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दिव्यास्त्र शस्त्र

दिव्यास्त्र क्या हैं, ब्रह्मास्त्र, पाशुपतास्त्र, सुदर्शन चक्र — पौराणिक अस्त्र-शस्त्र के प्रश्नोत्तर।

497प्रश्नोत्तर
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भार्गवास्त्र और इंद्रास्त्र में क्या संबंध है?

भार्गवास्त्र को इंद्रास्त्र का उन्नत और अधिक शक्तिशाली संस्करण माना जाता है जिसे परशुराम ने निर्मित किया था।

दिव्यास्त्रभार्गवास्त्रइंद्रास्त्र
प्र

इंद्रास्त्र का प्रतिकार क्या था?

इंद्रास्त्र का प्रतिकार दो तरीकों से होता था — पहला, दूसरा इंद्रास्त्र चलाकर दोनों को शांत करना, और दूसरा, भार्गवास्त्र या ब्रह्मास्त्र जैसे अधिक शक्तिशाली अस्त्र से रोकना।

दिव्यास्त्रइंद्रास्त्रप्रतिकार
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इंद्रास्त्र के प्रयोग से क्या होता था?

इंद्रास्त्र के प्रयोग से आकाश बाणों से भर जाता था। ये दिव्य ऊर्जा से भरे बाण आग उगलते या बिजली की तरह चमकते हुए शत्रु सेना पर गिरते थे।

दिव्यास्त्रइंद्रास्त्रप्रभाव
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इंद्रास्त्र का कोई भौतिक स्वरूप होता था या नहीं?

इंद्रास्त्र का कोई भौतिक स्वरूप नहीं था। योद्धा साधारण बाण को मंत्रों से अभिमंत्रित करता था और धनुष से छूटते ही वह हजारों दिव्य बाणों में बदल जाता था।

दिव्यास्त्रइंद्रास्त्रभौतिक स्वरूप
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इंद्रास्त्र और वज्र में क्या अंतर है?

वज्र दधीचि की हड्डियों से बना शस्त्र है जो एक बिंदु पर प्रहार करता है, जबकि इंद्रास्त्र मंत्रों से जागृत अस्त्र है जो बड़े क्षेत्र में हजारों बाणों की वर्षा करता है।

दिव्यास्त्रइंद्रास्त्रवज्र
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इंद्रास्त्र का अधिष्ठाता देवता कौन है?

इंद्रास्त्र के अधिष्ठाता देवता देवराज इंद्र हैं जो वर्षा, तूफान और युद्ध के देवता हैं। यह अस्त्र उनकी प्राकृतिक शक्तियों का सैन्य रूपांतरण है।

दिव्यास्त्रइंद्रास्त्रइंद्र
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इंद्रास्त्र किस श्रेणी का अस्त्र था?

इंद्रास्त्र सामरिक महत्व के अस्त्रों की श्रेणी में था। यह प्रलयंकारी नहीं बल्कि युद्धभूमि पर दुश्मन सेनाओं को नष्ट करने वाला दिव्य तोपखाना था।

दिव्यास्त्रइंद्रास्त्रसामरिक
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दिव्यास्त्रों की उत्पत्ति कैसे हुई?

अहिर्बुध्न्य संहिता के अनुसार भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र की शक्ति से धर्म की स्थापना के लिए सौ से अधिक दिव्यास्त्रों का निर्माण किया था।

दिव्यास्त्रदिव्यास्त्रउत्पत्ति
प्र

शस्त्र और अस्त्र में क्या अंतर है?

शस्त्र शारीरिक बल से चलाए जाते थे जैसे तलवार और भाला, जबकि अस्त्र मंत्रों से जागृत होते थे जिनमें देवता अपनी दिव्य शक्ति भरते थे।

दिव्यास्त्रशस्त्रअस्त्र
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इंद्रास्त्र क्या है?

इंद्रास्त्र देवराज इंद्र का दिव्यास्त्र है जो मंत्रों से जागृत होकर आकाश से बाणों की वर्षा करता था और दुश्मन सेनाओं को नष्ट करने में सक्षम था।

दिव्यास्त्रइंद्रास्त्रदिव्यास्त्र
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द्रोणाचार्य के पास कौन-कौन से अस्त्र थे?

