कुंडली ज्ञानकुंडली में संन्यास योग कैसे दिखता है?4+ ग्रह एक भाव, शनि+चंद्र(विरक्ति), केतु 1/9/12(मोक्ष), गुरु+केतु(ज्ञान+वैराग्य), 12वाँ शुभ। संन्यास योग≠संन्यास अनिवार्य — आध्यात्मिक रुचि/ध्यान प्रवृत्ति।#संन्यास योग#वैराग्य#कुंडली
लोकमहर्लोक का वातावरण कैसा है?महर्लोक का वातावरण तपस्या, वैराग्य और यज्ञीय ऊर्जा से स्पंदित है। यहाँ विशुद्ध सत्त्वगुण की प्रधानता है। रोग, शोक, थकावट और भूख का पूर्णतः अभाव है।#महर्लोक#वातावरण#तपस्या
शिव तत्व दर्शनशिव का वास श्मशान में क्यों बताया गया है शिव पुराण में क्या लिखा हैशिव का श्मशान-वास परम वैराग्य, मृत्यु की स्वीकृति और अहंकार-नाश का प्रतीक है। श्मशान जीवन का परम सत्य दर्शाता है। शिव काल के अधिपति हैं इसलिए काल के घर श्मशान में रहते हैं — यही शिव पुराण का दर्शन है।#शिव श्मशान#वैराग्य#मृत्यु स्वीकृति
शिव महिमाशिव जी व्याघ्र चर्म यानी बाघ की खाल क्यों पहनते हैं?शिव पुराण के अनुसार दारुकवन में ऋषियों ने क्रोध में बाघ उत्पन्न किया जो शिव को मारने आया, लेकिन शिव ने उसे क्षण भर में मार डाला और उसकी खाल अपने शरीर पर लपेट ली। यह अहंकार और वासना पर विजय का प्रतीक है।#व्याघ्र चर्म#बाघ की खाल#दारुकवन
शिव पूजा नियमशिवलिंग पर हल्दी क्यों नहीं चढ़ाई जाती, इसका कारण बताएं?शिवलिंग पर हल्दी वर्जित। कारण: हल्दी = स्त्री सौभाग्य/सौंदर्य प्रतीक, शिव = वैरागी। हल्दी = विष्णु/बृहस्पति से संबंधित (पीतांबर)। रसोई सामग्री, शिव श्मशानवासी। शिवलिंग पर चंदन, भस्म या केसर लगाएं। पार्वती प्रतिमा पर हल्दी स्वीकार्य।#हल्दी#शिवलिंग#निषेध
शिव मंदिरमहाकालेश्वर भस्म आरती में श्मशान भस्म का उपयोग क्यों होता है?प्राचीन: श्मशान भस्म — शिव = श्मशानवासी, मृत्यु विजयी, वैराग्य संदेश। वर्तमान: श्मशान भस्म का उपयोग नहीं — कपिला गाय गोबर + 6 वृक्ष लकड़ी + कपूर-गुगल से तैयार। भस्म प्रकार: श्रौत, स्मार्त, लौकिक।#श्मशान भस्म#महाकालेश्वर#भस्म आरती
लोकयोग साधक मृत्यु के बाद सिद्धलोक में क्यों जाते हैं?जो योग साधक पूर्ण वैराग्य नहीं पा सके वे मृत्यु के बाद अपनी सिद्धियों के फलस्वरूप भुवर्लोक के सर्वोच्च स्तर सिद्धलोक में जन्म लेते हैं।#योग साधक#सिद्धलोक#भुवर्लोक
शिव महिमाशिव जी शरीर पर भस्म क्यों लगाते हैं?शिव जी भस्म इसलिए लगाते हैं क्योंकि वे मृत्यु के स्वामी हैं और भस्म शरीर की नश्वरता का बोध कराती है। एक कथा के अनुसार सती के भस्म होने के बाद उन्होंने उसे अपने शरीर पर लगाया। भस्म पाप-नाशक, वैराग्य की प्रतीक और उनका श्रृंगार भी है।#शिव भस्म#चिताभस्म#भोलेनाथ
तंत्र साधनाअघोर मंत्र और उनके आध्यात्मिक लाभअघोर मंत्र का अर्थ है हर वस्तु में शिव को देखना। 'ॐ अघोरेभ्यो...' मंत्र के जप से द्वैत भाव, मृत्यु का भय और पाप भस्म होते हैं तथा साधक को गहरा वैराग्य और आत्मज्ञान प्राप्त होता है।#अघोर#शिव#वैराग्य
