लक्ष्मी-नारायण तत्त्वधन को धर्म के बिना क्यों नहीं रखना चाहिए?भागवत पुराण: धर्म (विष्णु) के बिना धन (लक्ष्मी) आसुरी संपत्ति बन जाता है और मनुष्य के पतन का कारण बनता है। बिना ज्ञान के धन उन्माद देता है, बिना न्याय के नीति शोषण बनती है।#धन धर्म#आसुरी संपत्ति#भागवत पुराण
लक्ष्मी-नारायण तत्त्वविष्णु पुराण में लक्ष्मी और नारायण का क्या दार्शनिक संबंध है?विष्णु = अर्थ/नय/बोध/स्रष्टा/धर्म/यज्ञ। लक्ष्मी = वाणी/नीति/बुद्धि/सृष्टि/सत्क्रिया/दक्षिणा। विचार विष्णु हैं तो अभिव्यक्ति लक्ष्मी। धर्म विष्णु है तो उसका व्यावहारिक आचरण लक्ष्मी।#दार्शनिक संबंध#अर्थ वाणी#नय नीति
लक्ष्मी-नारायण तत्त्वविष्णु पुराण में लक्ष्मी और विष्णु के संबंध को किस रूपक से समझाया है?अग्नि और उसकी उष्णता का रूपक — जैसे अग्नि से उसकी गर्मी अलग नहीं की जा सकती, वैसे विष्णु से लक्ष्मी पृथक नहीं। विष्णु = पुरुष तत्त्व (चेतना), लक्ष्मी = स्त्री तत्त्व (क्रियाशील ऊर्जा)।#अग्नि उष्णता रूपक#विष्णु पुराण#पराशर मुनि
लक्ष्मी-नारायण तत्त्वलक्ष्मी और नारायण को अविभाज्य क्यों माना गया है?विष्णु पुराण (1.8.17): 'जगन्माता लक्ष्मी विष्णु की नित्य सहचरी हैं, कभी संग नहीं छोड़तीं।' विष्णु = पुरुष तत्त्व (चेतना), लक्ष्मी = स्त्री तत्त्व (क्रियाशील ऊर्जा)। दोनों का संबंध अग्नि और उसकी उष्णता जैसा — अविभाज्य।#लक्ष्मी नारायण#अविभाज्य#अद्वैत दर्शन
कालसर्प और पितृदोषनारायण नागबली क्या है और क्यों जरूरी है?नारायण नागबली एक पितृ-शांति और श्राद्ध कर्म है जो त्र्यंबकेश्वर में कराया जाता है — यह कालसर्प दोष और पितृदोष दोनों का एक साथ शमन करता है।#नारायण नागबली#पितृ शांति#त्र्यंबकेश्वर
स्तोत्र में ज्वर और रोग निवारणब्रह्म ज्वर, विष्णु ज्वर और रुद्र ज्वर क्या हैं?ब्रह्म, विष्णु और रुद्र ज्वर अत्यंत असाध्य, कर्मजन्य और देवता से उत्पन्न रोग हैं — सदाशिव स्वरूप होने के कारण केवल नीलकंठ ही इनका निवारण कर सकते हैं।#ब्रह्म ज्वर#विष्णु ज्वर#रुद्र ज्वर
गुप्त रुद्राक्ष प्रयोग१० मुखी रुद्राक्ष का देवता और मुख्य फल क्या है?१० मुखी रुद्राक्ष भगवान विष्णु का स्वरूप है, इसका मंत्र 'ॐ ह्रीं नमः' है और यह शांति प्रदान करता है।#10 मुखी#विष्णु#शांति
रामचरितमानस — बालकाण्डनारदजी ने भगवान विष्णु को शाप क्यों दिया?अभिमान तोड़ने को भगवान ने वानर-मुख दिया, स्वयंवर में अपमान, शिवगणों ने हँसी उड़ाई — क्रोध में शाप दिया। कारण — उपहास का अपमान।#बालकाण्ड#नारद शाप कारण#अपमान
अनंत सूत्रअनंत सूत्र की 14 गांठों का विष्णु जी और 14 लोकों से क्या संबंध है?हर एक गांठ ब्रह्मांड के एक लोक (जैसे पाताल, भू, स्वर्ग) और उस लोक की रक्षा करने वाले भगवान विष्णु के एक विशेष स्वरूप (जैसे पद्मनाभ, माधव, श्रीहरि) से जुड़ी है।#विष्णु स्वरूप#14 लोक#संरक्षण