द्रोणाचार्य के पास परशुराम से प्राप्त संपूर्ण अस्त्र-शस्त्र ज्ञान था — ब्रह्मास्त्र, ब्रह्मशिरास्त्र, नारायणास्त्र, प्रस्वापनास्त्र, आंगिरस धनुष सहित सभी प्रमुख दिव्यास्त्र।

अस्त्र शस्त्रद्रोणाचार्यअस्त्र
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राम ने जयंत पर कौन सा अस्त्र चलाया था?

राम ने जयंत पर घास का एक तिनका ब्रह्मास्त्र से अभिमंत्रित करके चलाया। जयंत तीनों लोकों में भागा पर शरण नहीं मिली — अंत में राम की शरण में आया। राम ने क्षमा किया, एक आँख दंड में ली।

अस्त्र शस्त्रजयंतब्रह्मास्त्र
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हिंदू धर्म में युद्ध के क्या नियम थे?

युद्ध नियम — रथी vs रथी, पैदल vs पैदल, निरस्त्र पर वार नहीं, सोए-असावधान पर नहीं, एक पर अनेक नहीं, स्त्री-बालक-पलायनकर्ता पर नहीं। सूर्यास्त पर युद्ध बंद।

अस्त्र शस्त्रयुद्ध नियमधर्मयुद्ध
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नरकासुर कौन था और उसे भौमासुर क्यों कहते हैं?

नरकासुर भगदत्त का पिता था जिसका जन्म भूमि देवी और विष्णु के वराह अवतार से हुआ था। इसीलिए उसे 'भौमासुर' यानी 'भूमि का पुत्र' कहते हैं।

दिव्यास्त्रनरकासुरभौमासुर
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भगदत्त और भौमास्त्र के बीच भ्रम क्यों पैदा होता है?

भ्रम इसलिए होता है क्योंकि नरकासुर को भौमासुर (भूमि का पुत्र) कहते थे। लोग सोचते हैं उसके पुत्र भगदत्त ने भौमास्त्र चलाया होगा, लेकिन वास्तव में उसने वैष्णवास्त्र चलाया।

दिव्यास्त्रभगदत्तभौमास्त्र
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भगदत्त ने अर्जुन पर कौन सा अस्त्र चलाया और क्या हुआ?

भगदत्त ने वैष्णवास्त्र चलाया। यह इतना शक्तिशाली था कि कृष्ण को आगे आकर इसे अपनी छाती पर झेलना पड़ा जहाँ यह वैजयंती माला बन गया।

दिव्यास्त्रभगदत्तवैष्णवास्त्र
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क्या भगदत्त ने अर्जुन पर भौमास्त्र चलाया था?

नहीं, यह एक भ्रम है। भगदत्त ने अर्जुन पर भौमास्त्र नहीं बल्कि वैष्णवास्त्र चलाया था जो भगवान विष्णु का व्यक्तिगत अस्त्र था।

दिव्यास्त्रभगदत्तभौमास्त्र
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अर्जुन ने भौमास्त्र का प्रयोग कहाँ किया?

अर्जुन ने भौमास्त्र का प्रयोग किसी युद्ध में नहीं बल्कि अपने दिव्यास्त्रों के प्रदर्शन के दौरान किया था।

दिव्यास्त्रअर्जुनभौमास्त्र
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महाभारत काल में भौमास्त्र का ज्ञाता कौन था?

महाभारत काल में महान धनुर्धर अर्जुन भौमास्त्र के ज्ञाता थे। यह अस्त्र उनके दिव्यास्त्र संग्रह का हिस्सा था।

दिव्यास्त्रभौमास्त्रमहाभारत
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भौमास्त्र के प्रतिकार के लिए श्रीराम ने क्या सोचा?

भौमास्त्र के प्रतिकार के लिए श्रीराम को ब्रह्मशिरा जैसे और भी विनाशकारी महाअस्त्र का प्रयोग करने पर विचार करना पड़ा, जो इसकी उच्च श्रेणी का प्रमाण है।

दिव्यास्त्रभौमास्त्रप्रतिकार
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भौमास्त्र के प्रयोग से युद्धभूमि पर क्या हुआ?

भौमास्त्र के प्रयोग से युद्धभूमि कांप उठी, पत्थर खिसकने लगे और लावा निकलने का संकट आया। पूरी सेना का आगे बढ़ना असंभव हो गया।

दिव्यास्त्रभौमास्त्रयुद्धभूमि
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लव-कुश ने भौमास्त्र क्यों चलाया?

अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को पकड़ने पर जब अयोध्या की विशाल सेना लव-कुश पर भारी पड़ने लगी तब उन्होंने रक्षात्मक उपाय के रूप में भौमास्त्र चलाया।

दिव्यास्त्रलव कुशभौमास्त्र
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रामायण में भौमास्त्र का प्रयोग किसने और किस पर किया?

रामायण के उत्तर कांड में लव और कुश ने अश्वमेध यज्ञ के विवाद में अयोध्या की सेना (भरत, शत्रुघ्न, हनुमान के नेतृत्व में) पर भौमास्त्र का प्रयोग किया।

दिव्यास्त्रभौमास्त्रलव कुश
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भौमास्त्र को परम रणनीतिक हथियार क्यों कहते हैं?

भौमास्त्र पैरों के नीचे की धरती को ही हथियार बना देता है। यह बिना सीधे प्रहार किए सेनाओं को हरा सकता है इसलिए यह परम रणनीतिक हथियार है।

दिव्यास्त्रभौमास्त्ररणनीतिक
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भौमास्त्र की विध्वंसक शक्तियाँ क्या-क्या थीं?

भौमास्त्र पृथ्वी में दरारें पैदा कर सेनाओं को निगल सकता था। इसके प्रयोग से पत्थर खिसकते थे, धरती कांपती थी और लावा प्रकट होने का संकट होता था।

दिव्यास्त्रभौमास्त्रविध्वंसक शक्ति
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भौमास्त्र की सृजनात्मक शक्तियाँ क्या-क्या थीं?

भौमास्त्र की सृजनात्मक शक्तियाँ थीं — पृथ्वी में सुरंग बनाना, बहुमूल्य रत्न प्रकट करना, और उपजाऊ भूमि का निर्माण करना।

दिव्यास्त्रभौमास्त्रसृजनात्मक शक्ति
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भौमास्त्र का स्वरूप क्या था — बाण था या यंत्र?

भौमास्त्र को सामान्यतः मंत्र से चलाया जाने वाला बाण माना जाता है लेकिन एक वैकल्पिक मत इसे जटिल नक्काशी के लिए प्रयुक्त यंत्र भी बताता है।

दिव्यास्त्रभौमास्त्रस्वरूप
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भौमास्त्र अन्य दिव्यास्त्रों से अलग क्यों है?

भौमास्त्र खगोलीय नहीं बल्कि पार्थिव शक्ति का अस्त्र है जो पृथ्वी से जन्मा है। अन्य अस्त्र अग्नि-ऊर्जा से काम करते हैं जबकि यह भूगर्भीय शक्तियों से।

दिव्यास्त्रभौमास्त्रअनूठा
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भौमास्त्र की उत्पत्ति कैसे हुई?

भौमास्त्र की रचना स्वयं भूमि देवी (पृथ्वी माता) ने की थी। यह उनका उपहार नहीं बल्कि उनके अपने अस्तित्व और अधिकार क्षेत्र का ठोस विस्तार है।

दिव्यास्त्रभौमास्त्रउत्पत्ति
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भौमास्त्र क्या है?

भौमास्त्र पृथ्वी की शक्ति से जन्मा दिव्यास्त्र है जिसकी रचना भूमि देवी ने की। इसकी शक्तियाँ भूगर्भीय हैं — सुरंग बनाना, रत्न प्रकट करना और शत्रुओं को भूमि में समाना।

दिव्यास्त्रभौमास्त्रदिव्यास्त्र
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आग्नेयास्त्र किस देवता का अस्त्र है

आग्नेयास्त्र अग्निदेव का अस्त्र है। इसका प्रतिकार वारुणास्त्र (वरुणदेव का जल-अस्त्र) था। महाभारत के लगभग सभी प्रमुख योद्धाओं के पास यह अस्त्र था।

दिव्यास्त्रआग्नेयास्त्रअग्निदेव
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आग्नेयास्त्र क्या होता है

आग्नेयास्त्र चलाने पर आकाश से अग्नि-गोले बरसते हैं और शत्रु-सेना जलती है। इसे केवल वारुणास्त्र (जल-अस्त्र) से बुझाया जा सकता था। महाभारत के लगभग सभी महारथियों के पास यह था।

दिव्यास्त्रआग्नेयास्त्रअग्नि बाण
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कर्ण ने भार्गवास्त्र क्यों नहीं चलाया अर्जुन पर