महादेव का वरमहादेव ने ब्रह्मा को कौन-कौन से वर दिए?महादेव ने ब्रह्मा को दिव्य योग, महान् कीर्ति, ऐश्वर्य, ज्ञानसम्पदा और वैराग्य प्रदान किया।#महादेव#ब्रह्मा#दिव्य योग
साधु और संतजितेन्द्रिय व्यक्ति कैसा होता है?जो इन्द्रिय-विषयों या ऐश्वर्यों की अप्राप्ति पर क्रोध नहीं करता और प्राप्ति पर हर्षित नहीं होता, वह जितात्मा है।#जितेन्द्रिय#इन्द्रिय संयम#ऐश्वर्य
मुक्ति और पाशुपत योगपरमेश्वर की कृपा से क्या-क्या सुलभ होता है?परमेश्वर की कृपा से धर्म, ऐश्वर्य, ज्ञान, वैराग्य और मोक्ष सुलभ हो जाते हैं।#परमेश्वर कृपा#धर्म#ऐश्वर्य
शैव पद और वैराग्यसिद्धियों का त्याग करने से महेश्वर कैसे प्रसन्न होते हैं?चित्त को विषयभोगों से हटाकर विघ्नरूप ब्राह्म ऐश्वर्यों का त्याग करने से महेश्वर प्रसन्न होते हैं।#सिद्धि त्याग#महेश्वर प्रसन्न#वैराग्य
शैव पद और वैराग्यगुणवैतृष्ण्य क्या है?पुरुष में वितृष्णा नाम से प्रसिद्ध भाव को गुणवैतृष्ण्य कहा गया है।#गुणवैतृष्ण्य#वितृष्णा#वैराग्य
शैव पद और वैराग्यविषय भोगों को नश्वर क्यों समझना चाहिए?विषयभोग भय उत्पन्न करने वाले और अवश्य नाशवान हैं, इसलिए उनका अश्रद्धा से त्याग करना चाहिए।#विषय भोग#नश्वरता#वैराग्य
शैव पद और वैराग्यवैराग्य से सिद्धियों का त्याग कैसे किया जाता है?सिद्धियों को समाधि में विघ्न मानकर परम वैराग्य से रोकना और विषयभोगों की नश्वरता जानकर त्यागना चाहिए।#वैराग्य#सिद्धि त्याग#औपसर्गिक सिद्धि
शैव पद और वैराग्यसिद्धियाँ समाधि में विघ्न क्यों बनती हैं?चौंसठ गुण व्यवहार में सिद्धि कहे जाते हैं, पर समाधि में वही उपसर्ग यानी विघ्न बन जाते हैं।#सिद्धि#समाधि#उपसर्ग
उपसर्ग और सिद्धियाँअणिमा आदि सिद्धियाँ कब मिलती हैं?प्रतिभा आदि स्वल्प सिद्धियों के आकर्षण से मुक्त मुनि को अणिमा आदि सिद्धियाँ अभिलषित सिद्धि देती हैं।#अणिमा#सिद्धि#स्वल्प सिद्धि
उपसर्ग और सिद्धियाँछोटी सिद्धियों से बचना क्यों जरूरी है?प्रतिभा आदि छह स्वल्प सिद्धियाँ आकर्षक हैं, पर उनके आकर्षण से मुक्त मुनि को आगे अणिमादि सिद्धियाँ मिलती हैं।#स्वल्प सिद्धि#प्रतिभा#श्रवणा
योग बाधाएँदौर्मनस्य क्या है?तमोगुण और रजोगुण से मिले मन में उत्पन्न दूषित भाव दौर्मनस्य है; इसे परम वैराग्य से नियंत्रित करना चाहिए।#दौर्मनस्य#दुर्मन#तमोगुण
श्रीमद्भागवतदुनियावी सुख के पीछे भागना क्यों ठीक नहीं?नारदजी कहते हैं कि विषय-सुख कर्मफल से अपने आप मिलते हैं, जैसे दुख मिल जाता है; बुद्धिमान को परम लक्ष्य के लिए प्रयत्न करना चाहिए।#दुनियावी सुख#वैराग्य#कर्मफल
शौच और नियमअन्तःशौच कैसे होता है?वैराग्यरूपी मृत्तिका का लेपन और आत्मज्ञानरूपी जल में स्नान अन्तःशौच कहा गया है।#अन्तःशौच#वैराग्य#आत्मज्ञान
