लोकरावण को भगवान विष्णु ने क्यों मारा?श्रीराम ने रावण को अधर्म के नाश और जय के उद्धार के लिए मारा।#रावण#विष्णु#श्रीराम
लोकरावण को मुक्ति कैसे मिली?रावण को श्रीराम के हाथों वध होकर श्राप से मुक्ति मिली।#रावण#मुक्ति#श्रीराम
लोकअहिरावण ने राम-लक्ष्मण को पाताल क्यों ले गया था?अहिरावण ने देवी को बलि देने के लिए राम-लक्ष्मण का अपहरण कर पाताल ले गया था। हनुमान जी ने अपने पुत्र मकरध्वज को परास्त कर और अहिरावण का वध कर उन्हें मुक्त कराया।#अहिरावण#राम#लक्ष्मण
अवतारवादश्री राम अवतार का क्या महत्व है?श्री राम = त्रेता युग में रावण वध और धर्म स्थापना के लिए अवतार। प्रतीक: आदर्श, मर्यादा पुरुषोत्तम और सामाजिक नियमों से पूर्णतः बंधे हुए सभ्य मनुष्य।#श्री राम#मर्यादा पुरुषोत्तम#रावण वध
रामचरितमानस — बालकाण्ड'मंगल करनि कलि मल हरनि तुलसी कथा रघुनाथ की' — इसका अर्थ?रघुनाथजी की कथा = मंगलकारी + कलियुग के पाप नष्ट करने वाली। बालकाण्ड समापन का छन्द। रामकथा ही कलियुग का सबसे बड़ा साधन।#बालकाण्ड#मंगल करनि#रघुनाथ कथा
रामचरितमानस — बालकाण्ड'भगत हेतु भगवान प्रभु राम धरेउ तनु भूप' — इसका अर्थ?अर्थ — भक्तों के लिये भगवान ने राजा (मनुष्य) का शरीर धारण किया। भक्त-प्रेम ही अवतार का मूल कारण।#बालकाण्ड#भगत हेतु#राम
रामचरितमानस — बालकाण्ड'होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा' — अर्थ?जो राम ने रचा वही होगा, तर्क से क्या? शिवजी ने सतीजी को कहा। शिक्षा — ईश्वर की योजना सर्वोपरि।#बालकाण्ड#राम रचि राखा#भाग्य
रामचरितमानस — बालकाण्डविनम्रता की शिक्षा — श्रीरामजी के चरित्र से?सर्वशक्तिमान पर सबसे विनम्र — गुरु को प्रणाम, परशुराम से मृदु वाणी, माता की आज्ञा मानी। शिक्षा — सच्ची शक्ति विनम्रता में।#बालकाण्ड#विनम्रता#राम
रामचरितमानस — बालकाण्डसतीजी ने सीता रूप धारण करके राम की परीक्षा क्यों ली?संदेह — सर्वव्यापक ब्रह्म मनुष्य कैसे? शिवजी ने मना किया पर नहीं मानीं — यही पतन का कारण।#बालकाण्ड#सती कारण#संदेह
रामचरितमानस — बालकाण्डभगवान राम ने मनुष्य रूप में अवतार क्यों लिया — सबसे सरल उत्तर?'बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार' — ब्राह्मण, गौ, देवता, संतों की रक्षा। कारण अनन्त हैं।#बालकाण्ड#अवतार कारण#सरल उत्तर
रामचरितमानस — बालकाण्डसीता-राम विवाह कहाँ हुआ?जनकपुर (मिथिला) के भव्य विवाह-मण्डप में। चारों भाइयों का विवाह एक मण्डप में वेदविधि से। 'जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई।'#बालकाण्ड#विवाह स्थान#जनकपुर
रामचरितमानस — बालकाण्डसीता-राम का प्रथम मिलन कहाँ हुआ?जनकपुर की पुष्पवाटिका (राजकीय बाग) में। रामजी फूल लेने आये, सीताजी गिरिजा पूजन के लिये। 'सिय मुख ससि भए नयन चकोरा' — दोनों ने एक-दूसरे को पहली बार देखा।#बालकाण्ड#प्रथम मिलन स्थान#पुष्पवाटिका
रामचरितमानस — बालकाण्ड'भानुकुलभूषण' किसे कहा गया?श्रीरामजी — सूर्यवंश (भानुकुल) के भूषण (आभूषण)। 'देखि भानुकुलभूषनहि बिसरा सखिन्ह अपान।' राम रघुवंश (सूर्यवंश) के राजकुमार — इसलिये 'भानुकुलभूषण', 'रघुकुलतिलक', 'रघुवर'।#बालकाण्ड#भानुकुलभूषण#राम
