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विधि से जुड़े सभी प्रश्न(236)

विधि पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 236 प्रश्न उपलब्ध हैं।

पूजा विधि

पूजा के बाद प्रसाद कैसे ग्रहण करें?

प्रसाद ग्रहण: दाएं हाथ से, बैठकर, सिर पर लगाएं फिर खाएं। भूमि पर न गिरने दें, अस्वीकार न करें। चरणामृत हथेली में लेकर पीएं। वितरण में सबको समान — कोई वंचित न हो।

#प्रसाद ग्रहण#विधि#नियम
ध्यान विधि

पूजा के दौरान ध्यान कैसे करें?

पूजा में ध्यान: स्थिर आसन, तीन गहरी साँसें, आँखें बंद करके इष्ट देव का स्वरूप मन में देखें। मंत्र मन में दोहराएं। देवता के सामने बालक की तरह भाव — पूर्ण समर्पण। गीता 6.10: 'ध्यानी एकांत में आत्मा को परमात्मा में लगाए।'

#ध्यान#एकाग्रता#पूजा
पूजा विधि

घर में पूजा कैसे करें?

घर पूजा का क्रम: स्नान → स्वच्छ वस्त्र → आसन → आवाहन → पंचोपचार (चंदन, फूल, धूप, दीप, भोग) → मंत्र जप → आरती → क्षमा प्रार्थना → प्रसाद। षोडशोपचार (16 उपचार) पूर्ण विधि है।

#घर पूजा#विधि#नित्य पूजा
साधना विधि

काली साधना घर पर कैसे करें?

घर पर काली साधना (भक्ति मार्ग): लाल/काला आसन, सरसों तेल दीप, लाल गुड़हल, सिंदूर, 'ॐ क्रीं काल्यै नमः' — 108 बार, काली चालीसा, आरती। अमावस्या पर 1008 जप और 10 दीप। तांत्रिक विधि घर पर गुरु के बिना न करें।

#घर काली साधना#भक्ति मार्ग#नित्य पूजा
साधना विधि

काली साधना कैसे करें?

काली साधना के तीन स्तर: भक्ति (नित्य पूजा — सबके लिए), उपासना (गुरु दीक्षा के बाद) और तांत्रिक (केवल अनुभवी दीक्षित)। भक्ति साधना में: स्नान, लाल/काले वस्त्र, 'ॐ क्रीं काल्यै नमः' — 108 बार जप, आरती। अमावस्या और नवरात्रि विशेष काल।

#काली साधना#विधि#शाक्त साधना
साधना विधि

काली साधना घर पर कैसे करें?

घर पर काली साधना (भक्ति मार्ग): लाल/काला आसन, सरसों तेल दीप, लाल गुड़हल, सिंदूर, 'ॐ क्रीं काल्यै नमः' — 108 बार, काली चालीसा, आरती। अमावस्या पर 1008 जप और 10 दीप। तांत्रिक विधि घर पर गुरु के बिना न करें।

#घर काली साधना#भक्ति मार्ग#नित्य पूजा
साधना विधि

काली साधना कैसे करें?

काली साधना के तीन स्तर: भक्ति (नित्य पूजा — सबके लिए), उपासना (गुरु दीक्षा के बाद) और तांत्रिक (केवल अनुभवी दीक्षित)। भक्ति साधना में: स्नान, लाल/काले वस्त्र, 'ॐ क्रीं काल्यै नमः' — 108 बार जप, आरती। अमावस्या और नवरात्रि विशेष काल।

#काली साधना#विधि#शाक्त साधना
भैरव साधना

भैरव साधना कैसे करें?

भैरव साधना: काले/नीले वस्त्र, सरसों तेल दीप, उड़द की दाल, लाल पुष्प। मंत्र: 'ॐ बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ॐ' — 108 बार। काल भैरव अष्टकम् (शंकराचार्य) पाठ करें। भैरव शत्रु भय नाश, स्थान रक्षा और सिद्धि के देवता हैं।

#भैरव साधना#काल भैरव#बटुक भैरव
पूजा विधि

दुर्गा पूजा घर पर कैसे करें?