रामचरितमानस — बालकाण्डभगवान विष्णु ने देवताओं को क्या आश्वासन दिया?भगवान ने आकाशवाणी से कहा — अयोध्या में दशरथ के घर अवतार लूँगा। ब्रह्माजी ने देवताओं को सिखाया — वानर शरीर धरकर पृथ्वी पर भगवान की सेवा करो। देवता वानर रूप में पृथ्वी पर आ गये।#बालकाण्ड#आकाशवाणी#अवतार आश्वासन
रामचरितमानस — बालकाण्डनारदजी ने भगवान विष्णु को क्या शाप दिया?नारदजी ने भगवान विष्णु को शाप दिया — आपने मेरा उपहास कराया, अतः आपको मनुष्य योनि में जन्म लेना पड़ेगा और स्त्री-विरह सहना पड़ेगा। भगवान ने शाप प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया और माया हटा ली।#बालकाण्ड#नारद शाप#विष्णु
रामचरितमानस — बालकाण्ड'हरि' शब्द का दोहरा अर्थ क्या है जो भगवान ने नारदजी से कहा?'हरि' के दो अर्थ — (1) भगवान विष्णु (सुन्दर), (2) वानर/बन्दर। नारदजी ने विष्णु-रूप माँगा, भगवान ने वानर-रूप दिया। भगवान ने कहा — जैसे वैद्य रोगी को कुपथ्य नहीं देता, वैसे ही मैंने तुम्हारा हित किया।#बालकाण्ड#हरि शब्द#दोहरा अर्थ
रामचरितमानस — बालकाण्डनारदजी ने भगवान विष्णु से सुन्दर रूप का वरदान माँगा तो भगवान ने क्या किया?नारदजी ने 'हरि रूप' माँगा — भगवान ने 'हरि' = वानर (बन्दर) का मुख दे दिया। 'हरि' शब्द का दोहरा अर्थ — विष्णु भी, वानर भी। भगवान ने मुनि के कल्याण (अभिमान तोड़ने) के लिये कुरूप बनाया पर माया से किसी को पता नहीं चला।#बालकाण्ड#हरि रूप#वानर मुख
रामचरितमानस — बालकाण्डविश्वमोहिनी के स्वयंवर में नारदजी ने क्या किया?नारदजी ने भगवान से 'हरि रूप' (सुन्दर रूप) माँगा। भगवान ने उनके हित में वानर (बन्दर) का मुख दे दिया — पर माया से नारदजी को पता नहीं चला। स्वयंवर में राजकुमारी ने नारदजी को छोड़कर भगवान विष्णु को वरा।#बालकाण्ड#नारद स्वयंवर#सुन्दर रूप
रामचरितमानस — बालकाण्डभगवान विष्णु ने नारदजी को मोहित करने के लिये क्या माया रची?भगवान ने मायावी नगर रचा जिसमें एक अत्यन्त सुन्दर राजकुमारी थी (भगवान की माया)। स्वयंवर हो रहा था। नारदजी राजकुमारी का रूप देखकर वैराग्य भूल गये और मोहित हो गये — 'देखि रूप मुनि बिरति बिसारी।'#बालकाण्ड#विष्णु माया#नारद मोह
रामचरितमानस — बालकाण्ड'संबत सोरह सै एकतीसा। करउँ कथा हरि पद धरि सीसा' — इसमें कौन सा संवत है?संवत् 1631 (1574 ईस्वी)। 'सोरह सै' = 1600, 'एकतीसा' = 31, कुल = 1631। अर्थ — संवत् 1631 में श्रीहरि के चरणों पर सिर रखकर कथा आरम्भ करता हूँ।#बालकाण्ड#संवत 1631#चौपाई
रामचरितमानस — बालकाण्ड'बिधि हरि हर कबि कोबिद बानी। कहत साधु महिमा सकुचानी' — इसका क्या तात्पर्य है?तात्पर्य — संतों की महिमा इतनी अपार है कि ब्रह्मा, विष्णु, शिव, कवि और पण्डितों की वाणी भी उसे कहने में सकुचाती है। तुलसीदासजी ने कहा — जैसे सब्ज़ी बेचने वाला मणियों के गुण नहीं बता सकता, वैसे ही मुझसे यह महिमा कही नहीं जाती।#बालकाण्ड#संत महिमा#ब्रह्मा-विष्णु-शिव