रामचरितमानस — बालकाण्ड'कृपासिंधु' किसे कहा गया है बालकाण्ड में?मुख्यतः भगवान श्रीरामजी को — 'कृपासिंधु बोले मृदु बचना।' कई स्थानों पर शिवजी और विष्णुजी को भी। पर सर्वाधिक बार यह रामजी की उपाधि है — कृपा का समुद्र।#बालकाण्ड#कृपासिंधु#राम
रामचरितमानस — बालकाण्डसीता-राम विवाह तय होने पर राजा जनक ने किसे दूत बनाकर भेजा?विशिष्ट नाम मानस में नहीं — जनक ने विश्वामित्रजी की सलाह पर दूत भेजे। दूतों ने दशरथ को सब समाचार सुनाये — धनुष भंग, जयमाला, बारात का निमन्त्रण। दशरथ प्रसन्न हुए, बारात की तैयारी शुरू।#बालकाण्ड#दूत#जनक
रामचरितमानस — बालकाण्डपरशुरामजी ने अपना वैष्णव धनुष किसे दिया?श्रीरामजी को — 'राम रमापति कर धनु लेहू। खेंचहु मिटै मोर संदेहू।' धनुष देने लगे तो वह स्वयं रामजी के पास चला गया — इससे परशुरामजी को निश्चय हुआ कि ये साक्षात् विष्णु हैं।#बालकाण्ड#वैष्णव धनुष#परशुराम
रामचरितमानस — बालकाण्ड'कोदंड खण्डेउ राम तुलसी जयति बचन उचारहीं' — इसका अर्थ?अर्थ — तुलसीदासजी कहते हैं — जब सबको निश्चय हुआ कि रामजी ने कोदण्ड (शिवजी का धनुष) तोड़ डाला, तब सब 'जयति' (जय हो) बोलने लगे। धनुष भंग के क्षण की जयकार।#बालकाण्ड#छन्द अर्थ#धनुष भंग
रामचरितमानस — बालकाण्डविश्वामित्रजी ने श्रीरामजी से धनुष तोड़ने के लिये क्या कहा?'उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा' — उठो राम, शिवजी का धनुष तोड़ो, जनक का सन्ताप मिटाओ। गुरु की आज्ञा पर रामजी उठे और सहज भाव से धनुष तोड़ दिया।#बालकाण्ड#विश्वामित्र आज्ञा#धनुष भंग
रामचरितमानस — बालकाण्डसीता-राम विवाह में कन्यादान किसने किया?राजा जनक ने — 'गहि गिरीस कुस कन्या पानी। भवहि समरपीं जानि भवानी' — कुश हाथ में लेकर कन्या का हाथ पकड़कर भवानी (सीता) को भव (राम) को समर्पित किया। सीता-राम को शिव-पार्वती समान माना।#बालकाण्ड#कन्यादान#जनक
रामचरितमानस — बालकाण्डसीता-राम विवाह विधिपूर्वक कैसे सम्पन्न हुआ?वेदमन्त्र विधि से — वसिष्ठजी-शतानन्दजी ने करवाया। सखियाँ सीताजी को सजाकर लायीं। जनक ने कुश हाथ में लेकर कन्यादान किया। पाणिग्रहण पर देवताओं ने नगाड़े बजाये, पुष्पवर्षा, मुनियों ने वेदमन्त्र उच्चारे।#बालकाण्ड#सीता राम विवाह#वेद मंत्र
रामचरितमानस — बालकाण्डसीताजी ने जयमाला किसे पहनाई?श्रीरामचन्द्रजी को — सखियों के साथ रंगभूमि में आकर। गुरुजनों की लाज से सकुचाती थीं पर हृदय में रामजी को रखकर प्रेमपूर्वक जयमाला पहनाई। सारे ब्रह्माण्ड में आनन्द छा गया।#बालकाण्ड#जयमाला#सीता
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीरामजी ने शिव धनुष कैसे उठाया?अत्यन्त सहजता से — जबकि दस हज़ार राजा हिला नहीं सके। सहज भाव से उठाया, प्रत्यंचा चढ़ाई, खींचा — बीच से टूट गया। 'संकर चापु जहाजु सागरु रघुबर बाहुबलु' — धनुष = जहाज, राम बाहुबल = समुद्र।#बालकाण्ड#धनुष उठाया#सहज
