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श्रीमद् भागवत(464)

श्रीमद् भागवत पर शास्त्रीय व्याख्या, कथा, अर्थ, शिक्षाएँ और प्रश्नोत्तर — कुल 464 प्रश्न उपलब्ध हैं।

श्रीमद्भागवत

युधिष्ठिर ने कृष्ण को क्यों रोका?

युधिष्ठिर ने कृष्ण को प्रेम से रोका, क्योंकि वे अपने भाई-बंधुओं की मृत्यु के भारी शोक से मुक्त नहीं हो पा रहे थे।

#युधिष्ठिर#कृष्ण#महाभारत युद्ध
श्रीमद्भागवत

कृष्ण द्वारका क्यों लौटना चाहते थे?

राज्य-संबंधी कार्य पूरे होने के बाद कृष्ण ने द्वारका जाने का विचार किया; उनके भीतर का अलग कारण विस्तार से नहीं बताया गया।

#कृष्ण#द्वारका#पांडव
श्रीमद्भागवत

युधिष्ठिर ने अश्वमेध यज्ञ क्यों किए?

कृष्ण ने युधिष्ठिर से तीन अश्वमेध यज्ञ कराए, जिससे उनका पवित्र यश इंद्र के यश की तरह सब ओर फैल गया।

#युधिष्ठिर#अश्वमेध यज्ञ#कृष्ण
श्रीमद्भागवत

युधिष्ठिर को राज्य वापस कैसे मिला?

कृष्ण ने युधिष्ठिर को वह राज्य वापस दिलाया जिसे छल से छीन लिया गया था और द्रौपदी का अपमान करने वाले राजाओं का वध कराया।

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श्रीमद्भागवत

कृष्ण ने युद्ध के बाद पांडवों को कैसे संभाला?

कृष्ण ने शोकाकुल लोगों को काल की गति समझाकर सांत्वना दी, युधिष्ठिर को राज्य दिलाया और उनके यश के लिए तीन अश्वमेध यज्ञ कराए।

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श्रीमद्भागवत

पांडवों ने गंगा में तर्पण क्यों किया?

पांडवों ने युद्ध में मरे हुए अपने स्वजनों को जलांजलि देने और उनका स्मरण करने के लिए गंगा में तर्पण किया।

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श्रीमद्भागवत

महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने क्या किया?

युद्ध के बाद पांडव कृष्ण के साथ गंगा तट गए, मरे हुए स्वजनों को जलांजलि दी, विलाप किया और गंगाजल में स्नान किया।

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श्रीमद्भागवत

पांडव वंश को बचाने की कथा क्या है?

पांडव वंश को कृष्ण ने बचाया; उन्होंने अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से उत्तरा के गर्भ की रक्षा की।

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श्रीमद्भागवत

अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र और परीक्षित की कथा क्या है?

अश्वत्थामा ने पांडव वंश मिटाने के लिए ब्रह्मास्त्र छोड़ा, लेकिन कृष्ण ने उत्तरा के गर्भ में परीक्षित की रक्षा कर दी।

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श्रीमद्भागवत

कृष्ण ने परीक्षित को गर्भ में कैसे बचाया?

कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से भक्तों की रक्षा की और उत्तरा के गर्भ को अपनी माया के कवच से ढककर परीक्षित को बचाया।

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श्रीमद्भागवत

परीक्षित गर्भ में कैसे बचे?

परीक्षित कृष्ण की कृपा से बचे; कृष्ण ने उत्तरा के गर्भ को अपनी माया के कवच से ढक दिया और ब्रह्मास्त्र शांत हो गया।

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श्रीमद्भागवत

परीक्षित की जन्म कथा क्या है?

परीक्षित की पूरी जन्म-घटना नहीं, बल्कि जन्म से पहले गर्भ में उनकी रक्षा की कथा आती है।

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श्रीमद्भागवत

परीक्षित कौन थे?

परीक्षित उत्तरा के गर्भ में वह बालक थे जिनकी रक्षा कृष्ण ने अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से की, ताकि पांडव वंश बना रहे।

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श्रीमद्भागवत

पांडवों ने युद्ध के बाद अंतिम संस्कार कैसे किया?

