पौराणिक कथामहाभारत में पांडवों ने अनंत चतुर्दशी का व्रत क्यों किया था?वनवास की कठिनाइयां दूर करने और अपना खोया हुआ राज्य वापस पाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर पांडवों ने 14 साल तक यह व्रत किया था।#पांडव#श्रीकृष्ण#महाभारत
रामचरितमानस — बालकाण्ड'श्याम गौर किमि कहौं बखानी' — यह किसका वर्णन है?श्रीरामजी (श्याम/साँवले) और लक्ष्मणजी (गौर/गोरे) की जोड़ी का वर्णन। 'सोभा सीवँ सुभग दोउ बीरा। नील पीत जलजाभ सरीरा' — दोनों शोभा की सीमा, नील-पीत कमल समान शरीर, मोरपंख सिर पर। यह मानस में राम-लक्ष्मण की प्रसिद्ध उपाधि है।#बालकाण्ड#श्याम गौर#राम लक्ष्मण
आगमशास्त्र और दर्शनपिंगलेश्वर शिवलिंग की साधना में 'मारण' और 'मोहन' का वास्तविक अर्थ क्या है?शुद्ध तंत्र में 'मारण' का अर्थ अहंकार और षड्रिपुओं (क्रोध, लोभ आदि) का संहार करना है। 'मोहन' का अर्थ मन को सांसारिक विषयों से हटाकर शिव-भक्ति में पूर्णतः मुग्ध कर देना है।#मारण#मोहन#अद्वैत तंत्र
तीर्थ एवं मंदिरघंटाकर्ण और बद्रीनाथ धाम का संबंध — माणा गाँव के रक्षक देवताश्रीकृष्ण ने बदरिकाश्रम में घंटाकर्ण को मोक्ष दिया। आज भी माणा गाँव (बद्रीनाथ) में वे रक्षक देवता — क्षेत्रपाल — के रूप में पूजित हैं। गढ़वाल के अनेक गाँवों में उनके मंदिर हैं।#घंटाकर्ण#बद्रीनाथ#माणा गाँव
पौराणिक कथाएँघंटाकर्ण को मोक्ष कैसे मिला — श्रीकृष्ण और शिव की कथाशिव ने कहा मोक्ष केवल विष्णु दे सकते हैं। बदरिकाश्रम में श्रीकृष्ण ने घंटाकर्ण को गले लगाया — स्पर्श मात्र से पिशाच योनि छूटी, अठारह भुजाओं वाला शिवगण बना। आज भी बद्रीनाथ (माणा) में रक्षक देवता के रूप में पूजित।#घंटाकर्ण#मोक्ष#श्रीकृष्ण
व्रत एवं त्योहारगोवर्धन पूजा में अन्नकूट क्या है?अन्नकूट का अर्थ है 'अन्न का पर्वत।' गोवर्धन पर्वत उठाकर सात दिन भूखे रहने के बाद ब्रजवासियों ने कृष्ण को 7 दिन × 8 पहर = 56 प्रकार के व्यंजन खिलाए — यही छप्पन भोग की परंपरा है। इसे अन्नकूट कहते हैं।#गोवर्धन पूजा#अन्नकूट#56 भोग
व्रत एवं त्योहारनरक चतुर्दशी की कथा क्या है?नरक चतुर्दशी पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता से अत्याचारी राक्षस नरकासुर का वध किया और 16 हजार बंदी स्त्रियों को मुक्त कराया था। इसी की खुशी में दीप जलाए गए और यह पर्व मनाया जाने लगा।#नरक चतुर्दशी#नरकासुर#कृष्ण
वेद एवं उपनिषदयजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद में क्या फर्क है?यजुर्वेद की दो शाखाएँ हैं। कृष्ण यजुर्वेद में मंत्र और उनकी व्याख्या एक साथ मिली हुई है — तैत्तिरीय संहिता इसकी मुख्य शाखा है। शुक्ल यजुर्वेद में मंत्र और ब्राह्मण अलग-अलग हैं — इसका शतपथ ब्राह्मण अत्यंत प्रसिद्ध है।#यजुर्वेद#कृष्ण यजुर्वेद#शुक्ल यजुर्वेद
