने एक वेद को चार भागों में विभाजित किया।

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श्रीमद्भागवत

महाभारत क्यों लिखा गया?

महाभारत इसलिए लिखा गया कि जो लोग वेद-श्रवण के अधिकारी नहीं थे, वे भी धर्म-कर्म और कल्याणकारी मार्ग समझ सकें।

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श्रीमद्भागवत

सूतजी ने भागवत कथा किससे सीखी?

सूतजी शुकदेवजी की भागवत कथा के समय वहाँ बैठे थे और उनकी कृपा से उन्होंने इसका अध्ययन किया।

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श्रीमद्भागवत

कलियुग में भागवत को सूर्य क्यों कहा गया है?

कृष्ण के धाम जाने पर जब कलियुग में लोग अज्ञान-अंधकार से अंधे हो रहे थे, तब भागवत पुराण सूर्य के समान प्रकट हुआ।

#कलियुग#भागवत सूर्य#अज्ञान
श्रीमद्भागवत

परीक्षित ने गंगा तट पर भागवत क्यों सुनी?

इतना बताया गया है कि परीक्षित गंगातट पर आमरण अनशन का व्रत लेकर ऋषियों से घिरे बैठे थे और शुकदेवजी ने उन्हें भागवत सुनाई।

#परीक्षित#गंगा तट#भागवत श्रवण
श्रीमद्भागवत

शुकदेव जी ने भागवत किसे सुनाई?

शुकदेवजी ने श्रीमद्भागवत राजा परीक्षित को सुनाई, जो गंगातट पर आमरण अनशन का व्रत लेकर बैठे थे।

#शुकदेव#राजा परीक्षित#गंगा तट
श्रीमद्भागवत

श्रीमद्भागवत किसके लिए बनाई गई?

वेदव्यास ने भगवत चरित्र से पूर्ण भागवत पुराण लोकों के परम कल्याण के लिए बनाया और शुकदेवजी को ग्रहण कराया।

#श्रीमद्भागवत#वेदव्यास#लोक कल्याण
श्रीमद्भागवत

कृष्ण से अनन्य प्रेम करने का फल क्या है?

जो भगवान वासुदेव से सर्वात्मभाव और अनन्य प्रेम करते हैं, वे जन्म-मरण रूप संसार के भयंकर चक्र में फिर नहीं पड़ते।

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श्रीमद्भागवत

भगवान की लीला को कौन समझ सकता है?

भगवान की लीला को वही समझ सकता है जो निष्कपट भाव से निरंतर उनके चरणकमलों की सेवा और स्मरण करता है।

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श्रीमद्भागवत

भगवान संसार रचकर भी अलग कैसे रहते हैं?

भगवान लीला से संसार की सृष्टि, पालन और संहार करते हैं, पर उसमें आसक्त नहीं होते और सबके भीतर रहते हुए भी स्वतंत्र रहते हैं।

#भगवान#सृष्टि#लीला
श्रीमद्भागवत

माया दूर होने पर जीव को क्या अनुभव होता है?

जब अविद्या से बना स्थूल-सूक्ष्म शरीर का आरोप मिटता है, तब ब्रह्म का साक्षात्कार होता है और जीव अपनी स्वरूप-महिमा में स्थित होता है।

#माया#जीव#आत्मज्ञान
श्रीमद्भागवत

सूक्ष्म शरीर और जीव का संबंध क्या है?

स्थूल रूप से परे सूक्ष्म शरीर बताया गया है; आत्मा का उसमें आरोप या प्रवेश होने से वही जीव कहलाता है और उसका पुनर्जन्म होता है।

#सूक्ष्म शरीर#जीव#पुनर्जन्म
श्रीमद्भागवत

भगवान के स्थूल रूप का मतलब क्या है?

भगवान का स्थूल जगदाकार रूप उनकी माया के महत्तत्त्व आदि गुणों से उनमें कल्पित बताया गया है; वह उनका वास्तविक प्राकृत रूप नहीं है।

#स्थूल रूप#जगदाकार रूप#माया
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भगवान की जन्म कथा पढ़ने का फल क्या है?

जो मनुष्य भगवान के दिव्य जन्म की कथा को नियमपूर्वक सुबह-शाम प्रेम से पढ़ता है, वह दुखों से छूट जाता है।

#भगवान जन्म कथा#पाठ फल#दुख मुक्ति
श्रीमद्भागवत

क्या भगवान के अवतार अनगिनत हैं?

हाँ, भगवान हरि के अवतार असंख्य बताए गए हैं, जैसे विशाल सरोवर से हजारों धाराएँ निकलती हैं।

#असंख्य अवतार#हरि#भगवान
श्रीमद्भागवत

कृष्ण को स्वयं भगवान क्यों कहा गया है?

कहा गया है कि अन्य अवतार अंश या कला हैं, पर भगवान श्रीकृष्ण स्वयं भगवान हैं।

#कृष्ण#स्वयं भगवान#अंशावतार
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कल्कि अवतार कब होगा?

कलियुग के अंत के समीप, जब राजा प्रायः लुटेरे हो जाएँगे, तब भगवान विष्णुयश ब्राह्मण के घर कल्कि रूप में अवतीर्ण होंगे।

#कल्कि अवतार#कलियुग#विष्णुयश
श्रीमद्भागवत

बुद्ध अवतार का उद्देश्य क्या बताया गया है?

बुद्ध अवतार कलियुग में मगध देश में देवताओं से द्वेष रखने वाले दैत्यों को मोहित करने के लिए बताया गया है।

#बुद्ध अवतार#कलियुग#मगध
श्रीमद्भागवत

बलराम और कृष्ण अवतार का उद्देश्य क्या था?

बलराम और कृष्ण यदुवंश में प्रकट हुए और उन्होंने पृथ्वी का भार उतारा।

#बलराम#कृष्ण#यदुवंश
श्रीमद्भागवत

राम अवतार में भगवान ने क्या किया?

राम अवतार में भगवान ने देवताओं का कार्य पूरा करने के लिए सेतुबंधन और रावण वध आदि वीरतापूर्ण लीलाएँ कीं।

#राम अवतार#सेतु बंधन#रावण वध
श्रीमद्भागवत

व्यास अवतार ने वेदों को क्यों बाँटा?

व्यास अवतार में भगवान ने लोगों की समझ और धारणाशक्ति कम देखकर वेद रूप वृक्ष की कई शाखाएँ बना दीं।

#व्यास अवतार#वेद#सत्यवती
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परशुराम अवतार क्यों हुआ?

परशुराम अवतार तब हुआ जब राजाओं को ब्राह्मणों का द्रोही देखकर भगवान ने क्रोध में पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रिय-विहीन किया।

#परशुराम अवतार#क्षत्रिय#ब्राह्मण
श्रीमद्भागवत

वामन अवतार ने राजा बलि से क्या माँगा?

वामन अवतार में भगवान राजा बलि के यज्ञ में गए और केवल तीन पग भूमि माँगी।

#वामन अवतार#राजा बलि#तीन पग भूमि
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नरसिंह अवतार ने हिरण्यकशिपु को कैसे मारा?

नरसिंह अवतार में भगवान ने अत्यंत बलवान हिरण्यकशिपु की छाती अपने नखों से फाड़ दी।

#नरसिंह अवतार#हिरण्यकशिपु#भगवान
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धन्वंतरि और मोहिनी अवतार में क्या हुआ?

धन्वंतरि रूप में भगवान अमृत लेकर प्रकट हुए और मोहिनी रूप में दैत्यों को मोहित करके देवताओं को अमृत पिलाया।

#धन्वंतरि#मोहिनी#अमृत
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