कार्तिकेय कथाकार्तिकेय को षष्ठी को क्यों पूजा जाता है?कार्तिकेय को षष्ठी को इसलिए पूजा जाता है क्योंकि पुराणों के अनुसार उनका जन्म षष्ठी तिथि को हुआ था। उनकी पत्नी देवसेना को 'षष्ठी माता' भी कहते हैं। दक्षिण भारत में स्कंद षष्ठी इस कारण विशेष पर्व है।#कार्तिकेय षष्ठी#छठ पूजा#स्कंद षष्ठी
कार्तिकेय कथाछह कृत्तिकाओं ने कार्तिकेय को दूध कैसे पिलाया?शरवण वन में प्रकट हुए छह शिशुओं का रुदन सुनकर कृत्तिका नक्षत्र की छह देवियाँ आईं। उनके मन में मातृत्व भाव जागा और उन्होंने एक-एक बालक को अपने स्तन से दूध पिलाया। इसीलिए कार्तिकेय, कृत्तिका-पुत्र 'कार्तिकेय' कहलाए।#कृत्तिकाएं#कार्तिकेय स्तनपान#षण्मुख
कार्तिकेय कथाकार्तिकेय को मुरुगन और सुब्रमण्यम किस क्षेत्र में कहते हैं?कार्तिकेय को 'मुरुगन' और 'सुब्रमण्यम' दक्षिण भारत में — विशेषतः तमिलनाडु में — कहा जाता है। तमिल परंपरा में मुरुगन सर्वाधिक लोकप्रिय देवता हैं और 'तमिल कडवुल' (तमिलों के देवता) कहे जाते हैं।#मुरुगन#सुब्रमण्यम#दक्षिण भारत
दिव्यास्त्रस्कंद पुराण में कार्तिकेय के अस्त्रों का क्या वर्णन हैस्कंद पुराण में कार्तिकेय का मुख्य अस्त्र वेल (माता-प्रदत्त भाला) है। जन्म से ही उनके हाथ में दिव्य शस्त्र थे। वेल से तारकासुर-वध और सुरपदम का पहाड़-रूप तोड़ा। वे देव-सेनापति हैं।#स्कंद पुराण#कार्तिकेय अस्त्र#वेल
दिव्यास्त्रकार्तिकेय को वेल किसने दिया थाकार्तिकेय को वेल उनकी माता पार्वती ने दिया था। स्कंद पुराण में वर्णित है — 'माँ पार्वती द्वारा दी गई शक्तियों से परिपूर्ण अस्त्र का नाम वेल है।' यह तारकासुर-वध के लिए था।#वेल दाता#माता पार्वती#कार्तिकेय
दिव्यास्त्रवेल शक्ति क्या हैवेल कार्तिकेय का दिव्य भाला है — कुण्डलिनी शक्ति और अज्ञान-नाश का प्रतीक। माता पार्वती की शक्ति से परिपूर्ण यह अचूक अस्त्र था जिससे तारकासुर का वध हुआ।#वेल#कार्तिकेय भाला#कुण्डलिनी शक्ति
दिव्यास्त्रकार्तिकेय के अस्त्र का नाम क्या हैकार्तिकेय का प्रमुख अस्त्र 'वेल' है — एक दिव्य भाला जो कुण्डलिनी शक्ति का प्रतीक है। इसी से तारकासुर-वध हुआ और सुरपदम को दो भागों में तोड़ा — एक मोर बना, दूसरा मुर्गा।#कार्तिकेय#वेल#भाला
कार्तिकेय कथाकार्तिकेय को छह सिर क्यों हैं?कार्तिकेय को छह सिर इसलिए हैं क्योंकि उनका दिव्य तेज गंगाजल में बहकर छह भागों में विभाजित हो गया था और छह शिशुओं के रूप में प्रकट हुआ। माता पार्वती ने छहों को एक करके षड्मुख पुत्र प्राप्त किया।#कार्तिकेय षड्मुख#छह सिर#शरवण वन
कार्तिकेय कथातारकासुर के वध के लिए शिव-पुत्र की जरूरत क्यों थी?तारकासुर ने ब्रह्मा से यह वरदान लिया था कि उसका वध केवल शिव-पुत्र से होगा। उसने यह सोचकर यह माँगा था कि संन्यासी शिव का पुत्र कभी नहीं होगा। इस वरदान को पूरा करने के लिए ही कार्तिकेय का जन्म आवश्यक था।#तारकासुर वरदान#शिव पुत्र#तारकासुर वध