महाभारतउत्तरा के गर्भ को कृष्ण ने कैसे बचाया?अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से उत्तरा के गर्भ में पल रहे परीक्षित की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण ने सूक्ष्म रूप धारण करके गर्भ में प्रवेश किया और अपनी दिव्य शक्ति से ब्रह्मास्त्र के प्रहार को निष्फल किया। परीक्षित मृत जन्मे, पर कृष्ण ने उन्हें पुनर्जीवित किया।#उत्तरा#परीक्षित#कृष्ण
महाभारतकृष्ण ने अर्जुन को गीता क्यों सुनाई?कुरुक्षेत्र में युद्ध से पहले अर्जुन अपने स्वजनों को देखकर मोह और शोक में डूब गए और युद्ध करने से इनकार कर बैठे। उनके इस अज्ञानजनित मोह को दूर करने और धर्म के सही स्वरूप को समझाने के लिए श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया।#गीता#कृष्ण#अर्जुन
श्री कृष्णसंतान प्राप्ति के लिए संतान गोपाल मंत्र का जप कैसे करेंसंतान सुख के लिए 'संतान गोपाल मंत्र' का सवा लाख जप और हरिवंश पुराण का पाठ करना अत्यंत फलदायी है।#संतान#गोपाल मंत्र#हरिवंश पुराण
मंत्र एवं उपासनाहरे राम हरे कृष्ण महामंत्र की उत्पत्ति कैसे हुईहरे कृष्ण महामंत्र का स्रोत 'कलि-संतरण उपनिषद' है। इसमें ब्रह्माजी ने नारद को बताया कि कलियुग में 16 नामों का यह महामंत्र ही एकमात्र उपाय है। 15वीं सदी में चैतन्य महाप्रभु ने इसे जन-जन तक पहुँचाया।#हरे कृष्ण#महामंत्र#कलि-संतरण उपनिषद
भक्ति साहित्यसूरदास के पद कृष्ण भक्ति में कैसे सहायकसूरदास के पद बाल-लीला के वात्सल्य-भाव, माधुर्य-भक्ति और विरह-भाव से कृष्ण-भक्ति जागृत करते हैं। 'मैया मोरी मैंने माखन नाहीं खायो' जैसे पद सीधे हृदय तक पहुँचते हैं।#सूरदास#पद#कृष्ण भक्ति
मंत्र जप एवं साधनाकृष्ण के 108 नामों का जप कैसे करेंएकादशी या बुधवार को पीले वस्त्र पहनकर तुलसी माला से 'ॐ [नाम] नमः' क्रम में 108 नाम जपें। तुलसी पत्र और माखन-मिश्री अर्पित करें। 'ॐ क्लीं कृष्णाय नमः' से जप आरंभ करें।#कृष्ण 108 नाम#जप विधि#कृष्ण पूजा
तीर्थ यात्रागोकुल बरसाना नंदगाव दर्शन क्रममथुरा→वृंदावन→गोकुल (बाल्यकाल)→नंदगाव (नंद बाबा)→बरसाना (राधा जन्म; लट्ठमार होली)→गोवर्धन (परिक्रमा 21km)। 1-2 दिन। होली/जन्माष्टमी विशेष।#गोकुल#बरसाना#नंदगाव
तीर्थ यात्रागुरुवायूर कृष्ण मंदिर दर्शन नियमकेरल; 'दक्षिण द्वारका'; कृष्ण बाल रूप। केवल हिंदू। पारंपरिक वस्त्र (मुंडू, शर्ट नहीं)। 3AM-1PM + 4:30-10PM। हाथी पूजा, पायसम प्रसाद। विवाह अत्यंत शुभ। कोची ~80km।#गुरुवायूर#कृष्ण#केरल
तीर्थ यात्रामथुरा वृंदावन यात्रा कैसे करेंमथुरा (जन्मभूमि)+वृंदावन (बांके बिहारी/इस्कॉन/प्रेम मंदिर)+गोवर्धन+बरसाना। 2-3 दिन। दिल्ली→180km।#मथुरा#वृंदावन#कृष्ण