रामचरितमानस — बालकाण्ड'बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि' — इसमें गुरु को क्या कहा गया है?इस दोहे में गुरु को 'कृपा सिंधु' (कृपा का समुद्र) और 'नररूप हरि' (मनुष्य रूप में साक्षात् भगवान विष्णु) कहा गया है। गुरु के वचनों को महामोह रूपी अन्धकार नष्ट करने वाली सूर्य-किरणें बताया गया।#बालकाण्ड#गुरु वन्दना#नररूप हरि
पूजा विधिकामिका एकादशी पर भगवान विष्णु के किस स्वरूप (श्रीधर) की पूजा होती है?इस दिन भगवान विष्णु के 'श्रीधर' (हृदय में लक्ष्मी को धारण करने वाले) स्वरूप की पूजा होती है। इनकी पूजा से अपार सुख, शांति और ऐश्वर्य मिलता है।#श्रीधर स्वरूप#भगवान विष्णु#ऐश्वर्य
पौराणिक कथाभगवान विष्णु 4 महीने पाताल लोक में क्यों रहते हैं (राजा बलि की कथा)?वामन अवतार के समय राजा बलि की दानवीरता से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उसे वरदान दिया था कि वे 4 महीने (चातुर्मास) पाताल लोक में उसके महल के पहरेदार बनकर रहेंगे।#राजा बलि#पाताल लोक#वामन अवतार
दार्शनिक आधारक्या भगवान विष्णु सच में 4 महीने के लिए सोते हैं (योगनिद्रा)?नहीं, यह कोई साधारण नींद नहीं है बल्कि 'योगनिद्रा' है। इस दौरान भगवान अपनी शक्तियों को प्रकृति के विकास (बारिश और हरियाली) में लगा देते हैं।#योगनिद्रा#भगवान विष्णु#क्षीरसागर
पूजा विधिवरूथिनी एकादशी पर विष्णु जी के किस अवतार की पूजा होती है?इस दिन भगवान विष्णु के 'वराह अवतार' की पूजा होती है, जिन्होंने पृथ्वी को प्रलय से बचाया था। पूजा में पंचामृत से स्नान कराकर पीले फूल, पीले फल, चंदन और सफेद तिल चढ़ाने चाहिए।#वराह अवतार#विष्णु पूजा#षोडशोपचार
पौराणिक कथाएँघंटाकर्ण कौन थे और उन्होंने कानों में घंटे क्यों बाँधे थे?घंटाकर्ण शिव का परम भक्त पिशाच था जो विष्णु से घृणा करता था। विष्णु का नाम न सुनने के लिए कानों में घंटे लटकाए — नाम सुनते ही सिर हिलाता, घंटों की ध्वनि नाम को दबा देती। इसी से नाम 'घंटाकर्ण' पड़ा।#घंटाकर्ण#शिवगण#पिशाच
पूजा एवं उपासनाविष्णु पूजा की षोडशोपचार विधि क्या है?षोडशोपचार पूजन में भगवान विष्णु को सोलह सेवाएँ अर्पित की जाती हैं — आसन, स्वागत, अर्घ्य, पाद्य, आचमन, मधुपर्क, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, परिक्रमा और मंत्रपुष्पांजलि।#षोडशोपचार#विष्णु पूजा#सोलह उपचार
पौराणिक कथाएँनारद मुनि ने किसे श्राप दिया था?नारद मुनि ने भगवान विष्णु को श्राप दिया था कि उन्हें पत्नी का वियोग सहना पड़ेगा — जो त्रेतायुग में राम-सीता वियोग के रूप में फलित हुआ। नारद को स्वयं दक्ष प्रजापति का श्राप था कि वे कहीं रुक नहीं सकते।#नारद मुनि#श्राप#विष्णु