शिव पूजा विधिशिव परिवार की पूजा कैसे करें और इसका क्या लाभ है?शिवलिंग = पूरे परिवार का प्रतीक। क्रम: गणेश→पार्वती→कार्तिकेय→शिव→नंदी। लाभ: पारिवारिक एकता, बुद्धि (गणेश), सौभाग्य (पार्वती), साहस (कार्तिकेय), कल्याण (शिव)। संतान सुख। शिक्षा: विरोधी वाहन फिर भी एकसाथ = एकता।#शिव परिवार#पार्वती#गणेश
दोष निवारणचोरी हुई चीज वापस पाने का मंत्रचोरी हुई या खोई वस्तु को पुनः प्राप्त करने के लिए मंगलवार को लाल आसन पर बैठकर भगवान कार्तिकेय के मंत्र 'ॐ शरवणभवाय नमः' या राहु के बीज मंत्र का जप करना चाहिए।#खोई वस्तु#कार्तिकेय#राहु
मंत्र साधनाखोया हुआ धन वापस पाने का मंत्रफंसा हुआ या खोया धन वापस पाने के लिए मंगलवार को भगवान कार्तिकेय के मंत्र 'ॐ शरवणभवाय नमः' का लाल चंदन की माला से जप करना अत्यंत प्रभावशाली है।#खोया धन#कार्तिकेय#हनुमान
रुद्राक्षछह मुखी रुद्राक्ष — कार्तिकेय संबंध?6 मुखी=कार्तिकेय(षण्मुख/सेनापति)। विजय, इच्छाशक्ति, यौन स्वास्थ्य। लाल धागा, मंगलवार।#6 मुखी#कार्तिकेय
कार्तिकेय कथाशिव का वीर्य जो अग्नि में पड़ा उससे कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ?शिव का दिव्य तेज अग्निदेव ने ग्रहण किया, फिर गंगा को सौंपा। गंगाजल में बहकर वह छह भागों में विभाजित होकर शरवण वन में छह शिशुओं के रूप में प्रकट हुआ। कृत्तिकाओं ने उन्हें दूध पिलाया और पार्वती ने छहों को एक करके षड्मुख कार्तिकेय को प्राप्त किया।#कार्तिकेय जन्म#शिव तेज#अग्निदेव
कार्तिकेय कथाकार्तिकेय का जन्म क्यों हुआ था?कार्तिकेय का जन्म तारकासुर के वध के लिए हुआ था। तारकासुर को यह वरदान था कि उसका वध केवल शिव-पुत्र से ही होगा। तीनों लोकों में उसके अत्याचार से त्रस्त देवताओं की रक्षा के लिए कार्तिकेय का अवतरण हुआ।#कार्तिकेय जन्म#तारकासुर#शिव पुत्र
लोकतारकासुर कौन था?तारकासुर वह असुर था जिसका वध कार्तिकेय ने किया और जिसके पुत्र त्रिपुरासुर कहलाए।#तारकासुर#स्कंद#कार्तिकेय
लोकस्कंद पुराण में वैराज देवगणों की क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?स्कंद पुराण में वैराज देवगण तृष्णा-मुक्त, निवृत्ति मार्गी, वासुदेव-समर्पित और ब्रह्म-ध्यान में लीन बताए गए हैं।#स्कंद पुराण#वैराज#तृष्णा
अवतार की कथाभगवान स्कंद (कार्तिकेय) का जन्म कैसे हुआ?कार्तिकेय जन्म: सामान्य तरीके से नहीं। भगवान शिव के तेज से → अग्निदेव और गंगाजी के माध्यम से → छह कृत्तिका नक्षत्रों (स्त्रियों) ने धारण किया → पार्वती ने छह बच्चों को एकाकार करके स्कंद को गोद में लिया।#कार्तिकेय जन्म#शिव तेज#अग्निदेव गंगा
नवरात्रि और उपासनास्कंद पुराण के अनुसार विभिन्न आयु की कन्याएं किस देवी का स्वरूप हैं?स्कंद पुराण: 2 वर्ष = कुमारिका (दुख नाश); 3 = त्रिमूर्ति (धर्म-अर्थ-काम); 4 = कल्याणी (सुख-शांति); 5 = रोहिणी (स्वास्थ्य); 6 = कालिका (शत्रु नाश); 7 = चंडिका (ऐश्वर्य); 8 = शाम्भवी (विजय-लोकप्रियता); 9 = दुर्गा (संकट निवारण); 10 = भद्रा/सुभद्रा (मनोकामना पूर्ति)।#कन्या आयु देवी#स्कंद पुराण#2 से 10 वर्ष