अश्वत्थामा को दंड देने के बाद पांडवों ने कृष्णा द्रौपदी के साथ मृत भाई-बंधुओं की दाह आदि अंतिम क्रियाएँ कीं।

#पांडव#अंतिम संस्कार#द्रौपदी पुत्र
श्रीमद्भागवत

द्रौपदी और अश्वत्थामा की कथा क्या है?

अश्वत्थामा ने द्रौपदी के पुत्रों को मारा, पर बँधा हुआ लाए जाने पर द्रौपदी ने गुरु-पुत्र और ब्राह्मण समझकर उसे छोड़ने को कहा।

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श्रीमद्भागवत

कृष्ण ने अश्वत्थामा को क्या दंड दिलाया?

कृष्ण ने अर्जुन से आततायी को दंड देने और पतित ब्राह्मण का वध न करने, दोनों आदेश निभाने को कहा; अंत में अश्वत्थामा की मणि छीनकर उसे निकाल दिया गया।

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श्रीमद्भागवत

ब्राह्मण को मृत्युदंड क्यों नहीं दिया गया?

अश्वत्थामा गुरु-पुत्र और ब्राह्मण था; इसलिए शारीरिक वध के स्थान पर मणि छीनना, सिर मूँड़ना और निकाल देना दंड माना गया।

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श्रीमद्भागवत

आततायी का मतलब क्या है?

आततायी वह है जो घोर हिंसक अपराध करे; टिप्पणी में आग लगाने वाला, विष देने वाला, हथियार लेकर हमला करने वाला आदि छह प्रकार बताए गए हैं।

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श्रीमद्भागवत

अश्वत्थामा की मणि क्यों निकाली गई?

अश्वत्थामा की मणि दंड के रूप में निकाली गई, जिससे उसका तेज छिन गया और अर्जुन की प्रतिज्ञा भी पूरी हुई।

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श्रीमद्भागवत

अश्वत्थामा को क्या सजा मिली?

अश्वत्थामा की मणि बालों सहित काट ली गई, उसका तेज छिन गया, बंधन खोलकर उसे शिविर से बाहर निकाल दिया गया।

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श्रीमद्भागवत

अश्वत्थामा को कैसे पकड़ा गया?

अर्जुन ने कृष्ण को सारथि बनाकर अश्वत्थामा का पीछा किया, ब्रह्मास्त्र का संकट शांत किया और फिर उसे पशु की तरह बाँध लिया।

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श्रीमद्भागवत

कृष्ण ने अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र के बारे में क्या कहा?

कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि यह अश्वत्थामा का ब्रह्मास्त्र है; वह इसे लौटाना नहीं जानता और इसका निवारण ब्रह्मास्त्र से ही होगा।

#कृष्ण#अश्वत्थामा#ब्रह्मास्त्र
श्रीमद्भागवत

अर्जुन और अश्वत्थामा की ब्रह्मास्त्र कथा क्या है?

अश्वत्थामा ने भय में ब्रह्मास्त्र चलाया; कृष्ण के कहने पर अर्जुन ने ब्रह्मास्त्र से उसका निवारण किया और फिर अश्वत्थामा को बाँध लिया।

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श्रीमद्भागवत

अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र वापस क्यों नहीं ले पाया?

श्रीमद्भागवत के अनुसार अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र तो चला दिया, लेकिन उसे लौटाने की विधि वह नहीं जानता था।

#अश्वत्थामा#ब्रह्मास्त्र#कृष्ण
श्रीमद्भागवत

अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र क्यों चलाया?

अश्वत्थामा ने अर्जुन को अपनी ओर आते देखा, अपने को असहाय पाया और प्राण बचाने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया।

#अश्वत्थामा#ब्रह्मास्त्र#अर्जुन
श्रीमद्भागवत

अश्वत्थामा का ब्रह्मास्त्र क्या था?