मंत्रहरे कृष्ण महामंत्र के 16 शब्दों का अर्थ16 शब्द: हरे (ईश्वरीय शक्ति/राधा), कृष्ण (सर्वाकर्षक भगवान), राम (आनंददायक)। अर्थ: 'हे ईश्वरीय शक्ति, हे कृष्ण, हे राम — मुझे अपनी शरण/सेवा में लो।' कलिसंतरण उपनिषद: कलियुग में इन 16 नामों से मोक्ष। चैतन्य महाप्रभु ने जन-जन तक पहुंचाया।#हरे कृष्ण#महामंत्र#16 शब्द
संत और भक्तमीराबाई ने कृष्ण भक्ति में क्या सहामीरा ने कृष्ण भक्ति में सहा: ससुराल का अपमान, विष का प्याला, सांप, कांटों की शय्या, सामाजिक बहिष्कार, घर त्याग। 'मेरे तो गिरिधर गोपाल, दूसरो न कोई।' शिक्षा: सच्ची भक्ति = सब कष्ट सहन शक्ति। भक्ति में लोक-लाज गौण।#मीराबाई#कृष्ण भक्ति#विरह
पौराणिक कथाराधा कृष्ण का प्रेम आध्यात्मिक था या सांसारिकराधा-कृष्ण प्रेम पूर्णतः आध्यात्मिक — राधा = ह्लादिनी शक्ति/जीवात्मा, कृष्ण = परमात्मा। यह सांसारिक प्रेम (possession) नहीं बल्कि निःस्वार्थ विरह भक्ति है। विरह = आत्मा की ईश्वर-मिलन व्याकुलता। चैतन्य परंपरा: अप्राकृत (अलौकिक) प्रेम।#राधा कृष्ण#प्रेम#आध्यात्मिक
हिंदू दर्शनकृष्ण ने महाभारत में युद्ध क्यों करवाया अहिंसा उल्लंघनपूरा श्लोक: 'अहिंसा परमो धर्मः, धर्महिंसा तथैव च' — धर्म हेतु हिंसा भी धर्म। कृष्ण ने पहले सब शांति प्रयास किए (5 गांव भी नहीं मिले)। गीता 2.31 — क्षत्रिय का धर्म = अन्याय से लड़ना। अन्याय सहना = कायरता, अहिंसा नहीं।#कृष्ण#युद्ध#अहिंसा
पौराणिक कथाकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत क्यों उठाया आध्यात्मिक अर्थइंद्र यज्ञ रोककर गोवर्धन पूजा = अंधी परंपरा तोड़ना, प्रकृति सम्मान। इंद्र की प्रलयंकारी वर्षा में पर्वत उठाना = भगवान की शरण = सर्वरक्षा। आध्यात्मिक: इंद्र=अहंकार, गोवर्धन=प्रकृति/इंद्रिय पालन, कनिष्ठा उंगली=ईश्वर के लिए सब सरल।#गोवर्धन#कृष्ण#इंद्र
हिंदू दर्शनगीता में कृष्ण ने मन को वश में करना कैसे बतायागीता 6.35 — अभ्यास + वैराग्य से मन वश होता है। अभ्यास = बार-बार मन को विषयों से हटाकर ध्येय पर लाना (6.26)। वैराग्य = विषय भोगों से विरक्ति। सहायक: ध्यान, इंद्रिय निग्रह (कछुआ उदाहरण), सात्विक आहार, ईश्वर शरणागति।#मन#वश#गीता
हिंदू दर्शनभागवत पुराण का मुख्य संदेश क्या हैभागवत पुराण का मुख्य संदेश: अनन्य भक्ति = मोक्ष का सरलतम मार्ग। नवधा भक्ति (7.5.23), कृष्ण लीला (10वां स्कंध), प्रह्लाद की भक्ति शक्ति, अजामिल की नाम-मुक्ति। सार: किसी भी समय, किसी भी स्थिति में भगवन्नाम = मुक्ति। 12 स्कंध, 18,000 श्लोक।#भागवत पुराण#कृष्ण#भक्ति
आत्मा और मोक्षगीता में पुनर्जन्म के बारे में क्या कहा गया हैगीता में पुनर्जन्म का स्पष्ट वर्णन: 2.13 (देहांतर प्राप्ति), 2.20 (आत्मा अजन्मा), 2.22 (वस्त्र बदलना), 4.5 (बहुत जन्म), 8.6 (अंतिम भाव = अगला जन्म), 15.8 (वायु-सुगंध उदाहरण)। मुक्ति: गीता 8.15 — भगवान प्राप्ति पर पुनर्जन्म नहीं।#गीता#पुनर्जन्म#कृष्ण