प्रामाणिक ग्रंथों में 'भार्गवास्त्र भूलना' नहीं है — परशुराम का शाप ब्रह्मास्त्र-मंत्र पर था। 'भार्गवास्त्र भूलना' लोक-प्रचलित व्याख्या है। कर्ण ने वास्तव में भार्गवास्त्र पांडव-सेना पर चलाया था।

दिव्यास्त्रकर्ण भार्गवास्त्रपरशुराम श्राप
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भार्गवास्त्र और ब्रह्मास्त्र में कौन ज्यादा शक्तिशाली है

भार्गवास्त्र सेना-संहार में अधिक प्रभावशाली है; ब्रह्मास्त्र एकल लक्ष्य के लिए अमोघ है। दोनों की प्रकृति भिन्न है। पाशुपतास्त्र दोनों से श्रेष्ठ माना जाता है।

दिव्यास्त्रभार्गवास्त्र बनाम ब्रह्मास्त्रतुलना
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कर्ण को भार्गवास्त्र किसने दिया था

कर्ण को भार्गवास्त्र भगवान परशुराम ने दिया था — कर्ण ने ब्राह्मण वेश में शिक्षा ली थी। बाद में भेद खुला तो परशुराम ने शाप दिया कि सबसे जरूरी समय में विद्या भूल जाएगी।

दिव्यास्त्रभार्गवास्त्र कर्णपरशुराम शिक्षा
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भार्गवास्त्र किसने बनाया था

भार्गवास्त्र भगवान परशुराम (भार्गव) की अस्त्र-सिद्धि से उत्पन्न उनका अपना विशिष्ट दिव्यास्त्र है। यह उनके वंश-नाम 'भार्गव' पर आधारित है। शिव की शिक्षा और अपनी तपस्या से यह अस्त्र सिद्ध किया गया।

दिव्यास्त्रभार्गवास्त्र निर्माणपरशुराम
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भार्गवास्त्र क्या है

भार्गवास्त्र परशुराम (भृगु-वंशज/भार्गव) का विनाशकारी दिव्यास्त्र है जो एक साथ अनेक विध्वंसक अस्त्रों की वर्षा करता है। कर्ण ने इससे पांडव सेना की पूरी अक्षौहिणी नष्ट कर दी थी।

दिव्यास्त्रभार्गवास्त्रपरशुराम
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इंद्र ने कर्ण को वासवी शक्ति के बदले क्या लिया

इंद्र ने कर्ण से उनका दिव्य कवच-कुण्डल लिया जो जन्म से शरीर पर था और जिसके रहते कर्ण अजेय था। बदले में इंद्र ने वासवी शक्ति दी — जो केवल एक बार प्रयोग होती थी।

दिव्यास्त्रकवच कुण्डल दानइंद्र कर्ण विनिमय
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वासवी शक्ति एक ही बार क्यों चलाई जाती थी

वासवी शक्ति इंद्र का स्वयं का अस्त्र था। उन्होंने इसे कर्ण को एक बार-उपयोग की शर्त पर दिया था — प्रयोग के बाद यह इंद्र के पास लौट जाएगा। यही इसकी दिव्य सीमा थी।

दिव्यास्त्रवासवी शक्ति एक बारअस्त्र वापसी
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वासवी शक्ति घटोत्कच पर क्यों चलाई कर्ण ने

14वें दिन रात में घटोत्कच ने कौरव-सेना पर भीषण कहर बरपाया। दुर्योधन के अनुरोध और मित्र-धर्म के लिए कर्ण ने वासवी शक्ति घटोत्कच पर चलाई — घटोत्कच का वध हुआ और अर्जुन बच गया।

दिव्यास्त्रघटोत्कच वधकर्ण वासवी
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कर्ण ने वासवी शक्ति अर्जुन पर क्यों नहीं चलाई

कर्ण अर्जुन के लिए वासवी शक्ति बचाए हुए थे। श्रीकृष्ण ने रात को घटोत्कच को उतारा जो कौरव-सेना पर भीषण कहर बरपा रहा था। दुर्योधन के अनुरोध पर कर्ण को वासवी शक्ति घटोत्कच पर चलानी पड़ी।

दिव्यास्त्रवासवी शक्तिकर्ण अर्जुन
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कर्ण को वासवी शक्ति किसने दी थी