अश्वत्थामा का ब्रह्मास्त्र ऐसा प्रचंड अस्त्र बताया गया है जिसका तेज सब दिशाओं में फैल गया और जिसे वह लौटाना नहीं जानता था।

#अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र#ब्रह्मास्त्र#कृष्ण
श्रीमद्भागवत

द्रौपदी के पुत्रों की हत्या कैसे हुई?

द्रौपदी के पुत्र सो रहे थे; अश्वत्थामा ने उनके सिर काटकर दुर्योधन को भेंट किए।

#द्रौपदी पुत्र#हत्या#अश्वत्थामा
श्रीमद्भागवत

द्रौपदी के पांच पुत्रों को किसने मारा?

द्रौपदी के पांच पुत्रों को द्रोणपुत्र अश्वत्थामा ने सोते समय मार डाला।

#द्रौपदी पुत्र#अश्वत्थामा#उपपांडव
श्रीमद्भागवत

अश्वत्थामा ने द्रौपदी के पुत्रों को क्यों मारा?

अश्वत्थामा ने दुर्योधन का प्रिय कार्य समझकर द्रौपदी के सोते हुए पुत्रों को मारा, पर यह कर्म दुर्योधन को भी अप्रिय लगा।

#अश्वत्थामा#द्रौपदी पुत्र#दुर्योधन
श्रीमद्भागवत

अश्वत्थामा की कथा क्या है?

अश्वत्थामा ने द्रौपदी के सोए हुए पुत्रों की हत्या की, ब्रह्मास्त्र चलाया, अर्जुन ने उसे पकड़ा और अंत में उसकी मणि निकालकर उसे शिविर से बाहर किया गया।

#अश्वत्थामा#द्रौपदी पुत्र#ब्रह्मास्त्र
श्रीमद्भागवत

भागवत से शोक मोह भय कैसे मिटते हैं?

भागवत में बताया गया भक्ति-योग जीव को माया से उत्पन्न भ्रम से हटाता है, इसलिए शोक, मोह और भय मिटते हैं।

#शोक मोह भय#भागवत#भक्ति योग
श्रीमद्भागवत

भागवत सुनने से क्या लाभ होता है?

श्रीमद्भागवत सुनने से श्रीकृष्ण के प्रति प्रेममयी भक्ति उत्पन्न होती है और शोक, मोह तथा भय दूर होते हैं।

#भागवत श्रवण#भक्ति#शोक मोह भय
श्रीमद्भागवत

शुकदेव जी ने भागवत क्यों सीखी?

शुकदेवजी आत्माराम और निवृत्तिपरायण थे, फिर भी भगवान हरि के गुण इतने मधुर हैं कि उन्होंने भागवत का अध्ययन किया।

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श्रीमद्भागवत

वेदव्यास ने भागवत किसे सुनाई?

वेदव्यासजी ने श्रीमद्भागवत संहिता अपने निवृत्तिपरायण पुत्र शुकदेवजी को पढ़ाई।

#वेदव्यास#शुकदेव#भागवत संहिता
श्रीमद्भागवत

श्रीमद्भागवत की रचना कैसे हुई?

व्यासजी ने भक्ति-योग से परमात्मा और उनकी माया को देखा, जीवों के अनर्थ का उपाय समझा और श्रीमद्भागवत की रचना की।

#श्रीमद्भागवत#वेदव्यास#भक्ति योग
श्रीमद्भागवत

संसार के दुखों का असली उपाय क्या है?

नारदजी के अनुसार समस्त कर्म भगवान को अर्पित करना, कृष्ण सेवा और हरि लीला का वर्णन संसार-दुख की औषधि है।

#संसार दुख#तीन ताप#कृष्ण सेवा
श्रीमद्भागवत

चतुर्व्यूह भगवान कौन हैं?

नारदजी के मंत्र में वासुदेव, प्रद्युम्न, अनिरुद्ध और संकर्षण चार नाम चतुर्व्यूह रूप से जुड़े हैं।

#चतुर्व्यूह#वासुदेव#प्रद्युम्न
श्रीमद्भागवत

नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र किसके लिए है?