रामचरितमानस — बालकाण्डलक्ष्मणजी के क्रोधित वचन सुनकर विश्वामित्रजी ने क्या किया?विश्वामित्रजी, रामजी और मुनि मन में प्रसन्न हुए, पुलकित हुए। रामजी ने इशारे से लक्ष्मण को शान्त कर पास बैठाया। फिर विश्वामित्रजी ने कहा — 'उठहु राम भंजहु भवचापा। मेटहु तात जनक परितापा' — उठो राम, धनुष तोड़ो!#बालकाण्ड#विश्वामित्र#लक्ष्मण शान्त
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीराम-लक्ष्मण ने जनकपुर में किन-किन स्थानों का भ्रमण किया?नगर भ्रमण (गलियाँ-बाज़ार), राजा का सुन्दर बाग (पुष्पवाटिका), बाग का मणि-सीढ़ियों वाला सरोवर, लता-मण्डप। 'बागु तड़ागु बिलोकि प्रभु हरषे बंधु समेत' — बाग-सरोवर देखकर भाई सहित हर्षित हुए।#बालकाण्ड#जनकपुर भ्रमण#बाग
रामचरितमानस — बालकाण्डकिस सखी ने सीताजी को श्रीराम-लक्ष्मण के बारे में बताया?एक चतुर सयानी सखी ने — 'धरि धीरजु एक आलि सयानी। सीता सन बोली गहि पानी' — हाथ पकड़कर कहा कि गिरिजा पूजन बाद में, पहले राजकुमार को देख लो। सखी के वचन सीताजी को अत्यन्त प्रिय लगे।#बालकाण्ड#सखी#सीता
रामचरितमानस — बालकाण्डजनकपुर की स्त्रियों ने श्रीराम-लक्ष्मण को देखकर क्या-क्या कहा?स्त्रियों ने कहा — (1) यह वर जानकी के योग्य है, (2) राजा देख ले तो प्रतिज्ञा छोड़कर विवाह करा दे, (3) विधाता उचित फल देते हैं तो जानकी को यही मिलेगा, (4) पर शंकर धनुष कठोर है और ये कोमल किशोर — चिन्ता भी जताई।#बालकाण्ड#जनकपुर स्त्रियाँ#राम दर्शन
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीराम-लक्ष्मण ने जनकपुर में प्रवेश करते समय नगर का क्या वर्णन किया?राजा का सुन्दर बाग देखा — वसन्त ऋतु छायी, मनोहर वृक्ष, रंग-बिरंगी लताओं के मण्डप, कोयल-तोते-मोर, मणियों की सीढ़ियों वाला सरोवर, निर्मल जल, कमल और भँवरे।#बालकाण्ड#जनकपुर#नगर वर्णन
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीराम-लक्ष्मण जनकपुर में किसके अतिथि बने?विश्वामित्रजी के साथ राजा जनक के अतिथि बने। जनक ने आदर-सत्कार किया, भोजन करवाया, आवास दिया। नगरवासी और स्त्रियाँ राम-लक्ष्मण की शोभा देखकर मुग्ध हुए।#बालकाण्ड#राम लक्ष्मण#जनकपुर
रामचरितमानस — बालकाण्डविश्वामित्रजी श्रीराम-लक्ष्मण को लेकर कहाँ गये?जनकपुर (मिथिला/विदेहनगर) — जहाँ राजा जनक का धनुष-यज्ञ होने वाला था। मार्ग में गंगा-स्नान किया, विश्वामित्रजी ने गंगावतरण की कथा सुनाई, फिर जनकपुर पहुँचे।#बालकाण्ड#जनकपुर#विश्वामित्र
रामचरितमानस — बालकाण्डयज्ञ रक्षा के बाद विश्वामित्रजी ने क्या प्रसन्नता व्यक्त की?विश्वामित्रजी को 'महानिधि' प्राप्त हुई। उन्होंने रामजी को 'ब्रह्मण्यदेव' (ब्राह्मणों का भगवान) जाना — 'मोहि निति पिता तजेउ भगवाना' — मेरे लिये भगवान ने पिता भी छोड़ दिया। फिर जनकपुर की ओर चले।#बालकाण्ड#यज्ञ रक्षा#विश्वामित्र प्रसन्न
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीरामजी ने ताड़का का वध कैसे किया?एक ही बाण से — 'एकहिं बान प्रान हरि लीन्हा। दीन जानि तेहि निज पद दीन्हा॥' — एक बाण से प्राण हरे और दीन जानकर निजपद (मुक्ति) दिया। भगवान शत्रु को मारकर भी कल्याण करते हैं।#बालकाण्ड#ताड़का वध#एक बाण