शौच और नियमयोग में शुद्धि का सही अर्थ क्या है?योग में शुद्धि बाह्य और आंतरिक दोनों है, पर आंतरिक शुचिता श्रेष्ठ बताई गई है।#शुद्धि#शौच#आंतरिक शुचिता
वैराग्यअमृतत्व पाने का मार्ग क्या बताया गया है?अमृतत्व त्याग से प्राप्त बताया गया है; कर्म, संतान या द्रव्य से नहीं।#अमृतत्व#त्याग#वैराग्य
वैराग्यविषय भोगों से मन क्यों नहीं भरता?विषयों के भोग से इन्द्रियों की तृप्ति नहीं होती और कामना अग्नि की तरह बढ़ती जाती है।#विषय भोग#इन्द्रिय तृप्ति#वैराग्य
माहेश्वर योगबड़े योगी भी स्वर्ग और नरक में क्यों जाते हैं?बड़े योगी भी नानाविध कर्म करके अपने कर्मानुसार स्वर्ग और नरक में जाते हैं।#योगी#कर्म#स्वर्ग
श्रीमद्भागवतशुकदेव जी इतने बड़े योगी क्यों माने जाते हैं?वे समदर्शी, भेदभावरहित, परमात्मा में स्थित और इतनी विरक्त दृष्टि वाले थे कि स्त्री-पुरुष भेद भी नहीं देखते थे।#शुकदेव योगी#वैराग्य#समदर्शी
शंकर महिमाधर्म, ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्य कैसे मिलते हैं?धर्म, ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्य शिवजी की कृपा से प्राप्त होते हैं।#धर्म#ज्ञान#वैराग्य
शंकर महिमासदाशिव की कृपा से क्या संभव होता है?सदाशिव की कृपा से सत्-असत् वस्तु-विवेक और विषयों का त्याग एक साथ संभव होता है।#सदाशिव#कृपा#आत्मानात्म विवेक
शंकर महिमाकेवल विषय त्याग अस्थायी क्यों है?आत्मानात्मविवेक रूप विशिष्ट ज्ञान के बिना किया गया क्षणिक विषयत्याग ज्ञानरहित और अस्थायी बताया गया है।#विषय त्याग#आत्मानात्म विवेक#ज्ञान
शंकर महिमावैराग्य से शिव दर्शन कैसे मिलता है?स्वल्प विषयों का त्याग करके प्राणी सांसारिक भय से मुक्त होता है, फिर वैराग्य पाकर अंत में शिव दर्शन प्राप्त करता है।#वैराग्य#शिव दर्शन#विषय त्याग
शंकर महिमाशिव सबका कल्याण कैसे करते हैं?शिव दयार्द्र होकर प्राणियों का कल्याण करते हैं; उनकी आत्मा बिना प्रयत्न कल्याण करने वाली कही गई है।#शिव#कल्याण#शंकर
श्रीमद्भागवतभक्ति से ज्ञान और वैराग्य कैसे आते हैं?भगवान वासुदेव में भक्ति लगते ही अनन्य प्रेम से निष्काम ज्ञान और वैराग्य शीघ्र प्रकट होते हैं।#भक्ति#ज्ञान#वैराग्य
श्रीमद्भागवतभागवत सुनने से ज्ञान वैराग्य भक्ति कैसे बढ़ते हैं?विधिपूर्वक सप्ताह श्रवण के अंत में ज्ञान, वैराग्य और भक्ति को बड़ी पुष्टि मिली और वे तरुण होकर सबको आकर्षित करने लगे।#ज्ञान#वैराग्य#भक्ति
श्रीमद्भागवतशरीर नश्वर है तो क्या करना चाहिए?शरीर नश्वर है, इसलिए उससे अविनाशी फल कमाने के लिये भागवत कथा सुननी और हृदय में उतारनी चाहिए।#शरीर नश्वर#भागवत श्रवण#मुक्ति
श्रीमद्भागवतशरीर को नश्वर क्यों कहा गया है?शरीर को हड्डी, नस, मांस, रक्त, चर्म और मल-मूत्र का पात्र कहकर क्षणभंगुर और रोग-दुख से भरा बताया गया है।#शरीर#नश्वरता#वैराग्य
