मंत्र का स्वरूप और अर्थ'मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्' का क्या अर्थ है?'मृत्योर्मुक्षीय' = मृत्यु से मुक्त करें; 'मामृतात्' = 'मा' (नहीं) + 'अमृतात्' (अमरत्व से) — अर्थात् मुझे अमरत्व से दूर न करें, मुझे मोक्ष प्रदान करें।#मृत्योर्मुक्षीय#मामृतात्#मोक्ष
साधना के फल और सिद्धियाँनमः शिवाय से मोक्ष कैसे मिलता है?नमः शिवाय साधना से शिव की अहैतुकी कृपा मिलती है जिससे साधक शिवलोक प्राप्त करता है, जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होता है और 'शिवत्व' (शिव-चेतना) के साथ एकाकार हो जाता है।#मोक्ष
साधना के फल और सिद्धियाँनमः शिवाय साधना से क्या लाभ होता है?नमः शिवाय से: चित्त शुद्धि और पाप नाश, मानसिक शांति और अभय, सात्विक मनोरथ सिद्धि, वचन सिद्धि और अंततः शिव कृपा से मोक्ष की प्राप्ति।#साधना लाभ#चित्त शुद्धि#मानसिक शांति
नमः शिवाय मंत्र परिचयनमः शिवाय मंत्र की महिमा क्या है?शिव महापुराण: इसकी महिमा सौ करोड़ वर्षों में नहीं कही जा सकती। स्कंद पुराण: जिसके हृदय में यह मंत्र है उसे तीर्थ, तपस्या, यज्ञ की आवश्यकता नहीं। यह वेदों का सारतत्व और मोक्षदायक है।#नमः शिवाय महिमा#शिव महापुराण#लौकिक पारलौकिक
गुरु कृपा और साधना मर्मत्रिपुर भैरवी साधना का सर्वोच्च फल क्या है?त्रिपुर भैरवी साधना का सर्वोच्च फल मोक्ष (परम पुरुषार्थ) है — उनकी कृपा से भोग और मोक्ष दोनों मिलते हैं और शुद्ध श्रद्धा से शरण लेने वाले को वे समस्त भयों से पार लगाती हैं।#सर्वोच्च फल#मोक्ष#परम पुरुषार्थ
सिद्धियाँ और लाभत्रिपुर भैरवी साधना का अंतिम लक्ष्य क्या है?त्रिपुर भैरवी साधना का अंतिम लक्ष्य मोक्ष (परम पुरुषार्थ) है — समस्त दुखों से पूर्ण निवृत्ति और सच्चिदानंद ब्रह्म स्वरूप में स्थित होना। नित्य प्रलय शक्ति अज्ञान-अहंकार-कर्म संस्कार नष्ट करती है।#अंतिम लक्ष्य#मोक्ष#परम पुरुषार्थ
फलश्रुति और लाभचन्द्रशेखराष्टकम् से मोक्ष मिलता है क्या?हाँ — फलश्रुति के अनुसार चन्द्रशेखर 'अयत्नतः' (बिना विशेष परिश्रम के) अंत में मुक्ति प्रदान करते हैं — यह श्रद्धा और सात्त्विक भावना से शरण लेने वाले भक्त का परम फल है।#मोक्ष#अयत्नतः#फलश्रुति
रुद्राभिषेक परिचय और आधारनिष्काम रुद्राभिषेक में कौन से द्रव्य प्रयोग होते हैं?निष्काम रुद्राभिषेक में शुद्ध जल या पंचामृत का प्रयोग होता है — इसमें कोई भौतिक कामना नहीं होती, केवल महादेव की प्रसन्नता और मोक्ष की कामना होती है।#निष्काम अभिषेक#शुद्ध जल#पंचामृत
रुद्राभिषेक परिचय और आधारसकाम और निष्काम रुद्राभिषेक में क्या अंतर है?निष्काम रुद्राभिषेक केवल मोक्ष/प्रसन्नता के लिए शुद्ध जल/पंचामृत से होता है; सकाम में विशिष्ट कामना का संकल्प लेकर विशिष्ट द्रव्य, समय और मंत्रों का प्रयोग अनिवार्य होता है।#सकाम निष्काम#रुद्राभिषेक अंतर#कामना