दिव्य स्वरूप और प्रतीकस्कंद पुराण में सिंह वाहन की प्राप्ति की कथा क्या है?स्कंद पुराण: कार्तिकेय ने तारकासुर के भाई 'सिंहमुखम' को परास्त किया → सिंहमुखम ने क्षमा माँगी → कार्तिकेय ने उसे विशाल सिंह का रूप दिया और माता दुर्गा का स्थायी वाहन बनने का आशीर्वाद दिया। मार्कण्डेय पुराण: हिमालय ने भी देवी को सिंह प्रदान किया।#सिंहमुखम#कार्तिकेय#तारकासुर
दुर्गा शब्द की व्युत्पत्तिस्कंद पुराण के अनुसार 'दुर्गा' नाम कैसे पड़ा?स्कंद पुराण (काशी खंड, 71वाँ अध्याय): दुर्गमासुर ने वेद चुराए → देवताओं की शक्ति क्षीण → आद्याशक्ति का आह्वान → देवी पार्वती ने महाभयंकर रूप धारण कर दुर्गमासुर का वध किया → देवताओं-ऋषियों ने घोषणा: यह रौद्र रूप 'दुर्गा' कहलाएगा।#दुर्गमासुर#स्कंद पुराण#नामकरण
परिवार और सती-पार्वतीकार्तिकेय किसके प्रतीक हैं?कार्तिकेय (षडानन) = शिव के दिव्य तेज से तारकासुर वध के लिए उत्पन्न। वे शौर्य, शक्ति, अनुशासन और देवताओं के सेनापतित्व के प्रतीक हैं।#कार्तिकेय#शौर्य शक्ति#तारकासुर
कार्तिकेय और गणेश जन्मब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?ब्रह्मवैवर्त पुराण: पार्वती का 'पुण्यक व्रत' → विष्णु शिशु रूप में अवतरित → शनि की दृष्टि से मस्तक भस्म → विष्णु गरुड़ पर गजराज का मस्तक लाए।#गणेश जन्म#ब्रह्मवैवर्त पुराण#पुण्यक व्रत
कार्तिकेय और गणेश जन्मलिंग पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?लिंग पुराण: देवताओं ने दैत्यों के यज्ञों में विघ्न के लिए प्रार्थना की → शिव ने स्वयं दिव्य गजमुख स्वरूप प्रकट किया (हाथ में त्रिशूल और पाश) → विघ्नहर्ता और विघ्नकर्ता दोनों उपाधि दी।#गणेश जन्म#लिंग पुराण#विघ्नहर्ता
कार्तिकेय और गणेश जन्मपद्म पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?पद्म पुराण: पार्वती ने उबटन से हाथी मुख वाली प्रतिमा बनाई → गंगा जल में प्रवाहित किया → विशालकाय देवपुरुष (गांगेय) बन गया → ब्रह्मा जी ने 'गणेश' नाम दिया।#गणेश जन्म#पद्म पुराण#गंगा जल
कार्तिकेय और गणेश जन्मशिव पुराण के अनुसार गणेश का जन्म कैसे हुआ?शिव पुराण: पार्वती ने उबटन से बालक बनाया → शिव रोके गए → शिव ने मस्तक काटा → पार्वती का क्रोध → नंदी हाथी का सिर लाए → शिव ने जोड़कर जीवित किया और 'गणपति' नाम दिया। हाथी मस्तक = परम ज्ञान, पूर्व मस्तक = अहंकार नाश।#गणेश जन्म#शिव पुराण#उबटन
कार्तिकेय और गणेश जन्मभगवान कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ?शिव-पार्वती के मिलन का तेज → अग्नि ने धारण किया → गंगा में प्रवाहित → शरवण वन में 6 बालक → कृत्तिका कन्याओं ने पालन किया → पार्वती के आलिंगन से 6 बालक मिलकर षडानन (कार्तिकेय) बने → तारकासुर वध।#कार्तिकेय जन्म#षडानन#कृत्तिका
स्कंद पुराण: वाडवाग्नि कथासरस्वती ने वाडवाग्नि से विश्व की रक्षा कैसे की?शिव परामर्श: केवल सरस्वती ही इसे धारण कर सकती हैं। ब्रह्मा की आज्ञा से सरस्वती ने कुंवारी कन्या का रूप लिया, स्वर्ण पात्र में अग्नि रखी, नदी रूप में प्रकट हुईं और पश्चिम बहते हुए पुष्कर से होते हुए महासागर में अग्नि विसर्जित कर दी।#वाडवाग्नि रक्षा#नदी रूप#महासागर