कर्ण को वासवी शक्ति देवराज इंद्र ने दी — कवच-कुण्डल के बदले में। कर्ण ने बिना माँगे यह दान किया था और इंद्र ने प्रसन्न होकर वासवी शक्ति प्रदान की।

दिव्यास्त्रवासवी शक्तिइंद्र
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वासवी शक्ति क्या है

वासवी शक्ति देवराज इंद्र का अमोघ और अचूक अस्त्र है जिसे कोई नहीं काट सकता। इसे केवल एक बार चलाया जा सकता था — एक बार चलाने पर यह इंद्र के पास लौट जाता था।

दिव्यास्त्रवासवी शक्तिइंद्रास्त्र
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नागपाश का प्रतिकार क्या है

नागपाश का एकमात्र प्रतिकार गरुड़देव हैं — कोई अस्त्र इसे नहीं तोड़ सकता। गरुड़ नागों के जन्मजात शत्रु हैं। उनके आते ही नाग भाग जाते हैं और नागपाश निष्प्रभावी हो जाता है।

दिव्यास्त्रनागपाश काटगरुड़
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गरुड़ ने नागपाश को कैसे तोड़ा

गरुड़ ने अपनी चोंच से राम-लक्ष्मण से लिपटे सभी नागों को एक-एक करके काट डाला। गरुड़ नागों के जन्मजात शत्रु हैं — उनकी उपस्थिति मात्र से नागपाश का प्रभाव समाप्त हो गया।

दिव्यास्त्रगरुड़नागपाश
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नागपाश से राम और लक्ष्मण कैसे मुक्त हुए

हनुमानजी ने जाना कि केवल गरुड़ ही नागपाश तोड़ सकते हैं। उन्होंने गरुड़ को लाया जिन्होंने चोंच से सभी नागों को काटकर नागपाश तोड़ा और राम-लक्ष्मण को मुक्त किया।

दिव्यास्त्रनागपाश मुक्तिगरुड़
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मेघनाद ने राम-लक्ष्मण पर नागपाश क्यों चलाया

जब मेघनाद के सभी अस्त्र विफल हो गए तब उसने अदृश्य होकर पीछे से नागपाश चलाया। दोनों भाई मूर्छित होकर मृत्यु की ओर बढ़ने लगे — वानर-सेना में हाहाकार मच गया।

दिव्यास्त्रमेघनाद नागपाशराम लक्ष्मण
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नागपाश मेघनाद को किसने दिया था

नागपाश मेघनाद को भगवान शिव की कृपा से वरदान में मिला था। यह ब्रह्मा-निर्मित अस्त्र था जिसे शिव ने मेघनाद की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर प्रदान किया था।

दिव्यास्त्रनागपाश दातामेघनाद
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नागपाश किसका अस्त्र था

नागपाश भगवान ब्रह्मा का निर्मित अस्त्र था जो मेघनाद (इंद्रजीत) को वरदान में मिला था। मेघनाद इसे अत्यंत कठिन स्थिति में ही प्रयोग करता था क्योंकि यह उसका सर्वाधिक घातक अस्त्र था।

दिव्यास्त्रनागपाशमेघनाद इंद्रजीत
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नागपाश क्या है

नागपाश एक दिव्य बाण है जो छोड़ने पर असंख्य विषैले नागों में बदल जाता है और लक्ष्य को मृत्यु तक नहीं छोड़ता। इसे भगवान ब्रह्मा ने बनाया था। यमपाश से भी अधिक भयंकर अस्त्र।

दिव्यास्त्रनागपाशविषैले नाग
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मंत्र से अस्त्र कैसे चलाया जाता था

दिव्यास्त्र के लिए देव-संबंधित मंत्र का विधिपूर्वक उच्चारण करते हुए बाण धनुष पर चढ़ाया जाता था। मंत्र से देवता की शक्ति अस्त्र में समाती थी। यह विद्या गोपनीय और गुरु-परंपरा से मिलती थी।

दिव्यास्त्रमंत्र अस्त्रदिव्यास्त्र विधि
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पर्वतास्त्र और नागास्त्र में क्या अंतर था?

नागास्त्र अचूक निशाना साधता था और सम्मोहनास्त्र सेना को भ्रमित करता था, जबकि पर्वतास्त्र एक अंधाधुंध विनाश का हथियार था जो पूरी सेना पर पर्वत वर्षाता था।

दिव्यास्त्रपर्वतास्त्रनागास्त्र
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पर्वतास्त्र का मनोवैज्ञानिक प्रभाव क्या था?