तीर्थ स्थानकाशी में कालसर्प पूजा का क्या महत्व है?काशी महा-श्मशान है जहाँ मृत्यु पर विजय (मोक्ष) मिलती है — कालसर्प योग का सबसे बड़ा लक्षण मृत्यु-भय है इसलिए काशी में पूजा अत्यंत प्रभावी है।#काशी#वाराणसी#महाश्मशान
फलश्रुति और लाभनीलकंठ स्तोत्र पाठ से मृत्यु के बाद क्या होता है?नीलकंठ स्तोत्र का सर्वोच्च फल है 'शिवलोकं स गच्छति' — भक्तिपूर्वक पाठ करने वाला साधक मृत्यु के पश्चात शिवलोक को प्राप्त होता है।#शिवलोक#मोक्ष#मृत्यु के बाद
फलश्रुति और लाभनीलकंठ स्तोत्र से कौन सी सिद्धियाँ मिलती हैं?नीलकंठ स्तोत्र से सर्व रोग नाश, विष नाश, भूत-प्रेत से मुक्ति, ग्रह दोष निवारण, मृत्यु भय से मुक्ति, सर्वत्र विजय और मृत्यु के बाद शिवलोक की प्राप्ति होती है।#सिद्धि#विजय#आरोग्य
दक्षिणामूर्ति साधनादक्षिणामूर्ति साधना का फल क्या है?इसका परम फल जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति और आत्म-साक्षात्कार की प्राप्ति है।#साधना फल#मोक्ष#ज्ञान
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग१ मुखी रुद्राक्ष धारण करने के शास्त्रीय फल और लाभ क्या हैं?१ मुखी रुद्राक्ष सांसारिक सुख, मोक्ष और ब्रह्म-हत्या जैसे पापों का नाश कर साधक को परम-तत्त्व में लीन करता है।#1 मुखी लाभ#मोक्ष#ब्रह्महत्या
पौराणिक कथाइन्दुमती की कथा क्या है और उसने यह व्रत क्यों किया?भविष्य पुराण के अनुसार, इन्दुमती एक वेश्या थी जिसने जिंदगी में कभी पूजा-पाठ नहीं किया था। बुढ़ापे में मृत्यु के डर से उसने यह व्रत किया, जिसके पुण्य से उसे मोक्ष और 'सूर्य-लोक' मिला।#इन्दुमती#भविष्य पुराण#मोक्ष
व्रत फलअनंत चतुर्दशी व्रत करने और दान देने से क्या फल मिलता है?इस व्रत से पाप मिटते हैं, गरीबी दूर होती है, अकाल मृत्यु का डर खत्म होता है और जीवन के अंत में भगवान विष्णु के धाम (मोक्ष) की प्राप्ति होती है।#पाप मुक्ति#अक्षय फल#मोक्ष
काशी के शिवलिंगशंकुकर्णेश्वर महादेव की आराधना से क्या-क्या फल प्राप्त होते हैं?फल — (1) असाध्य रोगमुक्ति और अकाल मृत्यु से रक्षा, (2) अष्टमेश-मारकेश ग्रह दशा शांति, (3) पितृ दोष-शाप निवारण, (4) संतान-रोजगार (40 सोमवार), (5) कैवल्य मोक्ष — शिव स्वयं तारक मंत्र देते हैं।#शंकुकर्णेश्वर#फलश्रुति#अकाल मृत्यु
काशी के शिवलिंगकाशी खंड अध्याय 69 में शंकुकर्णेश्वर का क्या स्थान है — 68 मोक्षदायी शिवलिंगकाशी खंड अध्याय 69 में 68 मोक्षदायी शिवलिंगों में शंकुकर्णेश्वर 'महातेज लिंग' के रूप में वर्णित हैं। कुरुक्षेत्र का स्थाणु, नैमिषारण्य का देवदेव लिंग भी इनमें हैं। श्लोक 173 — इनके नाम सुनने मात्र से हजारों जन्मों के पाप नष्ट।#काशी खंड#अध्याय 69#68 शिवलिंग