स्कंद पुराण: वाडवाग्नि कथावाडवाग्नि क्या है?वाडवाग्नि = भृगुवंशियों और हैहय वंशियों के भयंकर युद्ध और महर्षि और्व के प्रचंड क्रोध से उत्पन्न सर्वनाशी अग्नि। घोड़े के मुख के समान, ब्रह्मांड को भस्म करने की क्षमता। अभी भी समुद्र में लघु रूप में विद्यमान।#वाडवाग्नि#बड़वाग्नि#प्रलयंकारी अग्नि
अष्टलक्ष्मीसंतानलक्ष्मी का क्या स्वरूप है?संतानलक्ष्मी = सुयोग्य संतान की प्राप्ति, संतान की रक्षा और परिवार संस्था को अक्षुण्ण रखने वाली देवी। स्वरूप: गोद में बालक स्कंद (कुमार), छः भुजाएं, बालक के हाथ में कमल।#संतानलक्ष्मी#सुयोग्य संतान#परिवार
नमः शिवाय मंत्र परिचयस्कंद पुराण में नमः शिवाय के बारे में क्या कहा गया है?स्कंद पुराण कहता है: जिसके हृदय में 'नमः शिवाय' मंत्र निवास करता है, उसे अन्य मंत्रों, तीर्थों, तपस्याओं या यज्ञों की कोई आवश्यकता नहीं।#स्कंद पुराण#नमः शिवाय#तीर्थ तपस्या
शास्त्रीय प्रमाण और फलश्रुतिस्कंद पुराण में पारद शिवलिंग के बारे में क्या कहा गया है?स्कंद पुराण कहता है कि हजार करोड़ शिवलिंगों की पूजा का अतुलनीय फल पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से मिल जाता है।#स्कंद पुराण#दर्शन मात्र#हजार करोड़
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग६ मुखी रुद्राक्ष किस देवता का स्वरूप है और इसका मंत्र क्या है?६ मुखी रुद्राक्ष कार्तिकेय स्वरूप है, इसका मंत्र 'ॐ ह्रीं हुं नमः' है और यह आरोग्य तथा ऐश्वर्य प्रदान करता है।#6 मुखी#कार्तिकेय#शुक्र
शिव शाबर मंत्रभंडार भरण मंत्र में शिव परिवार का ध्यान क्यों किया जाता है?शिव परिवार की समग्र ऊर्जा (समृद्धि, बुद्धि, शक्ति) को जीवन में स्थापित करने के लिए उनका ध्यान होता है।#शिव परिवार#गौरा#गणेश
मंत्र और स्तोत्रप्रदोष काल में जपने वाले प्रमुख मंत्र और 'प्रदोष स्तोत्र' (स्कंद पुराण) क्या है?#प्रदोष स्तोत्र#महामृत्युंजय मंत्र#पंचाक्षर मंत्र
उपासना का फलस्कंद पुराण के अनुसार कुक्कुटेश्वर शिवलिंग की पूजा से गर्भ-वास (पुनर्जन्म) से मुक्ति कैसे मिलती है?यह लिंग अण्डाकार है जो सृष्टि के मूल का प्रतीक है। इसकी पूजा से साधक जन्म के रहस्य को जानकर पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाता है और उसे पुनः गर्भ-वास (जन्म) का कष्ट नहीं सहना पड़ता।#पुनर्जन्म मुक्ति#गर्भ-वास मुक्ति#सायुज्य मोक्ष
उपासना का फलस्कंद पुराण के अनुसार पिंगलेश्वर शिवलिंग की पूजा और दान के क्या फायदे (फल) हैं?यहाँ दर्शन से जन्म-जन्मांतर के पाप भस्म होते हैं और पितरों को प्रेत-योनि से मुक्ति मिलती है। यह तारक ज्ञान प्रदान कर जीव को आवागमन के चक्र से मुक्त करता है और शिव-सायुज्य (मोक्ष) देता है।#मोक्ष प्राप्ति#पाप क्षय#पितृ शांति
आध्यात्मिक विज्ञानस्कंद पुराण के अनुसार नंदीशेनेश्वर शिवलिंग किस भाव को जाग्रत करता है?यह शिवलिंग साधक के भीतर 'वीर-भाव' (आंतरिक वीरता और निर्भयता), अजेय मानसिक बल और भगवान शिव के प्रति पूर्ण समर्पण के भाव को जाग्रत करता है।#वीर भाव#निर्भयता#पूर्ण समर्पण
