श्रीमद्भागवतकृष्ण गृहस्थ होकर भी निर्लिप्त कैसे रहे?कृष्ण गृहस्थ होकर भी निर्लिप्त रहे क्योंकि वे परमेश्वर हैं; वे अपनी माया से मनुष्यलोक में लीला करते हैं, पर प्रकृति के गुण उन्हें बांध नहीं पाते।#कृष्ण गृहस्थ जीवन#कृष्ण निर्लिप्त#कृष्ण लीला
श्रीमद्भागवतभागवत पुराण में कृष्ण का रूप कैसा है?भागवत पुराण में कृष्ण का रूप ऐसा बताया गया है कि उनका वक्ष सौंदर्य की लक्ष्मी का निवास, मुख नेत्रों के लिए सौंदर्य-सुधा और चरण भक्तों का आश्रय हैं।#कृष्ण रूप#भागवत पुराण#कृष्ण दर्शन
श्रीमद्भागवतकृष्ण भक्तों से कैसे मिलते हैं?कृष्ण भक्तों और नगरवासियों से उनकी योग्यता के अनुसार मिले: किसी को प्रणाम किया, किसी से बोले, किसी को गले लगाया, किसी से हाथ मिलाया और किसी को प्रेमभरी दृष्टि दी।#कृष्ण भक्त#कृष्ण मिलन#भक्ति
श्रीमद्भागवतकृष्ण को पूर्णकाम क्यों कहा जाता है?कृष्ण को पूर्णकाम कहा जाता है क्योंकि वे अपने आप में सदा पूर्ण हैं और किसी बाहरी वस्तु से उनकी कोई कमी पूरी नहीं होती।#पूर्णकाम कृष्ण#कृष्ण अर्थ#आत्माराम
श्रीमद्भागवतकृष्ण को आत्माराम क्यों कहा जाता है?कृष्ण को आत्माराम कहा जाता है क्योंकि वे अपने आत्मस्वरूप में ही पूर्ण आनंद और संतोष रखने वाले हैं; उन्हें बाहरी वस्तुओं से पूर्णता नहीं मिलती।#आत्माराम कृष्ण#कृष्ण अर्थ#भक्ति
श्रीमद्भागवतद्वारका में कृष्ण का स्वागत कैसे हुआ?द्वारका में कृष्ण का स्वागत भेंट, स्तुति, वेदपाठ, शंख-तुरही, ब्राह्मणों, हाथी, रथों, नर्तकों, गायकों और प्रेम से उमड़े परिजनों के साथ हुआ।#कृष्ण स्वागत#द्वारकावासी#वसुदेव
श्रीमद्भागवतकृष्ण के स्वागत में द्वारका कैसे सजाई गई?कृष्ण के स्वागत में द्वारका के फाटक, राजमार्ग, बाजार, चौक और घरों के द्वार बंदनवार, ध्वज, फूल, अक्षत, कलश, धूप और दीप से सजाए गए।#द्वारका सजावट#कृष्ण स्वागत#द्वारका उत्सव
श्रीमद्भागवतकृष्ण की द्वारका इतनी सुंदर क्यों थी?कृष्ण की द्वारका सुंदर थी क्योंकि वह यादव वीरों से सुरक्षित, ऋतु-वैभव से संपन्न, उद्यानों, सरोवरों, सजावट और मंगल-चिह्नों से भरी थी।#कृष्ण की द्वारका#द्वारका नगरी#द्वारकापुरी
श्रीमद्भागवतकृष्ण ने पंचजन्य शंख क्यों बजाया?कृष्ण ने पंचजन्य शंख इसलिए बजाया कि द्वारका के लोग उनके आने का संकेत पाएं और उनका विरह-दुख शांत हो।#पंचजन्य#कृष्ण#द्वारका वापसी
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह के प्राण त्यागने पर क्या हुआ?भीष्म के प्राण त्यागने पर सब मौन हो गए, देवता और मनुष्य वाद्य बजाने लगे, राजाओं ने प्रशंसा की और आकाश से फूल बरसे।#भीष्म प्राण त्याग#कृष्ण#देवता
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह को मोक्ष कैसे मिला?भीष्म को मोक्ष कृष्ण-स्मरण से मिला; उन्होंने मन, वाणी और दृष्टि कृष्ण में लीन की और भेद-मोह छोड़कर कृष्ण को प्राप्त हुए।#भीष्म मोक्ष#कृष्ण#प्राण त्याग
श्रीमद्भागवतभीष्म के अनुसार कृष्ण एक होकर भी अनेक कैसे दिखते हैं?भीष्म ने सूर्य का उदाहरण दिया: जैसे एक सूर्य अनेक आँखों से अनेक दिखता है, वैसे एक कृष्ण अनेक हृदयों में अनेक रूप से जान पड़ते हैं।#कृष्ण#परमात्मा#भीष्म स्तुति