काशी के तीर्थघंटाकर्ण हृद में स्नान और दर्शन की फलश्रुति — स्कंद पुराणतीन फलश्रुतियाँ — (१) जन्म-मृत्यु चक्र से मुक्ति, (२) कहीं भी मरने पर काशी-मरण का पुण्य, (३) सात पीढ़ियों के नरकवासी पितरों का उद्धार। पितर स्वयं कामना करते हैं कि कोई इस तीर्थ से तिलांजलि अर्पित करे।#घंटाकर्ण हृद#फलश्रुति#मोक्ष
पौराणिक कथाएँघंटाकर्ण को मोक्ष कैसे मिला — श्रीकृष्ण और शिव की कथाशिव ने कहा मोक्ष केवल विष्णु दे सकते हैं। बदरिकाश्रम में श्रीकृष्ण ने घंटाकर्ण को गले लगाया — स्पर्श मात्र से पिशाच योनि छूटी, अठारह भुजाओं वाला शिवगण बना। आज भी बद्रीनाथ (माणा) में रक्षक देवता के रूप में पूजित।#घंटाकर्ण#मोक्ष#श्रीकृष्ण
जीवन एवं मृत्युप्रेतकल्प में मोक्ष का वर्णन क्यों किया गया है?प्रेतकल्प में मोक्ष का वर्णन — नरक-भय के बाद आशा दिखाने, भक्ति-मार्ग प्रशस्त करने, 'परमात्मा-ध्यान ही सर्वोत्तम उपाय है' बताने और जीवन का परम लक्ष्य स्पष्ट करने के लिए।#प्रेतकल्प#मोक्ष#उद्देश्य
जीवन एवं मृत्युप्रेतकल्प का मुख्य उद्देश्य क्या है?प्रेतकल्प के मुख्य उद्देश्य — मृत्यु के रहस्य का उद्घाटन, जीवन में धर्माचरण की प्रेरणा, परिजनों को कर्तव्य-बोध, मुमूर्षु को ज्ञान और अंततः परमात्मा-शरण का संदेश।#प्रेतकल्प#उद्देश्य#गरुड़ पुराण
जीवन एवं मृत्युदान का प्रभाव मोक्ष में कैसे पड़ता है?दान का मोक्ष में प्रभाव — दान स्वर्ग का मार्ग खोलता है, दान + भक्ति + ज्ञान मोक्ष की ओर ले जाते हैं। वृषोत्सर्ग और गोदान से पितर यमलोक से मुक्त होते हैं। 'आत्म-ज्ञान और परमात्मा-शरण' अंतिम मोक्ष है।#दान#मोक्ष#भक्ति
दान एवं पुण्यकृष्णा गाय दान से वैतरणी पार होती है — इसका विस्तार क्या है?गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय के अनुसार कृष्णा (काली) गाय का दान — जिसे 'वैतरणी गाय दान' कहते हैं — यमलोक-मार्ग पर वैतरणी नदी को पार कराता है। दान की गई गाय नदी के तट पर प्रकट होती है और जीव उसकी पूँछ पकड़कर पार होता है।#कृष्णा गाय#वैतरणी दान#गोदान
तीर्थ एवं मोक्षगंगातट पर मृत्यु से मोक्ष का विधान क्या है?गंगातट, विशेषकर काशी-वाराणसी में, मृत्यु होने पर स्वयं शिव तारक मंत्र देते हैं जिससे मोक्ष मिलता है — यह काशीखण्ड में वर्णित है। गरुड़ पुराण के अनुसार मुख में गंगाजल पड़ने से आत्मा शुद्ध होती है और पाप नष्ट होते हैं।#गंगातट#मृत्यु#मोक्ष
भक्ति एवं आध्यात्मस्वर्ग और मोक्ष में क्या अंतर है?स्वर्ग पुण्य कर्मों का अस्थायी फल है जहाँ से पुण्य क्षीण होने पर पुनः जन्म होता है। मोक्ष जन्म-मरण से पूर्ण और शाश्वत मुक्ति है — यह स्वर्ग से भी उच्च है।#स्वर्ग#मोक्ष#मुक्ति