रामचरितमानस — बालकाण्ड'सब सुत प्रिय मोहि प्रान कि नाई। राम देत नहिं बनइ गोसाई' — इसका अर्थ?अर्थ — सब पुत्र मुझे प्राणों समान प्यारे हैं, राम को देना सम्भव नहीं। दशरथ ने कहा — पृथ्वी, गौ, धन, प्राण सब दे दूँगा पर राम नहीं दे सकता। कहाँ भयानक राक्षस, कहाँ मेरा सुकुमार पुत्र।#बालकाण्ड#दशरथ वचन#चौपाई अर्थ
रामचरितमानस — बालकाण्ड'राम' नाम का अर्थ वसिष्ठजी ने क्या बताया?'राम' = जो सबके हृदय में रमण करते हैं, आनन्दस्वरूप। 'र' 'आ' 'म' — अग्नि, सूर्य, चन्द्रमा का बीज। ब्रह्मा, विष्णु, शिव स्वरूप। वेदों का प्राण, निर्गुण, अनुपम, गुणनिधान।#बालकाण्ड#राम नाम अर्थ#वसिष्ठ
रामचरितमानस — बालकाण्डश्रीरामजी की बाललीला में कौन-कौन सी लीलाएँ प्रमुख हैं?प्रमुख बाललीलाएँ — (1) कौशल्या की गोद में खेलना, (2) ठुमककर चलना-पैंजनी बजना, (3) दही-भात मुँह लपटाकर भागना, (4) धूल में लोटना, (5) ईष्टदेव का नैवेद्य खाना। सबको परम आनन्द दिया।#बालकाण्ड#बाललीला#राम
रामचरितमानस — बालकाण्डनारदजी के शाप से राम अवतार का क्या सम्बन्ध है?नारदजी के शाप से भगवान को मनुष्य रूप में जन्म लेना पड़ा और स्त्री-विरह सहना पड़ा — रामावतार में ठीक यही हुआ। पर भगवान ने कहा — यह सब मेरी इच्छा से हुआ, शाप तो बहाना मात्र था।#बालकाण्ड#नारद शाप#रामावतार कारण
रामचरितमानस — बालकाण्डशिवजी ने राम अवतार के कितने कारण बताये?शिवजी ने अनेक कारण बताये पर कहा — 'इदमित्थं कहि जाइ न सोई' — निश्चित संख्या नहीं कही जा सकती। प्रमुख कारण — धर्म हानि, जय-विजय शाप, नारद शाप, मनु-शतरूपा वरदान, प्रतापभानु कथा, भक्त प्रेम। कारण अनन्त हैं।#बालकाण्ड#अवतार कारण संख्या#शिवजी
रामचरितमानस — बालकाण्डसतीजी ने श्रीराम की परीक्षा लेने के लिये किसका रूप धारण किया?सतीजी ने माता सीताजी का रूप धारण किया। दोहा — 'पुनि पुनि हृदयँ बिचारु करि धरि सीता कर रूप।' सतीजी ने सोचा कि यदि ये सचमुच परब्रह्म हैं तो सीता रूप पहचान लेंगे।#बालकाण्ड#सती#सीता रूप
रामचरितमानस — बालकाण्डशिवजी ने सतीजी को राम की परीक्षा लेने से क्यों मना किया?शिवजी ने कहा — ये मेरे इष्टदेव श्रीरघुवीर हैं, तर्क मत करो। 'होइहि सोइ जो राम रचि राखा' — जो राम ने रचा है वही होगा। शिवजी जानते थे कि परब्रह्म की परीक्षा लेना अनुचित है और इसका परिणाम बुरा होगा, इसलिये मना किया।#बालकाण्ड#शिव चेतावनी#सती
रामचरितमानस — बालकाण्डशिवजी ने सती से राम को देखकर क्या कहा?शिवजी ने श्रीरामजी को देखकर 'सच्चिदानन्द परमधाम' कहकर प्रणाम किया और उनकी शोभा में इतने मग्न हो गये कि हृदय में प्रीति रोकने से भी नहीं रुकती। इसी पर सतीजी को संदेह हुआ।#बालकाण्ड#शिवजी#राम दर्शन
रामचरितमानस — बालकाण्डरामचरितमानस में सती और शिवजी कहाँ जा रहे थे जब उन्होंने श्रीराम को देखा?शिवजी अगस्त्य मुनि के आश्रम से रामकथा सुनकर सतीजी के साथ कैलास लौट रहे थे। मार्ग में उन्हें भगवान श्रीराम दण्डकवन में वनवासी वेष में सीताजी की खोज करते दिखे।#बालकाण्ड#सती#शिवजी