तीर्थ एवं धामबदरीनाथ मंदिर के द्वार कब खुलते हैं?बदरीनाथ के कपाट हर वर्ष वसंत पंचमी को टिहरी राजमहल में पंचांग गणना के बाद घोषित तिथि पर अप्रैल-मई में खुलते हैं और नवंबर में बंद होते हैं। 2026 में कपाट 23 अप्रैल 2026 को प्रातः 6:15 बजे खुलेंगे।#बदरीनाथ#कपाट#चारधाम यात्रा
हिंदू पंचांगपुरुषोत्तम मास कब आता है और क्यों?पुरुषोत्तम मास लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है — जब चंद्र और सौर वर्ष के अंतर की भरपाई के लिए एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है। जिस माह सूर्य संक्रांति न हो, वह अधिकमास है। पौराणिक कथा के अनुसार स्वयं श्रीकृष्ण ने इसे अपना नाम देकर श्रेष्ठ बनाया।#पुरुषोत्तम मास#अधिकमास#मलमास
व्रत एवं त्योहारअधिकमास में पूजा का क्या महत्व है?अधिकमास में पूजा-जप-दान का फल दस गुना मिलता है क्योंकि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण इस मास के अधिपति हैं। विष्णु-कृष्ण पूजा, दीपदान, भागवत पाठ और तीर्थ यात्रा विशेष रूप से फलदायी हैं। मांगलिक कार्य वर्जित हैं लेकिन साधना के लिए यह मास सर्वश्रेष्ठ है।#अधिकमास#पुरुषोत्तम मास#मलमास
देवी-देवता पूजनकमल का फूल किस देवता को चढ़ाते हैं?कमल मुख्यतः माता लक्ष्मी को चढ़ाया जाता है, जो कमल पर विराजती हैं। भगवान विष्णु, सरस्वती और दुर्गा को भी कमल प्रिय है। नील कमल माता दुर्गा को विशेष रूप से अर्पित होता है।#कमल#फूल#देवता
देवी-देवता एवं उपासनाविष्णु के 1000 नामों में सबसे शक्तिशाली कौन सेविष्णु के 1000 नामों में सर्वाधिक शक्तिशाली हैं — विष्णु, नारायण, जनार्दन, गोविंद, माधव, पुरुषोत्तम, अच्युत, वासुदेव, हृषीकेश और अनंत। ये नाम महाभारत के अनुशासन पर्व में संकलित हैं।#विष्णु सहस्रनाम#विष्णु के नाम#नारायण
देवता पूजानरसिंह भगवान पूजा कैसे करेंविष्णु चौथा अवतार, प्रह्लाद रक्षक। नरसिंह जयंती (वैशाख शुक्ल 14)। सायंकाल पूजा। नरसिंह मंत्र और कवच (भागवत) अत्यंत शक्तिशाली। भय, शत्रु, तंत्र से सर्वोत्तम रक्षा।#नरसिंह#पूजा#विधि
स्तोत्र एवं पाठनारायण कवच पढ़ने से क्या लाभभागवत 6.8; विष्णु सर्वशक्ति कवच। सर्वरक्षा, शत्रु नाश, अजेय। शास्त्रीय आधार सबसे प्रबल। ~15-20 min। शत्रु/तंत्र=सर्वप्रभावी।#नारायण कवच#विष्णु#भागवत
तीर्थ यात्राबद्रीनाथ यात्रा के नियममई-नवंबर। ऑनलाइन पंजीकरण। ~3,133m ऊंचाई। तप्त कुंड→दर्शन। ऋषिकेश→300km।#बद्रीनाथ#नियम#विष्णु
पंचांग एवं कैलेंडरअधिक मास में कौन से पुण्य कर्म करेंपुरुषोत्तम मास पुण्य = कई गुना। विष्णु भक्ति (गीता/सहस्रनाम), दान (अन्न/वस्त्र/गो), व्रत, तीर्थ स्नान, भागवत कथा, तुलसी पूजा। शुभ कार्य वर्जित, पर पुण्य = अनंत।#अधिक मास#पुण्य#कर्म