भक्ति एवं आध्यात्मज्ञान मार्ग और भक्ति मार्ग में क्या अंतर है?ज्ञान मार्ग बुद्धि और विवेक से आत्मा-परमात्मा की एकता का बोध कराता है; भक्ति मार्ग प्रेम और समर्पण से ईश्वर की शरण में जाना सिखाता है। एक तर्क का मार्ग है, दूसरा हृदय का।#ज्ञान मार्ग#भक्ति मार्ग#वेदांत
भक्ति एवं आध्यात्मपाप कर्म से कैसे मुक्ति मिलती है?सच्चे पश्चाताप, भविष्य में न दोहराने के दृढ़ संकल्प, यज्ञ, दान, तप, भजन और ईश्वर शरणागति से पाप कर्म का प्रभाव क्षीण होता है।#पाप मुक्ति#प्रायश्चित#पाप कर्म
भक्ति एवं आध्यात्मचार पुरुषार्थ क्या हैं?धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — ये चार पुरुषार्थ हैं। धर्म नींव है, अर्थ-काम जीवन के साधन हैं, और मोक्ष — जन्म-मरण से मुक्ति — परम लक्ष्य है।#पुरुषार्थ#धर्म#अर्थ
तीर्थ एवं धार्मिक स्थलगया में पिंड दान क्यों करते हैं?गयासुर नामक असुर की देह पर भगवान विष्णु ने यज्ञ किया था और वरदान दिया कि यहाँ पिंड दान करने से पितरों को सीधे मोक्ष मिलेगा। गरुड़ पुराण सहित अनेक पुराणों में गया को पितृ तीर्थ और मोक्ष स्थली कहा गया है।#गया#पिंड दान#पितृ तर्पण
तीर्थ एवं धामकाशी में मरने पर मोक्ष क्यों मिलता है?काशी में शिव स्वयं मरने वाले के कान में तारक मंत्र देते हैं जिससे पापी भी मोक्ष पाता है। काशी शिव का अविमुक्त क्षेत्र है जिसे वे कभी नहीं छोड़ते। मणिकर्णिका घाट पर दाह-संस्कार से आत्मा सीधे मोक्ष पाती है।#काशी#मोक्ष#तारक मंत्र
तीर्थ एवं धामकाशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का रहस्य क्या है?काशी विश्वनाथ का सबसे बड़ा रहस्य तारक मंत्र है — यहाँ मरने वाले के कान में स्वयं शिव मुक्तिदायक मंत्र का उपदेश करते हैं, इसीलिए काशी मोक्ष नगरी है। काशी शिव के त्रिशूल पर बसी है इसलिए प्रलय में भी नष्ट नहीं होती।#काशी#विश्वनाथ#ज्योतिर्लिंग
तीर्थ यात्राकाशी मणिकर्णिका दाह संस्कार विशेष पुण्यकाशी सबसे पवित्र श्मशान; 24×7 अग्नि (हजारों वर्ष)। शिव तारक मंत्र=मोक्ष। पार्वती मणिकर्ण कथा। फोटो सख्त वर्जित। डोम राजा।#मणिकर्णिका#काशी#दाह
अंत्येष्टि संस्कारदाह संस्कार में कपाल क्रिया क्या है क्यों करते हैंकपाल क्रिया = सिर तोड़ना + घी डालना। कारण: (1) सिर सबसे मजबूत — पूर्ण दहन (2) ब्रह्मरंध्र खुले → आत्मा मुक्त = मोक्ष (गीता 8.12-13) (3) तांत्रिक दुरुपयोग रोकना। 30-45 min बाद करें। अनिवार्य — बिना कपाल क्रिया = अपूर्ण।#कपाल क्रिया#दाह संस्कार#खोपड़ी
हिंदू दर्शनसंन्यास लिए बिना मोक्ष मिल सकता है क्याहाँ — गीता 5.2-6 'कर्मयोगो विशिष्यते' (कर्म योग संन्यास से श्रेष्ठ)। राजा जनक = गृहस्थ, जीवनमुक्त। असली संन्यास = आसक्ति का आंतरिक त्याग, गेरुआ वस्त्र नहीं। गृहस्थ रहकर निष्काम कर्म + भक्ति + वैराग्य = मोक्ष।#संन्यास#मोक्ष#गृहस्थ