पर्वअन्नकूट उत्सव में गोवर्धन पर्वत बनाने की विधि क्या हैगोवर्धन विधि: गाय गोबर से लेटे पुरुष (गिरिराज) बनाएँ → नाभि पर कटोरा (दूध/दही) → फूल-तुलसी सजाएँ → पूजा → 56 भोग (छप्पन) अर्पण → 7 परिक्रमा → गाय पूजा। भागवत: कृष्ण ने इन्द्र के बजाय गोवर्धन पूजा कराई।#अन्नकूट#गोवर्धन#गोबर
त्योहार पूजाजन्माष्टमी पर कंस वध की लीला का आध्यात्मिक संदेश क्या है?कंस वध: कंस=अहंकार/भय, कृष्ण=सत्य। गीता 4.7-8 (अवतार)। अत्याचार अंत निश्चित। प्रेम>भय। आंतरिक कंस (लोभ-मोह)=विवेक से नष्ट।#कंस वध#जन्माष्टमी#कृष्ण
त्योहार पूजागोवर्धन पूजा में अन्नकूट में कितने व्यंजन बनाने चाहिए?अन्नकूट: छप्पन भोग (56)=आदर्श (8 भोजन/दिन × 7 दिन उपवास)। गृहस्थ=यथाशक्ति (21/32/56)। भावना>संख्या। गोबर गोवर्धन बनाएँ→अन्नकूट भोग→परिक्रमा→प्रसाद। नाथद्वारा=सबसे भव्य।#गोवर्धन#अन्नकूट#छप्पन भोग
त्योहार पूजाहोली पर रंग खेलने का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?रंग अर्थ: कृष्ण-गोपी लीला, समानता (सब एक=अद्वैत), जीवन रंग (अनुभव स्वीकार), बुराई बाद अच्छाई उत्सव, वसंत-प्रकृति एकत्व, क्षमा+नवीनता ('बुरा न मानो')। प्राकृतिक रंग (टेसू/हल्दी) प्रयोग।#होली#रंग#आध्यात्मिक
त्योहार पूजाजन्माष्टमी पर दही हांडी की परंपरा का पौराणिक आधार क्या है?दही हांडी आधार: भागवत दशम स्कन्ध — बालकृष्ण+ग्वाल=गोपियों का माखन चुराना। ऊँची मटकी=गोपी रक्षा, मानव पिरामिड=ग्वाल, शीर्ष=कृष्ण (गोविन्दा)। पुनराभिनय। महाराष्ट्र=भव्य। 'गोविन्दा आला रे!'#दही हांडी#जन्माष्टमी#कृष्ण
त्योहार पूजाकृष्ण जन्माष्टमी पर दही हांडी का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?दही हांडी अर्थ: सामूहिक शक्ति (अकेले लक्ष्य अप्राप्य), माखन = साधना से प्राप्त आनन्द/प्रेम, ऊँचाई = कठिन आध्यात्मिक लक्ष्य, गिरना-उठना = साधना बाधाएँ, नन्दोत्सव = 'आनन्दं ब्रह्म।' कृष्ण = भक्त के प्रेम का चोर।#दही हांडी#गोविन्दा#कृष्ण लीला
पर्वगोवर्धन पूजा कैसे करेंगोवर्धन पूजा: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा। गोबर से गोवर्धन आकृति → पूजा → अन्नकूट (छप्पन भोग) अर्पण → परिक्रमा → गाय पूजा। भागवत: कृष्ण ने गोवर्धन उठाकर ब्रज रक्षा की। भावना: प्रकृति कृतज्ञता, गौ सेवा।#गोवर्धन#अन्नकूट#कृष्ण
पर्वअन्नकूट पूजा की विधि क्या हैअन्नकूट: 56 (छप्पन) प्रकार के व्यंजन = अन्न का पर्वत। कृष्ण/गोवर्धन को अर्पित → भोग → प्रसाद वितरण। 56 = 7 दिन × 8 प्रहर (गोवर्धन उठाने की अवधि)। श्रीनाथजी, जगन्नाथ, वृन्दावन मन्दिरों में भव्य। यथाशक्ति व्यंजन बनाएँ।#अन्नकूट#छप्पन भोग#गोवर्धन