रुद्राक्षदस मुखी रुद्राक्ष विष्णु जी संबंध10 मुखी = विष्णु/दशावतार। सर्वरक्षा, बुरी नजर, कानूनी विजय, सर्वग्रह शमन। 'ॐ ह्रीं नमः'। ₹500-5,000।#दस मुखी#विष्णु#दशावतार
पौराणिक कथागजेंद्र मोक्ष की कथा का आध्यात्मिक संदेशगजेंद्र (जीवात्मा) को मगरमच्छ (संसार बंधन) पकड़ता है। अपनी शक्ति, परिवार — सब असफल। अंत में पूर्ण शरणागति ('ॐ नमो भगवते') → विष्णु तुरंत आए, मुक्त किया। शिक्षा: अहंकार त्यागकर पूर्ण समर्पण ही एकमात्र मोक्ष मार्ग।#गजेंद्र मोक्ष#विष्णु#शरणागति
पूजा विधिशालिग्राम की सेवा रोज करनी जरूरी है या नहींशालिग्राम की नित्य सेवा अनिवार्य है — यह साक्षात् विष्णु का स्वरूप है। प्रतिदिन स्नान, तुलसी दल, भोग और दीपक आवश्यक। उपेक्षा दोषपूर्ण है। नित्य सेवा संभव न हो तो मंदिर/योग्य परिवार को सौंपें।#शालिग्राम#विष्णु#नित्य पूजा
व्रत विधिपूर्णिमा पर सत्यनारायण पूजा करने का क्या विधान है?सत्यनारायण: पूर्णिमा=शुभ तिथि, विष्णु सत्य स्वरूप। विधि: षोडशोपचार→कथा (5 अध्याय, अनिवार्य)→आरती→प्रसाद (शीरा+केला)। प्रसाद अस्वीकार न करें। अवसर: नया कार्य, गृह प्रवेश, मनोकामना। सरलतम गृहस्थ पूजा।#सत्यनारायण#पूर्णिमा#विष्णु
व्रत विधिकार्तिक मास में कार्तिक स्नान का क्या विशेष लाभ है?कार्तिक स्नान: सर्वाधिक पुण्य मास (पद्म पुराण), विष्णु प्रिय (श्रावण=शिव), ब्रह्म मुहूर्त ठंडा जल=तप, तुलसी+दीपदान। ब्रह्म मुहूर्त→स्नान→तुलसी→विष्णु जप→दीपदान। 30 दिन निरंतर। पाप क्षय+मोक्ष।#कार्तिक स्नान#कार्तिक मास#ब्रह्म मुहूर्त
मंदिर रहस्यमंदिर में चांदी का छत्र चढ़ाने का क्या महत्व है?छत्र: राजसी सम्मान (भगवान = ब्रह्माण्ड राजा), रक्षा प्रतीक, चाँदी = चन्द्र (शीतलता), वामन अवतार सम्बंध। 'छत्रदानात् सुखं लोके' = इहलोक+परलोक सुख। अत्यंत पुण्यदायी दान।#छत्र#चांदी#राजसी सम्मान
त्योहार पूजाओणम में विष्णु पूजा कैसे करें?ओणम: केरल, चिंगम मास (10 दिन)। वामन-बलि कथा। विधि: पूक्कलम (पुष्प रंगोली) → त्रिक्काक्करप्पन (वामन) स्थापना-पूजन → ओणसद्या (26+ व्यंजन शाकाहारी भोज) → 'ॐ नमो भगवते वामनाय।' बलि राजा = दानवीरता। सर्वधर्म पर्व।#ओणम#केरल#वामन-बलि
व्रत विधिपरमा एकादशी का व्रत किस उद्देश्य से रखें?परमा एकादशी: अधिक/पुरुषोत्तम मास शुक्ल एकादशी (2.5-3 वर्ष में एक बार)। उद्देश्य: सर्वपाप नाश, सभी एकादशियों का सम्मिलित पुण्य, मोक्ष कामना। अधिक मास = पुरुषोत्तम (विष्णु) मास — सर्व पुण्य कर्म अनेकगुना फल।#परमा एकादशी#अधिक मास#पुरुषोत्तम मास
व्रत विधिअनंत चतुर्दशी पर अनंत धागा बांधने की विधि क्या है?अनंत धागा: हल्दी रंगा सूत/रेशम → 14 गाँठ (प्रति गाँठ 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय') → विष्णु पूजन → 'अनन्त संसारमहासमुद्रे...' मंत्र → पुरुष दाहिने, स्त्री बाएँ हाथ → 14 वर्ष व्रत → उद्यापन। 14 गाँठ = 14 भुवन।#अनंत चतुर्दशी#अनंत सूत्र#14 गाँठ