हिंदू दर्शनगृहस्थ जीवन में मोक्ष प्राप्ति कैसे संभवगृहस्थ मोक्ष संभव और श्रेष्ठ — राजा जनक प्रमाण। गीता 3.4-7 — निष्काम कर्मी गृहस्थ अकर्मण्य संन्यासी से श्रेष्ठ। उपाय: निष्काम कर्म, ईश्वरार्पण, भक्ति, सेवा, स्वाध्याय, कमल पत्र जैसे संसार में रहो पर चिपको मत।#गृहस्थ#मोक्ष#कर्म योग
हिंदू दर्शनधर्म अर्थ काम मोक्ष चार पुरुषार्थ क्या हैंचार पुरुषार्थ: धर्म (कर्तव्य/नैतिकता — आधार), अर्थ (धर्मपूर्वक धन — साधन), काम (धर्मयुक्त इच्छापूर्ति — सुख), मोक्ष (जन्म-मृत्यु से मुक्ति — परम लक्ष्य)। मनुस्मृति — धर्म के 10 लक्षण। कौटिल्य — 'अर्थ का मूल धर्म'। चारों में संतुलन = सार्थक जीवन।#पुरुषार्थ#धर्म#अर्थ
आत्मा और मोक्षमोक्ष प्राप्ति के चार मार्ग कौन से हैंचार मार्ग: ज्ञान योग (आत्म-ज्ञान — शंकराचार्य), भक्ति योग (ईश्वर समर्पण — गीता 12.6), कर्म योग (निष्काम कर्म — गीता 2.47), राज योग (ध्यान-समाधि — पतंजलि)। ये परस्पर पूरक हैं। गीता 18.66 — भगवान की शरण = सर्वपाप मुक्ति।#मोक्ष#चार मार्ग#योग
आत्मा और मोक्षजीवनमुक्त और विदेहमुक्त में क्या अंतर हैजीवनमुक्त = जीवित रहते हुए ब्रह्म-ज्ञान प्राप्त, शरीर में रहकर भी आसक्तिरहित (जैसे जनक)। विदेहमुक्त = शरीर छूटने पर ब्रह्म में विलय, पुनर्जन्म नहीं। जीवनमुक्त → मृत्यु पर → विदेहमुक्त। यह मुख्यतः अद्वैत वेदांत का सिद्धांत है।#जीवनमुक्त#विदेहमुक्त#मोक्ष
आत्मा और मोक्षमोक्ष क्या है और मोक्ष कैसे प्राप्त होता हैमोक्ष = जन्म-मृत्यु चक्र से स्थायी मुक्ति, सर्वदुःख निवृत्ति। अद्वैत में — आत्मा-ब्रह्म एकत्व का ज्ञान; विशिष्टाद्वैत में — वैकुंठ में शाश्वत सेवा; द्वैत में — भगवत्सान्निध्य। प्राप्ति: ज्ञान, भक्ति, निष्काम कर्म, ध्यान। गीता 8.15 — भगवान प्राप्ति = पुनर्जन्म नहीं।#मोक्ष#मुक्ति#संसार चक्र
अन्त्येष्टि संस्कारगंगा में अस्थि विसर्जन का क्या विशेष महत्व है?गंगा अस्थि: मोक्षदायिनी (गरुड़ पुराण), विष्णु पादोदक (चरण स्पर्श), पापनाश, पुनर्जन्म मुक्ति। स्थान: हरिद्वार, प्रयागराज, काशी (शिव तारक मंत्र), गंगासागर। 3-10 दिन में। 'ॐ' सहित विसर्जन→तर्पण→पिण्डदान।#अस्थि विसर्जन#गंगा#मोक्ष
तीर्थ स्नानगंगा स्नान का क्या पुण्य मिलता हैमहाभारत: गंगा स्नान से सैकड़ों पाप ऐसे नष्ट होते हैं जैसे अग्नि ईंधन जलाती है। कलियुग में गंगा सर्वश्रेष्ठ तीर्थ। पद्म पुराण: स्नान से सात पीढ़ियों का उद्धार। दर्शन मात्र से मुक्ति। तीन डुबकी, संकल्प, दान — यह विधि है। गंगा दशहरा, मकर संक्रान्ति पर विशेष पुण्य।#गंगा#स्नान#पाप नाश
साधना दर्शनध्यान और मोक्ष में क्या संबंध है?सम्बंध: ध्यान→समाधि→मोक्ष (मार्ग→द्वार→मंजिल)। गीता 6.15: 'सदा ध्यान=निर्वाण/मोक्ष।' आत्म-ज्ञान=मोक्ष, ध्यान=आत्म-ज्ञान प्रकट। बंधन(5 क्लेश) जलाना=ध्यान। जीवनमुक्ति=जीवित मोक्ष। सभी मार्गों में ध्यान अन्तर्निहित। ध्यान=मोक्ष का Engine।#ध्यान#मोक्ष#मुक्ति