त्योहार पूजाजन्माष्टमी पर कृष्ण जन्म की पूजा कैसे करें?जन्माष्टमी: निर्जला व्रत → झूला सजाएँ → मध्यरात्रि 12 बजे बालकृष्ण पंचामृत अभिषेक → वस्त्र-मुकुट-मोरपंख → माखन-मिश्री भोग → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' → कृष्ण जन्म कथा → आरती → झूला → प्रसाद से व्रत पारण।#जन्माष्टमी#कृष्ण जन्म#भाद्रपद कृष्ण अष्टमी
त्योहार पूजानरक चतुर्दशी पर सुबह तेल स्नान क्यों करते हैं?नरक चतुर्दशी तेल स्नान: कृष्ण ने नरकासुर वध के बाद प्रातः अभ्यंग स्नान किया — उसी स्मृति में। विधि: ब्रह्म मुहूर्त → तिल/सरसों तेल मालिश → हल्दी-बेसन उबटन → गर्म जल स्नान। फल: नरक यातना मुक्ति, पाप शुद्धि।#नरक चतुर्दशी#छोटी दिवाली#अभ्यंग स्नान
हवन विधिसंतान गोपाल हवन कैसे करवाएं?संतान गोपाल हवन: पति-पत्नी साथ → गणेश पूजन → 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द...' 1,25,000 जप → पीपल समिधा-दूध-खीर हवन → दशांश आहुति → पूर्णाहुति → गोदान। पुत्रदा एकादशी व्रत। चिकित्सा+आध्यात्मिक दोनों।#संतान गोपाल#संतान प्राप्ति#गोपाल हवन
स्वप्न दर्शनस्वप्न में कृष्ण भगवान के दर्शन होने का क्या अर्थ है?कृष्ण स्वप्न: (1) दिव्य प्रेम (2) आनन्द/हल्कापन (3) ज्ञान/मार्गदर्शन (गीता पढ़ें) (4) कर्म करें-फल चिंता नहीं (5) सुरक्षा। बाल कृष्ण=सरलता, बांसुरी=प्रेम, गीतोपदेश=निर्णय सहायता, मुस्कान='सब ठीक होगा'। करें: कृष्ण मंदिर+गीता+हरे कृष्ण जप।#कृष्ण स्वप्न#बाल कृष्ण#गोपाल
गीता परिचयभगवद गीता किसने लिखी?भगवद गीता महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत (भीष्म पर्व) का भाग है — किंतु ज्ञान भगवान श्री कृष्ण का है जो उन्होंने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में सुनाया। 18 अध्याय, 700 श्लोक। सांख्य योग, कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग — चार मुख्य मार्ग।#भगवद गीता#वेदव्यास#कृष्ण
गीता दर्शनगीता में भगवान कृष्ण का संदेश क्या है?गीता में श्रीकृष्ण का मुख्य संदेश है — निष्काम कर्म करो (2/47), आत्मा अमर है (2/19), धर्म की रक्षा करो (4/7), समभाव रखो और ईश्वर की शरण लो (18/66)। यही गीता का सार है।#श्रीकृष्ण#गीता#संदेश
गीता अध्ययनभगवद गीता का पाठ कैसे करें?गीता का पाठ प्रातःकाल स्नान के पश्चात, शांत मन से, श्रद्धापूर्वक करना चाहिए। पहले महात्म्य पढ़ें, फिर श्लोकों का अर्थ समझते हुए क्रमशः अध्याय 1 से 18 तक पाठ करें और ज्ञान को जीवन में उतारें।#गीता पाठ#विधि#नियम
स्वप्न शास्त्रसपने में कृष्ण दिखें तो क्या अर्थ?कृष्ण दर्शन = अत्यंत शुभ। बांसुरी बजाते = सुख+धन। माखन खाते = धनलाभ। आशीर्वाद = कष्ट मुक्ति। प्रेम संबंध में सफलता। क्रोधित कृष्ण = सावधानी (दुर्लभ)। सुबह मंदिर जाएँ।#सपने में कृष्ण#स्वप्न फल#प्रेम