रामचरितमानस — बालकाण्ड'राम चरित जे सुनहिं सुनावहिं' — ऐसे लोगों को क्या फल मिलता है?जो रामचरित स्नेहसहित कहते-सुनते हैं वे राम चरणों में अनुरागी होंगे, कलियुग के सब पापों से मुक्त और शुभ भाग्यवाले होंगे। रामचरितमानस सुनने से शान्ति मिलती है और विषयरूपी दावानल में जलता मन सुखी हो जाता है।#बालकाण्ड#रामचरित#श्रवण फल
रामचरितमानस — बालकाण्डतुलसीदासजी ने 'निर्गुण' और 'सगुण' राम में किसे श्रेष्ठ बताया?तुलसीदासजी ने कहा — 'अगुन सगुन दुइ ब्रह्म सरूपा' — दोनों ब्रह्म के स्वरूप हैं, किसी को बड़ा-छोटा कहना अपराध है। किन्तु सगुण भक्ति (राम की लीला) कलियुग में सुगम मार्ग बताया गया।#बालकाण्ड#निर्गुण#सगुण
रामचरितमानस — बालकाण्डरामचरितमानस में राम नाम की महिमा कितने दोहों/छन्दों में वर्णित है?बालकाण्ड में नाम महिमा का वर्णन दोहा 19 से 27-28 तक लगभग 8-10 दोहों और दर्जनों चौपाइयों में फैला हुआ है। इसमें नाम के दो अक्षर, शिवजी का जप, वाल्मीकि का उद्धार, कलियुग में नाम का एकमात्र आधार होना आदि अनेक पक्ष बताये गये।#बालकाण्ड#नाम महिमा#विस्तार
रामचरितमानस — बालकाण्ड'राम भगति मनि उर बस जाके' — राम भक्ति की तुलना किससे की गई?राम भक्ति की तुलना मणि (रत्न) से की गई है। अर्थ — जिसके हृदय में रामभक्तिरूपी मणि बसी है, उसको स्वप्न में भी रत्तीभर दुख नहीं होता।#बालकाण्ड#राम भक्ति#मणि उपमा
रामचरितमानस — बालकाण्डतुलसीदासजी ने राम नाम को शिवजी का प्राणप्रिय क्यों कहा?शिवजी स्वयं इस महामंत्र का जप करते हैं, काशी में मरने वालों को मुक्ति के लिये यही नाम उपदेश करते हैं, और एक राम नाम को हज़ार नामों के समान मानते हैं। नाम के प्रभाव से ही गणेशजी सबसे पहले पूजे जाते हैं।#बालकाण्ड#शिव#राम नाम
रामचरितमानस — बालकाण्ड'सकल कामना हीन जे राम भगति रस लीन' — ऐसे भक्तों की क्या विशेषता बताई?ऐसे निष्काम भक्तों ने रामनाम के प्रेमरूपी अमृत-सरोवर में अपने मन को मछली बना रखा है — जैसे मछली जल से अलग नहीं हो सकती, वैसे ही वे क्षणभर भी नाम-प्रेम से अलग नहीं होते। वे भोग और मोक्ष दोनों की कामना से रहित हैं।#बालकाण्ड#निष्काम भक्ति#नाम प्रेम
रामचरितमानस — बालकाण्डतुलसीदासजी ने राम नाम को निर्गुण और सगुण दोनों से कैसे बड़ा बताया?तुलसीदासजी ने कहा कि राम नाम निर्गुण और सगुण दोनों के बीच 'सुन्दर साक्षी' और 'चतुर दुभाषिया' है — दोनों का ज्ञान कराने वाला। रूप नाम के अधीन है, नाम के बिना रूप का ज्ञान नहीं हो सकता।#बालकाण्ड#नाम महिमा#निर्गुण सगुण
रामचरितमानस — बालकाण्ड'राम नाम मनि दीप धरु जीह देहरीं द्वार' — इसमें राम नाम की तुलना किससे है?राम नाम की तुलना मणि-दीपक से की गई है। अर्थ — यदि भीतर-बाहर दोनों ओर उजाला चाहते हो तो मुखरूपी द्वार की जीभरूपी देहली पर रामनामरूपी मणि-दीपक रख दो।#बालकाण्ड#राम नाम#मणि दीपक
रामचरितमानस — बालकाण्डरामचरितमानस में 'राम' नाम को किन दो अक्षरों का बताया गया है?'राम' नाम दो अक्षरों — 'र' और 'म' का है। ये दो अक्षर अग्नि, सूर्य और चन्द्रमा के बीजरूप हैं तथा ब्रह्मा, विष्णु और शिव — तीनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। तुलसीदासजी ने इन्हें सावन-भादों के दो महीनों की उपमा दी।#बालकाण्ड#राम नाम#दो अक्षर