श्रीमद्भागवतगोकर्ण ने संसार को असार क्यों कहा?गोकर्ण ने संसार को दुखरूप, मोहक और क्षणभंगुर कहा; पुत्र, धन और शरीर को स्थायी मानना अज्ञान बताया।#संसार#गोकर्ण#वैराग्य
श्रीमद्भागवतगोकर्ण ने आत्मदेव को क्या समझाया?गोकर्ण ने आत्मदेव को संसार की असारता, पुत्र-धन के मोह का दुख, शरीर की नश्वरता और भजन-साधुसेवा का मार्ग समझाया।#गोकर्ण#आत्मदेव#वैराग्य
श्रीमद्भागवतकुपुत्र से क्या दुख होता है?धुंधुकारी के उदाहरण से कथा बताती है कि कुपुत्र धन, घर और माता-पिता की शांति नष्ट कर देता है और मोह को दुख में बदल देता है।#कुपुत्र#धुंधुकारी#आत्मदेव
श्रीमद्भागवतसंन्यासी ने पुत्र मोह छोड़ने को क्यों कहा?संन्यासी ने कहा कि कर्म की गति प्रबल है और पुत्र से सुख निश्चित नहीं; संतान के कारण सगर और अंग को भी दुख मिला।#पुत्र मोह#संन्यासी#आत्मदेव
श्रीमद्भागवतभागवत से ज्ञान वैराग्य कैसे बढ़ता है?भागवत के शब्द सुनने से ज्ञान-वैराग्य को बल मिलता है और उसका कष्ट मिटता है।#भागवत#ज्ञान#वैराग्य
श्रीमद्भागवतगीता पाठ से वैराग्य क्यों नहीं जागा?नारदजी ने गीता-पाठ किया, पर ज्ञान-वैराग्य पूरी तरह न जागे; सनकादि ने भागवत-कथा को फलरूप सार बताया।#गीता पाठ#वैराग्य#श्रीमद्भागवत
श्रीमद्भागवतवैराग्य कैसे लाएं?वैराग्य को बल देने वाला उपाय श्रीमद्भागवत का पारायण और भक्ति की स्थापना बताया गया है।#वैराग्य#ज्ञान#भक्ति
श्रीमद्भागवतज्ञान वैराग्य कैसे जगाएं?ज्ञान-वैराग्य को जगाने का सफल उपाय श्रीमद्भागवत पारायण बताया गया है।#ज्ञान#वैराग्य#भागवत पारायण
श्रीमद्भागवतभक्ति ज्ञान और वैराग्य कैसे बढ़ते हैं?भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की समस्या उठती है और समाधान का मार्ग श्रीमद्भागवत, भक्ति और भगवान के आश्रय की ओर जाता है।#भक्ति#ज्ञान#वैराग्य
लोकपरमहंस अवस्था क्या हैपरमहंस अवस्था आत्मज्ञान और पूर्ण वैराग्य की सर्वोच्च स्थिति है।#परमहंस#हंस अवतार#आत्मज्ञान
लोकविष्णु भक्त का धन भगवान क्यों छीन लेते हैं?भगवान विष्णु कभी-कभी भक्त की आसक्ति तोड़कर उसे केवल अपने चरणों का आश्रित बनाने के लिए धन हर लेते हैं।#विष्णु कृपा#धन हरण#वैराग्य
लोकतलातल लोक से वैराग्य का क्या संदेश मिलता है?तलातल बताता है कि वैराग्य के बिना भोग-सुख अस्थायी हैं और जन्म-मरण से मुक्ति नहीं देते।#तलातल#वैराग्य#भोग
लोकतलातल आध्यात्मिक अज्ञान का प्रतीक क्यों है?तलातल में ऐश्वर्य बहुत है, पर वैराग्य और ईश्वर-समर्पण का अभाव है, इसलिए यह आध्यात्मिक अज्ञान का प्रतीक है।#तलातल#आध्यात्मिक अज्ञान#माया
लोकतलातल के निवासियों में वैराग्य क्यों नहीं होता?माया, भोग-विलास और इंद्रिय सुखों की आसक्ति के कारण तलातल के निवासियों में वैराग्य नहीं होता।#तलातल#वैराग्य#भोग