यह मंत्र वासुदेव, प्रद्युम्न, अनिरुद्ध और संकर्षण रूप भगवान के ध्यान और नमस्कार से जुड़ा है।

#नमो भगवते वासुदेवाय#वासुदेव#चतुर्व्यूह
श्रीमद्भागवत

भक्ति योग वाला ज्ञान क्या है?

भगवान की प्रसन्नता के लिए किए गए कर्मों से जो ज्ञान मिलता है, वह भक्ति योग से संयुक्त ज्ञान बताया गया है।

#भक्ति योग#ज्ञान#भगवान की प्रसन्नता
श्रीमद्भागवत

भगवान की माया को कैसे समझें?

नारदजी को संतों की कृपा से गुप्त ज्ञान मिला, जिससे वे भगवान की माया का प्रभाव समझ सके।

#भगवान की माया#ज्ञान#नारद
श्रीमद्भागवत

रजोगुण और तमोगुण कैसे दूर होते हैं?

हरि के निर्मल यश का श्रद्धापूर्वक श्रवण करने से भक्ति प्रकट हुई, जिसने नारदजी के रजोगुण और तमोगुण को हटाया।

#रजोगुण#तमोगुण#भक्ति
श्रीमद्भागवत

कृष्ण कथा सुनते-सुनते भक्ति कैसे बढ़ती है?

नारदजी ने श्रद्धा से कृष्ण कथा सुनी; पद-पद सुनते हुए भगवान में रुचि हुई और भक्ति प्रकट होकर रज-तम को हटाने लगी।

#कृष्ण कथा#भक्ति वृद्धि#श्रवण
श्रीमद्भागवत

सत्संग से भक्ति कैसे पैदा होती है?

सत्संग में सेवा, प्रसाद, कृष्ण कथा और श्रद्धापूर्वक श्रवण से नारदजी के हृदय में भक्ति प्रकट हुई।

#सत्संग#भक्ति#कृष्ण कथा
श्रीमद्भागवत

साधुओं की सेवा से मन कैसे शुद्ध होता है?

साधुओं की सेवा से नारदजी का चित्त शुद्ध हुआ, पाप नष्ट हुए और कृष्ण कथा में उनकी रुचि जागी।

#साधु सेवा#मन शुद्धि#नारद
श्रीमद्भागवत

प्रसाद खाने से पाप मिटते हैं?

नारदजी बताते हैं कि संतों की अनुमति से पात्रों में लगा प्रसाद एक बार खाने से उनके पाप धुल गए।

#प्रसाद#पाप नाश#नारद पूर्वचरित्र
श्रीमद्भागवत

तपस्या और दान का असली फल क्या है?

तपस्या और दान का असली फल श्रीकृष्ण के गुण और लीला का वर्णन करना बताया गया है।

#तपस्या#दान#कृष्ण गुण
श्रीमद्भागवत

वेद पढ़ने का अंतिम उद्देश्य क्या है?

नारदजी कहते हैं कि तपस्या, वेदाध्ययन, यज्ञ, स्वाध्याय, ज्ञान और दान का अविचल उद्देश्य कृष्ण के गुणों का वर्णन है।

#वेद#वेदाध्ययन#कृष्ण गुण
श्रीमद्भागवत

दुखी मन को शांति कैसे मिले?

नारदजी के अनुसार दुखी मन को भगवान की कथा, कृष्ण सेवा और भगवान को समर्पित कर्म से वास्तविक शांति मिलती है।

#मन की शांति#दुख#कृष्ण सेवा
श्रीमद्भागवत

भगवान की लीला सुनने से दुख कैसे मिटता है?

नारदजी कहते हैं कि हरि लीला का वर्णन दुखी लोगों के लिए संसार-सागर पार करने की नौका और शांति का उपाय है।

#भगवान की लीला#दुख#हरि कथा
श्रीमद्भागवत

दुनियावी सुख के पीछे भागना क्यों ठीक नहीं?

नारदजी कहते हैं कि विषय-सुख कर्मफल से अपने आप मिलते हैं, जैसे दुख मिल जाता है; बुद्धिमान को परम लक्ष्य के लिए प्रयत्न करना चाहिए।

#दुनियावी सुख#वैराग्य#कर्मफल
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