घर पर दुर्गा पूजा: लाल चुनरी, कुमकुम, लाल गुड़हल, धूप-दीप। आवाहन 'ॐ जयंती मंगला काली...' से करें। पंचोपचार, नवार्ण मंत्र 108 बार, सप्तशती पाठ या 'या देवी सर्वभूतेषु...' स्तोत्र, आरती 'जय अम्बे गौरी...' और क्षमा प्रार्थना।

#घर पूजा#दुर्गा पूजा#नित्य पूजा
जप विधि

दुर्गा मंत्र जप कैसे करें?

दुर्गा जप: लाल आसन, रुद्राक्ष या कमलगट्टा माला, पूर्व/उत्तर मुख। नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' — नित्य 108 बार। नवरात्रि में 1008 बार। पुरश्चरण: 9 लाख जप। देवी का ध्यान 'या देवी सर्वभूतेषु...' से करें।

#दुर्गा मंत्र जप#नवार्ण जप#विधि
पाठ नियम

चंडी पाठ के नियम क्या हैं?

चंडी पाठ के विशेष नियम: षडंग पाठ (कवच+अर्गला+कीलक+नवार्ण+13 अध्याय+उपसंहार) अनिवार्य। कीलक से पहले विकीलन (ॐ नमश्चण्डिकायै तीन बार)। अशुद्धि पर नवार्ण मंत्र 108 बार। पाठ के बाद आरती और क्षमा प्रार्थना।

#चंडी पाठ नियम#विधि#शुद्धता
साधना विधि

दुर्गा साधना कैसे करें?

दुर्गा साधना के तीन स्तर: भक्ति (नित्य पूजा-पाठ), उपासना (दीक्षा + पुरश्चरण), तांत्रिक (गुरु दीक्षा अनिवार्य)। नवरात्रि सर्वोत्तम साधना काल। नित्य: नवार्ण मंत्र 108 बार + सप्तशती पाठ + आरती। साधना में लाल वस्त्र, ब्रह्मचर्य और मांसाहार वर्जन।

#दुर्गा साधना#शाक्त साधना#नवरात्रि साधना
नवरात्रि विधि

नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें?

नवरात्रि कलश स्थापना: प्रतिपदा को ईशान कोण में चौकी पर मिट्टी में जौ बोएं, तांबे के कलश में गंगाजल, सिक्का, सुपारी भरें, आम के 5 पत्ते लगाएं, नारियल रखें। स्थापना मंत्र बोलें और देवी का आवाहन करें। नवमी को विसर्जन।

#कलश स्थापना#नवरात्रि#घट स्थापना
स्थापना विधि

शिवलिंग की स्थापना कैसे करें?

शिवलिंग स्थापना में: नर्मदेश्वर सर्वोत्तम (प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं)। घर में ईशान कोण, अंगूठे से छोटा आकार। पंचामृत शुद्धि, स्थापना मंत्र 'ॐ नमः शिवाय'। नित्य पूजा अनिवार्य। गृहस्थों के लिए पार्थिव लिंग (मिट्टी का) सर्वोत्तम विकल्प।

#शिवलिंग स्थापना#प्राण प्रतिष्ठा#घर मंदिर
जप विधि

महामृत्युंजय मंत्र जप की विधि क्या है?

महामृत्युंजय जप: ब्रह्ममुहूर्त में, रुद्राक्ष माला से, शिव का ध्यान करते हुए, भस्म त्रिपुंड लगाकर। नित्य 108, रोग में 1008 बार। गंभीर संकट में 21 दिन × 1008। हवन: 'ॐ त्र्यम्बकं... स्वाहा' — तिल और घी से।

#महामृत्युंजय जप#रुद्राक्ष#विधि
पूजा विधि

शिव पूजा की सही विधि क्या है?

शिव पूजा में: स्नान, बेलपत्र, पंचामृत अभिषेक (दूध-दही-घी-शहद-शक्कर), गंगाजल, भस्म त्रिपुंड, धतूरा-आक पुष्प, 'ॐ नमः शिवाय' जप, आरती और आधी परिक्रमा। बेलपत्र और जल — ये दो सबसे महत्वपूर्ण अर्पण हैं।

#शिव पूजा#विधि#षोडशोपचार
आरती विधि

आरती कैसे करें?