व्रत विधिवामन द्वादशी पर पूजा कैसे करें?वामन द्वादशी: भाद्रपद शुक्ल 12। वामन अवतार = बलि से तीन पग दान। विधि: वामन प्रतिमा → षोडशोपचार → 'ॐ नमो भगवते वामनाय' → कथा पाठ → छत्र (छाता) दान विशेष → ब्राह्मण बालक पूजन-भोज। दान = बलि की महिमा।#वामन द्वादशी#भाद्रपद शुक्ल द्वादशी#वामन अवतार
व्रत विधिप्रबोधिनी एकादशी पर विष्णु जागरण कैसे करें?प्रबोधिनी एकादशी: कार्तिक शुक्ल एकादशी। विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं। विधि: शंख-घण्टा से जगाएँ → 'उत्तिष्ठ गोविन्द...' मंत्र → षोडशोपचार → तुलसी विवाह → रात्रि जागरण → गन्ना-आँवला भोग। चातुर्मास समाप्ति, विवाह मुहूर्त आरम्भ।#प्रबोधिनी एकादशी#देवउठनी#कार्तिक शुक्ल एकादशी
व्रत विधिहरिशयनी एकादशी पर विष्णु पूजा कैसे करें?हरिशयनी एकादशी: आषाढ़ शुक्ल एकादशी। विष्णु योगनिद्रा आरम्भ, चातुर्मास प्रारम्भ (4 माह शुभ कार्य वर्जित)। विधि: विष्णु शयन सज्जा → षोडशोपचार → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' 1008 जप → चातुर्मास संकल्प → दान। प्रबोधिनी तक विष्णु सोते हैं।#हरिशयनी एकादशी#देवशयनी#चातुर्मास
व्रत विधिविजया एकादशी व्रत कैसे रखें?विजया एकादशी: फाल्गुन कृष्ण एकादशी। श्रीराम ने लंका विजय से पूर्व रखी थी। विजय प्रदायिनी। विधि: दशमी शाम भोजन → एकादशी निर्जला/फलाहार → विष्णु पूजा-जप → रात्रि जागरण → द्वादशी पारण। कोर्ट/परीक्षा/प्रतिस्पर्धा हेतु विशेष।#विजया एकादशी#फाल्गुन कृष्ण एकादशी#विजय प्राप्ति
व्रत विधिमोहिनी एकादशी का क्या विशेष महत्व है?मोहिनी एकादशी: वैशाख शुक्ल एकादशी। विशेष: विष्णु मोहिनी अवतार दिवस (समुद्र मंथन)। मोह-माया नाश। मेरुपर्वत सम पाप क्षय। सहस्र गोदान फल। कथा: धृष्टबुद्धि → कौण्डिन्य ऋषि → व्रत → विष्णुधाम। वर्ष की श्रेष्ठतम एकादशियों में।#मोहिनी एकादशी#वैशाख शुक्ल एकादशी#मोहिनी अवतार
एकादशीकामिका एकादशी व्रत कैसे रखेंकामिका एकादशी: श्रावण कृष्ण एकादशी। दशमी एक-समय भोजन → एकादशी निराहार/फलाहार → विष्णु पूजा (तुलसी विशेष) → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' → कथा → रात्रि जागरण → द्वादशी पारण। तुलसी = सहस्र गोदान पुण्य। शिव+विष्णु कृपा।#कामिका एकादशी#श्रावण#विष्णु
एकादशीपुत्रदा एकादशी व्रत कैसे रखेंपुत्रदा एकादशी: श्रावण/पौष शुक्ल एकादशी = सन्तान प्राप्ति हेतु। निराहार/फलाहार → विष्णु/बालकृष्ण पूजा → सन्तान गोपाल मंत्र → कथा → जागरण → द्वादशी पारण। कथा: सन्तानहीन राजा महीजित को व्रत से पुत्र प्राप्ति। दम्पति साथ करें।#पुत्रदा एकादशी#श्रावण#सन्तान