पर्वतास्त्र शत्रु सेना को स्वयं प्रकृति का प्रकोप प्रतीत होता था। आकाश से पर्वत गिरते देख साधारण सैनिक का मनोबल टूट जाना स्वाभाविक था क्योंकि इसका कोई पारंपरिक उत्तर नहीं था।

दिव्यास्त्रपर्वतास्त्रमनोवैज्ञानिक प्रभाव
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पर्वतास्त्र के प्रयोग से युद्धभूमि पर क्या होता था?

पर्वतास्त्र के प्रयोग से आकाश में विशाल पर्वत और चट्टानें प्रकट होकर शत्रु सेना पर गिरती थीं। पैदल सैनिक, रथ, घुड़सवार और हाथी सभी इनके नीचे कुचल जाते थे।

दिव्यास्त्रपर्वतास्त्रप्रभाव
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पर्वतास्त्र किस प्रकार का अस्त्र था?

पर्वतास्त्र एक अंधाधुंध विनाश का हथियार था जो शत्रु सेना को एक क्षण में कुचल देता था। इसकी अनियंत्रित प्रकृति के कारण इसे अंतिम उपाय का हथियार माना जाता था।

दिव्यास्त्रपर्वतास्त्रअंधाधुंध विनाश
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पर्वतास्त्र नाम का क्या अर्थ है?

'पर्वत' और 'अस्त्र' के मेल से बना यह नाम 'पर्वतों का हथियार' का अर्थ देता है। यह नाम ही इस अस्त्र की भयावह शक्ति का परिचय दे देता है।

दिव्यास्त्रपर्वतास्त्रनाम
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पर्वतास्त्र के अधिष्ठाता देवता कौन हैं?

पर्वतास्त्र के अधिष्ठाता देवता वायु देव हैं। हल्की और निराकार वायु का सबसे भारी पर्वतों पर नियंत्रण — यही वायु देव की असीम शक्ति का प्रमाण है।

दिव्यास्त्रपर्वतास्त्रवायु देव
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पर्वतास्त्र क्या है?

पर्वतास्त्र एक अत्यंत विनाशकारी दिव्यास्त्र है जिसके प्रयोग से आकाश से विशाल पर्वत और चट्टानें प्रकट होकर शत्रु सेना पर गिरती थीं। इसके अधिष्ठाता देवता वायु देव हैं।

दिव्यास्त्रपर्वतास्त्रदिव्यास्त्र
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ब्रह्मशिरास्त्र ब्रह्मास्त्र से कितना ज्यादा शक्तिशाली है?

ब्रह्मशिरास्त्र ब्रह्मास्त्र से चार गुना अधिक शक्तिशाली है। ब्रह्मास्त्र = ब्रह्मा का 1 मुख, ब्रह्मशिरास्त्र = ब्रह्मा के 4 मुखों की सम्मिलित शक्ति। यदि दो टकराएं तो ब्रह्मांड नाश होने का खतरा।

अस्त्र शस्त्रब्रह्मशिरास्त्रब्रह्मास्त्र
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नारायणास्त्र का प्रतिकार क्या है?

नारायणास्त्र का कोई प्रतिकार नहीं है। एकमात्र उपाय है — सभी शस्त्र छोड़कर, मन से भी युद्ध का विचार त्यागकर, हाथ जोड़कर आत्मसमर्पण करना। ऐसा करने पर यह अस्त्र शांत हो जाता है।

अस्त्र शस्त्रनारायणास्त्रप्रतिकार
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दिव्यास्त्र शस्त्र — प्रश्नोत्तर

दिव्यास्त्र शस्त्र से सम्बन्धित 497+ शास्त्रीय प्रश्नोत्तर यहाँ उपलब्ध हैं। सनातन धर्म के विद्वानों द्वारा दिए गए इन उत्तरों में वेद, पुराण, उपनिषद और शास्त्रों के प्रमाण दिए गए हैं। यदि आप दिव्यास्त्र शस्त्र के बारे में कोई भी प्रश्न खोज रहे हैं — चाहे विधि हो, नियम हो, सामग्री हो या लाभ — तो यहाँ आपको शास्त्रसम्मत उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर में स्रोत, विधि और व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया गया है।

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