आरती में पंचमुखी घी का दीप जलाएं। चरणों से आरंभ करके ऊपर जाएं — दक्षिणावर्त (clockwise) घुमाएं। शंख-घंटी बजाते हुए देवता की स्तुति गाएं। अंत में कपूर आरती करें। आरती की लौ दोनों हाथों से स्पर्श करके नेत्रों से लगाएं।

#आरती#विधि#दीप आरती
जप विधि

मंत्र जप की सही विधि क्या है?

मंत्र जप से पूर्व स्नान, शांत स्थान, कुश आसन, पूर्व मुख, संकल्प और गुरु स्मरण करें। माला को अनामिका और अंगूठे से पकड़ें, तर्जनी न लगाएं। मानसिक जप सर्वोत्तम है। जप के बाद माला सिर से लगाकर देवता को अर्पित करें।

#मंत्र जप#विधि#साधना
पूजा विधि

हनुमान जी की पूजा कैसे करें?

हनुमान पूजा में: स्नान, लाल वस्त्र, सिंदूर लेपन, चमेली तेल का दीप, 21 लाल गुड़हल, गुड़-चना भोग, 'ॐ हं हनुमते नमः' का 108 बार जप, हनुमान चालीसा पाठ और आरती करें। मंगलवार-शनिवार को सिंदूर का चोला अर्पण विशेष फलदायी है।

#हनुमान पूजा#विधि#सिंदूर
पूजा विधि

गणेश पूजा विधि क्या है?

गणेश पूजा में पंचामृत स्नान, सिंदूर, 21 दूर्वा, लाल पुष्प, जनेऊ अर्पण, 21 मोदक का भोग, 'ॐ गं गणपतये नमः' का 108 बार जप और आरती करें। पूजा में तुलसी वर्जित है। बुधवार और चतुर्थी तिथि सर्वश्रेष्ठ है।

#गणेश पूजा#विधि#षोडशोपचार
व्रत विधि

शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा कैसे करें?

शुक्रवार को पीले वस्त्र पहनकर, लक्ष्मी जी को कमल-गुलाब अर्पित करें, सिंदूर-कुमकुम लगाएं, श्री सूक्त पाठ करें और 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जप करें। वैभवलक्ष्मी व्रत 11 या 21 शुक्रवार तक करें।

#शुक्रवार व्रत#शुक्रवार पूजा#लक्ष्मी व्रत
पूजा विधि

लक्ष्मी पूजन की सही विधि क्या है?

लक्ष्मी पूजन में लक्ष्मी ध्यान, पंचामृत स्नान, पीत वस्त्र, सिंदूर-कुमकुम, कमल-गुलाब, श्री सूक्त पाठ, 'ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जप और आरती करें। शुक्रवार प्रदोष काल में यह पूजा सर्वाधिक फलदायी है।

#लक्ष्मी पूजन#विधि#षोडशोपचार
पूजा विधि

काली पूजा की सही विधि क्या है?

काली पूजा दीपावली रात, अमावस्या या नवरात्रि सप्तमी को करें। सरसों का दीप, 108 लाल गुड़हल, सिंदूर, खीर का भोग, काली ध्यान श्लोक, 'ॐ क्रीं कालिकायै नमः' का 108 बार जप और आरती — यह पूर्ण विधि है।

#काली पूजा#दीपावली#विधि
साधना विधि

काली साधना कैसे की जाती है?

काली साधना भक्ति मार्ग और तंत्र मार्ग से होती है। अमावस्या की रात दक्षिण मुख करके बैठें, सरसों का दीप जलाएं, लाल गुड़हल अर्पित करें और 'ॐ क्रीं कालिकायै नमः' का 108 बार जप करें। उच्च तांत्रिक साधना गुरु दीक्षा के बाद ही करें।

#काली साधना#महाकाली#विधि
पूजा विधि

दुर्गा पूजा घर पर कैसे करें?