उपासना का फलस्कंद पुराण के अनुसार नंदीवन स्थित सोमानंदीश्वर लिंग के दर्शन और आराधना का क्या फल प्राप्त होता है?स्कंद पुराण के अनुसार इसके दर्शन और आराधना से 'सौ गायों के दान' (शत-गोदान) के समान पुण्य प्राप्त होता है। साधक लौकिक सुख भोगकर अंततः सोमलोक (चंद्रलोक) के सर्वोच्च आनंद को प्राप्त करता है।#सोमलोक की प्राप्ति#उपासना का फल#शत गोदान
उपासना का फलस्कंद पुराण के अनुसार महोदरेश्वर शिवलिंग के दर्शन और साधना का अंतिम फल (मोक्ष) क्या है?स्कंद पुराण (काशी खण्ड) के अनुसार जो साधक महोदरेश्वर के दर्शन और साधना करता है, वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है और उसे पुनः किसी माता के गर्भ में प्रवेश नहीं करना पड़ता (सायुज्य मुक्ति)।#मोक्ष प्राप्ति#स्कंद पुराण फल-श्रुति#सायुज्य मुक्ति
काशी के तीर्थघंटाकर्ण हृद में स्नान और दर्शन की फलश्रुति — स्कंद पुराणतीन फलश्रुतियाँ — (१) जन्म-मृत्यु चक्र से मुक्ति, (२) कहीं भी मरने पर काशी-मरण का पुण्य, (३) सात पीढ़ियों के नरकवासी पितरों का उद्धार। पितर स्वयं कामना करते हैं कि कोई इस तीर्थ से तिलांजलि अर्पित करे।#घंटाकर्ण हृद#फलश्रुति#मोक्ष
पुराण ज्ञानस्कंद पुराण सबसे बड़ा पुराण क्यों है?स्कन्द पुराण में ८१,१०० श्लोक हैं — किसी अन्य पुराण से अधिक, इसीलिए यह सबसे बड़ा है। इसमें ६ खण्ड हैं। काशी, जगन्नाथ, महाकाल, रामेश्वर जैसे तीर्थों की महिमा, नदियों की उद्गम-कथाएँ, सत्यनारायण व्रत और शिवरात्रि का वर्णन है।#स्कंद पुराण#सबसे बड़ा पुराण#कार्तिकेय
कार्तिकेय कथाकार्तिकेय को स्कंद क्यों कहते हैं?कार्तिकेय को 'स्कंद' इसलिए कहते हैं क्योंकि उनका जन्म शिव-तेज के गंगाजल में स्खलित होने से शरवण वन में हुआ। 'स्कंद' का अर्थ है स्खलित होकर प्रकट होने वाला। शत्रु-सेना को छिन्न करने वाले योद्धा के अर्थ में भी यह नाम सार्थक है।#स्कंद#कार्तिकेय#स्कंद अर्थ
कार्तिकेय कथाकार्तिकेय को देवताओं का सेनापति किसने बनाया?कार्तिकेय को तारकासुर के वध के बाद समस्त देवताओं ने — इंद्र के नेतृत्व में — देवताओं का सेनापति बनाया। उनका नाम 'महासेन' भी है जिसका अर्थ महान् सेना का स्वामी है।#कार्तिकेय सेनापति#देव सेनापति#तारकासुर वध
कार्तिकेय कथाकार्तिकेय का पालन-पोषण किसने किया था?कार्तिकेय का पालन-पोषण मुख्यतः कृत्तिका नक्षत्र की छह देवियों ने किया जिन्होंने उन्हें स्तनपान कराया। इसीलिए वे 'कार्तिकेय' कहलाए। इसके अतिरिक्त गंगा, अग्निदेव और माता पार्वती भी उनकी मातृशक्तियाँ मानी जाती हैं।#कार्तिकेय#कृत्तिकाएं#षण्मुख
गणेश कथागणेश और कार्तिकेय में पृथ्वी परिक्रमा की प्रतिस्पर्धा क्या थी?भगवान शिव ने ब्रह्मांड परिक्रमा की प्रतियोगिता रखी। कार्तिकेय मोर पर निकल पड़े, जबकि गणेश जी ने माता-पिता की सात परिक्रमा कर कहा — 'माता-पिता ही ब्रह्मांड हैं।' इस बुद्धि से गणेश जी प्रथम पूज्य घोषित हुए।#गणेश कार्तिकेय#पृथ्वी परिक्रमा#माता-पिता परिक्रमा