श्रीमद्भागवतराजसूय यज्ञ में कृष्ण की पूजा क्यों हुई?राजसूय यज्ञ में कृष्ण की पूजा इसलिए हुई क्योंकि भीष्म उन्हें सबके आत्मा प्रभु और सबसे पहले पूजने योग्य मानते हैं।#राजसूय यज्ञ#कृष्ण पूजा#युधिष्ठिर
श्रीमद्भागवतकृष्ण का नाम लेते हुए मृत्यु से क्या फल मिलता है?कृष्ण में मन लगाकर और उनके नाम का कीर्तन करते हुए शरीर छोड़ने वाला योगी कामना और कर्मबंधन से मुक्त होता है।#कृष्ण नाम#मृत्यु#भक्ति
श्रीमद्भागवतभीष्म के अनुसार कृष्ण नारायण कैसे हैं?भीष्म के अनुसार कृष्ण साक्षात आदिपुरुष नारायण हैं, जो यदुवंश में छिपकर लीला करते हैं और सबके आत्मा हैं।#कृष्ण नारायण#भीष्म#परमात्मा
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह ने कृष्ण को भगवान क्यों माना?भीष्म ने कृष्ण को भगवान इसलिए माना क्योंकि वे साक्षात नारायण, सबके आदिकारण, सर्वात्मा और अनन्य भक्तों पर कृपा करने वाले परमात्मा हैं।#भीष्म#कृष्ण भगवान#नारायण
श्रीमद्भागवतभीष्म स्तुति में कृष्ण के युद्ध रूप का वर्णन क्या है?भीष्म स्तुति में कृष्ण के युद्ध रूप में धूल-पसीने से सजे केश, कवच, बाणों के घाव, रास-चाबुक और पार्थसारथी छवि आती है।#कृष्ण युद्ध रूप#भीष्म स्तुति#महाभारत युद्ध
श्रीमद्भागवतभीष्म स्तुति में गीता का प्रसंग क्या है?भीष्म स्तुति में गीता का प्रसंग अर्जुन का मोह दूर करने और कृष्ण के पार्थसारथी रूप को दिखाने के लिए आता है।#भीष्म स्तुति#गीता#अर्जुन
श्रीमद्भागवतभीष्म ने कृष्ण को पार्थसारथी क्यों याद किया?भीष्म ने कृष्ण को पार्थसारथी इसलिए याद किया क्योंकि कृष्ण ने अर्जुन के सारथी बनकर रथ चलाया, गीता सुनाई और भक्तवत्सल रूप दिखाया।#पार्थसारथी#कृष्ण#अर्जुन
श्रीमद्भागवतकृष्ण ने रथ का पहिया क्यों उठाया?कृष्ण ने रथ का पहिया भीष्म की प्रतिज्ञा को सत्य करने और अपनी भक्तवत्सलता प्रकट करने के लिए उठाया।#कृष्ण रथ का पहिया#भीष्म#अर्जुन
श्रीमद्भागवतकृष्ण ने भीष्म के लिए प्रतिज्ञा क्यों तोड़ी?कृष्ण ने भीष्म की प्रतिज्ञा को सत्य और ऊँचा करने के लिए अपनी शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा तोड़ी।#कृष्ण प्रतिज्ञा#भीष्म#महाभारत युद्ध
श्रीमद्भागवतभीष्म को कृष्ण का कौन सा रूप दिखा?भीष्म को प्रसन्न मुख, अरुण नेत्र, पीतांबर और चतुर्भुज रूप में कृष्ण दिखे; स्तुति में उन्होंने पार्थसारथी युद्ध रूप भी याद किया।#भीष्म#कृष्ण रूप#चतुर्भुज
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह ने मृत्यु के समय किसका ध्यान किया?भीष्म पितामह ने मृत्यु के समय श्रीकृष्ण का ध्यान किया और मन, वाणी तथा दृष्टि को उन्हीं में लगा दिया।#भीष्म ध्यान#कृष्ण#प्राण त्याग
श्रीमद्भागवतभीष्म स्तुति हिंदी अर्थ क्या है?भीष्म स्तुति का भाव है कि मृत्यु के समय बुद्धि, मन और प्रेम श्रीकृष्ण में स्थिर हों, क्योंकि वही परमात्मा और अंतिम आश्रय हैं।#भीष्म स्तुति अर्थ#कृष्ण#पार्थसारथी
श्रीमद्भागवतभीष्म स्तुति क्या है?भीष्म स्तुति मृत्यु के समय श्रीकृष्ण को समर्पित प्रार्थना है, जिसमें भीष्म ने कृष्ण के सौंदर्य, युद्ध रूप और परमात्मा स्वरूप का ध्यान किया।#भीष्म स्तुति#कृष्ण#महाभारत