ईशान कोण में देवी प्रतिमा स्थापित करें। आचमन, संकल्प, पंचोपचार पूजन (जल, चंदन, सिंदूर, लाल फूल, भोग), नवार्ण मंत्र जप, देवी सूक्त पाठ और आरती करें। नवरात्रि में अखंड दीप और नवमी को कन्या पूजन अनिवार्य है।

#घर पर पूजा#दुर्गा पूजा#विधि
साधना विधि

दुर्गा मंत्र जप कैसे करें?

लाल आसन पर पूर्व/उत्तर मुख करके बैठें, रुद्राक्ष माला से नवार्ण मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे) या 'ॐ दुं दुर्गायै नमः' का 108 बार जप करें। तर्जनी माला को न छुए। नवरात्रि में 1008 बार जप विशेष फलदायी है।

#मंत्र जप#दुर्गा मंत्र#विधि
पाठ नियम

चंडी पाठ के नियम क्या हैं?

चंडी पाठ से पूर्व देवी कवच, अर्गला, कीलक और नवार्ण मंत्र अनिवार्य है। स्नान करें, लाल आसन पर बैठें, पुस्तक भूमि पर न रखें, शुद्ध उच्चारण करें और एक बार शुरू करें तो पूरा करें।

#चंडी पाठ नियम#विधि#नियम
साधना विधि

दुर्गा साधना कैसे करें?

दुर्गा साधना में ब्रह्ममुहूर्त में लाल आसन पर बैठकर, नवार्ण मंत्र (ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे) का 108 बार जप, सप्तशती पाठ और आरती करें। नवरात्रि में 9 दिन व्रत, अखंड दीप और कन्या पूजन विशेष महत्व का है।

#दुर्गा साधना#उपासना#नवरात्रि साधना
नवरात्रि विधि

नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें?

नवरात्रि प्रतिपदा को जौ बोकर, तांबे के कलश में गंगाजल, सिक्का, सुपारी भरें। पाँच आम पत्ते मुख पर रखें, नारियल ऊपर स्थापित करें। ईशान कोण में रखें और 'ॐ कलशस्य मुखे विष्णुः...' मंत्र से स्थापना करें।

#कलश स्थापना#नवरात्रि#घट स्थापना
पाठ नियम

दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम क्या हैं?

सप्तशती पाठ के नियम: स्नान, ब्रह्मचर्य, सात्विक भोजन, लाल/पीत वस्त्र, एक बार शुरू करें तो पूरा करें, बीच में न उठें, शुद्ध उच्चारण करें। नवरात्रि में लहसुन-प्याज-मांस वर्जित है। पुस्तक भूमि पर न रखें।

#सप्तशती नियम#पाठ नियम#विधि
पूजा विधि

शिव जी की आरती कैसे करें?

शिव जी की आरती पंचमुखी दीप या घी के दीप से, 'ओम जय शिव ओंकारा' के गायन के साथ, दक्षिणावर्त 7 बार घुमाते हुए करें। शंख-घंटा बजाएं और अंत में दीप की लौ आँखों से लगाएं।

#आरती#शिव आरती#विधि
स्थापना विधि

शिवलिंग की स्थापना कैसे करें?

ईशान कोण में, शुभ मुहूर्त में, पंचामृत स्नान कराकर, पंडित जी से प्राण प्रतिष्ठा करवाकर शिवलिंग स्थापित करें। जलहरी का मुख उत्तर में हो और शिवलिंग का आकार गृह पूजा के लिए अंगूठे जितना उचित है।

#शिवलिंग स्थापना#प्रतिष्ठा#गृह पूजा
साधना विधि

महामृत्युंजय मंत्र जप की विधि क्या है?

कुश आसन पर पूर्व/उत्तर दिशा में बैठकर, रुद्राक्ष माला से, शिव का ध्यान करते हुए महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। तर्जनी से माला न स्पर्श करें। जप के बाद दशांश हवन करें।

#महामृत्युंजय जप#विधि#साधना
व्रत विधि

सोमवार व्रत करने का सही तरीका क्या है?