मंत्र एवं साधनागोपाल मंत्र की सिद्धि कैसे होती है?गोपाल मंत्र की सिद्धि के लिए एक लाख जप पूर्ण करने का विधान है। स्फटिक या रुद्राक्ष माला से ब्रह्मचर्य, सात्विक आहार और एकाग्रता के साथ जप करें। जप पूर्ण होने पर दशांश हवन और ब्राह्मण भोजन का विधान है।#गोपाल मंत्र#संतान गोपाल#मंत्र सिद्धि
देव कथाकृष्ण रास लीला का आध्यात्मिक अर्थ?गोपी=जीवात्मा, कृष्ण=परमात्मा, रास=आत्मा-परमात्मा मिलन। प्रत्येक गोपी साथ=ईश्वर सबके+व्यक्तिगत। सब छोड़ना=पूर्ण समर्पण। विरह=भक्ति चरम। भागवत: कामदेव जीतने वाले=काम नाश।#कृष्ण#रास लीला#गोपी
वास्तु तस्वीर नियमघर में राधा कृष्ण की तस्वीर कहाँ लगाएं?राधा-कृष्ण की तस्वीर पूजा घर (ईशान कोण), लिविंग रूम (पूर्व/उत्तर दीवार) या बेडरूम (दांपत्य प्रेम हेतु) में लगा सकते हैं। दोनों साथ, प्रसन्न मुद्रा में होने चाहिए।#राधा कृष्ण#तस्वीर स्थान#वास्तु
भगवद गीतागीता के चौथे अध्याय ज्ञानकर्मसंन्यासयोग का सारचौथा अध्याय: अवतार सिद्धांत, कर्म-अकर्म-विकर्म का रहस्य, ज्ञान की सर्वोच्च महिमा और यज्ञों के विभिन्न प्रकार। ज्ञान अग्नि के समान सभी पापों को जलाता है।#गीता#ज्ञानकर्मसंन्यासयोग#चौथा अध्याय
अस्त्र शस्त्रमहाभारत में निरस्त्र योद्धा पर अस्त्र चलाना क्यों वर्जित था?निरस्त्र पर वार धर्मयुद्ध की मर्यादा के विरुद्ध था — यह वीरता नहीं अधर्म था। कर्ण-अर्जुन प्रसंग में कृष्ण ने कहा — कर्ण ने स्वयं अभिमन्यु वध में यह नियम तोड़ा था, इसीलिए यह उसका परिणाम है।#निरस्त्र योद्धा#युद्ध धर्म#क्षत्रिय मर्यादा
भक्तिभक्ति में सख्य भाव क्या है?ईश्वर=मित्र। अर्जुन-कृष्ण (गीता), सुदामा (पोहा→महल), गोपबाल। 'दोस्त से सब कहूंगा — खुशी/दुख/शिकायत।' 5 भाव: शांत→दास्य→**सख्य**→वात्सल्य→माधुर्य।#सख्य#भाव#क्या
पूजा विधानराधा कृष्ण युगल पूजा कैसे करें?राधाजी को श्रीकृष्ण की बाईं ओर स्थापित करें। पंचामृत स्नान, मिलते-जुलते वस्त्र, गुलाब-तुलसी, माखन-मिश्री-पेड़े का भोग। 'ॐ राधा-कृष्णाभ्यां नमः' या 'राधे कृष्णा' जप करें। एकादशी और राधाष्टमी पर विशेष पूजा करें।#राधा कृष्ण#युगल पूजा#निम्बार्क
कृष्ण लीलाकृष्ण जी के घर मथुरा या वृंदावन?कृष्ण जी का जन्म मथुरा में हुआ, बचपन गोकुल में बीता और किशोरावस्था की लीलाएँ वृंदावन में हुईं। तीनों स्थान उनके 'घर' हैं। कंस वध के बाद वे मथुरा लौटे और बाद में द्वारका राजधानी बनाई।#कृष्ण जन्म#मथुरा#गोकुल
पूजा विधानलड्डू गोपाल पूजा का विशेष विधान क्या है?लड्डू गोपाल को बालक मानकर सेवा करें। प्रातः पंचामृत स्नान, मौसमी वस्त्र, मोरपंख मुकुट, बाँसुरी, माखन-मिश्री-तुलसी का भोग, दिन में दो बार भोग, रात्रि में शयन सेवा। तुलसी अनिवार्य है।#लड्डू गोपाल#बाल कृष्ण#पूजा विधि