तंत्र साधनातंत्र साधना का अंतिम लक्ष्य क्या है?तंत्रालोक: परम लक्ष्य = शिव-शक्ति-ऐक्य-साक्षात्कार। तीन स्तर: भोग (सकाम — रोग-धन), मुक्ति (मध्यम), शिव-शक्ति ऐक्य (परम)। तंत्र की विशेषता: संसार-त्याग नहीं — संसार-रूपांतरण। 'देह = मंदिर, जीव = देव' (कुलार्णव)। फल: जीवनमुक्ति — शरीर में रहकर मुक्त।#तंत्र लक्ष्य#मोक्ष#शिव-शक्ति ऐक्य
मंत्र जपमंत्र जप से मोक्ष कैसे प्राप्त होता है?भागवत (6.1.15): कृष्ण-कीर्तन से परम पद। गीता (8.7): अंतकाल जो भाव — वही अगली गति। नित्य जप = अंतकाल में भगवत्-स्मृति सुनिश्चित। मोक्ष के प्रकार: सालोक्य, सामीप्य, सारूप्य, सायुज्य। मार्ग: कर्म-क्षय + अहंकार-विसर्जन + निष्काम जप = मुक्ति।#मोक्ष#मुक्ति#अंतकाल स्मृति
मंदिर पूजामंदिर में पूजा से मोक्ष कैसे प्राप्त होता है?गीता (18.65-66): भगवान का वचन — केवल मुझे शरण लो, सभी पापों से मुक्ति। भागवत (1.2.6): निष्काम भक्ति ही श्रेष्ठ धर्म। मोक्ष-क्रम: निष्काम पूजा → कर्म-क्षय → अहंकार-विसर्जन → ब्रह्मलीनता। केवल कर्मकांड पर्याप्त नहीं।#मोक्ष#मुक्ति#भक्ति
शिव पूजाशिव पूजा से मोक्ष कैसे प्राप्त होता है?शिव पूजा से मोक्ष: शिव पुराण (कैलाश संहिता): 'शिवमेव परो मोक्षः।' तीन मार्ग: सायुज्य-मुक्ति (लिंग पुराण), काशी में मोक्ष (स्कंद पुराण: शिव तारक-मंत्र देते हैं), महाशिवरात्रि व्रत। क्रम: पाप-क्षय → वासना-नाश → अविद्या-नाश → समाधि → शिव-सायुज्य। ज्ञान + वैराग्य + भक्ति आवश्यक।#शिव पूजा#मोक्ष#मुक्ति
शिव पूजाशिव पूजा से क्या लाभ होते हैं?शिव पूजा लाभ: पाप-नाश ('शिवपूजाकरो नित्यं पापं नश्यति')। रोग-निवारण (वैद्यनाथ)। धन-समृद्धि। संतान-प्राप्ति। ग्रह-दोष शांति (शनि, राहु, केतु)। शत्रु-नाश। मोक्ष। परिवार-रक्षा। स्कंद पुराण: नित्य शिव-आराधना = निश्चित मुक्ति।#शिव पूजा#लाभ#फल
शिव पूजारुद्राभिषेक का आध्यात्मिक महत्व क्या है?रुद्राभिषेक का आध्यात्मिक महत्त्व: वेद-प्रमाणित सर्वोच्च पूजा (श्री रुद्रम् = तैत्तिरीय संहिता)। काश्मीर शैवागम: 'अहं शिवः' — चेतना का शिव-चेतना से मिलन। पंचभूत-शुद्धि। नाद-शक्ति (वेद-मंत्र = वातावरण-शुद्धि)। अहंकार-विसर्जन। शिव-शक्ति संतुलन। बाहरी क्रिया नहीं — आत्मा की शिव-यात्रा।#रुद्राभिषेक#आध्यात्मिक महत्व#शिव
शिव पूजारुद्राभिषेक से क्या लाभ होते हैं?रुद्राभिषेक लाभ: शिव पुराण — 'सर्वान् कामान् प्राप्नोति।' द्रव्य-फल: दूध=पुत्र, घी=मोक्ष, शहद=वाक्-सिद्धि, गंगाजल=मोक्ष+पितृ-शांति। सामान्य: ग्रह-दोष शांति, रोग-निवारण, संतान, समृद्धि, शत्रु-शांति। एकादश रुद्राभिषेक > लघु रुद्र > महा रुद्र (शक्ति-क्रम)।#रुद्राभिषेक#लाभ#फल