सोमवार को ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करके शिव पूजा करें — जल, दूध, बेलपत्र अर्पित करें और 'ॐ नमः शिवाय' का 108 बार जप करें। दिन में एक बार फलाहार लें, नमक का त्याग करें और सायंकाल व्रत कथा सुनें।

#सोमवार व्रत#शिव व्रत#उपवास
अभिषेक विधि

रुद्राभिषेक करने की सही विधि क्या है?

रुद्राभिषेक में श्री रुद्रम् पाठ के साथ शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), गंगाजल, नारियल जल से क्रमशः अभिषेक किया जाता है। इसके बाद बेलपत्र, चंदन, विभूति अर्पण और आरती की जाती है।

#रुद्राभिषेक#अभिषेक#शिव पूजा
मंत्र विधि

मंत्र जप में संकल्प का क्या महत्व है?

संकल्प = उद्देश्य + प्रतिज्ञा। 'संकल्पमूलो हि कामः' — सभी कर्म संकल्प मूल। बोलें: काल, स्थान, नाम, गोत्र, मंत्र, संख्या, उद्देश्य। क्यों: एकाग्रता, ऊर्जा निर्देशन, प्रतिबद्धता, पूर्ण फल। निष्काम: 'ईश्वर प्रीत्यर्थे' = सर्वोच्च।

#संकल्प#उद्देश्य#विधि
हवन/यज्ञ

महामृत्युंजय हवन की विधि और सामग्री क्या है?

'ॐ त्र्यम्बकं...स्वाहा'। सामग्री: घी+तिल+जौ+दूर्वा+बिल्व+धतूरा+चंदन। 1,25,000 (पूर्ण) / 108 (सरल)। कब: रोग, दुर्घटना, शनि, दीर्घायु। श्वेत, रुद्राक्ष। पुरोहित=अनुशंसित।

#महामृत्युंजय#हवन#विधि
ध्यान साधना

ध्यान क्या होता है और इसे कैसे करें?

ध्यान वह अवस्था है जिसमें चित्त बिना भटके एक विषय पर टिका रहे (योगसूत्र 3/2)। विधि — शांत स्थान, सीधा आसन, श्वास-साधना, फिर ओम्/इष्टदेव/श्वास पर एकाग्रता। गीता (6/15) के अनुसार नियमित ध्यान से परम शांति और निर्वाण मिलता है।

#ध्यान#परिभाषा#विधि
गीता अध्ययन

भगवद गीता का पाठ कैसे करें?

गीता का पाठ प्रातःकाल स्नान के पश्चात, शांत मन से, श्रद्धापूर्वक करना चाहिए। पहले महात्म्य पढ़ें, फिर श्लोकों का अर्थ समझते हुए क्रमशः अध्याय 1 से 18 तक पाठ करें और ज्ञान को जीवन में उतारें।

#गीता पाठ#विधि#नियम
मंदिर ज्ञान

मंदिर में चरणामृत पीने की सही विधि क्या है?

दाहिने हाथ (कुप्पी मुद्रा), तुरंत पिएं, शेष शिर पर। बायां वर्जित। तुलसी+जल+चंदन+कपूर। शिर/बालों में फेरें। पंचामृत: दूध+दही+घी+शहद+शक्कर। तुलसी = antibacterial।

#चरणामृत#पीने#विधि
तंत्र साधना

तंत्र में होम और हवन की विशेष विधि क्या है?

कुंड: त्रिकोण(शक्ति)/वर्ग(शिव)/गोल(विष्णु)। देवता अनुसार सामग्री। मंत्र+'स्वाहा'+घी। दशांश (जप÷10)। पूर्णाहुति (नारियल)। अग्नि=देवमुख। तांत्रिक: यंत्र समक्ष, बीज, रात्रि।

#होम#हवन#तांत्रिक
दशमहाविद्या

बगलामुखी मंत्र का जप कैसे करें और कितनी बार?

'ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ॐ नमः'। 108 दैनिक, सवा लाख अनुष्ठान। हल्दी माला। पीला: आसन/वस्त्र/फूल। मंगलवार/शनिवार। गुरु दीक्षा अनुशंसित। शुद्ध उच्चारण अनिवार्य।

#बगलामुखी#मंत्र#जप
शिव पूजा विधि

शिव पूजा में भस्म लगाने का सही तरीका और मंत्र क्या है?