श्रीमद्भागवतभीष्म को मृत्यु के समय कृष्ण दर्शन क्यों मिले?भीष्म को मृत्यु के समय कृष्ण दर्शन इसलिए मिले क्योंकि कृष्ण अपने अनन्य प्रेमी भक्तों पर कृपा करते हैं।#भीष्म#कृष्ण दर्शन#भक्ति
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह और कृष्ण की कथा क्या है?भीष्म ने कृष्ण को साक्षात भगवान नारायण माना, युद्ध में उनका पार्थसारथी रूप याद किया और मृत्यु के समय उन्हीं में मन लगाया।#भीष्म और कृष्ण#कृष्ण#पार्थसारथी
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह ने उत्तरायण में प्राण क्यों छोड़े?उत्तरायण वह समय बताया गया है जिसे भगवत्परायण योगी चाहते हैं; उसी समय भीष्म ने मन कृष्ण में लगाकर प्राण त्यागे।#भीष्म उत्तरायण#प्राण त्याग#योगी
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह शरशय्या कथा क्या है?भीष्म पितामह शरशय्या पर पड़े थे; पांडव, कृष्ण और ऋषि उनके पास गए, उन्होंने धर्म बताया और कृष्ण का ध्यान करते हुए प्राण त्यागे।#भीष्म शरशय्या#कुरुक्षेत्र#युधिष्ठिर
श्रीमद्भागवतभीष्म पितामह कौन थे?भीष्म पितामह भरतवंशियों के गौरव, पांडवों के पितामह, धर्मज्ञ महापुरुष और श्रीकृष्ण के भक्त थे।#भीष्म पितामह#शरशय्या#पांडव
अघोर कुमारअघोर शिव के पास प्रकट चार कुमार कौन थे?अघोर शिव के समीप कृष्ण, कृष्णशिख, कृष्णास्य और कृष्णवस्त्रधृक् नाम वाले चार महात्मा कुमार प्रकट हुए।#चार कुमार#कृष्ण#कृष्णशिख
श्रीमद्भागवतकुंती ने कृष्ण से मोह छुड़ाने की प्रार्थना क्यों की?कुंती ने यदुवंशियों और पांडवों के प्रति मजबूत ममता को काटने और अपनी बुद्धि को गंगा की धारा की तरह कृष्ण में लगाने की प्रार्थना की।#कुंती#मोह#कृष्ण भक्ति
श्रीमद्भागवतकृष्ण दर्शन से जन्म-मृत्यु कैसे मिटती है?कुंती के अनुसार विपत्ति में कृष्ण का दर्शन होता है, और कृष्ण के चरणकमल का दर्शन जन्म-मृत्यु के प्रवाह को रोक देता है।#कृष्ण दर्शन#जन्म मृत्यु#कुंती
श्रीमद्भागवतकृष्ण लीला सुनने का फल क्या है?कृष्ण लीला को सुनने, गाने, कीर्तन करने और याद करने वाले भक्त शीघ्र ही कृष्ण के चरणकमल का दर्शन पाते हैं, जो जन्म-मृत्यु का प्रवाह रोक देता है।#कृष्ण लीला#श्रवण#कीर्तन
श्रीमद्भागवतकृष्ण अवतार का उद्देश्य क्या है?कुंती स्तुति में कृष्ण अवतार के कई कारण बताए गए हैं: भक्तों की कीर्ति, देवकी-वसुदेव का वर, दैत्यों का नाश, पृथ्वी का भार हटाना और सुनने-स्मरण योग्य लीला।#कृष्ण अवतार#कुंती स्तुति#दैत्य विनाश
श्रीमद्भागवतकृष्ण ने पांडवों को किन विपत्तियों से बचाया?कुंती ने कहा कि कृष्ण ने पांडवों को विष, लाक्षागृह की आग, राक्षसों, द्यूतसभा, वनवास, युद्धों और अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से बचाया।#कृष्ण#पांडव#कुंती
श्रीमद्भागवतकुंती ने कृष्ण से विपत्ति क्यों मांगी?कुंती ने विपत्ति इसलिए मांगी क्योंकि विपत्तियों में कृष्ण का दर्शन होता है, और कृष्ण-दर्शन के बाद जन्म-मृत्यु के चक्र में नहीं आना पड़ता।#कुंती#विपत्ति#कृष्ण दर्शन