त्रिपुंड — तीन आड़ी रेखाएं ललाट पर (बाएं→दाएं)। तीन अंगुलियों से लगाएं। मंत्र: 'ॐ त्र्यायुषं जमदग्नेः...' (जाबालोपनिषद्) या 'ॐ नमः शिवाय'। यज्ञ/गोबर भस्म सर्वोत्तम। भस्म = वैराग्य, अनित्यता, अहंकार त्याग का प्रतीक।

#भस्म#विभूति#त्रिपुंड
मंत्र जप विधि

मंत्र जप में संकल्प कैसे लें — विधि सहित?

दाहिने हाथ जल+अक्षत+फूल → 'ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः, अद्य... [नाम] अहं [उद्देश्य] [मंत्र] [संख्या] जपं करिष्ये' → जल छोड़ दें। संकल्प = पूर्ण करें।

#संकल्प#विधि#जप
लक्ष्मी पूजा

लक्ष्मी जी के आठ रूपों की अलग-अलग पूजा कैसे करें?

8 रूप: आदि (कमल), धन (सिक्का), धान्य (अन्न), गज (श्वेत), सन्तान (पीला), वीर (लाल), विजय (श्रृंगार), विद्या (पुस्तक)। अष्ट लक्ष्मी स्तोत्र — 8 श्लोक = 8 पुष्प।

#अष्ट लक्ष्मी#8 रूप#अलग पूजा
शिव पूजा

शिव की पूजा में भक्ति और विधि में कौन अधिक महत्वपूर्ण है?

भक्ति > विधि। शिव पुराण: शिव 'भावग्राही' — भाव देखते हैं, विधि नहीं। कन्नप्पा: विधि विरुद्ध पूजा, पर सच्ची भक्ति से शिव प्रसन्न। 'मंत्रहीनं क्रियाहीनं' श्लोक: भक्ति विधि की कमी पूर्ण करती है। विधि भी महत्वपूर्ण: अनुशासन, एकाग्रता देती है। भक्ति = आत्मा, विधि = शरीर।

#भक्ति#विधि#भाव प्रधान
शिव भक्ति

शिव भक्त को विभूति कैसे लगानी चाहिए और कब?

तीन अंगुलियों से ललाट पर बाएं→दाहिने तीन क्षैतिज रेखाएं = त्रिपुंड। कब: स्नान बाद/पूजा पूर्व/सोमवार/शिवरात्रि। स्रोत: यज्ञ भस्म सर्वोत्तम, मंदिर प्रसाद शुभ। लाभ: पाप नाश, रक्षा, शिव कृपा।

#विभूति#भस्म#त्रिपुंड
मंत्र जप नियम

मंत्र जप के दौरान बीच में उठना पड़े तो क्या करें?

माला आसन पर (भूमि नहीं) → 'ॐ' 3 बार → कार्य → हाथ/आचमन → पुनः 'ॐ' 3 बार → जारी। अनुष्ठान: कुछ = माला पुनः। बचाव: पहले शौचालय।

#बीच#उठना#जप
दुर्गा साधना

दुर्गा यंत्र स्थापना की विधि और लाभ क्या हैं?

नवरात्रि/अष्टमी स्थापन। गंगाजल शुद्धि → 108 जप अभिमंत्रण → लाल कपड़ा पूर्व दिशा → लाल पुष्प+सिंदूर → दीपक। लाभ: शत्रु नाश, गृह शांति, वास्तु, कानूनी विजय।

#दुर्गा यंत्र#स्थापना#विधि
नवरात्रि

नवरात्रि में घटस्थापना की विधि और शुभ मुहूर्त क्या है?

प्रतिपदा प्रातः। वेदी+जौ/गेहूं बोएं → कलश (जल+आम पत्ते+नारियल) → अखंड ज्योति → देवी प्रतिमा → षोडशोपचार। 9 दिन बाद जौ अंकुरण = सफलता संकेत। मुहूर्त: अभिजित/पंचांग अनुसार।

#घटस्थापना#कलश#विधि
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