श्रीमद्भागवतकुंती स्तुति हिंदी अर्थ क्या है?कुंती स्तुति का भाव है कि कृष्ण परमेश्वर हैं, भक्तों के रक्षक हैं, विपत्ति में उनका दर्शन होता है और मन केवल उन्हीं में लगना चाहिए।#कुंती स्तुति अर्थ#कृष्ण#विपदः सन्तु
श्रीमद्भागवतकुंती स्तुति क्या है?कुंती स्तुति में कुंती ने कृष्ण को प्रकृति से परे परम पुरुष, भक्तों के रक्षक और जन्म-मृत्यु से छुड़ाने वाले भगवान के रूप में नमस्कार किया।#कुंती स्तुति#कृष्ण#भक्ति
श्रीमद्भागवतयुधिष्ठिर ने कृष्ण को क्यों रोका?युधिष्ठिर ने कृष्ण को प्रेम से रोका, क्योंकि वे अपने भाई-बंधुओं की मृत्यु के भारी शोक से मुक्त नहीं हो पा रहे थे।#युधिष्ठिर#कृष्ण#महाभारत युद्ध
श्रीमद्भागवतकृष्ण द्वारका क्यों लौटना चाहते थे?राज्य-संबंधी कार्य पूरे होने के बाद कृष्ण ने द्वारका जाने का विचार किया; उनके भीतर का अलग कारण विस्तार से नहीं बताया गया।#कृष्ण#द्वारका#पांडव
श्रीमद्भागवतयुधिष्ठिर ने अश्वमेध यज्ञ क्यों किए?कृष्ण ने युधिष्ठिर से तीन अश्वमेध यज्ञ कराए, जिससे उनका पवित्र यश इंद्र के यश की तरह सब ओर फैल गया।#युधिष्ठिर#अश्वमेध यज्ञ#कृष्ण
श्रीमद्भागवतयुधिष्ठिर को राज्य वापस कैसे मिला?कृष्ण ने युधिष्ठिर को वह राज्य वापस दिलाया जिसे छल से छीन लिया गया था और द्रौपदी का अपमान करने वाले राजाओं का वध कराया।#युधिष्ठिर#कृष्ण#राज्य
श्रीमद्भागवतकृष्ण ने युद्ध के बाद पांडवों को कैसे संभाला?कृष्ण ने शोकाकुल लोगों को काल की गति समझाकर सांत्वना दी, युधिष्ठिर को राज्य दिलाया और उनके यश के लिए तीन अश्वमेध यज्ञ कराए।#कृष्ण#पांडव#युद्ध के बाद
श्रीमद्भागवतमहाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने क्या किया?युद्ध के बाद पांडव कृष्ण के साथ गंगा तट गए, मरे हुए स्वजनों को जलांजलि दी, विलाप किया और गंगाजल में स्नान किया।#महाभारत युद्ध#पांडव#गंगा तर्पण
श्रीमद्भागवतपांडव वंश को बचाने की कथा क्या है?पांडव वंश को कृष्ण ने बचाया; उन्होंने अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से उत्तरा के गर्भ की रक्षा की।#पांडव वंश#परीक्षित#उत्तरा
श्रीमद्भागवतअश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र और परीक्षित की कथा क्या है?अश्वत्थामा ने पांडव वंश मिटाने के लिए ब्रह्मास्त्र छोड़ा, लेकिन कृष्ण ने उत्तरा के गर्भ में परीक्षित की रक्षा कर दी।#अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र#परीक्षित#उत्तरा
श्रीमद्भागवतकृष्ण ने परीक्षित को गर्भ में कैसे बचाया?कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से भक्तों की रक्षा की और उत्तरा के गर्भ को अपनी माया के कवच से ढककर परीक्षित को बचाया।#कृष्ण#परीक्षित#उत्तरा
श्रीमद्भागवतपरीक्षित गर्भ में कैसे बचे?परीक्षित कृष्ण की कृपा से बचे; कृष्ण ने उत्तरा के गर्भ को अपनी माया के कवच से ढक दिया और ब्रह्मास्त्र शांत हो गया।#परीक्षित#गर्भ रक्षा#कृष्ण
श्रीमद्भागवतपरीक्षित की जन्म कथा क्या है?परीक्षित की पूरी जन्म-घटना नहीं, बल्कि जन्म से पहले गर्भ में उनकी रक्षा की कथा आती है।#परीक्षित जन्म कथा#उत्तरा गर्भ#अश्वत्थामा ब्रह्मास्त्र